SBI ने चौथी तिमाही में 19,684 करोड़ रुपये का बंपर मुनाफा कमाया है. हालांकि, यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से कम रहा, जिसके चलते बैंक के शेयरों में 5 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई. इस झटके के बीच, बैंक ने अपने निवेशकों को राहत देते हुए प्रति शेयर 17.35 रुपये के शानदार डिविडेंड का भी देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. आंकड़ों के लिहाज से बैंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हजारों करोड़ रुपये की कमाई की है, लेकिन शेयर बाजार के निवेशकों को बैंक का यह प्रदर्शन रास नहीं आया. एक तरफ बैंक का मुनाफा बढ़ा है, तो दूसरी तरफ इसके शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली है. सवाल उठना लाजमी है कि जब बैंक मुनाफे में है, तो शेयर बाजार में ऐसी घबराहट क्यों है?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च तिमाही में अपने स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफे में 5.6 फीसदी का सालाना इजाफा दर्ज किया है. बैंक ने इस दौरान 19,684 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नेट प्रॉफिट कमाया है. पहली नजर में यह आंकड़ा बहुत शानदार लगता है, लेकिन शेयर बाजार की नजरें कुछ और ही तलाश रही थीं. रॉयटर्स-एलएसईजी (Reuters-LSEG) के जुटाए गए डेटा के मुताबिक, जानकारों ने अनुमान लगाया था कि बैंक का मुनाफा 20,312 करोड़ रुपये के पार जाएगा. ठीक इसी तरह, बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) यानी ब्याज से होने वाली मुख्य कमाई भी सालाना आधार पर 4.1 फीसदी बढ़कर 44,380 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 42,618 करोड़ रुपये थी. मुनाफा और ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ने के बावजूद, यह बाजार के अनुमानों से काफी पीछे रह गई. यही वजह है कि शानदार कमाई के बाद भी दलाल स्ट्रीट पर निराशा का माहौल देखने को मिला.

बाजार की उम्मीदों पर खरा न उतरने का सीधा और तत्काल असर एसबीआई के शेयरों पर पड़ा. कारोबारी सत्र के दौरान एसबीआई का शेयर लगभग 5 फीसदी टूटकर 1,037.5 रुपये के स्तर पर आ गया. शेयर बाजार में इस तेज गिरावट से उन निवेशकों को जरूर झटका लगा है, जो नतीजों के बाद बड़े उछाल की उम्मीद लगाए बैठे थे. हालांकि, बैंक ने अपने शेयरधारकों को खुश करने के लिए एक बड़ा ऐलान भी किया है. एसबीआई के बोर्ड ने प्रति शेयर 17.35 रुपये का शानदार डिविडेंड (लाभांश) देने की घोषणा की है. जो भी निवेशक 16 मई 2026 तक इस शेयर को अपने पोर्टफोलियो में होल्ड करेंगे, वे इस डिविडेंड के हकदार होंगे. बैंक 4 जून 2026 को शेयरधारकों के बैंक खातों में इस डिविडेंड का भुगतान कर देगा. यह उन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है जो बैंक के साथ लंबी अवधि से जुड़े हैं.
किसी भी बैंक की सेहत इस बात से तय होती है कि उसके दिए गए कर्ज कितने सुरक्षित हैं और एसेट क्वालिटी कैसी है. इस मोर्चे पर एसबीआई ने शानदार काम किया है. बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) यानी फंसा हुआ कर्ज पिछली तिमाही के 1.57 फीसदी से घटकर 1.49 फीसदी पर आ गया है. वहीं, नेट एनपीए 0.39 फीसदी पर स्थिर रहा. रुपयों में बात करें तो ग्रॉस एनपीए घटकर 73,452.5 करोड़ रुपये रह गया है, हालांकि नेट एनपीए में मामूली बढ़त देखी गई है और यह 18,830 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
बैंक के मुनाफे को सहारा देने में एक बड़ा हाथ ‘प्रोविजनिंग’ का रहा है. बैंक ने इस तिमाही में प्रोविजनिंग के तौर पर महज 2,872 करोड़ रुपये रखे हैं, जो पिछले साल इसी समय 6,441 करोड़ रुपये थे. लेकिन बैंक के लिए सब कुछ अच्छा नहीं रहा. एसबीआई की ट्रेजरी ऑपरेशंस से होने वाली कमाई में भारी गिरावट आई है. यह पिछले साल के 8,991 करोड़ रुपये से लुढ़ककर सीधे 1,259 करोड़ रुपये पर आ गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से बैंकों के पास मौजूद बॉन्ड की वैल्यू कम हो जाती है, जिसका सीधा असर एसबीआई की ट्रेजरी आय पर पड़ा है. इसके अलावा बैंक की अन्य आय भी करीब 29 फीसदी गिरकर 17,314 करोड़ रुपये रह गई है.

