HEALTH : इलाज से बीमा क्लेम तक में होंगे सुधार, संसदीय समिति कसेगी नकेल; कंपनियों पर भी होगी सख्ती

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संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने गंभीर बीमारियों के इलाज को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उपायों पर विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटान में देरी और अस्वीकृति के मामलों पर भी चिंता जताई गई, जिस पर बीमा नियामक ने पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था लागू करने का भरोसा दिया।

इलाज के बढ़ते खर्च से जूझ रहे करोड़ों मरीजों को राहत देने की दिशा में संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने गहन मंथन किया है। दो दिनों तक समिति ने विशेषज्ञों से पूछा कि गरीबों को कैंसर, किडनी, लीवर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कम खर्च में कैसे उपलब्ध कराया जाए? साथ ही आयुष्मान भारत, सीजीएचएस और जन औषधि जैसी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने व सरकारी अस्पतालों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।

समिति सदस्यों ने कहा कि लाखों लोग हर साल प्रीमियम भरते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कई कंपनियां तकनीकी कारणों का हवाला देकर क्लेम खारिज कर देतीं या भुगतान में महीनों देरी करती हैं। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इस मुद्दे पर आईआरडीएआई से जवाब मांगा गया।

नियामक ने समिति को भरोसा दिलाया कि क्लेम निपटान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध व जवाबदेह बनाने के लिए नए सुधार लागू किए जा रहे, ताकि पॉलिसीधारकों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं हो। समिति के सामने उठा कि इलाज और दवाओं का खर्च लोगों को आर्थिक संकट में डाल देता है। इस पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जन औषधि केंद्रों का तेजी से विस्तार किया जाए, आवश्यक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया जाए।

समिति अब सभी से मिले सुझावों और मंत्रालय के जवाबों के आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। माना जा रहा कि इन सिफारिशों में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाने, सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने और गंभीर बीमारियों के इलाज का आर्थिक बोझ कम करने के लिए ठोस सुझाव शामिल हो सकते हैं। बीमा कंपनियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।

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