Wednesday, April 1, 2026
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NATIONAL : UGC के नए नियमों को लागू करने की मांग, दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन तेज, निकाला ‘इक्विटी मार्च’

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DU छात्रों ने यूजीसी समानता नियम 2026 को लागू करने के लिए ‘इक्विटी मार्च’ निकाला. छात्रों का कहना है कि नियमों पर रोक से जातिगत भेदभाव बढ़ेगा और कमजोर वर्ग असुरक्षित महसूस करेगा.दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के सैकड़ों छात्रों ने मंगलवार, 3 फरवरी को नॉर्थ कैंपस में मार्च निकालकर यूजीसी समानता नियम 2026 को तत्काल लागू करने की मांग की. ‘इक्विटी मार्च’ नामक यह विरोध प्रदर्शन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने आयोजित किया था.

तख्तियां थामे नारे लगा रहे छात्रों ने कहा कि हाल ही में इन नियमों पर लगी अदालती रोक के कारण उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से निपटने का काफी समय से लंबित प्रयास नाकाम हो गया है.ने कहा कि समानता नियम केवल प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए जवाबदेही और संरक्षण सुनिश्चित करने का एक अहम उपाय है, जिन्हें ‘रोहित एक्ट’ की भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए.

‘रोहित एक्ट’ से आशय प्रस्तावित रोहित वेमुला अधिनियम से है, जिसमें भारतीय उच्च शिक्षा में छात्रों के खिलाफ जातिगत/पहचान-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने की बात कही गई. यह कानून हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला के नाम पर है, जिन्होंने 2016 में कथित तौर पर जातित भेदभाव के चलते आत्महत्या कर ली .छात्रों ने कहा कि ये नियम देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में वर्षों तक चले आंदोलनों का परिणाम हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों पर रोक के चलते एक बार फिर कमजोर वर्ग के छात्र विश्वविद्यालयों में असुरक्षित महसूस करेंगे.

सभा को संबोधित करते हुए जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष नितीश ने कहा, “सड़कों पर वर्षों की कुर्बानी और संघर्ष के बाद हमने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को ऐसे नियम लाने के लिए मजबूर किया ताकि जवाबदेही तय हो. इन दिशानिर्देशों पर लगी रोक यह साफ दिखाती है कि हमारे संस्थानों में उच्चतम स्तरों में आज भी जातिवाद गहराई से जड़ें जमाए हुए है. जब तक वास्तविक समानता हासिल नहीं होती, हम चैन से नहीं बैठेंगे.”

WORLD : 2300 करोड़ का नुकसान, भारत-पाकिस्तान मैच के बायकॉट पर गुस्से में पाकिस्तानी, बोले- ‘हमारे बिना…’

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भारत-पाकिस्तान के T-20 वर्ल्ड कप मैच से जुड़े बॉयकॉट पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. 2300 करोड़ की वैल्यू वाले मैच को लेकर पाकिस्तानी आवाम ICC पर सवाल उठा रही है.T-20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से मना कर दिया है. इसको लेकर माहौल गरमाया हुआ है. इस बीच पाकिस्तानी महिला यूट्यूबर सना अमजद ने आवाम के बीच जाकर उनसे प्रतिक्रिया ली. उन्होंने सवाल किया कि अगर पाकिस्तान सच में भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता है तो इसका क्या असर पड़ेगा. इस पर एक शख्स ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच की कीमत करीब 2300 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर कायम रहता है और 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता तो इसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा और उसे जुर्माने के तौर पर 2300 करोड़ देने होंगे. हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तानी आवाम का कहना है कि पाकिस्तान का बॉयकॉट का फैसला बिल्कुल सही है.

एक पाकिस्तानी शख्स ने ICC पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा समय में आईसीसी निष्पक्ष संस्था की तरह काम नहीं कर रही, बल्कि वह इंडियन क्रिकेट काउंसिल बनकर रह गई है. वजह यह बताई जाती है कि ICC की कमाई का बड़ा हिस्सा भारतीय क्रिकेट बोर्ड से आता है. इसी कारण दूसरे क्रिकेट बोर्डों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता. पाकिस्तानी शख्स ने कहा कि इज्जत और आत्मसम्मान से जुड़ा फैसला है और आने वाले समय में आईसीसी को यह मानना पड़ेगा कि पाकिस्तान के बिना क्रिकेट अधूरा है.

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच की कीमत करीब 2300 करोड़ रुपये बताई जा रही है. पाकिस्तानी आवाम का कहना है कि पाकिस्तान के बहिष्कार करने से आईसीसी से मिलने वाली टूर्नामेंट की रकम में कुछ कटौती हो सकती है. उदाहरण के तौर पर, अगर पाकिस्तान को 50 करोड़ मिलने थे तो शायद 35 करोड़ मिलें, लेकिन इसे बहुत बड़ा नुकसान नहीं मान रहे हैं. असल नुकसान आईसीसी और भारतीय ब्रॉडकास्टर्स को होने की बात कही जा रही है, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान मैच के लिए भारी निवेश किया है. बताया जाता है कि इस मैच के हर मिनट का विज्ञापन करोड़ों में बिकता है. पाकिस्तान का तर्क है कि यह टूर्नामेंट उसका घरेलू टूर्नामेंट नहीं है, इसलिए आर्थिक नुकसान सीमित रहेगा.

ENTERTAINMENT : सुशांत की मौत के बाद इंडस्ट्री ने किया था बायकॉट, 7 साल बाद रिया चक्रवर्ती ने किया कमबैक

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती की जिंदगी में एक तूफान आ गया था. रिया ने कई महीने जेल में भी बिताए. एक्ट्रेस के लिए मुश्किल वक्त था, लेकिन वो हिम्मत नहीं हारीं. आज वो फिर से नई शुरूआत के लिए तैयार हैं.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी, लेकिन अब एक्ट्रेस एक्टिंग में धमाकेदार कमबैक करने को तैयार हैं. मंगलवार शाम मुंबई में ‘नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स’ इवेंट में ऐलान हुआ. रिया नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘फैमिली बिजनेस’ एक्टिंग की दुनिया में वापसी कर रही हैं. इसमें अनिल कपूर और विजय वर्मा भी लीड रोल में हैं.

रिया ने इंस्टाग्राम पर शो का टीजर शेयर किया है. टीजर के कैप्शन में लिखा है- नया खून पुराने पैसों से मिला. जब इतनी ताकत दांव पर हो, तो फैमिली और बिजनेस की लाइनें धुंधली पड़ जाती हैं. देखिए फैमिली बिजनेस, जल्द आ रही है, सिर्फ नेटफ्लिक्स पर.एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर टीजर शेयर करते हुए लिखा कि 7 साल बाद. उन्होंने कैप्शन के साथ हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी बनाया.

रिया चक्रवर्ती के कमबैक को लेकर फैन्स को एक्साइटेड हो उठे हैं. एक्ट्रेस के चाहने वालों ने वीडियो पर कमेंट करके खुशी जाहिर की है. एक यूजर ने उनके पोस्ट पर कमेंट किया, देर आए दुरुस्त आए. दूसरे ने लिखा, रिया को स्क्रीन पर वापस देखकर बहुत खुशी हुई. वो इस कमबैक की हकदार हैं. अन्य ने कहा कि इंतजार नहीं हो रहा. एक फैन ने कहा कि रिया की जर्नी हिम्मत की मिसाल है. उन्हें सिर्फ सम्मान नहीं, माफी भी मिलनी चाहिए.

2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया की जिंदगी में बड़ा भूचाल आ गया था. सितंबर 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उनके व्हाट्सएप पर ड्रग पेडलर्स के चैट्स मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन लंबे समय तक ट्रैवल पर पाबंदी रही. उन्हें इंडस्ट्री ने भी बायकॉट कर दिया था. एक्ट्रेस से प्रोजेक्ट्स छीन लिए गए थे.

2025 में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में रिया को सभी आरोपों से क्लीन चिट दे दी, जिससे इस चैप्टर का आधिकारिक अंत हुआ. ये सब उनके लिए बहुत बड़ा झटका था.

NATIONAL : पति की पत्थर से कुचलकर हत्या, प्रेमी के साथ मिलकर पत्नी ने ही रची थी साजिश

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फरीदाबाद में पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की पत्थरों से सिर कुचलकर हत्या कर दी और शव को रेलवे ट्रैक पर फेंककर हादसा दिखाने की कोशिश की. 18 दिन बाद भाई की गुमशुदगी रिपोर्ट से मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है.

हरियाणा के फरीदाबाद से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और वारदात को रेलवे एक्सीडेंट का रूप देने के लिए शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया. करीब 18 दिन बाद जब मृतक के भाई ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तब जाकर इस जघन्य अपराध का खुलासा हुआ.

यह मामला फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर इलाके का है. पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान सुमन के रूप में हुई है, जो पेशे से ऑटो चालक था. उसकी शादी करीब 15 साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे भी हैं. लेकिन सुमन की पत्नी के अपने ही दफ्तर में काम करने वाले रियाजुल नामक युवक से अवैध संबंध थे. इसी रिश्ते को छिपाने और पति को रास्ते से हटाने के लिए दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची.

पुलिस जांच में सामने आया है कि 30 नवंबर को महिला और उसके प्रेमी ने योजना के तहत सुमन को शराब पिलाई. जब वह नशे में पूरी तरह धुत हो गया, तो दोनों ने मिलकर पत्थरों से उसका सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद हत्या को हादसा दिखाने के लिए शव को मेवला महाराजपुर इलाके में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया.

1 दिसंबर 2025 को रेलवे ट्रैक के पास एक अज्ञात शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी. शव ट्रेन की चपेट में आने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त था, जिससे उसकी पहचान नहीं हो सकी. पुलिस ने शव को फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया और बाद में उसका अंतिम संस्कार भी करा दिया. उस समय पुलिस ने भी इसे ट्रेन एक्सीडेंट का मामला माना.

करीब 18 दिन बाद मृतक के भाई ने सूरजकुंड थाने में सुमन की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. जांच के दौरान जब हुलिए का मिलान किया गया तो कई तथ्य मेल खाते नजर आए. क्राइम ब्रांच डीएलएफ ने जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि मृतक की पत्नी ने अपने पति की गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट नहीं दी थी और वह झारखंड चली गई थी.कड़ाई से पूछताछ करने पर पत्नी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी महिला और उसके प्रेमी रियाजुल को गिरफ्तार कर लिया. एसीपी क्राइम वरुण दहिया ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

NATIONAL : ‘मेरे ख्वाबों में जो आए…’,लाल सूट में रेलवे ट्रैक पर नाच-नाचकर बनाई थी रील, लड़की ने अब जोड़े हाथ

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रील्स बनाने का जुनून युवाओं को खतरनाक रास्ते पर ले जाता दिख रहा है. गुजरात के सूरत में सचिन रेलवे स्टेशन के पास एक युवती ने व्यस्त रेलवे ट्रैक पर फिल्मी गाने पर रील बनाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. विवाद बढ़ने के बाद युवती ने माफी मांगते हुए वीडियो जारी किया. रेलवे प्रशासन ने मामले में कानूनी कार्रवाई की है.

रील्स बनाने का पागलपन युवाओं को किस ओर ले जा रहा है, यह कहना मुश्किल है. रील बनाने के चक्कर में लोग अपनी जान तक जोखिम में डाल लेते हैं. गुजरात में सूरत के सचिन रेलवे स्टेशन के पास व्यस्त रेलवे ट्रैक पर एक युवती द्वारा फिल्मी गाने पर रील बनाने का मामला सामने आया है. जान जोखिम में डालकर बनाई गई ये रील सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद युवती ने माफी मांगने का वीडियो भी वायरल किया है. गौरतलब है कि हाल ही में गुजरात के ही राजकोट में वंदे भारत ट्रेन के साथ सेल्फी लेने के चक्कर में 3 लोग चपेट में आ गए थे, जिनमें से 2 की मौत हो गई थी.

सूरत के सचिन रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर खतरनाक रील बनाने के इस वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लाल सूट पहने एक युवती रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच बिना किसी डर के चल रही है और पोज दे रही है. यह वही ट्रैक है जहां से दिन-रात तेज रफ्तार एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं. यदि शूटिंग के दौरान अचानक ट्रेन आ जाती, तो युवती को जान बचाने का मौका भी नहीं मिलता. महज कुछ सेकंड की प्रसिद्धि के लिए युवती ने अपनी अनमोल जान दांव पर लगा दी थी. युवती का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और उसके बाद युवती के रील बनाने के इस तरीके को लेकर काफी विवाद हुआ था.

इसके बाद युवती ने अपना एक और वीडियो वायरल किया जिसमें उसने रेलवे ट्रैक पर रील बनाने की अपनी गलती स्वीकार की है. उसने कहा कि मेरा नाम नेहा राजभर है. जैसे मैं इंस्टाग्राम पर अपनी वीडियो अपलोड करती हूँ, तो एक दिन मैं मार्केट गई थी, फिर में सचिन स्टेशन पर गई, तो वहां रेलवे ट्रैक पर वीडियो डाल रही थी. मुझे यह नहीं पता था कि ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. फिर मैंने रील पोस्ट कर दी थी, तो मेरे ऊपर जो भी है, कानूनी कार्रवाई की गई है. तो आइंदा कोई भी रील बनाने वाला व्यक्ति चाहे वह महिला हो या पुरुष रेलवे ट्रैक पर इस तरह की वीडियो न डालें. मुझसे गलती हुई है, उसके लिए मैं सॉरी बोल रही हूं.

रेलवे सुरक्षा बल के नियमों के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर अनाधिकृत प्रवेश करना या वहां शूटिंग करना एक गंभीर कानूनी अपराध है. रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत इसके लिए जेल की सजा या भारी जुर्माने का प्रावधान है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो अन्य युवा भी ऐसे जोखिम भरे स्टंट करने के लिए प्रेरित होंगे. सूरत रेलवे विभाग ने सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर युवती की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की है. यह बात उसने अपने दूसरे माफी वाले वीडियो में कबूल की है.

BHOPAL : मोबाइल गेम ने छीनी 14 साल के अंश की जिंदगी, मां-बाप को फंदे पर लटका मिला इकलौता बेटा

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भोपाल में एक 14 वर्षीय लड़के ने ऑनलाइन गेम में 28 हजार रुपये हारने के बाद आत्महत्या कर ली. वह फ्री फायर गेम का आदी था. माता-पिता के बाहर होने पर उसने यह कदम उठाया.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे जानकर हर मां-बाप का दिल दहल जाए. यहां पर 14 साल के मासूम बच्चे की जिंदगी ऑनलाइन गेम की लत ने खत्म कर दी. 14 साल का अंश साहू फ्री फायर गेम खेलने का शौकीन था, लेकिन उसमें 28 हजार रुपये हार गया था. माता-पिता के पैसों का नुकसान होने के डर से मासूम अंश ने अपने ही घर में अपनी जान दे दी.

अंश के माता-पिता तेरहवीं में गए थे. जब वे घर लौटे तो अपने इकलौते बेटे को फंदे पर लटका पाया. यह दृश्य दुनिया में किसी मां-बाप को कभी न देखना पड़े, लेकिन अंश के माता-पिता को जो सहना पड़ा उसे समझना बहुत मुश्किल है. अपने इकलौते बेटे की मौत से परिवार टूट गया है.

अंश साहू 8वीं क्लास में पढ़ता था और अपने माता-पिता की अकेली संतान था. पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन बच्चे के कमरे से उसका मोबाइल फोन बरामद किया गया है. परिजनों ने पुलिस को बताया कि अंश मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने का आदी था. गेम में दिए गए किसी टास्क को पूरा करने के दबाव में उसने यह कदम उठाया हो सकता है.

अभी आत्महत्या के सही कारणों का खुलासा नहीं हो सका है, लेकिन परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. पिपलानी थाना पुलिस फिलहाल जांच में जुटी है.उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से भी ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां पर भारत सिटी सोसाइटी के एक टावर से तीन नाबालिग सगी बहनें नवीं मंजिल से कूद गईं. तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. ये लड़कियां महज 12, 14 और 16 साल की थीं. बच्चियों ने सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसके जरिए पता चला है कि वे भी मोबाइल गेम की आदी थीं. आत्महत्या की इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है.

ENTERTAINMENT : ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ के लिए मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे हर्षवर्धन, ऐसे बने हिस्सा

फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ में अपनी एक्टिंग से लोगों के दिल पर राज करने वाले और उन्हें दीवाना बना देने वाले एक्टर हर्षवर्धन राणे मेकर्स के नहीं थे पहली पसंद.

बॉलीवुड में ‘सनम तेरी कसम’ से डेब्यू करने वाले अभिनेता हर्षवर्धन राणे की फिल्म पहली बार कमाल दिखाने में असफल रही. मगर, री-रिलीज पर इसका जादू बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला. वहीं, ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ भी दर्शकों को खासा इंप्रेस कर गई. पर क्या आप जानते हैं कि इन दोनों ही फिल्मों के लिए हर्षवर्धन मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे?

‘सनम तेरी कसम’ में उनके साथ पाकिस्तानी अभिनेत्री मावरा होकैन नजर आई थीं, यह फिल्म साल 2016 में रिलीज हुई थी.अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनकी दो सबसे चर्चित फिल्में ‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ में वह मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे. दोनों फिल्मों के मुख्य रोल पहले किसी और को ऑफर किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें चुना गया.

हर्षवर्धन ने बताया, “दोनों फिल्मों में मैं फर्स्ट चॉइस नहीं था. ‘सनम तेरी कसम’ का रोल किसी और के पास था और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ भी किसी और को ऑफर हो चुकी थी. ‘सनम तेरी कसम’ फिल्म रिलीज होने के तीसरे दिन ही निर्देशक मिलाप मिलन जावेरी का मैसेज आया था. फिल्म 5 फरवरी 2016 को रिलीज हुई थी और 7 फरवरी को मिलाप सर ने संपर्क किया और मिलने को कहा. जब उन्होंने ये कहानी मुझे सुनाने की बात कही तो मैंने कहा कि सर, मैं तो ऑलरेडी आपके काम को पसंद करता हूं और मुझे आपके साथ काम करना है.”

हर्षवर्धन ने कहा कि मिलाप सर का विजन उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है. वह मास ऑडियंस के लिए फिल्में बनाते हैं और उनकी कहानियां आम लोगों के दिलों तक पहुंचती हैं. दोनों फिल्मों में काम करके उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला.

हर्षवर्धन ने बताया, “मिलाप सर की फिल्में टियर-2 और टियर-3 शहरों की मास ऑडियंस के लिए बनती हैं. वह हमेशा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इमोशनल कहानियां पहुंचाना चाहते हैं. मुझे ऐसे डायरेक्टर पसंद हैं जो मास ऑडियंस तक बात पहुंचाएं, न कि सिर्फ चुनिंदा दर्शकों के लिए फिल्म बनाएं. यही वजह थी कि मैंने मिलाप सर के साथ काम किया.”

वहीं, ‘सनम तेरी कसम’ को लेकर अभिनेता ने बताया, “मैंने ऑडिशन दिया था. मेकर्स ने उनका ऑडिशन देखा और एक घंटे बाद उन्हें दोबारा ऑडिशन देने को कहा. दूसरी बार सीन करने पर डायरेक्टर इमोशनल हो गए. जबकि, यह फिल्म दूसरे एक्टर को ऑफर हो चुकी थी. मैं समझ गया था कि उन्हें मेरा काम पसंद आया.”

फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ का निर्देशन राधिका राव और विनय सप्रू ने मिलकर किया, जो बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में कमजोर रही, लेकिन बाद में री-रिलीज से सुपरहिट हो गई. साल 2025 में इसकी री-रिलीज ने इस फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया. दर्शकों को हर्षवर्धन और मावरा की जोड़ी बेहद पसंद आई और लोगों ने इतना प्यार दिया कि फिल्म 30 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने में सफल रही.’एक दीवाने की दीवानियत’ साल 2025 में आई थी, जिसे मिलाप जावेरी ने डायरेक्ट किया है. इस फिल्म में हर्षवर्धन का इंटेंस और इमोशनल रोल दर्शकों को बेहद पसंद आया. फिल्म ने अच्छा बिजनेस किया और हर्षवर्धन की परफॉर्मेंस की जमकर तारीफ हुई.

NATIONAL : आस्था, वोटर और पावर… पंजाब चुनाव 2027 का फैसला कैसे तय कर सकते हैं डेरे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बजट वाले दिन डेरा सचखंड बल्लन जाना और गुरु रविदास जयंती में शामिल होना पंजाब की राजनीति में दलित वोट बैंक और डेरों की भूमिका को फिर केंद्र में ले आया है. करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी वाले राज्य में बीजेपी अपनी कमजोर पकड़ मजबूत करने के लिए डेरों के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य दल भी समय-समय पर डेरों का रुख करते रहे हैं.

बजट वाले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डेरा सचखंड बल्लन पहुंचना अब पंजाब की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है. वह गुरु रविदास जयंती के 649वें कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके बाद पूरे पंजाब में डेरों पर सबकी नजर टिक गई है. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को दलित समाज तक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. पंजाब में करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित है. यह वर्ग चुनाव में बहुत अहम माना जाता है. बीजेपी लंबे समय से पंजाब में खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. लेकिन उसे अब तक बड़ी चुनावी जीत नहीं मिल पाई है.

बीजेपी पहले अकाली दल के साथ मिलकर सरकार में रही. 1997 से 2002 और 2007 से 2017 तक वह छोटे सहयोगी की भूमिका में थी. वह परंपरागत रूप से 117 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. तीन कृषि कानूनों के दौरान 2020 में अकाली दल ने गठबंधन तोड़ दिया. तब से बीजेपी अकेले अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन रास्ता आसान नहीं है.

हाल ही में पद्म श्री से सम्मानित डेरा बल्लन के प्रमुख से प्रधानमंत्री मिले. उन्होंने वहां समय बिताया और गुरु रविदास के समानता और सद्भाव के संदेश को दोहराया. इसे पंजाब के रविदासिया समाज तक पहुंच बनाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है. खासकर दोआबा इलाके की करीब 19 सीटों पर इसका असर माना जाता है. इससे पहले दिसंबर 2025 में डेरा प्रमुख ने दिल्ली में उनसे मुलाकात कर न्योता दिया था.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी अभी दलित वोट बैंक में मजबूत पकड़ नहीं बना पाई है. पार्टी अकाली दल की सपोर्टर वाली अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलना चाहती है. इसके लिए वह सिख नेताओं को पार्टी में ला रही है. विपक्ष इसे बाहर से लाए गए नेता बताता है. साथ ही पार्टी डेरों से नजदीकी भी बढ़ा रही है, क्योंकि डेरों का असर माना जाता है.

पंजाब के कई डेरा खुद को गैर राजनीतिक बताते हैं. वे कहते हैं कि उनका काम आध्यात्म और समाज सेवा है. लेकिन हकीकत यह है कि उनका चुनाव पर असर दिखता है. खासकर जाति आधारित वोटिंग में डेरों की भूमिका अहम मानी जाती है. पंजाब में दलित आबादी करीब 32 प्रतिशत है. इसमें रविदासिया और वाल्मीकि समुदाय सबसे बड़े समूह हैं. दोनों का वोट चुनाव की दिशा बदल सकता है. माना जाता है कि रविदासिया वोट पहले कांग्रेस को ज्यादा मिलता रहा. जबकि वाल्मीकि वोट बिखरा रहा और 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को फायदा मिला.

पंजाब हमेशा से बीजेपी के लिए कठिन राज्य रहा है. हरियाणा से सीख लेते हुए पार्टी सामाजिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति में डेरों को अहम माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी नवंबर 2022 में राधा स्वामी सत्संग ब्यास भी गए थे. वहां उन्होंने प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की थी. वह करीब एक घंटे वहां रहे. प्रधानमंत्री हर साल वाराणसी में गुरु रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर भी जाते हैं. लेकिन 2026 का बल्लन दौरा समय और राजनीतिक संकेत के कारण खास माना गया.

मार्च 2016 में राहुल गांधी ने ब्यास में गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की. उन्होंने पंजाब में नशे के मुद्दे पर चर्चा की. दिसंबर 2016 में वह डेरा मुख्यालय में रात रुके. उनके साथ तब के पंजाब कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह भी थे. जनवरी 2017 में उन्होंने संत निरंजन दास से बंद कमरे में मुलाकात कर आशीर्वाद लिया. कांग्रेस के कई नेता नियमित रूप से डेरों में जाते रहे हैं.

सितंबर 2016 में अरविंद केजरीवाल ने ब्यास डेरा का दौरा किया. यह 2017 चुनाव से पहले हुआ था. उन्होंने गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की. मार्च 2016 में केजरीवाल और भगवंत मान डेरा बल्लन भी गए थे. मार्च 2023 में भी दोनों नेता वहां पहुंचे. उन्होंने गुरु रविदास रिसर्च सेंटर के लिए रकम देने का ऐलान किया.हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी हाल में पंजाब के डेरों और सामाजिक कार्यक्रमों में पहुंचे हैं. वह अक्सर पगड़ी पहनकर हरियाणा मॉडल की बात करते हैं और आम आदमी पार्टी पर हमला करते हैं.

डेरों का रास्ता राजनीतिक दलों के लिए आसान नहीं होता. हाल में राधा स्वामी ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों के बिक्रम सिंह मजीठिया से जेल में मिलने पर विवाद हुआ. उन्होंने सितंबर 2025 और फिर 2 फरवरी 2026 को मजीठिया से मुलाकात की. दूसरी मुलाकात के बाद ढिल्लों ने मजीठिया पर लगे आरोपों को गलत बताया.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर तंज किया. उन्होंने कहा कि भगवान अदालतों को बचाए, जहां मिलने वाला ही जज बन जाए. रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री के बयान की निंदा की. आम आदमी पार्टी समर्थक कहते हैं कि डेरा प्रमुख मजीठिया के रिश्तेदार हैं, इसलिए उनके बयान को उसी नजर से देखा जाना चाहिए.

2017 चुनाव से पहले कई सिख नेता डेरा सच्चा सौदा गए थे. उन्होंने वहां आशीर्वाद मांगा था. यह 2007 के अकाल तख्त के आदेश के खिलाफ माना गया. 4 अप्रैल 2017 को अकाल तख्त ने 44 नेताओं को पेश होने को कहा. इसमें अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता शामिल थे. करीब 39 नेता पेश हुए और उन्हें धार्मिक सजा दी गई.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम 2017 से जेल में है. उसे दो साध्वियों से दुष्कर्म और हत्या के मामलों में सजा मिली है. इसके बाद भी उसे कई बार पैरोल और फरलो मिली. फरवरी 2026 तक उसे 15 बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली. वह कुल 400 से ज्यादा दिन जेल से बाहर रहा. अक्सर यह समय चुनाव के आसपास रहा. इस पर भी राजनीतिक असर के आरोप लगते रहे हैं.

अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब के 13000 गांवों में करीब 9000 डेरा बताए जाते हैं. लेकिन औपचारिक अनुमान करीब 100 बड़े डेरों का है. इनमें से आधा दर्जन डेरों का पूरे पंजाब पर असर माना जाता है.

पंजाब के प्रमुख डेरा

  1. राधा स्वामी सत्संग ब्यास

मुख्यालय अमृतसर के ब्यास में है. इसके लाखों अनुयायी हैं. देश और विदेश में भी बड़ा असर है. यह शाकाहार, ध्यान और अनुशासन पर जोर देता है. इसे पंजाब का सबसे संगठित डेरा माना जाता है. करीब 19 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. डेरा सच्चा सौदा

मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में है. लेकिन मालवा क्षेत्र में मजबूत असर है. इसका प्रमुख गुरमीत राम रहीम है. इसके अनुयायी बड़ी संख्या में बताए जाते हैं. करीब 69 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. डेरा सचखंड बल्लन

जालंधर के पास बल्लन गांव में है. इसके प्रमुख संत निरंजन दास हैं. इसका असर खास तौर पर रविदासिया और दलित समाज में है. दोआबा की करीब 8 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान

मुख्यालय जालंधर के नूरमहल में है. यह आध्यात्म और समाज सेवा पर जोर देता है. करीब 8 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. संत निरंकारी मिशन

मुख्यालय दिल्ली में है. पंजाब में इसकी शाखाएं हैं. यह जीवित गुरु की परंपरा पर जोर देता है. करीब 4 सीटों पर असर माना जाता है.

  1. नामधारी संप्रदाय

इसका मुख्य केंद्र लुधियाना के भैणी साहिब में है.

भले ही बीजेपी ने शुरुआत जल्दी कर दी हो, लेकिन पंजाब के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बाकी दल भी डेरों का रुख करेंगे. सवाल यही है कि क्या डेरा आगे भी चुनाव में गेम चेंजर बनेंगे. राजनीतिक दलों को इससे काफी उम्मीद जरूर है.

UP : गोंडा में मामी पर चढ़ा इश्क का खुमार, पति और दो बच्चों को छोड़कर 11 साल छोटे भांजे के साथ हुई फरार

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यूपी के गोंडा में मामी और भांजे के बीत प्रेम प्रसंग का मामला सुर्खियों में बना हुआ है. दोनों पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि महिला अपने दोनों बच्चों और पति को छोड़कर भांजे के साथ चली गई.उत्तर प्रदेश के गोंडा में 30 साल की मामी पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि अपने दो बच्चे और पति को छोड़कर वो 11 साल छोटे भांजे के साथ फरार हो गई. दोनों के बीच प्यार की ऐसी खुमारी थी कि मामी ने एक बार फांसी पर लटककर जान देने की भी कोशिश की. मामी-भांजे के प्रेम-प्रसंग की चर्चाएं अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

ये घटना गोंडा के थाना इटियाथोक क्षेत्र के परना गांव की है जहां रहने वाला दद्दन तिवारी पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं. चंडीगढ़ में ही दद्दन की मुलाकात मनीषा से हुई थी. वो मनीषा के घर में किराये पर रहता था. साल 2017 में दोनों ने गोंडा में आकर कोर्ट मैरिज कर ली, उनके दो बेटे हुए. बड़े बेटे की उम्र नौ साल और छोटा बेटा चार साल का है.मनीषा की मुलाकात यहीं पर भांजे विनीत से हुई. उसे दसवीं के बाद पढ़ाई लिखाई छोड़ दी थी. उसके पिता अरुण दीक्षित राशन की दुकान चलाते हैं. विनीत का अक्सर दद्दन के घर पर आना-जाना था. इसी बीच मनीषा और विनीत एक-दूसरे के करीब आ गए और फिर चोरी छिपे एक दूसरे से मिलने लगे.

इस बात की भनक जब दद्दा को लगी तो उसने मनीषा को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी. जिसके बाद दोनों साथ रहने की जिद करे लगे, पति ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो मनीषा ने दो महीने पहले फांसी पर लटककर जाने देने की भी कोशिश की. हालांकि परिजनों ने किसी तरह उसे समझाकर शांत किया. वहीं दूसरी तरफ़ भांजे विनीत ने भी अपनी शादी तोड़ दी थी.

बीते रविवार की रात को भी मनीषा ने भांजे को घर बुलाया था. जिसके बाद दोनों पूरी रात साथ रहे. अगले दिन सोमवार मनीषा की सास ने जब कपड़े लेने के लिए घर में घुसी तो उसने विनीत को देख लिया जिसके बाद उसने शोर मचा दिया. घर से शोरगुल की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर इकट्ठा हो गए.

परिजनों ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हुए, जिसके बाद मंगलवार को ये मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया. लेकिन फिर भी मामी और भांजा मानने को तैयार नहीं हुए. मनीषा भांजे विनीत के साथ रहने की जिद पर अड़ गई. यहीं नहीं अपने प्यार के लिए उसने दोनों बच्चों को भी छोड़ दिया.

मनीषा ने पुलिस के सामने ये लिखकर दिया कि वो विनीत से प्यार करती है और उसी के साथ रहना चाहती है. उसका अपने बच्चों, पति और पति की संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है और ना ही उससे कोई नाता है. जिसके बाद पुलिस ने उसे प्रेमी के साथ जाने दिया.

BUSINESS : क्रैश होने के बाद अब फिर से उठ रही सोने-चांदी की कीमतें, जानें आपके शहर में कितनी है 24 कैरेट की कीमत?

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जनवरी में सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद कीमतों में हाल-फिलहाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखी गई. लेकिन अब सोने-चांदी की कीमत फिर से धीरे-धीरे चढ़ रही है.जनवरी में देश में सोने और चांदी की कीमतों में गजब की तेजी आई. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ग्लोबल ट्रेड को लेकर अनिश्चितता और कमजोर होती करेंसी के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ती गई. नतीजतन, कुछ ही हफ्तों में कीमतें भी लगभग दोगुनी हो गईं.

GoodReturns की डेटा के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत 29 जनवरी को अपने अब तक के सबसे हाई लेवल 17,885 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गई थी. इसमें महज छह दिनों में लगभग 2,492 रुपये प्रति ग्राम और 24,920 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है. मंगलवार, 3 फरवरी को भारत में 24 कैरेट सोने का रेट 15,393 रुपये प्रति ग्राम था, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 14,110 रुपये प्रति ग्राम थी.

आज कितनी सोने की कीमतें?
आज बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 16,053 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 660 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत मंगलवार को 14,110 रुपये के मुकाबले आज 605 रुपये बढ़कर 14,715 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. 18 कैरेट सोने की कीमत भी 495 रुपये बढ़कर आज 12,040 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.

सोने का इन शहरों में भाव
दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, अयोध्या, गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, लुधियाना, अमृतसर जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,068 रुपये, 22 कैरेट की कीमत 14,730 रुपये और 18 कैरेट की कीमत 12,055 रुपये प्रति ग्राम है.
मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, मैसूर, अमरावती में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,053 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,715 और 12,040 रुपये प्रति ग्राम है.
चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे कई दक्षिण भारतीय शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 16,256 रुपये प्रति ग्राम है. यहां 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 14,900 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,750 रुपये प्रति ग्राम है.

चांदी की कितनी है कीमत?
भारत में चांदी की कीमत आज 320 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल के मुकाबले 40 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से एक किलो चांदी की कीमत 3,20,000 रुपये है, जिसमें 40,000 रुपये का उछल आया है. पिछले एक हफ्ते में भारत में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जनवरी में चांदी की कीमतें 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चली गई थीं. सिर्फ एक हफ्ते में भारत में चांदी की कीमत 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के निशान से नीचे आ गई.

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