दुनिया के कई देशों में युवाओं के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन एक बार फिर चर्चा में हैं। भारत से लेकर फ्रांस तक युवा शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई, रोजगार के अवसरों और सरकारी नीतियों को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। सोशल मीडिया इन आंदोलनों को संगठित करने और उनकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम बन रहा है।
भारत में Gen Z आंदोलन ने खींचा ध्यान
भारत में युवा कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में युवाओं ने हिस्सा लिया और चुनावी मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया निष्पक्षता और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करती है। वहीं, सरकार की ओर से राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया गया है।

17 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में एक युवा आंदोलन से जुड़े प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इस घटना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
फ्रांस में छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन
फ्रांस में भी छात्र शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और स्कूलों की खराब सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।


