प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान ‘स्वच्छता से स्वागत’ नाम की एक नई परंपरा और प्रोटोकॉल उभरकर सामने आया है। इसके तहत पीएम मोदी के आगमन से पहले स्थानीय प्रशासन और भाजपा की स्थानीय इकाइयां मिलकर सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक सफाई अभियान चलाती हैं, जैसा कि हाल ही में गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा के दौरों पर देखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान एक नई परंपरा उभरकर सामने आई है। गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा के पिछले दौरों के दौरान देखा गया कि पीएम मोदी के आगमन पर स्थानीय प्रशासन और भाजपा की स्थानीय यूनिट मिलकर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाते हैं। इसे स्वच्छता से स्वागत नाम दिया गया है। यह पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता जताने का नया माध्यम बन गया है।

पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में यह परंपरा सबसे मजबूत बनकर सामने आई है। किसी भी बड़े कार्यक्रम या रैली से दो-तीन दिन पहले ही नगर निगम और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई और उन्हें चमकाने में जुट जाते हैं। भाजपा के झोली में आए बंगाल में भी यह पहल नजर आई है। राज्य में सियासी गहमागहमी के बीच भी पीएम के दौरों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से गंगा घाटों और कार्यक्रम स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया था। इसने लोगों का ध्यान अपनी ओर बरबस खींचा। राज्य प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम के दौरे से पहले छह दिनों तक सफाई अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मंत्रियों के नेतृत्व में चले इस अभियान में जन-प्रतिनिधियों ने कोलकाता के प्रमुख ऐतिहासिक घाटों और सार्वजनिक जगहों की सफाई के लिए झाड़ू उठाई। वहीं राजस्थान में भी पीएम की यात्राओं से पहले ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख रास्तों की न केवल सफाई की गई, बल्कि स्वच्छता से स्वागत के तहत दीवारों पर सुंदर पेंटिंग और कलाकृतियां भी उकेरी गईं। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में भी स्थानीय प्रशासन ने सड़कों के किनारे से कचरा हटाने व हरियाली बढ़ाने के लिए जमकर काम किया। अभियान की खासियत यह है कि इसमें केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के संगठन की भी बराबर की भागीदारी होती है। एक प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, यह केवल एक प्रोटोकॉल नहीं है, बल्कि एक जन-आंदोलन की तरह है।
नागरिकों की भागीदारी : यह अभियान सार्वजनिक जगहों पर समुदाय का मालिकाना हक और जिम्मेदारी की भावना पैदा करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय व्यापारियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को सक्रिय रूप से शामिल करता है।
स्थानीय संसाधनों का कायाकल्प : सिर्फ झाड़ू-पोछा करने से आगे बढ़कर, इस अभियान ने जटिल नागरिक कार्यों पर ध्यान दिया है, जैसे ऐतिहासिक आदि गंगा चैनल की गहरी सफाई, गाद निकालना और उसे सुंदर बनाना।
नीतिगत एकीकरण : राज्य के अधिकारियों ने इस अभियान की गति का इस्तेमाल स्थायी नागरिक नीतियां बनाने में किया है, जिसमें डिजिटल निगरानी प्रणाली शुरू करना और सार्वजनिक जगहों पर कचरा फैलाने वालों के लिए सख्त जुर्माने का प्रस्ताव रखना शामिल है।

