NEET UG री-एग्जाम: वायुसेना के हेलिकॉप्टर 18 जगह पहुंचाएंगे प्रश्नपत्र, GPS निगरानी और पासवर्ड से होगी सुरक्षा

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क्या इस बार NEET परीक्षा में पेपर लीक की कोई गुंजाइश बचेगी? 21 जून को होने जा रही दोबारा परीक्षा के लिए सरकार ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसमें वायुसेना के हेलिकॉप्टर से लेकर सेना, GPS निगरानी और पासवर्ड सिस्टम तक शामिल हैं।

मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए 21 जून को दोबारा होने जा रही नीट-यूजी की परीक्षा के प्रश्नपत्र वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर दिल्ली से देश के 18 लोकेशन पर पहुंचाएंगे। यहां से पेपर को सेना के लॉजिस्टिक सेंटर और वहां से 551 परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी सेना और अर्द्धसैनिक बलों को दी गई है।

पीएम नरेंद्र मोदी की निगरानी में नीट को पेपरलीक से बचाने के लिए पूरी तरह सरकारी तंत्र का प्रयोग किया गया है। पहली बार सरकारी प्रोफेसरों व वरिष्ठ शिक्षकों से पेपर तैयार करवाकर हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में अनुवाद कराया गया। इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने वाली प्रौद्योगिकी का भी प्रयोग हुआ है।

पूरी प्रक्रिया में सरकार से इतर किसी भी बाहर व्यक्ति को जिम्मेदारी नहीं दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के लिए बजट तैयार करने वाली टीम भी सीधे जुड़ी है। कुल 23 लाख प्रश्नपत्र छपने हैं और इसके लिए जिस तरह बजट बनाने के दौरान टीम काम करती है, उसी तर्ज पर प्रश्न पत्र तैयार हुए हैं।

लॉजिस्टिक सेंटर से परीक्षा केंद्र तक जीपीएस से निगरानी
प्रश्न पत्र पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है…इसमें शिक्षा मंत्रालय, संचार मंत्रालय के अधीनस्थ डाक विभाग, रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय व केंद्रीय गृहमंत्रालय के साथ वरिष्ठ अफसर हैं। समिति पीएमओ और कैबिनेट सचिवालय को सीधे रिपोर्ट करेगी।

हवाई जहाज से उतारने के बाद पेपर के स्टील बॉक्स सेना के लॉजिस्टिक सेंटर तक पहुंचाए जाएंगे…डाक विभाग और सेना के वाहनों से केंद्रों तक पेपर पहुंचाने वाले वाहन जीपीएस के साथ लाइव कैमरे जोड़े जा रहे हैं।

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