दिल्ली में पीजी आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर एमसीडी ने के 2,453 पीजी के सर्वेक्षण में सामने आया है कि इनमें से सिर्फ 1.2% के पास फायर एनओसी थी, और 30% से भी कम के भवन नक्शे मंज़ूर हैं. एमसीडी के दक्षिण ज़ोन, जहां डीयू का साउथ कैंपस, आईआईटी और जेएनयू जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, वहां 390 पीजी आवास में से किसी के पास भी ज़रूरी सर्टिफिकेट या नियमानुसार दस्तावेज़ नहीं पाए गए.
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंज़िला छात्रावास की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक सप्ताह बाद दिल्ली में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है.इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के राजधानी के 2,453 पीजी आवासों के सर्वेक्षण में सामने आया है कि इनमें से सिर्फ 31 यानी 1.2% के पास दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है.
सर्वेक्षण में शामिल 2,453 इमारतों में से सिर्फ 726 यानी 30% से भी कम के भवन नक्शे मंज़ूर पाए गए. वहीं, महज़ आठ इमारतों के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र है.

यह सर्वेक्षण एमसीडी के सभी 12 ज़ोन में किया गया. सत्य निकेतन की इमारत गिरने के एक दिन बाद, 7 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी के बाद एमसीडी ने अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करते हुए यह सर्वे कराया था.
सर्वेक्षण में भवनों की संरचनात्मक स्थिरता, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसीसी), भवन नक्शे की मंज़ूरी और मास्टर प्लान फॉर दिल्ली (एमपीडी) के तहत पीजी चलाने की अनुमति समेत कई नियामकीय पहलुओं की जांच की गई.
ज़ोन के हिसाब से स्थिति
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस वाले सिविल लाइंस ज़ोन में 12 एमसीडी ज़ोन में सबसे अधिक 608 पीजी आवास मिले. इनमें से 364 के भवन नक्शे ही मंज़ूर हैं. सिर्फ 28 के पास फायर एनओसी और 27 के पास नियमितीकरण की मंज़ूरी है. किसी भी पीजी के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र नहीं मिला है.
इसके अलावा केशवपुरम ज़ोन में 410 पीजी आवास दर्ज किए गए, जो सभी ज़ोन में दूसरे सबसे अधिक हैं. इनमें सिर्फ 54 के भवन नक्शे मंज़ूर हैं. दो के पास फायर एनओसी और दो के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र हैं. किसी भी पीजी के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है.
दक्षिण ज़ोन में दिल्ली विश्वविद्यालय का साउथ कैंपस, आईआईटी दिल्ली और जेएनयू जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं. यहां सर्वे में 390 पीजी आवास मिले. इनमें से किसी के पास भी डीएफएस की मंज़ूरी, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र, मंज़ूर भवन नक्शा या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है. इनमें से किसी भी संपत्ति में मास्टर प्लान के तहत पीजी गतिविधि की अनुमति दर्ज नहीं है.
सुरक्षा मानकों पर सवाल
हाईकोर्ट द्वारा तय सर्वेक्षण की समयसीमा रविवार को खत्म हो गई. हालांकि, एमसीडी ने 10 सितंबर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा था. अधिकारियों के मुताबिक, इसे कम से कम एक दिन और जारी रखा जाएगा.
नियमों के मुताबिक, पीजी चलाने वाली इमारतों के लिए नगर निकाय से लेआउट प्लान मंज़ूर कराना जरूरी है. एमसीडी की वेबसाइट के अनुसार, यह प्लान मास्टरप्लान फॉर दिल्ली और भवन उपनियमों के अनुरूप होना चाहिए.
इसी तरह, फायर एनओसी यह सुनिश्चित करती है कि इमारत अपने इस्तेमाल के मुताबिक अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करती है. दिल्ली अग्निशमन सेवा आवश्यक सुरक्षा उपायों की जांच के बाद फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करती है. इसमें आपात स्थिति में बाहर निकलने और प्रवेश के रास्तों को बाधामुक्त रखना, लोगों और कर्मचारियों को आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की जानकारी होना और अग्निशमन उपकरणों को काम करने की स्थिति में रखना शामिल है.
मालूम हो कि सत्य निकेतन में गिरी इमारत में कथित तौर पर बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक रास्ता था.
संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र से यह सुनिश्चित किया जाता है कि इमारत अपने निर्माण और इस्तेमाल के दौरान पड़ने वाले भार और दबाव को सुरक्षित रूप से सहन कर सकती है.
वहीं, इमारत बनने के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट अगला महत्वपूर्ण चरण है. इसके लिए एमसीडी वास्तविक निर्माण को दर्शाने वाले पूर्णता नक्शे, प्लॉट का आकार और क्षेत्रफल, सेटबैक, पूरी हो चुकी इमारत की तस्वीरें और अन्य जरूरी दस्तावेज़ मांगता है.
एमसीडी के अनुसार, नियमितीकरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत कुछ मौजूदा अनधिकृत निर्माण या विकास को संबंधित नियमों और नियमितीकरण नीति के तहत वैध किया जाता है. इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होता है.
गौरतलब है कि सर्वेक्षण के शुरुआती आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब राजधानी में पीजी और छात्रावासों में रहने वाले बड़ी संख्या में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी की कार्रवाई ने यह भी सामने ला दिया है कि राजधानी में बड़ी संख्या में पीजी आवास बुनियादी नियामकीय मंज़ूरियों के बिना चल रहे हैं.


