आखिरकार बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट से जुड़े मामले में मेटा कंपनी जांच एजेंसियों के साथ डीटेल शेयर के लिए सहमत हो गई है। बता दें कि भारत सरकार ने पिछले कुछ समय से इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपना रखा था।
नई दिल्ली: मेटा बच्चों के यौन शोषण के मामलों की जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देने पर सहमत हो गया है। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार हानिकारक जानकारी को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ लगातार बातचीत कर रही है। भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
बच्चों के लिए सुरक्षित हों प्लेटफॉर्म
सरकार का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला कदम है और अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार ऐसे कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। सरकार उन प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाते हैं।

सरकार की सख्ती से पहले ढुलमुल था रवैया
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार Meta के अलावा भी दूसरे सोशल मीडिा प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती कर रही है। मोदी सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी (Child Sexual Abuse Material) के खिलाफ कार्रवाई सख्त एक्शन लेना होगा। भारत सरकार ने इसके पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट हटाने को लेकर ढुलमुल रवैया अपनाने की बात कही थी।
सरकार और अधिकारियों ने दी थी चेतावनी
भारत सरकार के अधिकारियों के अलावा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया कंपनियों को चेताया था कि उन्हें बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। अगर कंपनियां इससे पीछे हटती हैं तो उन्हें भारत में मिली ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। सरकार की चेतावनी के बाद ही कंपनियों ने इस तरह के कंटेंट के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरू की है।

