पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) दो खेमों में बंट गई है। बागी गुट द्वारा नई राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन के बाद, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली एआईटीसी ने बागियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।
कोलकाता: विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस दो खेमों बंट चुकी है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि इन नेताओं ने पार्टी के नाम, लोगो और संगठनात्मक पहचान का गैरकानूनी इस्तेमाल किया। उन्होंने खुद को पार्टी का असली प्रतिनिधि बताया और फर्जी दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की। यह शिकायत तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन की ओर से दर्ज कराई गई है।
शिकायत में कहा गया है कि कुछ बागी नेताओं ने बिना पार्टी नेतृत्व की अनुमति के बैठकें आयोजित कीं और संगठन के आधिकारिक ढांचे को चुनौती देने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि यह कदम न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि कानूनी तौर पर भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। दरअसल, 22 जून को तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बागी गुट ने खुद को असली TMC बताते हुए अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन की घोषणा कर दी। इस नई समिति का अध्यक्ष वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को बनाया गया। साथ ही, ममता बनर्जी को संरक्षक की भूमिका निभाने का प्रस्ताव भी दिया गया।

खास बात यह है कि नई घोषित राष्ट्रीय कार्य समिति में TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया। इस कदम से पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों और बदलती निष्ठाओं को लेकर अटकलें तेज होने की संभावना है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि समिति का गठन पार्टी के संविधान के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी चुनाव आयोग को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह गुट जल्द ही अपने संगठनात्मक विस्तार के तहत जिला समितियां, एक राज्य इकाई और प्रवक्ताओं का एक पैनल गठित करेगा।
TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का इस तरह इस्तेमाल करना विश्वासघात है। घोष ने आरोप लगाया कि कुछ नेता बाहरी दबाव में काम कर रहे हैं और पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसा रखती है और ऐसे प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

