NATIONAL : पेपर लीक रोकने के लिए आधार के संस्थापक का बड़ा सुझाव, AI से परीक्षा के दिन ही तैयार हों प्रश्नपत्र

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देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की समस्या को रोकने के लिए आधार (Aadhaar) के निर्माण से जुड़े प्रमुख व्यक्ति और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने तकनीक आधारित सुधारों का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से परीक्षा के दिन ही प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं, जिससे पेपर लीक होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रश्नपत्र बनाने के तरीके में बदलाव का सुझाव

नंदन नीलेकणी के अनुसार, प्रश्नपत्रों को पहले से तैयार करके सुरक्षित रखने के बजाय प्रश्नों का एक बड़ा डिजिटल बैंक बनाया जाना चाहिए। इसी बैंक से परीक्षा के दिन अंतिम समय में प्रश्नों का चयन करके प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है।

उनका मानना है कि जब परीक्षा का एक निश्चित प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध नहीं होगा, तो उसे लीक करके बेचने का आर्थिक प्रलोभन भी कम हो सकता है। उन्होंने यह विचार 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान रखा।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर भी जोर

नीलेकणी ने देश में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer-Based Testing यानी CBT) का विस्तार करने की जरूरत भी बताई। इस व्यवस्था में अभ्यर्थी कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा देते हैं और प्रश्नों का वितरण डिजिटल तरीके से किया जा सकता है।

हालांकि, इस व्यवस्था को देशभर में लागू करने के लिए पर्याप्त परीक्षा केंद्र, मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करना होगा।

प्रस्ताव पर उठे सवाल

इस सुझाव पर शिक्षा जगत में चर्चा भी शुरू हो गई है। सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ने AI से प्रश्नपत्र तैयार करने और पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं। उनके अनुसार, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के पास कंप्यूटर की सीमित उपलब्धता, परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं में अंतर और AI से चुने गए प्रश्नों में संभावित गलतियां निष्पक्ष परीक्षा के सामने चुनौतियां बन सकती हैं।

आगे क्या हो सकता है?

नंदन नीलेकणी परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं। AI आधारित प्रश्नपत्र और कंप्यूटर आधारित परीक्षा उनके सुझाए गए संभावित उपायों में शामिल हैं। इन सुझावों को लागू करने से पहले प्रश्नों की गुणवत्ता, सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और सभी छात्रों को समान अवसर देने जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी होगा। पेपर लीक रोकने के लिए AI का इस्तेमाल परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक के साथ पारदर्शिता, प्रश्नों की शुद्धता और छात्रों के लिए समान अवसर कैसे सुनिश्चित किए जाते हैं।

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