AHMEDABAD : ‘जयेशभाई जोरदार’ का गुजराती एक्टर निकला मर्डर का वॉन्टेड आरोपी, 12 साल बाद अहमदाबाद में पकड़ा गया

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अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शातिर क्रिमिनल को अरेस्ट किया है जिसकी कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जितनी ही इंटरेस्टिंग है। एक आर्टिस्ट बनकर मुंबई में एक दशक से ज़्यादा समय से फरार चल रहा एक उम्रकैद का सजायाफ्ता कैदी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। घी कांटा मेट्रो स्टेशन के पास पकड़े गए हेमंत मोदी नाम के गुजराती आर्टिस्ट की असली पहचान सामने आने पर खुद पुलिस ऑफिसर भी हैरान रह गए।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा क्रिमिनल केस साल 2005 में शुरू हुआ था, जब हेमंत मोदी ने अहमदाबाद के नरोदा इलाके में एक बेरहमी से मर्डर किया था। इस केस में कोर्ट ने उसे दोषी पाया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई और मेहसाणा जेल भेज दिया। जेल में रहने के दौरान मेंटली टूट चुके हेमंत ने अपनी पत्नी को तलाक भी दे दिया था, क्योंकि उसे लगा कि अब उसकी पूरी ज़िंदगी सलाखों के पीछे ही खत्म हो जाएगी। हालांकि, साल 2014 में उसे कोर्ट से पैरोल मिल गई थी। जेल से बाहर आते ही, वापस लौटने के बजाय, उसने हमेशा के लिए गायब होने का प्लान बनाया।

पैरोल जंप करके भागने के बाद, हेमंत सीधे मुंबई पहुंचा। वहां, उसने अपने खूनी अतीत को छिपाते हुए, एक आम स्ट्रगलिंग एक्टर के तौर पर नाटकों और फिल्मों की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि इस दौरान, उसने अपनी पहचान छिपाई और ‘स्पंदन मोदी’ नाम अपना लिया। इंटरनेट डेटाबेस में भी, यह देखा गया है कि उसने जो फिल्में की हैं, उनमें क्रेडिट के तौर पर यही नाम दिया गया है।

हैरानी की बात यह है कि, जिस समय वह पुलिस रिकॉर्ड में एक बड़ा वॉन्टेड क्रिमिनल था, उसी समय उसने बड़े पर्दे पर रणवीर सिंह, आमिर खान और अमिताभ बच्चन जैसे स्टार्स के साथ ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’, ‘जयेशभाई जोरदार’ और ’53वां पेज’ जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया। इसके अलावा, उसने कई हिंदी सीरियल और नाटकों में छोटे-बड़े रोल भी किए। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसने एक गुजराती फिल्म में भी काम किया, लेकिन किसी को शक भी नहीं हुआ कि यह आदमी एक गंभीर जुर्म में फरार क्रिमिनल है। क्राइम ब्रांच को खास जानकारी मिली थी कि यह पाकिस्तानी कैदी, जो लंबे समय से गायब था, अहमदाबाद में कहीं छिपा हुआ है और किसी से मिलने जा रहा है। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस लगाया और उसके पुराने कॉन्टैक्ट्स की कड़ियों को जोड़कर नज़र रखना शुरू किया। हेमंत मोदी आखिरकार क्राइम ब्रांच के बिछाए जाल में घी कांटा मेट्रो स्टेशन के पास फंस गया। पकड़े जाने पर भी उसने अपनी ‘एक्टिंग स्किल्स’ से पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि, यह चाल काम नहीं आई और उसने पुलिस के सामने सब कुछ कबूल कर लिया। अब पुलिस ने उसे वापस जेल भेजने का प्लान बनाया है।

छोटा उदयपुर जिले के बोडेली तालुका के जाबुगाम में मौजूद लोकल झील हाल ही में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। सरकार की सुजलाम सुफलाम योजना के तहत झील को गहरा करने के दौरान कॉन्ट्रैक्टर द्वारा की गई अंधाधुंध खुदाई से लोकल प्रजापति समुदाय में भारी गुस्सा है। सालों से इस झील की मिट्टी से बर्तन और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले परिवारों का अब आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी रोजी-रोटी छीन ली गई है। यह गंभीर मामला अब स्थानीय प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकार ने जाबुगाम के प्रजापति समुदाय के लोगों को पारंपरिक काम-धंधों के लिए रोजगार देने के लिए इस झील से मिट्टी निकालने का कानूनी अधिकार भी दिया है। लेकिन, सुजलाम सुफलाम योजना के तहत झील को गहरा करने का ठेका जिस ठेकेदार के पास था, उसने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से बेतरतीब ढंग से खुदाई कर दी है।

समुदाय के लोगों का आरोप है कि झील के तल से सारी कीमती चिकनी मिट्टी खोद ली गई है और अब अंदर सिर्फ रेत बची है। ऐसे में बिना मिट्टी के अपना पारंपरिक कारोबार और घरेलू उद्योग कैसे करें, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

प्रजापति समुदाय के लोग मिट्टी चोरी और झील की अवैध खुदाई के मामले में ग्राम पंचायत की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों के मुताबिक, झील को गहरा करने का प्रस्ताव ग्राम सभा बुलाकर और नियमों के मुताबिक गांववालों की सहमति से लिया जाना चाहिए, लेकिन यहां तो पंचायत ने ही बंद कमरे में प्रस्ताव पास कर दिया।

गांव के लोगों या सालों से इस पर निर्भर रहे प्रजापति समुदाय को भरोसे में लिए बिना लिए गए इस फैसले से बहुत नाराजगी है। आरोप है कि प्रजापति समुदाय के हक छीने गए हैं और इस कीमती मिट्टी को पास में चल रहे नेशनल हाईवे के काम में इस्तेमाल करने के लिए भेज दिया गया है। न्याय की मांग कर रहे प्रजापति समुदाय का साफ कहना है कि ठेकेदार ने जो मिट्टी यहां से गैर-कानूनी तरीके से निकाली है, उसे तुरंत पंप या पंचायत के जरिए हमें वापस किया जाए।

जाबुगाम में रहने वाले करीब 40 प्रजापति परिवार पूरी तरह से इसी झील की मिट्टी पर निर्भर हैं। उनके पास खेती या मजदूरी के अलावा रोजगार का कोई दूसरा जरिया नहीं है। परिवार के मुखिया चिंता जताते हुए कह रहे हैं, ‘अब मिट्टी के बिना हमारा घर का काम कैसे चलेगा?’ जल्द ही घर में जो थोड़ी बहुत मिट्टी है, वह भी खत्म हो जाएगी, उसके बाद हम बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरेंगे और घर का किचन कैसे चलाएंगे?’ बस यही चिंता लोगों को कमज़ोर कर देती है। इस मामले में बार-बार लिखकर और बड़े अधिकारियों को अर्ज़ी देने के बाद भी, आज तक प्रशासन की तरफ़ से कोई ठोस हल नहीं निकला है।

जाबुगाम की इस झील में मिट्टी की खुदाई का मामला अब सिर्फ़ पानी जमा करने या डेवलपमेंट के काम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे पिछड़े वर्ग के कई गरीब परिवारों के गुज़ारे, रोज़गार और रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ता है।
‘jayeshbhai jordar’ ka gujarati actor nikla murder ka wanted

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