श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आपातकालीन बैठक 11 जुलाई को होनी थी, लेकिन इसमें अचानक बदलाव कर दिया गया है। अब यह बैठक 6 जुलाई को होगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।
शलभ, लखनऊ/अयोध्या: यहां चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 11 जुलाई को प्रस्तावित बैठक की तारीख में बदलाव कर दिया गया है। अब यह बैठक 11 के बजाय 6 जुलाई को होगी। माना जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के भविष्य का फैसला होगा। ट्रस्ट के सभी 14 सदस्यों से 6 जुलाई की बैठक में मौजूद रहने के लिए कहा गया है।

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख 87 वर्षीय संत महंत नृत्य गोपाल दास हैं। ट्रस्ट की 6 जुलाई को होने वाली बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दैनिक कामकाज और उच्च स्तर पर निगरानी के तरीके में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं? इस ट्रस्ट में और लोगों को शामिल करने पर भी निर्णय लिया जा सकता है। पिछले साल अगस्त में ट्रस्ट के सदस्य राजा अयोध्या (विमलेंद्र मोहन मिश्रा) की स्थान पर किसी नए सदस्य को लाया जा सकता है।
आशा की जा रही है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य मौजूदा भीड़ प्रबंधन प्रणाली पर चर्चा करेंगे और मंदिर में आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने की रणनीति बनाएंगे। ट्रस्ट के एक सदस्य ने कहा, ‘हमें भक्तों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए और सुविधाएं और इंतजाम करने की जरूरत है। गर्मी तेज हो रही है। हमें विशेषज्ञों के साथ मिलकर योजना बनानी होगी।’
जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए कार्यक्रम बदला
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की यह आपातकालीन बैठक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की पहल पर बुलाई गई है। ट्रस्ट के सदस्यों को भेजे गए पत्र में गिरी ने कहा है कि बैठक की तारीख पहले कर दी गई है क्योंकि कुछ जरूरी मुद्दों पर चर्चा होनी है।
इस ट्रस्ट का मई 2020 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ रजिस्ट्रेशन हुआ था। इस ट्रस्ट में केंद्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले चार पदेन सदस्य हैं। इसकी पिछली बैठक 21 मार्च को हुई थी, जिसमें मुख्य एजेंडा राम नवमी समारोह की तैयारी का था। ट्रस्ट की बैठक हर तीन महीने में होती है।
नहीं बरती जा रही थी पारदर्शिता
एक सूत्र ने कहा, ‘अब तक कोई पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी। ट्रस्ट के कुछ ही पदाधिकारी सभी आंतरिक मामलों पर पूरे अधिकार के साथ काम चला रहे थे। किसी के साथ कोई रिकॉर्ड या दस्तावेज साझा नहीं किए गए। भक्तों का भरोसा डगमगाने के कारण, हमें कई स्तरों पर जांच और संतुलन की व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर फैसला लेने की प्रक्रिया में और भी स्तर जोड़े जाएंगे।’

