NATIONAL : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पूरा शेड्यूल जारी, जींद-सोनीपत के बीच कहां स्टॉपेज? सबकुछ जान लीजिए

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही वे हरियाणा में कई अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन करेंगे। इससे पहले इंडियन रेलवे ने जींद से सोनीपति के बीच प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है।

चंडीगढ़\जींद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) 17 जुलाई को जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ( Hydrogen Train ) को झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री के जींद आगमन को लेकर हरियाणा सरकार पूरी तरह से सक्रिय है। हरियाणा के मुख्य सचिव ने शुक्रवार को दो आईएएस और चार एचसीएस अधिकारियों को जींद में तैनात किया है। हरियाणा सरकार में मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि पीएम मोदी हरियाणा में कई अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन करेंगे। उधर, इंडियन रेलवे ने हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है।

जींद से सोनीपत के लिए कितने बजे चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?
देश में हाइड्रोजन से चलने वाली पहली ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में तय करेगी और रास्ते में 12 स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे बोर्ड की ओर से उत्तर रेलवे को जारी एक आधिकारिक संदेश के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन नंबर 74010 अपनी नियमित के दौरान सुबह 7.40 बजे जींद रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और सुबह 9.40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।

किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी हाइड्रोजन ट्रेन?
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन बीच में पड़ने वाले 12 स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भम्बेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहना और बड़वासनी शामिल हैं। वापसी की यात्रा में ट्रेन नंबर 74009 सोनीपत से सुबह 10.40 बजे चलेगी और दोपहर 1.00 बजे जींद पहुँचेगी। रास्ते में यह संबंधित स्टेशनों पर रुकेगी।

दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन
इंडियन रेलवे के मुताबिक जींद-सोनीपत सेक्शन के लिए प्रस्तावित हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन 10-कोच वाली होगी। इसकी अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रति घंटा होगी। यह 1,200 KW के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलेगी। इस ट्रेन को पूरी तरह से भारत में डिजाइन और डेवलप किया गया है। ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर बनी यह ट्रेन 10 कोच के साथ दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन है।

जींद-सोनीपत रूट को क्यों चुना?
इस प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा में जींद-सोनीपत रूट को पायलट कॉरिडोर के तौर पर चुना गया है। ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइज़ेशन (PESO) ने इस सुविधा केंद्र पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और वितरण के लिए जरूरी लाइसेंस जारी कर दिया है। रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम के साथ-साथ जरूरी टेक्निकल सपोर्ट और अहम स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं, ताकि भरोसेमंद और सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा सके। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

हाइड्रोजन ट्रेन टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन से जुड़ी केमिकल रिएक्शन के जरिए बिजली पैदा करती है, जिसमें पानी की भाप ही एकमात्र बाय-प्रोडक्ट होती है। यह इसे पारंपरिक ट्रैक्शन सिस्टम (जो फॉसिल फ्यूल पर निर्भर होते हैं) की तुलना में एक साफ-सुथरा विकल्प बनाती है। दुनिया भर में हाइड्रोजन-पावर्ड रेल ट्रांसपोर्ट को सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए एक बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इस पहल के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जो हाइड्रोजन-आधारित रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं।

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