श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत ईपीएफओ की तीन नई योजनाएं अधिसूचित की हैं। नई व्यवस्था में पीएफ, पेंशन और बीमा दावों का 20 दिनों में निपटारा अनिवार्य होगा। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की तीन नई योजनाएं अधिसूचित कर दी हैं। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-2026 शामिल हैं। नई योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन तथा बीमा दावों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि भविष्य निधि, पेंशन या बीमा का दावा सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूरा होने के बावजूद 20 दिनों के भीतर नहीं निपटाया जाता, तो संबंधित आयुक्त पर 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकेगा। यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी। मंत्रालय का कहना है, इससे दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिलेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले भी देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे स्पष्ट रूप से 12 प्रतिशत तय कर दिया गया है। पहले अधिकारियों को पीएफ पर घोषित ब्याज दर के अनुसार भुगतान करना पड़ता था।

कर्मचारियों और नियोक्ताओं का अंशदान पहले जैसा रहेगा
नई योजनाएं लागू होने के साथ कर्मचारी भविष्य निधि योजना-1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना-1971, कर्मचारी पेंशन योजना-1995 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-1976 की जगह लेंगी। हालांकि, कर्मचारियों व नियोक्ताओं के अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देंगे। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 प्रतिशत राशि पेंशन योजना में जाएगी, जबकि केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत का योगदान देगी।
नई योजनाओं में नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि सदस्य पीएफ निकासी, पेंशन, बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन और बिना देरी के ले सकें।

