BUSINESS : एथेनॉल से खराब हो जाएगा गाड़ी का इंजन? E20 पेट्रोल से फायदा या नुकसान, सरकार ने दिया हर सवाल का जवाब

0
21

सरकार के मुताबिक E20 कोई नया प्रयोग नहीं है. अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, जापान और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है. भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं. कहीं कहा जा रहा है कि इससे इंजन खराब हो जाएगा. कहीं, माइलेज कम होने की बात कही जा रही है, तो कहीं चींटियां और मधुमक्खियां पेट्रोल टैंक पर जमा होने के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. अब इन सभी दावों पर पेट्रोलियम मंत्रालय से जवाब आया है. सरकार का मानना है कि E20 को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है.

सरकार के मुताबिक E20 कोई नया प्रयोग नहीं है. अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, जापान और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है. भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और दिसंबर 2025 में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुका है.

सरकार का कहना है कि ARAI, IOCL और SIAM समेत कई संस्थानों ने E20 पर लंबी टेस्टिंग की है. कारों को 40 हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को 20 हजार किलोमीटर तक चलाकर जांच की गई. परीक्षण में इंजन, स्टार्टिंग, ड्राइविंग और अधिकांश पार्ट्स में कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई. सिर्फ कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ पार्ट्स अपेक्षाकृत जल्दी बदलने पड़ सकते हैं.

सरकार मानती है कि माइलेज कई चीजों पर निर्भर करता है! ड्राइविंग स्टाइल, टायर प्रेशर, सर्विसिंग और ट्रैफिक जैसी परिस्थितियां भी असर डालती हैं. मंत्रालय का दावा है कि E20 से माइलेज में भारी गिरावट की बात सही नहीं है. उल्टा E20 बेहतर एक्सेलेरेशन और कम कार्बन उत्सर्जन में मदद करता है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर BPCL का कहना है कि फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में कोई शुगर नहीं होती और इसमें ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं. इसलिए E20 पेट्रोल की वजह से चींटियां या मधुमक्खियां पेट्रोल टैंक पर आने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है.

सरकार ने गिनाए फायदे

सरकार के मुताबिक 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बची. किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ. करीब 930 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन कम हुआ. 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात की जरूरत घटी.

E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि इससे गाड़ियों की माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि माइलेज सिर्फ ईंधन से तय नहीं होती बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और वाहन की मेंटेनेंस जैसे कई दूसरे कारण भी इसमें भूमिका निभाते हैं. मंत्री हरदीप पुरी ने ये बाते अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही.

सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले कुछ तकनीकी फायदे भी मिलते हैं. सरकार के मुताबिक एथेनॉल की वजह से ईंधन की ऑक्टेन रेटिंग बढ़ती है, जिससे इंजन की नॉकिंग कम होती है और कई परिस्थितियों में पिकअप बेहतर हो सकता है.

E20 के समर्थन में सरकार ने कहा कि एथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी किया जाता है. हालांकि, तकनीकी जानकार इस तुलना को पूरी तरह सही नहीं मानते. दरअसल, रेसिंग कारों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन सामान्य E20 पेट्रोल से काफी अलग होता है. वहां अक्सर ज्यादा एथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल का इस्तेमाल होता है और इंजन भी उसी के मुताबिक डिजाइन किए जाते हैं. दूसरी ओर आम लोगों की गाड़ियां रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से बनाई जाती हैं. ऐसे में रेसिंग कार और सड़क पर चलने वाली सामान्य गाड़ी के प्रदर्शन की सीधी तुलना करना उचित नहीं माना जाता.

सरकार ने साफ किया है कि E20 गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर कोई दिक्कत नहीं है. साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में एथेनॉल ब्लेंड को E25 तक बढ़ाने का फैसला लिया जाता है तो उससे पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण और ऑटोमोबाइल उद्योग समेत सभी संबंधित पक्षों से सलाह ली जाएगी.

सरकार ने भले ही E20 को सुरक्षित और वैज्ञानिक परीक्षणों से प्रमाणित बताया हो लेकिन पानी की खपत, फीडस्टॉक, कृषि और पर्यावरण को लेकर बहस अब भी जारी है. ऐसे में आने वाले समय में E20 के वास्तविक प्रभावों पर लगातार निगरानी और स्वतंत्र अध्ययन भी अहम रहेंगे.शांति समझौता करने PAK पहुंचे अराघची और गालिबाफ को मारना चाहता है इजरायल! हत्या की साजिश का खुलासा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here