भारत से जुड़ा एक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर स्ट्रेटेजिक रूप से अहम होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर गया है. यह बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक बड़ी सफलता है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज सर्वशक्ति को शनिवार को ईरान के लारक और केशम आइलैंड के पास से गुजरने के बाद ओमान की खाड़ी में जाते हुए ट्रैक किया गया. इसमें लगभग 45,000 टन एलपीजी है. ये आमतौर पर खाना पकाने के फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल होता है.
माना जा रहा है कि जहाज भारत आ रहा है. सर्वशक्ति एक बहुत बड़ा गैस कैरियर है जो पहले भी फारस की खाड़ी और भारतीय पोर्ट के बीच के रूट पर इस्तेमाल किया जा चुका है. यह अभी अपने भारतीय डेस्टिनेशन और क्रू की डिटेल्स ब्रॉडकास्ट कर रहा है. यह एक सेफ्टी प्रोटोकॉल है जिसे ईरान से जुड़ी लड़ाई शुरू होने के बाद से इस इलाके में चलने वाले जहाज बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं.
जहाज का सफर इसलिए अहम है क्योंकि यह ईरान से जुड़े जहाजों को टारगेट करने वाली अमेरिकी नाकेबंदी के कुछ हफ़्ते पहले शुरू होने के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर के निकलने की पहली खबर है. इन पाबंदियों ने होर्मुज से टैंकर ट्रैफिक को लगभग जीरो लेवल तक कम कर दिया था, जिससे दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक में रुकावट आई थी.

सर्वशक्ति पिछले महीने होर्मुज के थोड़े समय के लिए खुलने के दौरान निकलने में कामयाब हो गया. इसके निकलने के तुरंत बाद नई पाबंदियां लगा दी गई. इस बीच पिछले महीने रिपोर्ट्स में कहा गया कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) शिपमेंट, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरी, जिससे दुनिया भर में एनर्जी के एक अहम चोकपॉइंट पर एक बड़ी कामयाबी का इशारा मिला.
शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक एलएनजी टैंकर मुबारज जिसने मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी की दास आइलैंड फैसिलिटी से कार्गो लोड किया था भारत के दक्षिणी सिरे से गुजर रहा था. यह जहाज कई हफ़्तों तक फारस की खाड़ी के अंदर खड़ा रहा और 31 मार्च के आसपास सिग्नल भेजना बंद कर दिया और सोमवार को भारत के पश्चिम में फिर से दिखा.

