NATIONAL : दो-तिहाई भारत पर छाए घने बादल, पर क्या हर जगह होगी मूसलाधार बारिश? ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया!

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अगर आज आप आसमान से भारत को देखें, तो जमीन ढूंढना शायद मुश्किल हो जाएगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO के मौसम सैटेलाइट INSAT-3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने मौसम वैज्ञानिकों को चौंका दिया है. भारत के मौसम को लेकर सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों को देखने से पचा चल रहा है कि इस समय देश का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा घने मॉनसूनी बादलों की मोटी चादर से ढका हुआ है. यानी जल्दी ही जोरदार बरसात देखने को मिल सकती है.

इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, सबसे घने बादलों का जमावड़ा उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर देखने को मिल रहा है. पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर भारत पर बादलों का कड़ा पहरा देखने को मिल रहा है. इसके साथ ही अरब सागर से आ रही नम हवाओं की वजह से दक्षिण भारत के राज्यों पर भी बादलों की लंबी पट्टियां देखी जा रही हैं. हालांकि, पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मौसम फिलहाल साफ बना हुआ है.

अंतरिक्ष से इसरो का सैटेलाइट ऐसे रख रहा है नजर
भारत का एडवांस्ड वेदर सैटेलाइट INSAT-3DR भूमध्य रेखा से 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में तैनात है. भारतीय मौसम विभाग यानी IMD के मुताबिक, यह सैटेलाइट हर आधे घंटे में देश की तस्वीरें भेजता है. इसके पास दो आंखें यानी कैमरा है.

मौसम विज्ञान के अनुसार, बादल जितना ऊंचा होगा, उसका ऊपरी हिस्सा उतना ही ठंडा होगा. इसरो के डेटा में जम्मू-कश्मीर के ऊपर बादलों का तापमान माइनस 80 डिग्री सेल्सियस से भी कम रिकॉर्ड किया गया है, जो भीषण तूफान का संकेत है. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ऊपर बादलों का तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ है. इसका मतलब है कि ये बादल आसमान में 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं और भारी तबाही मचाने वाले बादलों की श्रेणी में आते हैं.

मौसम वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इतने बड़े हिस्से पर बादल होने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह मूसलाधार बारिश हो रही है. देश के बड़े हिस्से में सिर्फ रिमझिम फुहारें या घने काले बादल छाए हुए हैं. भारी और खतरनाक बारिश केवल उन 10% इलाकों में हो रही है जहां बादलों के गहरे स्टॉर्म कोर यानी तूफानी केंद्र बने हुए हैं. फिलहाल मॉनसून की मुख्य ट्रफ लाइन उत्तर भारत में एक्टिव है, जिसके चलते यह मॉनसूनी इंजन पूरी रफ्तार से काम कर रहा है.

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