NATIONAL : ‘भारत दिखा रहा दुनिया को रास्ता’: मोहन भागवत ने अशोक सिंघल का दिया उदाहरण, कहा – समाज की बेहतरी के लिए करें काम

0
187

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही समाज व दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को एक संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह बात नागपुर जिले के देओलापुर में ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में कई पहलों का उद्घाटन करते हुए कही, जो वीएचपी के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थीं।

उन्होंने कहा, ‘हमारे जीवन, समाज, धर्म की सुरक्षा और दुनिया की बेहतरी के लिए, जो रास्ता हर गुजरते दिन के साथ जरूरी होता जा रहा है। वह यह है कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीना चाहिए और सफल होना चाहिए। हर किसी का जीवन संतोषजनक होना चाहिए, और हम सभी को कुछ न कुछ करना चाहिए।’

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में ‘अच्छे कामों में लगे’ लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उन्होंने सामाजिक कार्यों में लोगों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं – या तो अच्छे काम करके या सिर्फ़ उन लोगों को याद करके जिन्होंने अच्छे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग यह जानते हुए भी कि क्या करने की जरूरत है, मानते हैं कि ऐसा काम किसी और को करना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘लोग कहते हैं कि उनके पास नौकरी है और परिवार की जिम्मेदारी है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि कोई और समाज के लिए कुछ अच्छा करे।’ उन्होंने आगे कहा कि जब कुछ अच्छा होता है, तो उसमें पूरे समाज का योगदान झलकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाते हैं, वे दूसरों को मुश्किल रास्ते चुनने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

भागवत ने कहा, ‘जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।’ उन्होंने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक बड़े मकसद के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और आज उन्हें व्यापक रूप से सम्मान मिलता है।

भागवत ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने निजी फायदे पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खुद को समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया और अंततः प्रमुख नेता बने। उन्होंने कहा कि जब भी वर्तमान में कुछ अच्छा होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में ऐसे कामों की शुरुआत की थी, और उन्हें याद करना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here