NATIONAL : क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से खराब हो रहीं आपकी गाड़ियां? उठते सवालों पर गडकरी का बड़ा खुलासा

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केंद्रीय परिवहन मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘ज्यादा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यह पैसे देकर अभियान चलाया जा रहा है.’

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर इंजन में खराबी से लेकर माइलेज में कमी तक, कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. इस पर अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार (7 जुलाई) को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सवाल उठाने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि वह ऐसी एक भी कार का नाम बताएं, जिसमें इस ईंधन की वजह से कोई समस्या आई हो.

‘विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा, कोयला, पेट्रोल आदि पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है. इसकी वजह से ईंधन इम्पोर्ट पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘E20 पेट्रोल की वजह से किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है. क्या देश में कोई ऐसी कार है, जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए.’

केंद्रीय परिवहन मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘ज्यादा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यह पैसे देकर अभियान चलाया जा रहा है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है. एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है.’

गडकरी ने उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें आरोप लगाए जा रहे थे कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथेनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथेनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि देश में एथेनॉल की अधिकता है, इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इनकम हुई है. गडकरी ने कहा, ‘जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया तो मक्के की बाजार कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1800 रुपये प्रति क्विंटल था. इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई.’ उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए.’

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