NATIONAL : न निजीकरण होगा, न भूमिका घटेगी… प्राइवेटाइजेशन के दावों पर ISRO की सफाई, जानें क्या कहा

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ISRO ने अपने निजीकरण और भूमिका कम किए जाने की खबरों को सिरे से खारिज किया है. ISRO ने स्पष्ट किया कि उसका महत्व कम नहीं होगा, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी भूमिका पहले की तरह रहेगी.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण और उसकी भूमिका कम किए जाने की खबरों को पूरी तरह से निराधार और गलत बताते हुए सिरे से खारिज किया है. ISRO ने साफ सफाई देते हुए कहा कि ये दावे गलत और बेबुनियाद हैं. ISRO ने साफ कहा कि उसका न तो निजीकरण किया जा रहा है और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में उसका महत्व कम किया जाएगा. ISRO ने स्पष्ट किया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी भूमिका पहले की तरह बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी.

ISRO का यह बयान उन रिपोर्टों के सामने आने के कुछ बाद आया है जिनमें कहा गया था कि ISRO के हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 9 संगठनों ने अंतरिक्ष एजेंसी के विनिर्माण और परिचालन कार्यों को निजी संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण मांगा था.

‘ निजीकरण की बात पूरी तरह गलत’
ISRO ने इन दावों को गलत बताते हुए बयान जारी किया. जिसमें उसने कहा कि हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि ISRO का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा. बयान में आगे कहा गया है ‘ISRO उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों, अंतरिक्ष विज्ञान और अन्वेषण, और महत्वपूर्ण एवं सीमांत अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगा’.

ISRO ने कहा, स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य किसी भी तरह से इसरो की भूमिका को कम करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इसरो को भारत के स्पेस प्रोग्राम की अगली पीढ़ी पर और ज्यादा मजबूती से फोकस करने में सक्षम बनाना है, जबकि इंडस्ट्री मैच्योर टेक्नोलॉजिज और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करेगा.

‘कुछ बदलाव हो रहा है लेकिन…’
एजेंसी ने कहा कि जो भी कुछ बदलाव हो रहा है वो ISRO के लिए महत्व में नहीं हो रहा, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के स्ट्र्क्चर और स्केल में हो रहा है.एजेंसी ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने का मतलब ISRO की भूमिका कम होना नहीं है. इसके बजाय इससे ISRO को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगले चरण पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा. वहीं निजी क्षेत्र पहले से विकसित और परखी जा चुकी तकनीकों और क्षमताओं को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाएगा.

ISRO के मुताबिक, अंतरिक्ष क्षेत्र में उद्योगों, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य देश के मौजूदा अंतरिक्ष ढांचे और क्षमताओं का विस्तार करना है. एजेंसी ने कहा कि इन सुधारों को निजीकरण के बजाय अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार और क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के रूप में देखा जाना चाहिए. ISRO के अनुसार, बदलाव उसकी अहमियत में नहीं बल्कि भारत के पूरे अंतरिक्ष तंत्र के आकार और काम करने के तरीके में हो रहा है.

ISRO ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही इसकी मौजूदा क्षमताओं को भी बढ़ाया और विस्तारित किया जा रहा है, इसलिए इन सुधारों को निजीकरण के बजाय पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और क्षमता वृद्धि के रूप में देखा जाना चाहिए.

स्पेस विजन 2047 के लिए जरूरी बदलाव
ISRO ने कहा कि यह बदलाव उसके अंतरिक्ष विजन 2047 के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करना, 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजना है. इसके अलावा अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट विकसित करना, चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की लंबे समय तक खोज जारी रखना और भारत को दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल करना भी इस योजना का हिस्सा है.

बयान में कहा गया है कि ये तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण मिशन हैं जिनके लिए ISRO को उन्नत अनुसंधान और क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित रखना होगा, जिन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से आसानी से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है. इसलिए इसका उद्देश्य उद्योग को परिपक्व क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाना है, जबकि ISRO भारत को अगली तकनीकी सीमा की ओर ले जा रहा है.

ISRO ने कहा कि जहां उपयुक्त होगा, वहां संचालन और सेवाओं में निजी भागीदारी को सक्षम बनाया जाएगा और यह राष्ट्रीय सुरक्षा, संरक्षा और अन्य नियामक आवश्यकताओं के अधीन रहेगी. रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व की क्षमताओं का संचालन सुरक्षा, संरक्षा, गुणवत्ता और राष्ट्रीय हित के संदर्भ में होता रहेगा.

कर्मचारियों में क्यों बढ़ी चिंता
निजीकरण की खबरों के बाद ISRO के कर्मचारियों में चिंता पैदा हुई थी. 4 सितंबर को 9 कर्मचारी संगठनों ने ISRO अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकार की निजीकरण नीति और संगठन की भविष्य की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी.

इन संगठनों में ISRO के कई केंद्रों से जुड़े कर्मचारी संगठन शामिल हैं. उन्होंने कहा था कि मीडिया में आई खबरों से कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच चिंता का माहौल बना है. संगठनों ने यह भी पूछा था कि प्रस्तावित बदलाव का मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली भर्तियों पर क्या असर पड़ेगा.

पवन गोयनका ने भी दी सफाई
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने भी रविवार (6 सितंबर) को कहा कि ISRO की भूमिका कम नहीं की जा रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि 2020 से किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य भारत के पूरे अंतरिक्ष तंत्र का विस्तार करना है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रक्षेपण यान, उपग्रह और दूसरी तकनीकों के निर्माण और बड़े स्तर पर उत्पादन की जिम्मेदारी धीरे-धीरे देने का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता बढ़ाना है.

IN-SPACe अंतरिक्ष विभाग के अधीन एक स्वायत्त निकाय है जो गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देता है, सक्षम बनाता है, अधिकृत करता है और उनकी देखरेख करता है. दरअसल हाल ही में गोयनका के इस बयान के बाद कर्मचारियों में चिंता बढ़ी थी कि भविष्य में ISRO खुद कोई प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और इसका निर्माण निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां करेंगी, जिसके बाद कर्मचारियों ने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था.

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