NATIONAL : ‘पता नहीं अपने आप को G7 क्यों कहते हैं?’: पुतिन ने पश्चिमी देशों पर कसा तंज, समझाया ब्रिक्स कैसे बना ताकतवर

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नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और जी-7 समूह पर जोरदार हमला बोला। पुतिन ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए समझाया कि कैसे वैश्विक जीडीपी और आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स समूह जी-7 से बहुत आगे निकल चुका है। क्या पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच ब्रिक्स समूह दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की राह पर है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं साथ ही ये भी जानेंगे कि पुतिन ने और क्या कुछ कहा…

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक दबदबे को खुली चुनौती दी। जी-7 समूह पर तीखा प्रहार किया। पुतिन ने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया गहरे संरचनात्मक और व्यापक बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि पश्चिमी देश निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा करने से बुरी तरह डरते हैं और इसी वजह से रूस पर मनमाने और गलत प्रतिबंध थोपे गए हैं। हालांकि इन प्रतिबंधों के बावजूद रूस न केवल आगे बढ़ा है, बल्कि ब्रिक्स देश आपसी सहयोग और मजबूत रिश्तों के दम पर वैश्विक चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं।

पुतिन ने जीडीपी और वैश्विक विकास का कौन सा गणित समझाया?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ठोस तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अकेले ब्रिक्स देशों ने किया है।
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इसके उलट तथाकथित जी-7 समूह का योगदान सिमटकर केवल 29 प्रतिशत रह गया है। पुतिन ने तंज कसते हुए कहा कि वे समझ नहीं पाते कि उसे जी-7 या ग्रेट-7 क्यों कहा जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है।
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उन्होंने विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का आंकड़ा समझाते हुए कहा कि समान अवधि में वैश्विक आर्थिक विकास की आधी से अधिक यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि ब्रिक्स देशों की वजह से हुई है, जबकि जी-7 समूह का योगदान इसमें केवल 18 प्रतिशत रहा है।
पुतिन ने इस भारी अंतर की सीधी वजह बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से अधिक आबादी बसती है, जिससे उनके पास बेहद गतिशील, विशाल और जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।

भारत की तकनीकी प्रगति पर क्या बोले पुतिन?
पुतिन ने भारत की तकनीकी प्रगति को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की आईटी कंपनियां बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच आज दुनिया का करीब 40 फीसदी व्यापार संचालित होता है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भरोसेमंद बिजनेस-टू-बिजनेस संबंध और मजबूत आर्थिक साझेदारियां ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये साझेदारियां दुनिया के सामने मौजूद संकटों को हल करने में मदद करती हैं। उन्होंने साफ किया कि रूस पूरी दुनिया में केवल विश्वसनीय और उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरने वाले साझेदारों के साथ अपने संबंध लगातार मजबूत कर रहा है।

वो आंकड़े, जिस आधार पर पुतिन ने ब्रिक्स को बताया आगे

वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी
पिछले 5 वर्षों में ब्रिक्स देशों ने विश्व की 40% से अधिक जीडीपी बनाई, जबकि जी-7 का हिस्सा केवल 29% रहा।

वैश्विक विकास दर में योगदान
दुनिया की आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 50% से अधिक रही, जबकि जी-7 केवल 18% का योगदान दे सका।

जनसंख्या और बाजार
ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की आधी से अधिक आबादी और अत्यंत जीवंत घरेलू बाजार मौजूद हैं।

वैश्विक व्यापार
वर्तमान में विश्व का लगभग 40 प्रतिशत व्यापार ब्रिक्स देशों के बीच हो रहा है।

भारतीय आईटी की भूमिका
मंच से पुतिन ने भारत की आईटी कंपनियों की तेज विकास दर की जमकर सराहना की।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर पुतिन का क्या रुख?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जोर देकर कहा कि रूस पर्यटन, उद्योग और व्यापार के क्षेत्रों में दिलचस्प और आशाजनक पहलों के लिए पूरी तरह खुला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर में विश्वसनीय लॉजिस्टिक और परिवहन मार्ग तैयार करने पर विशेष बल दिया। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और ‘नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ जैसे अहम और रणनीतिक व्यापारिक रास्तों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

पश्चिमी प्रतिबंधों और प्रतिस्पर्धा के बदसूरत रूप पर क्या बोले पुतिन?
रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि के बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका या किसी अन्य देश का सीधा नाम लिए बिना पश्चिमी देशों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कई बार अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बेहद बदसूरत रूप अख्तियार कर लेती है। पुतिन ने रेखांकित किया कि यह बदसूरत रूप अब केवल निजी स्तर पर नहीं, बल्कि सरकारी और राज्य स्तर पर भी साफ देखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कभी-कभी प्रतिस्पर्धा को दबाने के लिए ऐसे उपाय अपनाए जाते हैं जो भौतिक प्रकृति के यानी सीधे नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं।

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