कांग्रेस ने वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने कहा कि सरकारी नीतियों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है, जबकि पासपोर्ट सेवाएं महंगी और वीजा व्यवस्था कमजोर हुई है। कांग्रेस ने विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या पर भी सवाल उठाए। पढ़िए रिपोर्ट-
वैश्विक पासपोर्ट सूचकांक में भारत की स्थिति को को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कथित पुराने बयान का जिक्र किया और उसको लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले दावा किया था कि विदेश जाने और वहां रहने वाले लोग भारतीय पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को जानते हैं।

उन्होंने कहा, सेवाओं में सुधार करने के बजाय मोदी सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट का शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क बढ़कर 5,000 रुपये हो गया है।
खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अभी तक कोविड महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि 2019 में 1.09 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आए थे। जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 99.5 लाख रह गई।
उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार इस कमी को छिपाने के लिए एनआरआई (प्रवासी भारतीय) के आगमन को भी विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में जोड़ रही है? खरगे ने यह भी पूछा, भारत का आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल अब भी इतना पुराना और जटिल क्यों है कि वह 1990 के दशक की वेबसाइट जैसा लगता है?
उन्होंने कहा, ‘अतिथि देवो भवः’ की भूमि भारत में कोई भी पर्यटकों का इस तरह स्वागत नहीं करना चाहता।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, अगर भारतीय पासपोर्ट की ताकत कम हुई है। पर्यटन अब तक पूरी तरह नहीं संभला है। वीजा सेवाएं कमजोर हैं और लोगों को खराब सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, तो फिर सरकार जिस वैश्विक सम्मान का प्रचार करती है, वह आखिर कहां है? उन्होंने कहा कि सच्चाई कुछ और है और मोदी सरकार की वजह से भारत की छवि प्रभावित हो रही है।

