प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए देश से ईंधन बचाने की अपील की है. उन्होंने सोने की खरीद कम करने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने का भी जिक्र किया. इस अपील के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. सरकार ने साफ किया कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार (11 मई) को पश्चिम एशिया पर गठित अनौपचारिक मंत्रिसमूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई. इसमें पेट्रोलियम, रेलवे, नागरिक उड्डयन, उर्वरक, बंदरगाह और विज्ञान मंत्रालयों के मंत्री शामिल हुए. बैठक के बाद जारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के बयान में कहा गया कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है. सरकार ने लोगों से घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की.
बैठक में बताया गया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर पर है, जिसे मौजूदा परिस्थितियों में मजबूत स्थिति माना जा रहा है. हालांकि अधिकारियों ने मंत्रियों को जानकारी दी कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे देश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

सरकार के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने के लिए रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अंडर-रिकवरी लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. सरकार ने कहा कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें 30 से 70 फीसदी तक बढ़ी हैं, लेकिन भारत में आम लोगों पर बोझ कम रखने की कोशिश की जा रही है.
इसी को ध्यान में पीएम मोदी की ईंधन बचाने और आयातित सामानों पर निर्भरता घटाने की अपील को सरकार ने जरूरी बताया. गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि देश हर साल आयात पर लाखों करोड़ रुपये खर्च करता है और मौजूदा वैश्विक संकट में हर नागरिक का छोटा-बड़ा प्रयास महत्वपूर्ण है.

