रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को अस्थिर बताते हुए कहा कि इससे हालात अचानक बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। राजनाथ सिंह ने यह टिप्पणी पश्चिम एशिया की स्थिति की निगरानी के लिए गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, उपभोक्ता मामले के मंत्री प्रह्लाद जोशी, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू, पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल शामिल हुए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘जमीनी स्थिति अनिश्चित और अस्थिर है और भारत को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।’ सोशल मीडिया पोस्ट में सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार जोखिमों को कम करने के लिए तेजी और प्रभावी ढंग से कदम उठा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल’ के गठन को मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया, जिसे 12,980 करोड़ रुपये की गारंटी के साथ स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अस्थिर समुद्री मार्गों के बीच भी भारतीय व्यापार के लिए निरंतर और सस्ती बीमा सुविधा सुनिश्चित करना है।

रक्षा मंत्री ने कहा, यह अहम फैसला भारत के समुद्री व्यापार को सस्ती और निरंतर बीमा कवरेज देगा, जिससे आयात-निर्यात संचालन की सुरक्षा और स्थिरता मजबूत होगी। यह देश के व्यापार तंत्र को और मजबूत, सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।’ बैठक में बताया गया कि वैश्विक आपूर्ति में झटकों के बावजूद भारत ने ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिशें जारी हैं।
वर्तमान में भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) का 60 दिनों से अधिक का स्टॉक है। वहीं एलएनजी का करीब 50 दिन और एलपीजी का लगभग 40 दिन का भंडार उपलब्ध है, जिसमें घरेलू उत्पादन का भी योगदान है। सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता हासिल की है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है। अप्रैल और मई 2026 के लिए आयात की जरूरतें काफी हद तक सुरक्षित कर ली गई हैं, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी।


