NATIONAL : ‘हताश नेता की झूठी गूंज’, भाजपा ने CEC-SIR विवाद पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उड़ाया मजाक

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चुनाव आयोग को लेकर सियासत गर्म है। एक तरफ जहां राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमतियों को लेकर लोकतंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा किया।

वहीं भाजपा की ओर से सांसद व प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बिंदुवार पलटवार करते हुए उस खबर पर ही सवाल खड़ा किया जिसमें आयोग के अंदर ही दरार की बात कही गई है।

सुंधाशु ने कहा कि उक्त अखबार की पूरी खबर में कहीं भी इसका साक्ष्य नहीं दिया गया कि एक भी फैसला बिना सर्वसम्मति के हुआ। अगर दो आयुक्त विरोध में हों तो फैसला हो ही नहीं सकता है।

एक दिन पहले ही आयोग ने भी विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि एक साल में 40 फैसले लिए गए और सभी सर्वसम्मति से थे। सुधांशु ने कहा कि राहुल गांधी को ऐसी खबरों के आधार पर बहस नहीं खड़ी करनी चाहिए क्योंकि 2012 में इसी अखबार में कहा गया था कि सेना सत्ता पर कब्जा करना चाहती थी।

सुधांशु ने कहा कि संविधान के नियमों के अनुसार आयोग को एसआइआर कराने का अधिकार है। और यह संविधान के अनुरूप है कि वोटर वही हो जो भारतीय नागरिक हो।

उन्होंने राहुल से पूछा कि 1987 में पहली बार यह तय हुआ कि 26 जनवरी 1987 से पहले जन्मे को भारतीय माना जाएगा। यह कांग्रेस के समय का कानून है और इसका अर्थ है कि उसके बाद जो भी वोटर बनेगा उससे सवाल पूछए जाएंगे।2003 में संशोधन हुआ माता पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके बाद यह भी संशोधन हुआ कि माता पिता में कोई भी एक अवैध रूप से भारत न आया हो। ऐसे मे क्या यह जरूरी नहीं कि जो भी नया वोटर बन रहा है उससे कुछ सवाल पूछे जाएं। इसीलिए फआर्म 6 के साथ घोषणापत्र लाया गया है।सुधांशु ने कहा कि कांग्रेस को घुसपैठियों से प्रेम है क्योंकि वह उसके भरोसे चुनाव जीतती है। यही कारण है 2024 चुनाव से पहले कांग्रेस के एक नेता ने बंग्लादेश के अखबार में आर्टिकल लिखा कि मोदी हैज टू गो(मोदी को जाना होगा)। जब चुनाव भारत में हो रहे थे तो बंग्लादेश के अखबार मे क्यों आर्टिकल लिखा गया। जबकि 70 फीसद मुस्लिम आबादी वाले असम के ढूबरी में कांग्रेस को सबसे बडी जीत मिली।

ऐसे कई और इलाके हैं जहां घुसपैठियों का सबसे ज्यादा संदेह है। कई घुसपैठियों ने तो वापस जाते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने चार बार वोट डाले हैं।

बंग्लादेश के सांसद अख्तर हुसैन ने भी कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई तो मुश्किल होगी क्योंकि उनके कई लोग वापस आने लगेंगे। इस सबके तार कांग्रेस से जुड़े हैं।

राहुल ने कहा था कि एंटी इनकंबैंसी स्थापित नियम है। इस पर सुधांशु ने चुटकी लेते कहा कि यह कांग्रेस और खासतौर पर गांधी परिवार के लिए है। क्योंकि खुद राहुल और सोनिया गांधी भी अपने पुस्तैनी सीट रायबरेली और अमेठी से सपा के समर्थन के बगैर नहीं जीत पाते हैं।

वायनाड में मुस्लिम लीग का समर्थन चाहिए होता है। जब तक देश में बूथ लूटा जाता रहा, वोटर आइ कार्ड की जरूरत नहीं थी, सीसीटीवी नहीं होते थे कांग्रेस रिपीट करती रही। जबस चुनाव स्वच्छ होने लगे कांग्रेस विदा हो गई। तमिलानाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्य हैं जहां कांग्रेस दशकों से गायब है।

क्या यह भी चुनाव आयोग के कारण हो रहा है। कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा आयोग पर न फोड़े। सुधांशु ने तीखा तंज किया और कहा- नग्न व्यक्ति नृत्य करे और कहे कि कपड़ा फट गया जैसी कांग्रेस की हालत है।

सुधांशु ने कांग्रेस के काल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की भी याद दिलाई और यह वीडियो भी दिखाया जिसमें तत्कालीन कैबिनेट सचिव टीएन शेषन ने कहा था कि राजीव गांधी ने चुनाव की तिथि के लिए आयोग को निर्देश देने की बात कही थी।

सुधांशु ने एक और सवाल खड़ा किया और कहा कि राज्यों में चुनाव आयुक्त नियुक्त होते हैं। कितने राज्यों में उनकी नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष शामिल होता है। कितनी जगह राज्य के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।

एसआईआर के सभी विषय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाए गए थे और वहीं से मुहर लगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाना चाहता है तो ले आए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

बिना सियासी जमीन के जमींदार बनना चाहती है कांग्रेस
भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस बौखलाहट में है। देश गवाह है कि खुद को सत्ता की स्वभाविक पार्टी समझने वाली ग्रांड ओल्ड पार्टी बिना जनाधार की जागीरदारी , बिना जमीन की जमींदारी के गुरूर सुरूर में अभी भी है। और इसीलिए केंद्र और राज्यों में सिमटती सिकुड़ती गई।

जबकि भाजपा 2014, 2019, 2024 के चुनाव में अकेले क्रमशः 282 सीट और 38% वोट, 303 सीट और 38% वोट, 240 सीट और 37% वोट हासिल कर श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतरता के साथ बिना कांग्रेस के सपोर्ट, रहम-रिमोट के तीसरे कार्यकाल में प्रवेश कर गई।

चुनाव में लगी चोट को चुनाव तंत्र की खोट साबित करने की सोच, सनक, साजिश, सियासत ने हार की हताशा ने कांग्रेस को हुड़दंगी तमाशा बना दिया है ।

हर चुनाव राजनैतिक दलों के लिए सबक-संदेश होता है, कोई भी हार जीत स्थाई नहीं होती, जनतंत्र में जनादेश की ताकत को अहंकार, अराजकता की आफत से अपहरण करने की सनक सियासी सेहत के लिए हानिकारक होती है ।

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