BUSINESS : Whatsapp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर लग सकती है रोक, मोदी सरकार को सता रही धोखाधड़ी की चिंता

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Whatsapp के अपकमिंग फीचर ‘यूजरनेम’ को लेकर केंद्र सरकार चिंतित है। रिपोर्टों के अनुसार, इस फीचर की जांच की जाएगी। सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। उसे चिंंता है कि इस फीचर के कारण धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में इस फीचर पर रोक लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस तरह के स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे हैं जो दावा करते हैं कि लोग दूसरों के नाम पर यूजरनेम को बुक करा रहे हैं।
Whatsapp के इस साल आने वाले ‘यूजरनेम’ फीचर पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार को इस फीचर के कारण धोखाधड़ी और दूसरों के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाने की चिंता सता रही है। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी सरकार इस फीचर की जांच करेगी। हमारी सहयोगी वेबसाइट ET ने बताया है कि सरकार वॉट्सऐप के अपकमिंग ‘यूजरनेम’ (Username) फीचर पर रोक लगाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। सोमवार रात वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर की बुकिंग शुरू हुई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने यूजरनेम रिजर्व कराए हैं। हालांकि ऐसी खबरें भी सोशल मीडिया में आई थीं कि लोगों ने दूसरों के नाम पर यूजरनेम बुक किए हैं, जिनमें PMNarendraModi और Whatsapp जैसे नाम रिजर्व किए जाने की खबरें हैं।

क्या है वॉट्सऐप यूजरनेम
वॉट्सऐप के अनुसार, वॉट्सऐप यूजरनेम कंपनी का अबतक का सबसे बड़ा प्राइवेसी फीचर है। इसे लोगों के फोन नंबर को सेफ रखने के लिए डिजाइन किया गया है। लोग अपना फोन नंबर किसी को बताए बिना उनसे वॉट्सऐप पर कनेक्ट हो पाएंगे। खास बात है कि लोग अपनी पसंद का यूजरनेम चुन सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि वह यूजरनेम किसी अन्य ऐप के हैंडल से मेल खाता हो। वॉट्सऐप ने स्पष्ट किया है कि यह एक प्राइवेसी फीचर है, सोशल मीडिया हैंडल नहीं।

कंपनी ने बताया है कि फीचर को इस साल के अंत तक लाया जाएगा। हालांकि उससे पहले ही यूजरनेम को रिजर्व कराया जा सकता है। वॉट्सऐप के अनुसार, जब यह फीचर आ जाएगा, तो लोगों को उनके ऐप में नोटिफिकेशन मिल जाएगा। वॉट्सऐप ने सुझाव दिया है कि लोगों के लिए ऐसा अनोखा वॉट्सऐप यूजरनेम चुनना सही रहेगा, जो सिर्फ उन्हीं लोगों को पता हो जिनसे यूजर संपर्क करना चाहता है।

धोखाधड़ी की संभावना
हालांकि केंद्र सरकार ने जिस चिंता को जाहिर किया है, वह गंभीर है। अगर इस फीचर का गलत उपयोग हुआ तो लोगों के साथ धोखाधड़ी हो सकती है। ऐसे में संभव है कि कानूनी विकल्पों पर विचार के कारण इस फीचर का भारत में आना इतना आसान ना हो।

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