Monday, June 29, 2026
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DELHI : 10 साल के कंटेंट क्रिएटर अभिनव अरोड़ा के पिता की कार पर हमला, पुलिस ने 3 आरोपियों को किया अरेस्ट

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पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में 10 साल के आध्यात्मिक कंटेंट क्रिएटर अभिनव अरोड़ा के पिता की कार पर हमला कर दिया गया. दरअसल, कार एक बाइक से टकरा गई थी, इसी के बाद दोनों पक्षों में विवाद होने लगा. इस मामले में पुलिस ने मामले में शांति भंग की आशंका के तहत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है,

राजधानी दिल्ली में बीते दिनों 10 साल के कंटेंट क्रिएटर अभिनव अरोड़ा के पिता की कार पर हमला हो गया था. इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को अरेस्ट किया है. दरअसल, अभिनव के पिता की कार रास्ते में खड़ी बाइक से टच हो गई थी, इसी के बाद वहां खड़े लोगों ने लापरवाही से ड्राइविंग का आरोप लगाते हुए हमला कर दिया था.

एजेंसी के अनुसार, यह मामला पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में एक रेस्टोरेंट के पास का है, जहां 7 अप्रैल की रात करीब 10 बजे कार बाइक से टकरा गई थी. कार अभिनव अरोड़ा के पिता चला रहे थे. घटना के समय अभिनव अरोड़ा कार में मौजूद नहीं थे. कार पास में ही खड़ी बाइक से टकरा गई थी, इसी दौरान वहां मौजूद लोगों ने कार चालक के ड्राइविंग तरीके पर आपत्ति जताई.

बाइक के पास खड़े लोगों का आरोप था कि कार स्पीड में थी और ड्राइविंग लापरवाही से की जा रही थी, जिससे उन्हें चोट लग सकती थी. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते माहौल गर्मा गया.

पुलिस का कहना है कि बहस के दौरान दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने गुस्से में आकर कार के बोनट और खिड़कियों पर कड़े (धातु का कंगन) से वार किया, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचा. हालात बिगड़ते देख कार चालक ने तुरंत PCR को कॉल कर पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया. पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, इन तीनों को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है, ताकि आगे किसी प्रकार की शांति भंग न हो. गिरफ्तार आरोपियों को बाद में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस ने बताया कि इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई है. उन्होंने यह भी कहा कि मामले से जुड़े लोगों के बयानों के आधार पर यदि आवश्यक हुआ तो आगे की कार्रवाई की जाएगी.

ENTERTAINMENT : रणदीप हुड्डा ने दिखाया बेटी का चेहरा, रिवील किया नाम, ज‍िसका मतलब है बहुत खास

बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा पिता बन गए हैं. उनकी पत्नी लिन लैशराम ने बेटी को जन्म दिया है. एक्टर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर न्यू बॉर्न बेबी की झलक भी दिखाई है.

बॉलीवुड के दमदार एक्टर रणदीप हुड्डा और उनकी पत्नी लिन लैशराम के जीवन में खुशियों ने दस्तक दी है. लिन ने 1 महीने पहले यानी 10 मार्च को एक प्यारी सी नन्ही परी को जन्म दिया था, जिसके बाद से हुड्डा परिवार में जश्न का माहौल है.

रणदीप ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस खुशखबरी को अपने फैंस के साथ शेयर किया और अपनी नन्हीं बिटिया की पहली झलक दिखाई. एक्टर की इस पोस्ट के बाद से ही सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.रणदीप की शेयर की गई पोस्ट में आप देख सकते हैं कि उनकी पत्नी लिन लैशराम अपनी बेटी को बड़े ही प्यार और सुकून से अपनी बांहों में लिए नजर आ रही हैं. रणदीप ने अपनी बेटी को ‘अपनी दुनिया का नया केंद्र’ बताया है.

रणदीप हुड्डा ने पिता बनने के इस भावुक पल को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक दिल छू लेने वाली शेयर किया.. उन्होंने न केवल अपनी खुशी जाहिर की, बल्कि अपनी बेटी के नाम का खुलासा भी कर दिया है. रणदीप ने बताया कि उन्होंने अपनी लाडली का नाम ‘न्योमिका हुड्डा’ (Nyomika Hooda) रखा है. एक्टर ने लिखा कि न्योमिका का अर्थ है— ‘भगवान की कृपा, स्वतंत्रता और आसमान की तरह असीम.’

अपनी खुशी शेयर करते हुए, रणदीप और लिन ने कहा, ‘हमारी बेटी का नाम रखना हमारे लिए एक बेहद खास और इमोशनल पल रहा है. जैसे ही हमने ‘न्योमिका’ नाम सुना, हमें लगा कि यही नाम बिल्कुल सही है. पिछला एक महीना हमारे लिए सबसे शानदार तरीके से जीवन बदलने वाला रहा है, और माता-पिता के तौर पर हम इस नई यात्रा के हर पल को जी रहे हैं.’

एक्टर रणदीप हुड्डा और लिन लैशराम ने साल 2023 में शादी की थी. उन्होंने मणिपुर के इंफाल में पारंपरिक मैतेई रीति-रिवाज से शादी की थी. उनकी शादी रिवाजों के कारण भी काफी सुर्खियों में रही थी. बता दें कि 10 मार्च 2026 को रणदीप की बेटी का जन्म हुआ था.

NATIONAL : टैक्सी ड्राइवर से प्यार, दो बच्चों को छोड़ भागी महिला, कॉल रिकॉर्डिंग ने बचाई बैंक के रीजनल हैड पति की जान

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अलवर में एक महिला ने टैक्सी ड्राइवर प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची. पति को बातचीत से इसकी जानकारी मिल गई और उसने शिकायत दर्ज कराई. एक महीने फरार रहने के बाद महिला और उसका प्रेमी पुलिस के हत्थे चढ़ गए. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

राजस्थान के अलवर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शादीशुदा महिला को टैक्सी ड्राइवर से प्यार हो गया. यह रिश्ता इतना आगे बढ़ गया कि दोनों ने साथ मिलकर महिला के पति को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. हालांकि समय रहते साजिश का खुलासा हो गया और अब पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला अलवर जिले के गोविंदगढ़ कस्बे का है. यहां रहने वाली अर्चना अरोड़ा की शादी साल 2018 में कर्णव खत्री से हुई थी, जो जयपुर में एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर काम करता है. दोनों के दो बच्चे भी हैं.

कर्णव की नौकरी जयपुर में होने के कारण अर्चना अक्सर उससे मिलने टैक्सी से जयपुर जाया करती थी. इसी दौरान उसकी मुलाकात टैक्सी ड्राइवर ऋषभ शर्मा से हुई. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और यह बातचीत जल्द ही प्यार में बदल गई. दोनों एक-दूसरे के करीब आते गए और साथ रहने का फैसला कर लिया. इस बीच अर्चना और ऋषभ ने कर्णव को रास्ते से हटाने की योजना भी बना ली. पुलिस जांच में सामने आया कि एक दिन कर्णव जयपुर से अलवर लौट रहा था और उसी टैक्सी में सवार था, जिसे ऋषभ चला रहा था. रास्ते में कर्णव पीछे की सीट पर सो गया. ऋषभ को लगा कि वह सो चुका है और उसने अर्चना को फोन कर बात करना शुरू कर दिया.

फोन पर बातचीत के दौरान ऋषभ ने अर्चना से कहा कि तुम्हारा पति मेरे साथ गाड़ी में है और अगर कहो तो आज ही उसे रास्ते से हटा सकता हूं. हालांकि अर्चना ने उस समय उसे मना कर दिया, लेकिन यह पूरी बातचीत कर्णव ने सुन ली और चुपचाप उसका वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया. उसने अपनी पत्नी पर नजर रखना शुरू कर दिया. जांच के दौरान उसे अर्चना के फोन से दोनों के बीच लंबी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मिली, जिससे उनके संबंधों की पुष्टि हो गई. जब कर्णव ने अर्चना से इस बारे में सवाल किया, तो वह घबरा गई. कर्णव ने ऋषभ के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने की बात कही, जिस पर अर्चना ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.

कुछ समय बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया, लेकिन अर्चना ने इसके लिए कर्णव से 50 लाख रुपये की मांग की. जब कर्णव ने पैसे देने से मना कर दिया, तो अर्चना अपने प्रेमी ऋषभ के साथ घर से फरार हो गई. बताया जा रहा है कि 7 सितंबर 2025 को अर्चना घर से 5 लाख रुपये, जेवरात और एक छोटे बच्चे को लेकर मायके चली गई थी. बाद में बातचीत के बाद कर्णव उसे वापस घर ले आया था, लेकिन इसके बाद भी दोनों के बीच संबंध खत्म नहीं हुए.

इस बीच कर्णव ने मार्च 2026 में पुलिस में अपनी पत्नी और उसके प्रेमी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. करीब एक महीने तक फरार रहने के बाद अर्चना और ऋषभ खुद ही अलवर के मिनी सचिवालय में पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंच गए. इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

डिप्टी एसपी अंगद शर्मा के अनुसार, दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने अर्चना को जेल भेज दिया, जबकि ऋषभ को पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. फिलहाल पुलिस ऋषभ से पूछताछ कर रही है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किस तरह अवैध संबंध और लालच परिवारों को तोड़ने के साथ-साथ अपराध की ओर भी ले जा सकते हैं.

UP : पापा ये फ्रॉड है… समझाता रहा मासूम बेटा, नहीं माने पापा, चुपके से मोबाइल को फ्लाइट मोड पर रख कर रोकी ठगी

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बरेली में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों ने दंपति को 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाए रखा. आतंकी कनेक्शन का डर दिखाकर बैंक डिटेल हासिल की गई, लेकिन 8वीं के छात्र ने फोन फ्लाइट मोड पर डालकर ठगी नाकाम कर दी. बच्चे की सूझबूझ से बड़ा साइबर फ्रॉड टल गया.

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है. जालसाजों ने बड़ी चालाकी से एक दंपति को अपनी बातों में फंसा लिया.आतंकवादी घटनाओं में शामिल होने की बात कह कर दोनों को डरा लिया और दोनों को लगभग 10 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा. आरोपी बस अपने मंसूबों में कामयाब होने वाले थे लेकिन घर में मौजूद आठवीं क्लास में पढ़ने वाले नाबालिक छात्र ने दंपति को धोखाधड़ी की घटना से बचा लिया . अधिकारियों ने भी जब इस पूरे मामले की जांच पड़ताल की तो हैरानी जताई कि कैसे आठवीं में पढ़ने वाले एक बच्चे की समझदारी से दंपति की जिंदगी बच गई.

यह पूरी घटना बरेली का थाना प्रेम नगर क्षेत्र की बताई जा रही है जहां पर एक दंपति को साइबर ठग करीब 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर मानसिक रूप से बंधक बनाए रखे लेकिन लूट मचाने में असफल रहे.

इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सुरखा बानखाना निवासी व्यापारी संजय सक्सेना को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए आरोप लगाया कि उनका मोबाइल नंबर किसी आतंकी गतिविधि और करोड़ों के घोटाले में इस्तेमाल हुआ है. साइबर ठग ने दंपति को यूनिफॉर्म में वीडियो शेयर कॉलिंग के दौरान अरेस्ट वारंट तक दिखाया, जिससे परिवार में दहशत फैल गई. साइबर अपराधियों ने दंपति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लगातार वीडियो कॉल पर रखा.

साइबर ठगों ने वीडियो कॉलिंग के दौरान दंपति को इतना डरा दिया कि वह बुरी तरह से डर गए. उन्हें घर से बाहर न जाने, हर गतिविधि कैमरे के सामने करने और कॉल चालू रखने के निर्देश दिए गए. यहां तक कि खाना खाने और सोने के दौरान भी कॉल बंद न करने का दबाव बनाया गया. ठगों ने बातों में उलझाकर बैंक खातों से जुड़ी अहम जानकारी भी हासिल कर ली थी और पैसे निकालने की तैयारी में थे.

आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब होने वाले थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका. दरअसल, संजय सक्सेना के 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे तन्मय को ठगी का शक हुआ. उसने पिता को समझाने की कोशिश की, लेकिन डर के कारण वे सहमत नहीं हुए. आखिरकार देर रात तन्मय ने साहस दिखाते हुए मोबाइल को एयरोप्लेन मोड पर डाल दिया. इससे ठगों का संपर्क टूट गया और खातों से पैसे निकलने से बच गए.

अगली सुबह परिवार प्रेमनगर थाने पहुंचा. फोन चालू करते ही ठगों की फिर से कॉल आई, जिसे पुलिस ने उठाकर सख्ती से जवाब दिया. एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि इस तरह की वीडियो कॉलिंग आने पर तुरंत ही पुलिस को सूचना दें किसी भी प्रकार का ट्रांजैक्शन ना करें और बैंक डिटेल ना दें.

BHAKTI : कब है बगलामुखी जयंती? इस विधि से पूजा करने पर दूर होंगे सभी कष्ट

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माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं देवी हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड में विनाशकारी तूफान आया था, तब माँ बगलामुखी ने ही उसे रोककर सृष्टि की रक्षा की थी.हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का बहुत महत्व है, जिनमें से आठवीं शक्ति माँ बगलामुखी हैं. इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विरोधियों पर जीत मिलती है. साल 2026 में माँ बगलामुखी की जयंती बहुत ही शुभ संयोग में मनाई जाएगी.

साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 24 अप्रैल 2026 सुबह 07:18 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 25 अप्रैल 2026 सुबह 05:51 बजे तक होगा. पूजा के लिए शुक्रवार का पूरा दिन बहुत शुभ रहने वाला है.

माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है. कहते हैं कि इनकी कृपा से इंसान की वाणी और शत्रुओं की बुद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों या वाद-विवाद में सफलता पाने के लिए माँ बगलामुखी की साधना अचूक मानी जाती है.

माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा उपासना भी कहते हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा के लिए पीले रंग के आसन का इस्तेमाल करें. माँ की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ करें. उन्हें पीले फूल, पीला चंदन, पीला फल और पीला भोग (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाएं. पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और माँ के मंत्रों का जाप करें.

पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है. “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वान्कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।” मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे उत्तम माना जाता है. माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर शामिल हैं. जयंती के दिन इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.

BIHAR : बिहार में गला काटकर मर्डर, तेजस्वी बोले- ये ‘प्रोपेगेंडा फिल्म’ का असर; ड्राइवर का सरेआम गला काटा, फिर भीड़ ने हत्यारे को मार डाला

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बिहार के अररिया जिले स्थित फारबिसगंज में हुए दोहरे हत्याकांड ने पूरे राज्य को दहला दिया है. सरेआम गला रेतकर हत्या और उसके बाद मॉब लिंचिंग की इस घटना ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है.

बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में कानून के शासन को चुनौती देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है. एक मामूली विवाद में सत्तू विक्रेता रवि चौहान ने वाहन चालक नबी हसन का बीच सड़क पर गला रेतकर सिर अलग कर दिया. इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस प्रशासन की मौजूदगी पर कालिख पोत दी.

एसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि सत्तू विक्रेता रवि चौहान और वाहन चालक नबी हसन के बीच किसी बात पर झगड़ा हुआ था. इसके बाद रवि ने नबी की चाकू से निर्मम हत्या कर दी. फिर बाद में आरोपी को नबी के करीबी लोग पकड़ लेते हैं और बुरी तरह पीट देते हैं.पुलिस किसी तरह उसे घायल हालत में अस्पताल ले जाती है, जहां उसकी मौत हो जाती है. पूरी घटना वीडियो फुटेज में कैद हो गई है.

इस मामले में RJD नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार को घेर लिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तेजस्वी ने लिखा, ”ये है बिहार के भयावह हालात, अररिया जिले के फारबिसगंज में एक शख्स ने सरेआम बीच बाजार दूसरे शख्स का गला काट दिया और सैकड़ों लोगों के बीच उसका सिर लेकर घूमता रहा. बाद में मृतक के परिजनों ने हत्या करने वाले को ढूंढ़कर उसकी भी हत्या कर दी. पुलिस भी कानून व्यवस्था को संभालने की जगह जान बचाती दिखी.

तेजस्वी ने आगे लिखा, महाचौपट राज की इससे बड़ी तस्वीर क्या हो सकती है? यह घटना साफ दिखा रही है कि बिहार में कानून व्यवस्था किस हद तक बदहाल हो चुकी है. सत्ताधारी भाजपा-जदयू के नेता ‘सीएम चेयर’ के खेल में लगे हैं और बिहार में हर दिन लूट, हत्या, अपराध और बलात्कार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि दिनदहाड़े सरेआम हत्याएं हो रही हैं और कानून का जरा भी डर नहीं है. बालू-दारू में मस्त-व्यस्त और पस्त एनडीए शासन के कारण बिहार की आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है. बिहार में एनडीए राज नहीं, महाचौपट राज है. नरेंद्र मोदी 5 साल बाद चुनावों में आकर फिर भी जंगलराज का बेसुरा राग गाएंगे.

और एक बात सिर काट कर घूमने का दृश्य अभी हाल ही में आई प्रोपगंडा फिल्म का दृश्य था, भाजपा सरकार अपने प्रोपेगेंडे के लिए जो जहर समाज में भर रही है, ये भी दिल दहलाने वाला है. जहर की खेती का खामियाजा अब दिखना शुरू हो चुका है.”

NATIONAL : 22 साल का बॉयफ्रेंड और 35 की महिला! 13 साल बड़ी गर्लफ्रेंड का कंबल से दबाया मुंह, हाथ-पांव बांधकर बेड में छिपाई लाश

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दिल्ली के मंगोलपुरी में एक बॉयफ्रेंड ने अपनी महिला मित्र के हाथ पैर बांधे, फिर कंबल से मुंह दबा दिया और फिर गला दबाकर हत्या कर दी. इसके शव को बेड बॉक्स में बंद कर दिया. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 22 साल के बॉयफ्रेंड और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया है.

दरअसल, ​7 अप्रैल को मंगोलपुरी थाना पुलिस को एक पीसीआर कॉल मिली. सूचना मिलते ही पुलिस टीम पत्थर मार्केट स्थित उस इमारत की तीसरी मंजिल पर पहुंची, जहां अमरजीत नाम का व्यक्ति पीजी चलाता है. ​वहां एक कमरे में रखे डबल बेड के बॉक्स को जब खोला गया, तो पुलिस के भी होश उड़ गए. अंदर एक महिला की लाश ठूंसी हुई थी. महिला के माथे पर चोट के निशान मिले, हाथ-पांव बंधे थे और गले पर भी निशान मिले.

​जांच में मृतका के गले पर गला घोंटने के निशान और माथे पर गहरी चोट के निशान पाए गए हैं. साथ में हाथ पांव भी बंधे मिले थे.

​फॉरेंसिक जांच
क्राइम टीम और एफएसएल (FSL) की टीम ने मौके का मुआयना कर सबूत जुटा लिए हैं.

​विक्टिम की पहचान
मृतका की पहचान मंगोलपुरी की ही रहने वाली एक 35 वर्षीय महिला के रूप में हुई है.

​पुलिस पूछताछ और शुरुआती जांच में पता चला कि मृतका एक व्यक्ति के साथ रिलेशनशिप में थी. 7 अप्रैल को शाम करीब 4:30 बजे वह शख्स और महिला इस पीजी में आए थे. करीब एक घंटे बाद जब आरोपी अकेला कमरे से बाहर निकला, तो पीजी मालिक को कुछ शक हुआ. उसने तुरन्त पुलिस को जानकारी दी, पुलिस ने जब कमरे की जांच की और बेड को खोला तो दंग रह गई, अंदर महिला के शव को रखा गया था.

​मंगोलपुरी थाना पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है. आरोपियों के खिलाफ हत्या के तहत मामला दर्ज किया गया है. अब तक तीन आरोपियों ​सुरेंद्र उर्फ बॉबी, जोगिंदर और दीपक को गिरफ्तार किया है.

​फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और हत्या की वजह तलाश रही है. आशंका इस बात की भी है कि कहीं महिला का यौन शोषण तो नही किया गया. इसके लिए पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है.

NATIONAL : कानपुर किडनी कांड में चौंकाने वाला खुलासा, 20 हजार की नौकरी करने वाला सिक्योरिटी गार्ड निकला अस्पताल का मालिक

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कानपुर के किडनी रैकेट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जहां 20 हजार की नौकरी करने वाला एक गार्ड अस्पताल का मालिक निकला. वो गार्ड आरोपी शिवम को अस्पतालों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा था. इस मामले की जांच जारी है. जानें पूरी कहानी.

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट केस में हर दिन नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. अब इस मामले में एक सरकारी अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड की भूमिका सामने आई है, जिसने पुलिस जांच को और भी उलझा दिया है. महज 20 हजार रुपये की नौकरी करने वाला वह गार्ड खुद एक अस्पताल का मालिक निकला और आरोप है कि वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लोगों को अस्पतालों से जोड़ता था.

पुलिस की पूछताछ में अब अजय नाम के इस शख्स की भूमिका उजागर हुई है, जो एक सरकारी हेलिक्स अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता है. शुरुआत में वह एक मामूली कर्मचारी लग रहा था, लेकिन जांच में उसकी भूमिका कहीं ज्यादा गहरी निकली. अजय का नाम सामने आते ही पुलिस ने उसे नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया. यह खुलासा पूरे मामले को एक नए एंगल से देखने पर मजबूर कर रहा है.

सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि अजय सिर्फ गार्ड ही नहीं, बल्कि खुद एक अस्पताल का मालिक भी रह चुका है. पुलिस के अनुसार, उसने स्टार हॉस्पिटल नाम से एक अस्पताल खोला था, जिसे कुछ समय पहले बंद कर दिया गया. एक मामूली सैलरी पाने वाले व्यक्ति का अस्पताल मालिक होना जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अस्पताल के लिए पैसा कहां से आया और इसका किडनी रैकेट से क्या कनेक्शन था.

जांच में यह भी सामने आया है कि अजय किडनी रैकेट के मुख्य आरोपी शिवम और अन्य लोगों को अस्पतालों से जोड़ने का काम करता था. वह जरूरतमंद मरीजों और डोनर को अलग-अलग अस्पतालों तक पहुंचाने में मदद करता था. पुलिस का मानना है कि अजय इस पूरे नेटवर्क में एक अहम कड़ी के तौर पर काम कर रहा था. उसकी भूमिका सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह पर्दे के पीछे एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.

पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि अजय ने ही आरोपी शिवम की मुलाकात रोहन और नरेंद्र से करवाई थी. यही लोग आगे चलकर मेडलाइफ नाम का अस्पताल शुरू करने में शामिल हुए. इस अस्पताल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहीं पर किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े मामलों के सबूत मिलने की बात सामने आई है. पुलिस अब इस कनेक्शन को जोड़कर पूरे रैकेट की परतें खोलने में जुटी है.

मेडलाइफ अस्पताल को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि यहां पहले भी कई किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं. इतना ही नहीं, इस मामले के व्हिसलब्लोअर आयुष को भी ऑपरेशन के बाद इसी अस्पताल में रखा गया था. आयुष वही शख्स है जिसने पारुल को किडनी दी थी और बाद में इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ. यह तथ्य जांच एजेंसियों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.

पुलिस को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि एक गार्ड की नौकरी करने वाला व्यक्ति इतने बड़े स्तर पर कैसे काम कर सकता है. उसकी आय और संपत्ति के बीच का अंतर भी जांच के दायरे में है. इसी वजह से अजय को नोटिस देकर विस्तृत पूछताछ के लिए बुलाया गया है और उसे आगे भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस अब उसके बैंक खातों, संपत्तियों और संपर्कों की जांच कर रही है.

फिलहाल पुलिस के पास इतने ठोस सबूत नहीं हैं कि मेडलाइफ अस्पताल में हुए ट्रांसप्लांट के डोनर और रिसीवर की पूरी जानकारी सामने लाई जा सके. जांच अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और सबूतों के आधार पर ही आगे की गिरफ्तारी तय की जाएगी. यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

NATIONAL : मां और दो बेटियों के शव स्विमिंग पूल में मिले… पिता ने हत्या का संदेह जताया

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हनुमाकोंडा के इनावोलु मंडल में दुखद घटना सामने आई है. यहां बुधवार रात एक मां और उसकी दो नाबालिग बेटियां एक स्विमिंग पूल में मृत पाई गईं. यह घटना पुन्नेला गांव में हुई. यह परिवार आजीविका के लिए गांव के बाहरी इलाके में नेशनल हाइवे के पास एक स्विमिंग पूल चलाता था. स्थानीय लोगों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तीनों की मौत हो गई.

तेलंगाना के हनुमकोंडा से दर्दनाक और रहस्यमय घटना सामने आई है. यहां एक मां और उसकी दो मासूम बेटियों के शव स्विमिंग पूल में मिले हैं. इससे इलाके में सनसनी फैल गई. यह घटना इनावोलु मंडल के पुन्नेला गांव की है. मृतकों की पहचान 26 वर्षीय फरहत और उसकी दो बेटियों के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 8 साल और 6 साल है.

फरहत की शादी अजहरुद्दीन से हुई थी और परिवार गांव के बाहरी इलाके में वारंगल-खम्मम नेशनल हाइवे के पास एक स्विमिंग पूल चलाकर अपना गुजारा करता था. बुधवार रात परिवार रोज की तरह स्विमिंग पूल पर गया था. इसी दौरान फरहत और उसकी दोनों बेटियां कथित तौर पर पानी में गिर गईं. स्थानीय लोगों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और तीनों की मौत हो गई.

हालांकि, यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसमें साजिश की आशंका भी गहराने लगी है. मृतका के पति अजहरुद्दीन का दावा है कि यह दुर्घटना थी, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

फरहत के पिता अली ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी बेटी और नातिनों की हत्या की गई है और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से फरहत और उसके पति के बीच बच्चों को लेकर विवाद चल रहा था. जो इस घटना की एक वजह हो सकता है.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए MGM अस्पताल भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा.

थाना प्रभारी श्रीनिवास के मुताबिक, मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और हर पहलू से जांच की जा रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह वास्तव में हादसा था या फिर किसी साजिश के तहत हत्या की गई. घटना के बाद पीड़ित परिवार के घर का माहौल बेहद है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. फिलहाल, इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

MP : ऐसी पत्नी किसी को न मिले! रो-रोकर सुनाई पति के मर्डर की कहानी, खुद ही प्रेमी के साथ दी थी सुपारी

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मध्य प्रदेश के धार जिले में पत्नी ने रो-रोकर पति की हत्या को लूट बताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. प्रेमी के साथ मिलकर एक लाख रुपये की सुपारी देकर पति की हत्या करवाई गई थी. 36 घंटे में पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश जारी है.

मध्य प्रदेश के धार जिले से सामने आया यह मामला जितना सनसनीखेज है, उतना ही चौंकाने वाला भी. यहां एक पत्नी ने पहले तो अपने पति की हत्या की साजिश रची, फिर उसी हत्या को छुपाने के लिए ऐसा नाटक किया कि शुरुआती दौर में हर किसी को उस पर भरोसा हो गया. रो-रोकर उसने ऐसी कहानी सुनाई कि लगा जैसे वह खुद किसी भयावह हादसे की शिकार है. लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने परतें खोलीं, सच्चाई बिल्कुल उलट निकली और वही पत्नी इस पूरे हत्याकांड की मास्टरमाइंड निकली.

यह पूरा मामला धार जिले के गोंदीखेड़ा चारण गांव का है, जहां देवकृष्ण रोहित की हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी थी. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रात के समय कुछ अज्ञात बदमाश घर में घुसे, देवकृष्ण पर धारदार हथियार से हमला किया, और उनकी पत्नी प्रियंका को बंधक बनाकर लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया. घटना के बाद प्रियंका का रो-रोकर दिया गया बयान पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गया था. वह बार-बार यही कह रही थी कि बदमाश अचानक घर में घुस आए, उन्होंने पति पर हमला किया और उसे एक कमरे में बांध दिया. उसके आंसू, उसकी घबराहट और उसकी टूटी हुई आवाज सब कुछ इतना वास्तविक लग रहा था कि किसी को उस पर शक नहीं हुआ. लेकिन पुलिस की नजरों से यह कहानी ज्यादा देर तक बच नहीं सकी.

मामले की जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों ने जब घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, तो कई ऐसी बातें सामने आईं जो इस कहानी से मेल नहीं खा रही थीं. न तो जबरन घुसने के स्पष्ट निशान थे, न ही लूटपाट के ऐसे प्रमाण जो किसी बाहरी हमले की ओर इशारा करते हों. यही से पुलिस को शक हुआ कि मामला कुछ और ही है. जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए जैसे कॉल डिटेल्स, मोबाइल लोकेशन और आसपास के लोगों से पूछताछ. जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ती गईं, प्रियंका की कहानी कमजोर पड़ती चली गई. अंततः जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई, तो वह ज्यादा देर तक सच छुपा नहीं सकी और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

जांच में सामने आया कि प्रियंका का अपने ही गांव के कमलेश नाम के युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. यह संबंध कोई नया नहीं था, बल्कि पिछले कई वर्षों से दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे. इसी रिश्ते के चलते पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था. परिवार वालों के मुताबिक, प्रियंका कई बार अपने मायके चली जाती थी और लंबे समय तक वहीं रहती थी. इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया वो है बाल विवाह. पुलिस के अनुसार, प्रियंका और देवकृष्ण की शादी तब हुई थी जब दोनों नाबालिग थे. शादी के बाद वे अलग-अलग अपने परिवारों के साथ रहते रहे. जब प्रियंका बालिग हुई और उसे पति के साथ रहने के लिए कहा गया, तो वह इसके लिए तैयार नहीं थी. यही असहमति धीरे-धीरे एक खतरनाक साजिश में बदल गई.

प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश के साथ मिलकर देवकृष्ण को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. योजना इतनी सुनियोजित थी कि इसे एक लूट की वारदात का रूप देने की कोशिश की गई. कमलेश ने अपने एक साथी सुरेंद्र को इस हत्या को अंजाम देने के लिए करीब एक लाख रुपये की सुपारी दी. घटना वाली रात सब कुछ उसी प्लान के मुताबिक हुआ. सुरेंद्र घर में दाखिल हुआ और सोते हुए देवकृष्ण पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हत्या के बाद प्रियंका को बांध दिया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि वह भी इस वारदात की शिकार है. इसके बाद कुछ समय बीतने पर उसे चिल्लाने के लिए कहा गया, जिससे आसपास के लोग इकट्ठा हो जाएं और कहानी को असली रूप दिया जा सके. प्रियंका ने वही किया कुछ देर बाद उसने शोर मचाया, रोना-धोना शुरू किया और वही कहानी दोहराई जो पहले से तय की गई थी. लेकिन यह ‘परफेक्ट प्लान’ ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया.

पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया. मयंक अवस्थी (एसपी) के नेतृत्व में टीम ने न सिर्फ प्रियंका और कमलेश को गिरफ्तार किया, बल्कि लूट का सामान भी बरामद कर लिया और हैरानी की बात यह रही कि वह सामान खुद प्रियंका के घर से ही मिला. फिलहाल इस मामले में तीसरे आरोपी सुरेंद्र की तलाश जारी है, जिसे इस हत्या को अंजाम देने के लिए सुपारी दी गई थी. इस खुलासे के बाद मृतक के परिवार में गुस्सा और दुख दोनों साफ दिखाई दे रहा है. देवकृष्ण की मां और बहन ने प्रियंका पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि प्रियंका का व्यवहार शुरू से ही ठीक नहीं था. वह अक्सर विवाद करती थी और अपने पति को अपमानित करती थी. मृतक की बहन ने बताया कि प्रियंका अक्सर कहती थी कि “तुम मुझे डिजर्व नहीं करते, तुम मेरे लायक नहीं हो.” परिवार का यह भी आरोप है कि प्रियंका का कमलेश के साथ संबंध 2020 से चल रहा था और गांव में भी इस बात की चर्चा थी. कई बार कमलेश गांव आता था और घर के आसपास मंडराता दिखाई देता था.

मृतक की मां का कहना है कि उनकी बहू हमेशा झगड़ा करती थी और घर का माहौल खराब रखती थी. उन्होंने यहां तक कहा कि प्रियंका को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. फिलहाल, पूरे गांव में इस घटना को लेकर चर्चा है. लोग हैरान हैं कि जिस महिला को उन्होंने एक पीड़ित के रूप में देखा, वही इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता निकली.

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