जिले के तिरला में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के चिकलिया फाटे के समीप हुए दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। जबकि 13 घायल हैं। मृतकों में 6 बच्चे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हादसा मजदूरों से भरा पिकअप वाहन टायर फटने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़कर पलट गया। वाहन ने 3-4 बार पलटी खाई। इस दौरान सड़क के दूसरी तरफ जाकर स्कॉर्पियो से भी टकराया। हादसे में गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया हैं, जहां उनका उपचार जारी हैं।
हादसे के बाद जिला अस्पताल पहुंचे कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि पिकअप वाहन में करीब 46 लोग सवार थे। घायलों के इलाज को लेकर प्रशासन ने व्यवस्था की है। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है। वहीं करीब 15 घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। जबकि 6 अन्य का उपचार निजी अस्पतालों में जारी है। कमिश्नर ने बताया कि अस्पताल में हड्डी और फ्रैक्चर से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंदौर में भी डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है।
वहीं हादसे का प्रत्यक्षदर्शी शुभम सिसोदिया ने बताया कि हादसे के समय मैं घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद था। स्कॉर्पियो मांगूद से धार की ओर जा रही थी। जबकि पिकअप वाहन धार से मांगूद की तरफ आ रहा था। इसी दौरान अचानक पिकअप का टायर फट गया। अनियंत्रित होकर पिकअप डिवाइडर को पार करते हुए रॉन्ग साइड में आ गया और सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। फिर पलट गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार हादसे पर दुख जताया है। पीएम ने एक्स पर लिखा- दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे के प्रभावितों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने X पर लिखा- मृतकों के परिवारजन को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इंदौर संभागायुक्त और आईजी को उपचार व्यवस्था के लिए धार जाने के निर्देश दिए हैं। सभी घायलों का उपचार नि:शुल्क किया जाएगा।
इस हादसे ने जिम्मेदारों की लापरवाही की पोल भी खोल दी हैं, जहां आए दिन इस तरह के हादसों के बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। अगर समय रहते इन वाहनों में क्षमता से अधिक मजदूरों को बिठाकर बेलगाम चलने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई होती तो शायद आज ये बड़ा हादसा भी नहीं होता।

