NATIONAL : कॉकरोच जनता पार्टी की CBI जांच से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- भावुक न हों

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CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद बने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) पेज की CBI जांच कराने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने टाल दिया है। इंस्टाग्राम पर इस पेज के 2.29 करोड़ फॉलोअर्स हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े लोगों की गतिविधियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक हालिया टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आया है, जिसने इंटरनेट पर भारी सुर्खियां बटोरी हैं।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक बेहद तेजी से उभरता हुआ सोशल मीडिया पेज और प्लेटफॉर्म है। इसे 16 मई को सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके द्वारा बनाया गया था। यह पेज चीफ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा हाल ही में कोर्ट रूम की कार्यवाही के दौरान की गई ‘कॉकरोच टिप्पणी’ के विरोध और व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ। इस पेज की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार दोपहर 12 बजे तक इसके इंस्टाग्राम हैंडल पर 2.29 करोड़ (22.9 Million) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका एडवोकेट राजा चौधरी द्वारा दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील एन.के. गोस्वामी ने दलील दी कि यह तथाकथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भारतीय न्यायपालिका (ज्यूडीशियरी) की छवि को जानबूझकर खराब कर रही है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस दलील को सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने वकील को शांत करते हुए कहा – “इसे इतनी भावुकता (Emotionally) से मत लीजिए।” जब वकील ने मामले की गंभीरता का हवाला दिया, तो सीजेआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल ऐसी कोई गंभीर आपातकालीन स्थिति नहीं दिखती है। हम आगे देखते हैं कि इसमें क्या होता है।

एडवोकेट राजा चौधरी द्वारा दायर इस याचिका में केवल सीबीआई जांच की मांग ही नहीं की गई थी, बल्कि कुछ अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। इस पूरे सोशल मीडिया आंदोलन से जुड़े कथित ‘फर्जी अधिवक्ताओं’ और ‘फर्जी कानून की डिग्रियों’ की भी गहनता से जांच की जाए। सुप्रीम कोर्ट की हालिया कार्यवाहियों के दौरान जजों द्वारा दिए गए मौखिक बयानों (Oral Observations) के हो रहे ‘कमर्शियलाइजेशन’ (व्यावसायिक उपयोग/रील्स बनाना) पर तुरंत रोक लगाई जाए और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर याचिका खारिज हुई, वहीं दूसरी तरफ CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने संगठन का एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ब्लॉक किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दीपके ने अपनी याचिका में हैंडल को तुरंत अनब्लॉक करने की मांग की है। उधर, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में रहने वाले अभिजीत दीपके के घर के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। डीसीपी पंकज अतुलकर ने मीडिया को बताया “सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है। एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है ताकि दीपके के घर के बाहर कोई अवांछित भीड़ जमा न हो। हालांकि, उन्हें या उनके परिवार को किसी भी तरह की आधिकारिक धमकी मिलने की कोई रिपोर्ट नहीं है।”

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