पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नामकरण को लेकर नई बहस छिड़ गई है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा शहरों, सड़कों और स्थानों के नाम बदलने के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की पहल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को विधानसभा में बड़ा एलान करते हुए कहा कि कोलकाता में अब किसी भी सड़क या इलाके का नाम मुगलों, पठानों या दमनकारी ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रखा जाएगा। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब कोलकाता नगर निगम द्वारा सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष सरकार पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार इसे ऐतिहासिक भूल सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।

क्या सड़कों और इलाकों के नामों की समीक्षा होगी?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि राज्य सरकार सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नामों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन करेगी। इस समिति की अध्यक्षता स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोग भी इस समिति को सुझाव दे सकेंगे और केवल सच्चे देशभक्तों के नामों पर ही विचार किया जाएगा।

