दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह सकती है, जबकि 2025 में यह लगभग 2.9 प्रतिशत थी।
संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय UNCTAD ने इस धीमी रफ्तार के पीछे मध्य पूर्व में जारी संकट और ऊर्जा बाजार में पैदा हुए व्यवधानों को प्रमुख कारणों में शामिल किया है। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, महंगाई और कारोबार से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है।

ऊर्जा संकट से बढ़ सकती हैं कारोबारियों की मुश्किलें
दुनिया के कई देशों में ऊर्जा की कीमतों में बदलाव का असर उद्योगों और कारोबार पर पड़ता है। तेल और गैस महंगे होने से परिवहन, उत्पादन और माल की ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
इसका असर छोटे कारोबारियों से लेकर बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तक पर पड़ सकता है। कंपनियों को अपनी लागत नियंत्रित करने और उत्पादों की कीमतें तय करने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
वैश्विक व्यापार में जारी रह सकती है वृद्धि
रिपोर्ट में आर्थिक विकास धीमा होने के बावजूद 2026 में वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान दिया गया है।
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार में यह बढ़ोतरी पूरी तरह मजबूत आर्थिक मांग का संकेत नहीं है। ऊर्जा की बढ़ी कीमतों के कारण व्यापार का मौद्रिक मूल्य भी प्रभावित हो सकता है।


