भारत में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए विशेष समितियां गठित करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति करने को कहा है।
इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों में इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को कम करना, मरीजों की शिकायतों पर ध्यान देना और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना है।
अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा क्यों है जरूरी?
अस्पतालों में मरीजों को सुरक्षित इलाज देना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रमुख जिम्मेदारी है। दवाओं की गलत खुराक, संक्रमण की रोकथाम में लापरवाही और इलाज के दौरान होने वाली अन्य गलतियां मरीजों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित जानकारी में हर साल चिकित्सा संबंधी गलतियों के कारण लगभग 52 लाख चोटों का अनुमान सामने आया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मरीजों की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्थाओं की जरूरत पर जोर दिया है।
मेडिकल कॉलेजों में क्या बदलाव होंगे?
रिपोर्टों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों को मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी समितियां या सेल गठित करने और इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है।
इन व्यवस्थाओं के जरिए अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी, जोखिमों की पहचान और सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।


