सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की तबियत खराब होने के बाद उन्हें सोमवार को बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें वायरल फीवर और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। रात खबर लिखे जाने डॉक्टरों द्वारा उनके ब्लड सहित अन्य स्वास्थ्य जांच जारी थी।
मुंबई: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (89) को सोमवार रात करीब 8:30 बजे न्यू मरीन लाइन्स के पास बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। उन्हें वायरल इन्फेक्शन होने का शक है। अन्ना हजारे को पहले रालेगण सिद्धि के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें सड़क मार्ग से मुंबई लाया गया। क्योंकि उनका क्रिएटिनिन लेवल बढ़ गया था, जो किडनी की समस्या का संकेत है।
अन्ना हजारे का इलाज कर रहे डॉ गौतम भंसाली ने कहा कि हम कई तरह के टेस्ट कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्हें वायरल इन्फेक्शन है। उनमें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) बहुत ज़्यादा है और किडनी फेल होने के लक्षण दिख रहे हैं। खबर लिखे जाने तक टेस्ट चल रहे थे। पता चला है कि रालेगण सिद्धि के कई ग्रामीण भी हजारे के साथ अस्पताल आए थे।

भ्रष्टाचार-विरोधी और समाज सुधार अभियानों में शामिल रहने के लिए मशहूर अन्ना हजारे 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के दौरान देशभर में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मजबूत लोकपाल कानून की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी।
पिछले ही महीने हजारे ने इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के प्रोबेशनर्स के एक ग्रुप से कहा था कि भारत के युवा ही देश का भविष्य हैं और ईमानदारी व निस्वार्थ सेवा राष्ट्र-निर्माण के लिए जरूरी गुण हैं। अलग-अलग राज्यों के 20 आईपीएस प्रोबेशनर्स का यह ग्रुप (जिन्होंने हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ली थी) जुलाई के आखिर में पश्चिमी महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में स्थित हजारे के पैतृक गांव ‘रालेगन सिद्धि’ गया था। उन्होंने वहां के वॉटरशेड डेवलपमेंट और ग्रामीण बदलाव के मॉडल का अध्ययन किया।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान अन्ना हजारे ने जोर देकर कहा था कि शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक बातचीत ही जनता की शिकायतों को दूर करने के एकमात्र तरीके हैं। सीजेपी का विरोध-प्रदर्शन खत्म होने के बाद उन्होंने कहा था कि कोई भी मुद्दा बातचीत से ही सुलझता है। बातचीत से समाधान निकलते हैं। तनाव पैदा करने और गलत रास्ते पर चलने से कुछ भी हल नहीं होगा। बातचीत सबसे जरूरी चीज है। मैंने 22 बार भूख हड़ताल की है, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। मामलों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। समाज का कल्याण और जो सही हो, वही किया जाना चाहिए।
इससे पहले पिछले महीने भी अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ गई थी। दरअसल उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में अहिल्यानगर में दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ किया था। मौन आंदोलन के दौरान फफक-फफकर रोने लगे। अन्ना ने अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सुबह 11 बजे अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया और दोपहर एक बजे इसे समाप्त किया गया। इसके बाद वह इसी जिले में स्थित अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए। कहा गया कि अन्ना हजारे की तबीयत ठीक नहीं थी फिर वो इसमें शरीक हुए। वो यहां कुछ देर रुके और फिर चले गए।


