लोकसभा में सीटें बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष विरोध करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यह बात कही। मीटिंग खड़गे के घर पर हुई, जिसमें राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए।खड़गे ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। इसलिए हमने परिसीमन बिल के विरोध का निर्णय लिया है। पूरा विपक्ष बिल के खिलाफ वोट करेगा।
सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में तीन बिल लाने वाली है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 शामिल हैं। सरकार का प्रस्ताव लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना है।इनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल दो विधेयक पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह एक विधेयक पेश करेंगे। इन पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है। इसके बाद राज्यसभा में चर्चा होगी। पीएम मोदी कल ही चर्चा के दौरान अपनी बात रख सकते हैं।

महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिया जाए। इसे मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर 2029 के चुनाव से ही लागू किया जाए।
सारी विपक्षी पार्टियां परिसीमन के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ हैं। लोकसभा और राज्यसभा की बहस में भाग लेंगे और इसका विरोध करेंगे।
बिल पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं
राहुल गांधी ने कहा- सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। यह संशोधन, परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों के मनमाने फेरबदल के जरिए सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश है। हम OBC, दलित और आदिवासियों के हिस्से की चोरी नहीं होने देंगे। साथ ही, हम दक्षिणी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे।
TVK अध्यक्ष विजय ने कहा, “परिसीमन केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया एक पक्षपातपूर्ण कदम है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026′ पारित हो जाता है तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर काफी बढ़ जाएगा।
IUML सांसद ई टी मोहम्मद बशीर ने कहा- हम परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह असल में एक जाल है। वे 2023 में भी आरक्षण दे सकते थे, और हम अब भी उसका समर्थन करते हैं। लेकिन साथ ही, यह संवैधानिक संशोधन एक खतरनाक चीज है। हम विरोध करेंगे।
RSP सांसद एन के. प्रेमचंद्रन ने कहा- परिसीमन बिल और साथ ही संविधान संशोधन बिल के जरिए, वे अनुच्छेद 81 के खंड 3 में संशोधन कर रहे हैं। सरकार पूरे देश को नियंत्रित करना चाहती है। उत्तर भारत में सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी, लेकिन दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए, सीटों में कमी आएगी। यह अलोकतांत्रिक है।
सवाल-जवाब में जानिए, इस बदलाव को
- सीटें कितने बढ़ेंगी: लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 व केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें। इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटें की संख्या बदल जाएंगी।
- महिला आरक्षण कितने साल के लिए होगा : कुल सीटों में से 33% यानी 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी।
आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।
- आरक्षण कैसे होगा: परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा।
- संसद में महिलाओं की अभी क्या स्थिति है:
- परिसीमन में क्या होगा: अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी।
सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है।
संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते।
- क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी: संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत।
लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा।
वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
परिसीमन बिल में PoK को लेकर भी प्रावधान
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के नए परिसीमन बिल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस बिल में PoK के लिए भी संसदीय सीटों का प्रावधान किया गया है, हालांकि ये सीटें फिलहाल खाली रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि PoK को शामिल करना यह दर्शाता है कि भारत उसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और भविष्य के राजनीतिक ढांचे में भी उसकी भूमिका तय की जा रही है।

