NATIONAL : 30 दिन जेल तो खुद चली जाएगी CM/PM की कुर्सी; मानसून सत्र में आएगा वो बिल जिसपर मचा है बवाल! जानिए दो-तिहाई बहुमत के ‘नंबर गेम’ में कहां फंसा है पेच

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30Days In Jail Rule: मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में 130वां संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है. इसके तहत गंभीर अपराधों में लगातार 30 दिन जेल में रहने पर पीएम, सीएम या मंत्रियों की कुर्सी स्वतः चली जाएगी. विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है. आइए जानते हैं, इस की खास बातें…

30 दिन जेल तो खुद चली जाएगी CM/PM की कुर्सी; मानसून सत्र में आएगा वो बिल जिसपर मचा है बवाल! जानिए दो-तिहाई बहुमत के ‘नंबर गेम’ में कहां फंसा है पेच

CM PM Removal Bill: देश की सियासत में एक बार फिर भूचाल आने वाला है. मोदी सरकार एक ऐसा ऐतिहासिक कानून अमली जामा पहनाने की तैयारी में है, जो भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक इतिहास को हमेशा के लिए बदल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में सरकार बहुप्रतीक्षित 130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 पेश कर सकती है.

इस बिल की सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अगर कोई भी मंत्री, मुख्यमंत्री (CM) या प्रधानमंत्री (PM) गंभीर अपराधों के आरोप में लगातार 30 दिनों तक जेल या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसकी कुर्सी स्वतः चली जाएगी. इस कड़े कानून की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) आगामी 17 जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देने वाली है.

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पिछले साल अगस्त में पेश किए गए इस बिल में बेहद कड़े और सीधे नियम तय किए गए हैं:

  1. 5 साल से ज्यादा की सजा वाले अपराध: यदि किसी जन प्रतिनिधि पर ऐसा आरोप है जिसमें 5 साल या उससे अधिक की जेल हो सकती है.
  2. 30 दिन की हिरासत की शर्त: यदि आरोपी नेता लगातार 30 दिनों तक पुलिस या न्यायिक हिरासत (जेल) में बंद रहता है.
  3. स्वतः निष्कासन: हिरासत के 31वें दिन वह नेता अपने पद से स्वतः ही हटा हुआ माना जाएगा, या फिर राष्ट्रपति/राज्यपाल के निर्देश पर उसे तुरंत पद छोड़ना होगा.

ओडिशा से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय JPC इस प्रावधान को बिल में बनाए रखने के पक्ष में है. हालांकि, राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए इसमें कुछ ‘सेफगार्ड्स’ (सावधानियां) भी जोड़ी जा रही हैं.

विपक्ष क्यों थर-थर कांप रहा?
इस बिल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं. कांग्रेस और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने इस JPC की बैठकों का यह कहकर बहिष्कार कर दिया कि समिति सिर्फ सरकार की ‘रबर स्टैम्प’ बनी हुई है.

विपक्ष का डर: विपक्ष का सीधा तर्क है कि यह कानून अलोकतांत्रिक है और देश के संघीय ढांचे पर हमला है. इसके तहत किसी नेता को दोषी साबित होने से पहले, सिर्फ हिरासत के आधार पर पद से हटा दिया जाएगा, जो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है. विपक्ष को डर है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्षी सरकारों को गिराने के लिए किया जा सकता है.

सत्तापक्ष का पलटवार: सत्ताधारी गठबंधन का कहना है कि 30 दिन का समय बहुत लंबा होता है. इस दौरान कोई भी व्यक्ति कम से कम तीन बार जमानत (Bail) की अर्जी लगा सकता है. अगर कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तभी कुर्सी जाएगी, इसलिए यह कानून बिल्कुल न्यायसंगत है.

समझें लोकसभा और राज्यसभा का पूरा ‘नंबर गेम’
चूंकि यह एक संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और वोट करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत चाहिए होगा. पिछले मानसून सत्र से लेकर इस सत्र के बीच देश में बड़े राजनीतिक दलबदल हुए हैं, जिससे NDA काफी मजबूत हुआ है, लेकिन राह अब भी पूरी तरह आसान नहीं है.

  1. लोकसभा का गणित
    हाल ही में हुए बड़े उलटफेर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसद पाला बदलकर नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं, जो NDA का समर्थक है. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 6 सांसद भी एकनाथ शिंदे गुट (NDA) में आ चुके हैं.

NDA की मौजूदा ताकत: 330 सांसद
दो-तिहाई के लिए जादुई आंकड़ा: 362 सांसद
कितने कम हैं: अभी भी 32 वोट कम हैं.

  1. राज्यसभा का गणित
    उच्च सदन में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 सांसद पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिससे विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लगा है.

भले ही आंकड़े अभी भी सरकार के पास दो-तिहाई से थोड़े दूर दिख रहे हों, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि चाणक्य नीति के तहत बैकडोर चैनल सक्रिय हो चुके हैं. नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) और वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) पहले भी कई अहम और विवादित विधेयकों (जैसे दिल्ली ऑर्डिनेंस बिल) पर सरकार का संकटमोचक बनकर साथ दे चुकी हैं.

यदि इन दोनों क्षेत्रीय दलों ने सदन में वॉकआउट किया या सरकार के पक्ष में वोटिंग की, तो मोदी सरकार इस PM/CM रिमूवल बिल को आसानी से पास कराकर इतिहास रच देगी. 20 जुलाई से शुरू हो रहा मानसून सत्र भारतीय राजनीति में एक महासंग्राम का गवाह बनने जा रहा है.

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