Tuesday, September 15, 2026
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GUJARAT : वडोदरा में PM मोदी के Gen-Z कार्यक्रम का जबरदस्त क्रेज, रजिस्ट्रेशन खुलने के 1 घंटे में सभी सीटें हाउसफुल

गुजरात के वडोदरा में मंगलवार (8 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होने वाले विशेष कार्यक्रम को लेकर युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल सुबह 10:30 बजे खोला गया और महज एक घंटे के भीतर ही सभी उपलब्ध सीटें फुल हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुनने और इस खास अवसर का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया।

देखते ही देखतें सीटें बुक
रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही युवाओं का जबरदस्त रिस्पॉन्स देखने को मिला और देखते ही देखते सभी सीटें बुक हो गईं। रजिस्ट्रेशन फुल होने के कारण कई इच्छुक युवा कार्यक्रम में जगह नहीं बना पाए। इसे लेकर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से माफी मांगी।

जानिए क्या बाले हर्ष संघवी
हर्ष संघवी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन लिंक खुलते ही युवाओं की बड़ी प्रतिक्रिया के कारण कुछ ही समय में सभी सीटें भर गईं। उन्होंने युवाओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को कार्यक्रम में शामिल किया जा सके, इसके लिए क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

वेटिंग लिस्ट में शामिल युवाओं को भी आगामी व्यवस्था और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी लगातार दी जाएगी। आयोजकों की ओर से अधिक युवाओं को समायोजित करने के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे।

पीएम मोदी के स्वागत को लेकर युवाओं में भारी उत्साह
वडोदरा के सांसद डॉक्टर हेमांग जोशी ने भी वीडियो संदेश के जरिए बताया कि युवाओं में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को लेकर भारी उत्साह है। वहीं, नगर निगम आयुक्त ने जानकारी दी कि बुक माय शो पर रजिस्ट्रेशन सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ था और सिर्फ एक घंटे में हाउसफुल हो गया।

करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट का करेंगे शिलान्यास
8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वडोदरा और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। पीएम के स्वागत को लेकर पूरे वडोदरा में उत्साह का माहौल है।

NATIONAL : पीएम मोदी आज गुजरात में देंगे 35 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं की सौगात, DFC के 326 किमी खंड होंगे राष्ट्र को समर्पित

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वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के इन हिस्सों के शुरू होने से जेएनपीए पोर्ट से माल की आवाजाही आसान होगी। इससे माल को तेजी से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही मुंबई के व्यस्त रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 सितंबर को गुजरात के वडोदरा दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह राज्य में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पण करेंगे। इनमें वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के तीन महत्वपूर्ण हिस्से भी शामिल हैं। इन तीनों नए खंडों की कुल लंबाई 326 किलोमीटर है और इनके निर्माण पर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इनके चालू होने से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी और माल परिवहन की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे और रेलवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी।

मुंबई के रेल नेटवर्क पर घटेगा माल ढुलाई का दबाव
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के इन हिस्सों के शुरू होने से जेएनपीए पोर्ट से माल की आवाजाही आसान होगी। इससे माल को तेजी से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही मुंबई के व्यस्त रेलवे नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा। माल ढुलाई के लिए अलग कॉरिडोर उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री इस मौके पर चार स्थानों से नई फ्रेट ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। साथ ही टांडा रोड से वडोदरा (प्रतापनगर) के बीच नई यात्री ट्रेन सेवा भी शुरू की जाएगी।

जोबट-टांडा रोड रेल लाइन से आदिवासी इलाकों को फायदा
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान जोबट-टांडा रोड नई रेल लाइन भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस परियोजना से अलिराजपुर के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से मजबूत होगी। इससे क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन आसान होने के साथ स्थानीय कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

9,700 करोड़ की तीन परियोजनाओं का शिलान्यास
प्रधानमंत्री मोदी करीब 9,700 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन नई रेल परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। इनमें प्रमुख रूप से वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी रेल लाइन, मियागाम करजन-चोरंदा-मालसर गेज कन्वर्जन और विश्वामित्री-डभोई रेल लाइन दोहरीकरण शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। साथ ही यात्री और मालगाड़ियों के लिए ट्रैक क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की भीड़ कम होगी और रेल संचालन अधिक सुचारू होगा।

पूरा होगा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश के परिवहन ढांचे की महत्वपूर्ण रीढ़ बनेंगे। उनके मुताबिक, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जेएनपीटी से दादरी तक और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लुधियाना से प्रयागराज के आगे सोननगर तक पूरा हो चुका है।उन्होंने कहा कि 2014 से पहले इस परियोजना की प्रगति बहुत धीमी थी, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद इसे गति दी गई। अलग-अलग चुनौतियों का समाधान करते हुए पिछले चार-पांच वर्षों में कई सेक्शन शुरू किए गए। अब शेष महत्वपूर्ण हिस्सों के राष्ट्र को समर्पण के साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क चालू हो जाएगा। इससे माल की ढुलाई तेज होगी, ट्रांजिट टाइम घटेगा और देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।

रतलाम-वडोदरा फोर लाइनिंग पर भी बड़ा कदम
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी रतलाम-वडोदरा रेल मार्ग की तीसरी और चौथी लाइन यानी फोर लाइनिंग परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। रेल मंत्री वैष्णव ने इसे रेलवे के सात प्रमुख कॉरिडोरों की क्षमता बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा बताया। उन्होंने इसकी तुलना अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में शुरू हुए हाईवे के स्वर्णिम चतुर्भुज के तहत फोर-लेनिंग अभियान से की।

MP : एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार: नौ जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट, नर्मदा-मंदाकिनी उफान पर

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मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय है। 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है। मंदाकिनी और नर्मदा उफान पर हैं, जबकि बरगी-कुटनी बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। प्रदेश में अब तक 29.2 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से 8% कम है।

मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में तेज बारिश के बाद मंदाकिनी और नर्मदा नदी उफान पर हैं, जबकि कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। छतरपुर, सतना, मंडला और मैहर में बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसी बीच बरगी और कुटनी बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी है। शुक्रवार को सक्रिय मौसम प्रणाली आगे बढ़ेगी, जिसके कारण 4 और 5 सितंबर को बारिश का जोर और बढ़ने का अनुमान है।

9 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट
शिवपुरी, गुना, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, छिंदवाड़ा, बैतूल, सीहोर, शाजापुर, देवास,आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी है।इसके अलावा इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, रतलाम, हरदा, मुरैना, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

नदियां उफनीं, कई जगह बाढ़ का खतरा
चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर 138.52 मीटर तक पहुंच गया और खतरे के निशान के करीब है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए एसडीईआरएफ ने करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। छतरपुर में सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर मार्ग बंद रहा। मंडला में नर्मदा का जलस्तर 436.1 मीटर दर्ज किया गया। जबलपुर में बरगी बांध 93.33 प्रतिशत भर गया है। इसके बाद पांच गेट करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। इससे नर्मदा के घाटों पर जलस्तर करीब चार फीट तक बढ़ने की संभावना है।

29.2 इंच बारिश, फिर भी सामान्य से कम
प्रदेश में अब तक 741.2 मिलीमीटर यानी 29.2 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य 31.8 इंच से करीब 2.6 इंच कम है। पूरे प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8 प्रतिशत नीचे है। पूर्वी हिस्से में कमी सिर्फ 1 प्रतिशत रह गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है

34 जिलों में अब भी बारिश की कमी
पूर्वी हिस्से के कई जिलों में 1 से 23 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें बालाघाट, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिले शामिल हैं। इसके उलट पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में 6 से 54 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

21 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस मानसून सीजन में जून में प्रदेश में 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। मानसून के दो बार कमजोर पड़ने के कारण कई दिनों तक बारिश थमी रही। अब सितंबर की शुरुआत में सक्रिय सिस्टम ने पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर बढ़ा दिया है। अगले दो दिन प्रदेश के लिए अहम रहेंगे। 4-5 सितंबर को बारिश की गतिविधियां बढ़ने के बाद 6-7 सितंबर को ग्वालियर-चंबल संभाग में भी तेज बारिश होने का अनुमान है।

WORLD : मियामी एयरपोर्ट पर अमेजन का कार्गो प्लेन क्रैश! रनवे से फिसलकर गाड़ियों से टकराया, 5 की मौत

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मियामी: अमेरिका के मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को बड़ा विमान हादसा हो गया। अमेजन के लिए संचालित एक कार्गो विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर निकल गया और कई वाहनों से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गया। हादसे में कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 5 अन्य घायल बताए गए हैं। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई गई है।समय और कैलेंडर

लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर निकला विमान
हादसा करीब दोपहर 2 बजे के आसपास हुआ। Prime Air Flight 7598 सैन जुआन, प्यूर्टो रिको से मियामी पहुंचा था। लैंडिंग के दौरान विमान रनवे के निर्धारित हिस्से से आगे निकल गया और एयरपोर्ट परिसर से बाहर की ओर चला गया।

इसके बाद विमान ने जमीन पर मौजूद कई वाहनों को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और घटनास्थल के ऊपर धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा।

5 लोगों की मौत, 5 घायल
मियामी-डेड काउंटी के अधिकारियों के मुताबिक हादसे में पांच लोगों की जान गई है। पांच घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें तीन को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। दो अन्य घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया।

अधिकारियों ने शुरुआती चरण में मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। यह भी तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि मृतकों में विमान पर सवार लोग शामिल थे या जमीन पर मौजूद वाहन सवार लोग।

विमान में फंसे थे पायलट और को-पायलट
मियामी-डेड फायर रेस्क्यू के अनुसार, दुर्घटना के बाद विमान का कॉकपिट क्षतिग्रस्त हो गया और पायलट तथा को-पायलट को निकालने के लिए बचाव दल को काम करना पड़ा। कुछ लोग उन वाहनों में भी फंसे थे जिन्हें विमान ने टक्कर मारी थी।

रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को बाहर निकालने और घायलों को चिकित्सा सहायता देने का अभियान शुरू किया। हादसे के बाद 60 से अधिक फायर-रेस्क्यू यूनिट और करीब 200 कर्मियों ने राहत एवं बचाव कार्य में हिस्सा लिया।

32 साल पुराना Boeing 767 था विमान
हादसे में शामिल विमान Boeing 767-300 था। यह विमान करीब 32 साल पुराना बताया जा रहा है। विमान को मूल रूप से यात्री विमान के तौर पर बनाया गया था और बाद में वर्ष 2015 में इसे कार्गो विमान में बदल दिया गया था।

यह विमान अमेजन के लिए 21 Air नाम की नॉर्थ कैरोलिना स्थित कार्गो कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा था। अमेजन ने भी विमान के हादसे में शामिल होने की पुष्टि की है।

आग पर काबू पाने में जुटी टीमें
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। विमान में लगी आग पर काबू पाने के लिए एयरपोर्ट की विशेष फायर-फाइटिंग टीमों का इस्तेमाल किया गया। घटनास्थल पर ईंधन रिसाव की स्थिति भी सामने आई, जिसे नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ दल काम करता रहा।

अधिकारियों ने आसपास के लोगों और यात्रियों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की। शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे के बाद इलाके में आम लोगों के लिए कोई व्यापक खतरा नहीं था।

एयरपोर्ट पर उड़ानों पर पड़ा असर
हादसे के बाद मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए सभी रनवे और टैक्सीवे बंद कर दिए गए और ग्राउंड स्टॉप लागू किया गया। इससे बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुईं।

बाद में कुछ रनवे फिर से खोल दिए गए, लेकिन यात्रियों को लंबे समय तक देरी और संभावित फ्लाइट कैंसिलेशन का सामना करना पड़ा। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक सैकड़ों उड़ानों में देरी हुई और कई उड़ानें रद्द भी की गईं।

हादसे की जांच शुरू
अमेरिका की National Transportation Safety Board (NTSB) ने हादसे की जांच के लिए अपनी टीम भेजी है। Federal Aviation Administration (FAA) भी मामले की जांच कर रही है।

फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि विमान रनवे से क्यों बाहर गया और लैंडिंग के दौरान किन परिस्थितियों में यह दुर्घटना हुई। मौसम, विमान की लैंडिंग और तकनीकी पहलुओं समेत कई बिंदुओं की जांच की जाएगी।

अमेजन ने जताया दुख
अमेजन ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा है कि कंपनी प्रभावित लोगों की मदद के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ काम कर रही है और जांच में पूरा सहयोग करेगी।

कंपनी के मुताबिक इस समय उसकी प्राथमिकता हादसे से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और सहायता है। 21 Air ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

BUSINESS : शेयर बाजार में इस हफ्ते बड़ा धमाका! RBI और अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी निवेशकों की नजर

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भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। निवेशकों की नजर RBI की मौद्रिक नीति, अमेरिका -ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों, GDP आंकड़ों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन प्रमुख घटनाक्रमों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय होने की उम्मीद है।

भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।
आने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण और घटनाओं से भरा रहने वाला है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह बाजार की दिशा कई बड़े घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होगी। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत, मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक और कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

अमेरिका -ईरान वार्ता और तेल की कीमतों पर नजर
रिलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च प्रमुख अजीत मिश्रा के अनुसार, बाजार की नजर सबसे अधिक वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

PMI आंकड़ों से मिलेगी अर्थव्यवस्था की झलक
इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। सोमवार को मई महीने का अंतिम HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI डेटा जारी होगा। इसके बाद बुधवार को सर्विसेज PMI और कंपोजिट PMI के आंकड़े सामने आएंगे। ये आंकड़े देश में मांग, व्यावसायिक गतिविधियों और आर्थिक मजबूती की स्थिति को समझने में मदद करेंगे।

RBI की मौद्रिक नीति
विशेषज्ञों के अनुसार इस सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक होगी, जिसका फैसला शुक्रवार को घोषित किया जाएगा। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक महंगाई, ब्याज दरों और बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। RBI का रुख आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों और बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
GDP और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े भी रहेंगे अहम
RBI नीति के अलावा निवेशक भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। ये आंकड़े देश की आर्थिक मजबूती और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। यदि आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को सकारात्मक समर्थन मिल सकता है, जबकि कमजोर आंकड़े निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं।

विदेशी निवेश और रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण
जियो पोलिटिकल टेंशन के अलावा निवेशक भारतीय रुपये की स्थिति, विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री, वैश्विक शेयर बाजारों के रुझान और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी नजर बनाए रखेंगे। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च प्रमुख संतोष मीणा के अनुसार, बाजार निवेशकों की नजर RBI की ओर से महंगाई, तरलता और ब्याज दरों को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर भी रहेगी।

ऑटोमोबाइल बिक्री के आंकड़े
1 जून को मई महीने के ऑटोमोबाइल बिक्री आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इन आंकड़ों के जरिए देश में उपभोक्ता मांग और वाहन उद्योग की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

बाजार की दिशा तय करेंगे दो बड़े ट्रिगर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर का मानना है कि निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से दो बड़े कारकों पर निर्भर करेगी। पहला RBI का मौद्रिक नीति फैसला और दूसरा भारत के GDP आंकड़े। इसके अलावा PMI और IIP जैसे आर्थिक आंकड़े वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में औद्योगिक गतिविधियों की शुरुआती तस्वीर पेश करेंगे। इन सभी संकेतकों के आधार पर निवेशक बाजार की आगामी दिशा का अनुमान लगाएंगे।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण रहने वाला है। RBI की नीति, अमेरिका-ईरान वार्ता, मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, GDP आंकड़े, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और ऑटो बिक्री जैसे कई कारक बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी घटनाक्रमों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।

(डिस्क्लेमर :ये एक्सपर्ट/ ब्रोकरेज के निजी सुझाव/ विचार हैं. ये इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी के विचारों को नहीं दर्शाते हैं. किसी भी फंड/ शेयर में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें.)

NATIONAL : 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? UP से MP कैसे पहुंची शराब…कहां हुई चूक, जानिए सागर जहरीली शराब कांड की पूरी कहानी

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सागर के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद 3 आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है. वहीं बंडा थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने के बाद अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 50 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. घटना के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मामले में आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. वहीं उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. इसके अलावा कई शराब दुकानों को सील कर जांच की जा रही है.

सागर जिले की बंडा तहसील में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात जहरीली शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद मरीजों का अस्पतालों में आना शुरू हो गया और मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ गई. इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें हरकत में आईं और प्रभावित इलाकों में जांच शुरू की. शराब के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब में मौजूद किस चीज की वजह से लोगों की जान गई.

यूपी से एमपी कैसे पहुंची जहरीली शराब
इस मामले की शुरुआती जांच से पता चलता है कि इसका संबंध उत्तर प्रदेश के ललितपुर से होने वाली शराब की तस्करी से है. अधिकारियों के अनुसार, इस बात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां बनी थी, इसे सागर तक कैसे पहुंचाया गया और इसके वितरण में कौन-कौन शामिल था. इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने अपनी जांच तेज कर दी है. सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि घटना सुबह 4 बजे सामने आई और प्रशासन का मुख्य ध्यान अभी प्रभावित लोगों का इलाज कराने पर है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर से सागर में नकली शराब लाई गई है. उनका कहा है कि, ललितपुर का एक गिरोह ऐसी गतिविधियों में शामिल है. चूंकि यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा है, इसलिए शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है. मामले की जांच की जा रही है.

कौन बांट रहा था मौत का जहर?
जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोगों तक यह शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क कौन चला रहा था? पुलिस अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. जांच ​​में शराब के स्रोत से लेकर उसके बंटवारे तक की घटनाओं की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है. सैंपल रिपोर्ट और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि शराब जहरीली कैसे बनी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

कहां हुई चूक?

इस घटना ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अवैध शराब की बिक्री और तस्करी को रोकने में विभाग की अहम भूमिका होती है. इसके चलते विभाग ने तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर (सागर) कीर्ति दुबे, असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट एक्साइज ऑफिसर दिलीप खंडाते और एक्साइज सब-इंस्पेक्टर (बांदा सर्कल) रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, डिप्टी कमिश्नर और डिविजनल फ्लाइंग स्क्वाड की इंचार्ज नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. अब जांच से यह पता चलेगा कि अवैध शराब को रोकने और उसकी निगरानी करने में किस स्तर पर चूक हुई.

स्थानीय थाना प्रभारी और एक चौकी प्रभारी निलंबित
सागर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) शशेंद्र चौहान ने बताया कि पीड़ितों के परिवारों की शिकायतों के आधार पर तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं. उन्होंने बताया कि प्रभावित 54 लोगों में से 49 में धुंधला दिखाई देने और चक्कर आने जैसे लक्षण दिख रहे हैं. सभी को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (BMCH) में भर्ती कराया गया है. वहीं, मामूली समस्या वाले लोगों को शुरुआती इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई. इस मामले में पांच लोगों को सस्पेंड किया गया है, जिनमें तीन आबकारी अधिकारी, एक स्थानीय थाना प्रभारी और एक चौकी प्रभारी हैं. DIG चौहान ने बताया कि जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर के कुछ लोगों और एक स्थानीय शराब ठेकेदार के बीच संबंध सामने आए हैं. मामले की जांच चल रही है.

सीएम ने जताया दुख
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शराब पीने से हुई मौतों की खबर को दुखद बताया और कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएग. उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री और अधिकारियों को जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

7 दुकानें क्यों सील की गईं?
इस घटना के बाद, प्रशासन ने शराब की दुकानों और बिक्री व्यवस्था की जांच तेज कर दी है. अब तक 7 दुकानों को सील कर दिया गया है. इसका मकसद शराब की सप्लाई चेन से जुड़े कनेक्शन की जांच करना और संदिग्ध शराब की बिक्री को रोकना है.

अब आगे क्या?
फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की जांच चल रही है. शराब के सैंपल की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह का पता चलने की उम्मीद है. इस बीच, जांच एजेंसियां ​​शराब सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब ललितपुर से सागर कैसे पहुंची, इसे लोगों तक किसने पहुंचाया और इस गैर-कानूनी नेटवर्क के खिलाफ समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएंगे.

RAJASTHAN : रेस्तरां के खाने में निकला ‘कॉकरोच’! विरोध करने पर गुजराती पर्यटक पर हमला, पुलिस के सामने भारी हंगामा

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राजस्थान की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी उदयपुर में देश और दुनिया भर से हर दिन हजारों पर्यटक घूमने आते हैं, लेकिन देहलीगेट इलाके से आई एक घटना ने पर्यटकों की सुरक्षा और स्थानीय व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उदयपुर के धानमंडी थाना क्षेत्र में स्थित मीरा रेस्तरां में अहमदाबाद से अपने परिवार के साथ घूमने आए एक गुजराती पर्यटक जयेश पटेल के खाने में कॉकरोच निकलने को लेकर भारी विवाद हो गया। विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि रेस्तरां संचालक और उसके कर्मचारियों ने आपा खो दिया और पुलिस जवान की मौजूदगी में ही पर्यटक के साथ जमकर मारपीट कर दी। इस हमले में गुजराती पर्यटक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत उपचार के लिए एमबी अस्पताल ले जाना पड़ा।

इस घटना की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जब रेस्तरां परिसर में हंगामा और खींचतान हो रही थी, तब मौके पर एक पुलिस का जवान भी मौजूद था। लेकिन वह उपद्रव कर रहे रेस्तरां कर्मियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। घटना के बाद दोनों ही पक्ष धानमंडी थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ क्रॉस केस दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत दी। गुजराती परिवार में 2 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें देर रात तक कानूनी कागजी कार्रवाई के सिलसिले में पुलिस थाने में ही रुकना पड़ा।\

मिली जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद निवासी जयेश पटेल अपने परिवार के 8 सदस्यों (2 पुरुष और 6 महिलाएं) के साथ उदयपुर घूमने आए थे। रविवार रात करीब 10 बजे वे खाना खाने के लिए देहलीगेट स्थित मीरा रेस्तरां पहुंचे। खाना परोसे जाने के बाद जब परिवार ने भोजन शुरू किया, तो थाली में एक कीड़ा (कॉकरोच) तैरता हुआ दिखाई दिया। इस पर जयेश पटेल ने तुरंत रेस्तरां संचालक और वेटर को बुलाकर शिकायत दर्ज कराई।

हालांकि, रेस्तरां का कर्मचारी अपनी गलती मानने के बजाय उस कीड़े को बड़ी इलायची बताने लगा। बात को साबित करने के लिए वेटर उस खाने की थाली को रसोई के अंदर धोकर दिखाने के लिए ले जाने लगा। पर्यटक जयेश पटेल को आशंका हुई कि वेटर रसोई में ले जाकर कॉकरोच होने के सबूत को मिटा देगा, इसलिए उन्होंने थाली को अंदर ले जाने से रोका। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और खींचतान शुरू हो गई।

रेस्तरां खाली होने पर भड़का संचालक
थाली को लेकर हुए इस हंगामे और शोर-शराबे की वजह से रेस्तरां में मौजूद अन्य ग्राहक भी असहज हो गए और देखते ही देखते रेस्तरां में बैठे सभी लोग बाहर निकल गए। ग्राहकों के इस तरह अचानक चले जाने से रेस्तरां संचालक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। संचालक और उसके कर्मचारियों ने सारा गुस्सा अहमदाबाद के पर्यटक जयेश पटेल पर निकाल दिया और उन पर लात-घूसों से हमला कर दिया।

पुलिसकर्मी के सामने ही कर दिया हमला
हैरानी की बात यह रही कि मौके पर एक पुलिस जवान तैनात था, लेकिन वह रेस्तरां कर्मियों के सिर चढ़े गुस्से को शांत कराने में असफल रहा। मारपीट में जयेश पटेल के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ हालत में उन्हें परिजनों द्वारा तुरंत उदयपुर के महाराणा भूपाल (MB) अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दी गई।

अहमदाबाद के परिवार को देर रात तक थाने में रुकना पड़ा
अस्पताल से प्राथमिक इलाज कराने के बाद पीड़ित गुजराती परिवार सीधे धानमंडी पुलिस थाने पहुंचा। परिजनों ने पुलिस प्रशासन के सामने अपनी आपबीती सुनाई और आरोपी रेस्तरां संचालक व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। वहीं दूसरी तरफ, अपनी साख बचाने के लिए रेस्तरां संचालक भी थाने पहुंच गया और उलटा पर्यटकों पर ही विवाद करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दी।

पुलिस ने दोनों पक्षों की तरफ से क्रॉस केस की शिकायत दर्ज कर ली है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। देर रात तक 6 महिलाओं समेत पूरा गुजराती परिवार न्याय पाने के लिए थाने में ही बैठा रहा। राजस्थान आने वाले पर्यटकों के साथ इस तरह की हिंसक घटना से लेकसिटी की छवि पर गहरा असर पड़ा है।

उदयपुर में बाल श्रम पर कार्रवाई
उदयपुर शहर में कानून व्यवस्था और बाल संरक्षण से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। सूरजपोल थाना क्षेत्र के भटियानी चौहट्टा इलाके में एक नाबालिग बालक से उसकी उम्र की निर्धारित सीमा से अधिक काम कराने और उसकी मेहनत की कमाई रोकने का मामला उजागर हुआ है। मानव तस्करी विरोधी यूनिट (AHTU) के नारायण सिंह ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए माली कॉलोनी टेकरी निवासी शक्ति सिंह राठौड़ के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी द्वारा बच्चे को व्यावसायिक उद्देश्य से अपने पास बंधन में रखकर काम कराया जा रहा था और उसकी कमाई का भुगतान नहीं किया जा रहा था। पुलिस ने जेजे एक्ट (बाल न्याय अधिनियम) 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर बालक के संरक्षण की व्यवस्था की है और मामले से जुड़े तथ्यों की गहराई से जांच की जा रही है।

NATIONAL : 904 छापे, 350 अरेस्ट… महाराष्ट्र में मिलावटखोरों के लिए काल बन चुका है IAS तुकाराम मुंढे, कौन हैं?

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महाराष्ट्र में इन दिनों एक आईएएस अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. कहीं मिलावटी दूध पकड़ा जा रहा है, कहीं नकली घी जब्त हो रहा है, तो कहीं फूड डिलीवरी कंपनियों तक को नोटिस भेजे जा रहे हैं. यह सब हो रहा है महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे की अगुवाई में. अपनी सख्त कार्यशैली और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए मशहूर मुंढे ने कार्यभार संभालते ही मिलावटखोरों, गुटखा सिंडिकेट और नियम तोड़ने वाले कारोबारियों के खिलाफ बड़ी मुहिम छेड़ दी है. हाल ही में एफएसएसएआई द्वारा स्विगी इंस्टामार्ट को भेजे गए 9 कारण बताओ नोटिस के बाद भी एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर तुकाराम मुंढे कौन हैं और उनकी कार्रवाई से पूरे महाराष्ट्र में इतना डर क्यों है.

25 ट्रांसफर झेलने वाले ‘सिंघम’ आईएएस कौन हैं?
तुकाराम मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड़ जिले के रहने वाले हैं. अपनी बेदाग छवि, सख्त प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने की वजह से उनकी तुलना अक्सर हरियाणा के चर्चित आईएएस अशोक खेमका से की जाती है. हाल ही में उन्हें महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) का कमिश्नर बनाया गया, जो उनके 21 साल के करियर का 25वां तबादला माना जा रहा है. कई बार उन्हें एक ही महीने में दो-दो बार ट्रांसफर झेलना पड़ा और कुछ समय तक बिना विभाग के भी रखा गया. इसके बावजूद उनकी कार्यशैली में कभी नरमी नहीं आई.

मई 2026 में महाराष्ट्र अन्न और औषधि प्रशासन (FDA) की कमान संभालते ही तुकाराम मुंढे ने विभाग की कार्यशैली बदलनी शुरू कर दी. उन्होंने साफ कर दिया कि मिलावट, नकली दवाओं और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के कारोबार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. दूध और डेयरी उत्पादों की पूरी सप्लाई चेन की निगरानी, गुटखा माफिया पर शिकंजा, होटल-रेस्टोरेंट की सघन जांच और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन उनकी प्राथमिकता बना. इसके साथ ही विभाग की छापेमारी और शिकायतों पर कार्रवाई की रफ्तार भी पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई.

दो महीने में 904 छापे, नकली दूध से गुटखा माफिया तक पर शिकंजा
25 मई 2026 से अब तक मुंढे के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में गुटखा और प्रतिबंधित तंबाकू के कारोबार से जुड़े करीब 904 ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 350 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं. मुंबई के मशहूर के. रुस्तम एंड कंपनी आइसक्रीम पार्लर पर हाइजीन नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई हुई, जबकि कई डेयरियों के लाइसेंस निलंबित किए गए. पुणे में नकली आम पल्प बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ और मिलावटी मसालों, खाद्य तेल, मिठाइयों, नकली दवाओं व एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है. मुंबई, पुणे, ठाणे और नासिक के कई होटल-रेस्टोरेंट भी जांच के दायरे में आए.

दूध के कैन छोड़कर भाग रहे कारोबारी, आखिर इतना डर क्यों?
महाराष्ट्र में मिलावट के खिलाफ चल रही कार्रवाई का असर जमीन पर भी दिख रहा है. कई जगहों पर जांच टीमों को देखकर दूध सप्लाई करने वाले लोग अपने कैन छोड़कर भागते नजर आए. पिछले कई वर्षों से रिश्वतखोरी और ढीली कार्यप्रणाली को लेकर सवालों में रहे खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग ने अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है. तुकाराम मुंढे का साफ संदेश है कि मिलावट और नकली खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी. महाराष्ट्र में गुटखा पहले से प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार चलता रहा. अब इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और संगठित अपराध कानून मकोका लगाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है.

स्विगी इंस्टामार्ट तक पहुंची कार्रवाई, एफएसएसएआई ने भेजे 9 नोटिस
मिलावट के खिलाफ कार्रवाई अब सिर्फ स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं रही. देश के खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए स्विगी इंस्टामार्ट को 9 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. नोटिस में ग्राहकों को एक्सपायर्ड अंडे, सड़ा हुआ खाना, बदबूदार व्हे प्रोटीन और असुरक्षित दूध उत्पाद सप्लाई करने जैसे आरोप शामिल हैं. शिकायतों के बावजूद केवल रिफंड देकर मामले बंद करने और कुछ मामलों में लौटाया गया खराब सामान दूसरे ग्राहकों तक पहुंचाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं. एफएसएसएआई ने कंपनी से लिखित जवाब, दस्तावेजी सबूत और भविष्य में सुधार के लिए अनुपालन रिपोर्ट मांगी है. राज्यों के एफडीए के जरिए नमूने लेकर कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा रही है.

250 करोड़ की ‘सुपारी’ का दावा और सियासत में हलचल
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई अब राजनीतिक बहस का भी विषय बन गई है. महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता और एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया, फार्मास्युटिकल लॉबी और मिलावटखोरों ने मुंढे का तबादला कराने के लिए 250 करोड़ रुपये की ‘सुपारी’ जुटाई है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे यह जरूर साफ होता है कि उनकी कार्रवाई ने बड़े कारोबारी नेटवर्क पर दबाव बनाया है. दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सरकार ने भी विभाग में पारदर्शिता लाने और माफिया नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए उन्हें खुली जिम्मेदारी दी है.

सरकार ने क्या कहा, क्या मिल रहा है पूरा समर्थन?
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को महाराष्ट्र सरकार का खुला समर्थन मिला है. राज्य के खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में कहा कि मिलावटखोरी के खिलाफ कानून पहले भी मौजूद थे, लेकिन मुंढे के कमिश्नर बनने के बाद इनका पालन पहले से कहीं ज्यादा सख्ती और प्रभावी तरीके से कराया जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार इस अभियान की रफ्तार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. मंत्री ने यह भी बताया कि मुंढे की कार्रवाई के बाद एफडीए पर लोगों का भरोसा बढ़ा है. पहले जहां हेल्पलाइन पर कुछ सौ शिकायतें आती थीं, वहीं अब हर दिन हजारों शिकायतें दर्ज हो रही हैं. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हर शिकायत की जांच होगी. शिकायत दर्ज करना आसान बनाने के लिए एआई आधारित वॉयस शिकायत प्रणाली भी शुरू की गई है, जिसमें लोग हिंदी, मराठी या अंग्रेजी में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इससे साफ है कि सरकार फिलहाल मिलावट के खिलाफ मुंढे की जीरो टॉलरेंस नीति के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है.

NATIONAL : यूपी, पंजाब समेत 5 राज्यों में इलेक्शन का काउंटडाउन, फरवरी-मार्च में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

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यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ऐसी सूचना है कि फरवरी मार्च में ही पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके लिए जरूरी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

भारती जैन, नई दिल्ली: अगले साल यानी 2027 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन चुनाव वाले चार राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना की प्रक्रिया तेजी आगे बढ़ रही है। वहीं पांचवें राज्य मणिपुर में जनगणना का पहला चरण टल गया है। इस तरह इन पांचों राज्यों में अगले विधानसभा चुनावों का शेड्यूल लगभग तय हो गया है। ऐसी सूचना है कि अगले साल फरवरी-मार्च में यूपी-पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।

5 राज्यों में चुनाव पर बड़ा अपडेट
जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं इनमें मणिपुर असेंबली का कार्यकाल सबसे पहले 13 मार्च, 2027 को खत्म हो रहा है। गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च, 2027 को; पंजाब विधानसभा का 16 मार्च को; उत्तराखंड का 28 मार्च को खत्म होगा। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल सबसे आखिर में 22 मई को खत्म होगा। पिछली बार यानी 2022 इलेक्शन में यूपी, पंजाब समेत पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ संपन्न हुए थे। हालांकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 22 मई, 2022 को हुई थी।

फरवरी-मार्च में हो सकते हैं इलेक्शन
अब चूंकि इन राज्यों में 2027 के चुनाव भी एक साथ होंगे, इसलिए चुनाव आयोग के सबसे पहले खत्म होने वाले विधानसभा कार्यकाल (13 मार्च) से पहले चुनाव पूरे करने का पारंपरिक तरीका अपनाने की संभावना है। इस तरह, यूपी में चुनाव विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की तारीख से लगभग दो महीने पहले होंगे। यह पिछले तीन चुनावों के पैटर्न के अनुरूप है। चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार उसे किसी राज्य में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले कभी भी चुनाव कराने की इजाजत देता है।

यूपी में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से 2 महीने पहले इलेक्शन
यूपी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में कई चरणों में वोटिंग होना लगभग तय है। हालांकि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से तय किए गए उदाहरण को देखें तो वोटिंग फेज की संख्या कम हो सकती है। अगर चुनाव आयोग बिहार की तरह चुनाव को दो चरणों तक सीमित करने का फैसला करता है, तो वोटिंग फरवरी या मार्च की शुरुआत में भी शुरू हो सकती है। चुनावों की घोषणा जनवरी 2027 में हो सकती है।

तीन राज्यों में पूरा हुआ SIR का काम
चूंकि चुनाव वाले तीन राज्यों में SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) पहले ही पूरा हो चुका है और बाकी दो में चल रहा है, इसलिए विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले चुनाव आयोग के वहां सालाना समरी रिवीजन कराने की संभावना कम है। SIR के आखिर में, यूपी में वोटर्स की संख्या 13.4 करोड़ (13.2% की कमी), गोवा में 10.6 लाख (10.2% कम) और मणिपुर में 19.3 लाख (7.6% की गिरावट) थी। पंजाब और उत्तराखंड के लिए फ़ाइनल वोटर लिस्ट अगले कुछ महीनों में जारी की जाएगी।

चुनाव तैयारियों को लेकर केंद्र दिया बड़ा अपडेट
केंद्र ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के बर्फ से न ढके इलाकों और गोवा में जनगणना 2027 के जनसंख्या गिनती वाले चरण को पहले करने के अपने फैसले की जानकारी दी। इसके तहत यह काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच होगा और 5 जनवरी को रेफरेंस तारीख माना जाएगा। साथ ही, मणिपुर में जनगणना के हाउस-लिस्टिंग (घरों की सूची बनाने) वाले चरण को टालने की भी जानकारी दी गई।

चुनाव वाले चार अन्य राज्यों में जनसंख्या गिनती के चरण को पहले करने से उन लॉजिस्टिकल चुनौतियों से बचा जा सकेगा जो जनगणना और विधानसभा चुनावों की सामान्य समय-सीमा के टकराने से पैदा हो सकती थीं। चुनाव और जनगणना, दोनों के संचालन के लिए सरकारी कर्मचारियों- जिनमें ज्यादातर शिक्षक होते हैं, उनके एक ही समूह पर निर्भर रहना पड़ता है।

NATIONAL : ’13-14 करोड़ नाम हटाना स्कैम’: एसआईआर पर पूर्व सीईसी कुरैशी का बड़ा दावा, और क्या-क्या कहा?

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पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी ने एसआईआर के तहत वोटरों के नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 13-14 करोड़ नाम हटने का दावा करते हुए इसे ‘स्कैम’ बताया। कुरैशी ने योग्य मतदाताओं के नाम हटाने को असांविधानिक और गैरकानूनी कहा। साथ ही उन्होंने 2002 की मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने और क्या-क्या कहा है? जानिए…

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भुवनेश्वर में रविवार को उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को ‘अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण’ बताया। कुरैशी ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना एक ‘स्कैम’ है। उन्होंने दावा किया कि एक कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।

13-14 करोड़ नाम हटने पर क्या आपत्ति है?
पूर्व सीईसी कुरैशी ने कहा कि देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी हैरानी जताई। कुरैशी के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में बहुत नरम रुख अपनाया, जिससे यह प्रक्रिया जारी रह सकी। उन्होंने कहा कि हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य हैं। इसी पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी लोग दूसरे स्थानों पर चले गए हैं?

अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया तो?
कुरैशी ने यह भी कहा कि अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया है, तो उसका नाम नई जगह की मतदाता सूची में जोड़ा जाना चाहिए। केवल नाम हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर कुछ मतदाता पलायन कर गए हैं, तो उनके नाम नई जगह पर जोड़े जाने चाहिए। हैरानी की बात है कि केवल नाम हटाए जा रहे हैं। क्या कोई दूसरी जगह से यहां नहीं आ रहा? क्या सिर्फ बाहर जाना ही हो रहा है? यह पूरी तरह अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण है।

एक योग्य वोटर का नाम हटाना कितना गंभीर?
एसवाई कुरैशी ने कहा कि भारत के हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी योग्य व्यक्ति का नाम किसी कारण या बहाने से हटाया जाता है, तो यह असांविधानिक और गैरकानूनी है। उन्होंने इसके लिए जवाबदेही तय करने और आपराधिक जिम्मेदारी की बात भी कही। उनका कहना था कि प्रक्रियागत या नौकरशाही कारणों से किसी नागरिक का मौलिक अधिकार नहीं छीना जा सकता।

2002 की वोटर लिस्ट पर भी सवाल क्यों?
एसआईआर में 2002 की मतदाता सूची से तुलना किए जाने पर भी कुरैशी ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस सूची में भी गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पिता का नाम भी 2002 की सूची में गलत लिखा गया था। इसलिए उनके मुताबिक इस सूची का इस्तेमाल केवल संदर्भ के लिए किया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, ‘क्या यह बाइबल से आई थी? क्या 2002 की मतदाता सूची में कोई गलती नहीं थी?’

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