Saturday, June 20, 2026
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उत्तरी New England में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.8

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बीती रात उत्तरी न्यू इंग्लैंड के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 3.8 तीव्रता का था। भूकंप का केंद्र दक्षिणी मेन के यॉर्क हार्बर से लगभग 6 मील दक्षिण-पूर्व की दिशा में था। सर्वेक्षण में बताया गया कि यह भूकंप जमीन के 8 मील की गहराई पर था।

दूर-दूर तक महसूस किए गए भूकंप के झटके 

यह भूकंप न्यू इंग्लैंड के सभी राज्यों में महसूस किया गया। इसके अलावा पेन्सिलवेनिया जैसे दूर के इलाकों में भी कुछ लोगों ने हल्के झटकों की सूचना दी। भूकंप के कारण फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है लेकिन लोग डरे हुए हैं।

क्षेत्र में भूकंप दुर्लभ लेकिन संभव

न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भूकंप आमतौर पर कम आते हैं लेकिन इस बार आया भूकंप लोगों को डराने के लिए काफी था। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की है।

कोई बड़ा नुकसान नहीं

भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी लेकिन फिर भी झटकों के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

वहीं लोगों को सतर्क रहने और किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों ने कहा कि यह भूकंप इस क्षेत्र में प्लेटों के हल्के टकराव का नतीजा हो सकता है।

Petrol-Diesel: इन लोगों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल और CNG… सख्त होने जा रहे नियम

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जल्द ही थर्ड पार्टी बीमा के बिना चलने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। ऐसे वाहनों को न तो पेट्रोल-डीजल मिलेगा और न ही सीएनजी भरवाने या फास्टैग खरीदने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही, जिन वाहनों के पास थर्ड पार्टी बीमा नहीं होगा, उनके ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण (renewal) भी रुक सकता है। इस कदम का उद्देश्य थर्ड पार्टी बीमा को बढ़ावा देना और सड़क दुर्घटनाओं में तीसरे पक्ष के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य करने के लिए बड़े कदम
वित्त मंत्रालय ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सुझाव दिया है कि थर्ड पार्टी बीमा के बिना किसी भी वाहन को सड़क पर चलने की अनुमति न दी जाए। साथ ही, यह प्रस्तावित किया गया है कि केवल उन वाहनों को पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और फास्टैग उपलब्ध कराया जाए, जिनके पास वैध थर्ड पार्टी बीमा हो।

सेवाओं को बीमा से जोड़ा जाएगा
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही इन नियमों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इसके तहत, वाहन संबंधी सेवाओं को बीमा से जोड़ा जाएगा।

सख्त अनुपालन के लिए निर्देश
एक अधिकारी ने बताया कि पेट्रोल पंप और अन्य सेवाओं को इस तरह से जोड़ा जाएगा कि केवल वैध बीमा वाले वाहनों को ही ये सुविधाएं मिलें। इसके साथ ही, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे।

क्यों जरूरी है थर्ड पार्टी बीमा?
मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। यह बीमा सड़क दुर्घटनाओं में किसी तीसरे पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इसे कम से कम तीन महीने के लिए कराया जाना जरूरी है।

चार दिन काम, तीन दिन छुट्टी! यहां हफ्ते में करना पड़ेगा सिर्फ 4 दिन काम, कर्मचारियों के लिए खुशी की खबर

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पूरी दुनिया में काम करने के पैटर्न को लेकर विभिन्न बहसें चल रही हैं, लेकिन ब्रिटेन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वहां अब 200 से अधिक कंपनियों ने हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करने का नियम लागू किया है, जिसमें किसी प्रकार की सैलरी कटौती नहीं की जा रही। यह कदम कर्मचारियों के जीवन स्तर को सुधारने और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्या है यह नया नियम?
यूके में अब तक करीब 200 कंपनियां हफ्ते में 4 दिन काम करने के नियम को लागू कर चुकी हैं। यह कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों से हैं, जैसे मार्केटिंग, विज्ञापन, आईटी, प्रौद्योगिकी, चैरिटी, और सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट। इन कंपनियों ने बिना सैलरी कम किए, कर्मचारियों को एक अतिरिक्त दिन की छुट्टी देने का निर्णय लिया है। यह कदम 4 डे वीक फाउंडेशन के सहयोग से लिया गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को सुधारना है।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?
इसी दौरान, 4 डे वीक फाउंडेशन के अभियान निदेशक जो राइल ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि 9-5 का काम करने का पैटर्न अब पुराने समय का हिस्सा बन चुका है। राइल के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में दुनिया बदल चुकी है, और अब उस समय के काम के ढांचे में बदलाव की आवश्यकता है। उनका मानना है कि हफ्ते में 4 दिन काम करने से न केवल कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टी मिलती है, बल्कि यह उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। 4 डे वीक के समर्थकों का कहना है कि 5 दिन काम करने की प्रणाली ने कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया है। कर्मचारियों को अधिक खाली समय मिलने से वे अपने परिवार और व्यक्तिगत जीवन को ज्यादा प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे उनका काम के प्रति समर्पण भी बढ़ेगा और कार्य में उत्पादकता में सुधार होगा। यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह कंपनियों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ कर्मचारियों की संतुष्टि और आकर्षण भी बढ़ेगा।

कौन-कौन सी कंपनियां हैं इस बदलाव के समर्थन में?
यह बदलाव सबसे पहले मार्केटिंग, विज्ञापन, और प्रेस रिलेशन से जुड़ी कंपनियों ने शुरू किया था। इसके बाद, तकनीकी कंपनियां, आईटी और सॉफ़्टवेयर फर्मों ने भी इसे अपनाया। इन कंपनियों में प्रमुख नाम लंदन की 59 कंपनियां हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान घर से काम करने का पैटर्न लागू होने के बाद कर्मचारियों ने ऑफिस में लौटने के लिए और भी अधिक विरोध दिखाया, जिससे यह बदलाव और भी जरूरी हो गया।

कोविड-19 के बाद कैसे हुआ वर्क कल्चर में बदलाव
कोविड-19 महामारी के दौरान घर से काम करने के अनुभव ने कर्मचारियों के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया। जबकि कुछ बड़ी कंपनियां जैसे जेपी मॉर्गन चेस और अमेज़ॅन ने कर्मचारियों से सप्ताह में पांच दिन ऑफिस आने का आदेश दिया, वहीं कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और घर से काम करने का अधिकार मांगने लगे। ऐसे में, हफ्ते में 4 दिन काम करने का विचार और भी प्रासंगिक हो गया।

जीवन की गुणवत्ता में सुधार 
इस बदलाव के समर्थन में लेबर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी आवाज उठाई है, हालांकि यह अभी तक पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं बनी है। इस बदलाव का विशेष रूप से समर्थन युवा कर्मचारियों ने किया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 18 से 34 साल के कर्मचारियों का मानना है कि हफ्ते में 4 दिन काम करने का नियम अगले कुछ वर्षों में आदर्श बन जाएगा। लगभग 78 प्रतिशत युवा इस बदलाव के पक्षधर हैं, और उनका मानना है कि यह उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
युवाओं का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, चार दिन काम करने से कर्मचारियों को मानसिक शांति मिलती है, जिससे उनकी उत्पादकता और समग्र जीवन संतुलित होता है। इस नए कार्य सप्ताह के परिणामस्वरूप, कर्मचारियों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लाभ मिल सकते हैं और वे बेहतर कार्य प्रदर्शन कर सकते हैं।

कंपनियों को कैसे फायदा हो रहा है?
कंपनियों के लिए यह कदम न केवल कर्मचारियों को खुश रखने का तरीका है, बल्कि यह उनकी कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी सुधार कर रहा है। कर्मचारियों के लिए काम करने का यह नया तरीका उनकी ताजगी को बनाए रखता है, जिससे वे काम में ज्यादा फोकस और बेहतर परिणाम देने में सक्षम होते हैं।

क्या भविष्य में यह बदलाव और देशों में लागू हो सकता है?
यह कदम निश्चित रूप से कर्मचारियों की भलाई और कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाने के लिए एक सकारात्मक पहल है। यूके के उदाहरण को देखते हुए, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बदलाव अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है, खासकर उन देशों में जहां कार्य संस्कृति अभी भी पुराने तरीके से चल रही है। यूके में 200 से ज्यादा कंपनियों ने हफ्ते में 4 दिन काम करने का नियम लागू किया है। यह निर्णय कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। 4 डे वीक फाउंडेशन द्वारा समर्थित इस कदम को विशेष रूप से युवा कर्मचारियों द्वारा सराहा जा रहा है। इस बदलाव के कारण कंपनियों को भी उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।

कहीं आप भी त नहीं ‘संगम’ की जगह कर आए ‘यमुना स्नान’? इन घाटों पर डुबकी लगाए बिना अधूरी है महाकुंभ यात्रा

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम, महाकुंभ 2025 में रोजाना करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर पहुंच रहे हैं। अब तक 140 मिलियन से अधिक लोग संगम पर डुबकी लगा चुके हैं। हालांकि इनमें से बहुत से लोग जाने-अनजाने यमुना को गंगा घाट समझकर वहीं डुबकी लगा रहे हैं। अगर आप भी महाकुंभ जाने की योजना बना रहे है तो आप भी यह गलती करने से बचें नहीं तो आपका वहां जाना व्यथर् हो जाएगा। चलिए विस्तार से समझिए इन घाटों के बारे में

महाकुंभ में शाही स्नान क्या होता है

शाही स्नान(राजयोगी स्नान) कुंभ मेले का सबसे महत्वपूर्ण स्नान होता है। यह उन खास तिथियों पर होता है जब अखाड़ों (संत समाजों) के साधु-संत सबसे पहले पवित्र स्नान करते हैं। शाही स्नान में नागा साधु, महामंडलेश्वर और अन्य संत अपनी परंपराओं के अनुसार स्नान करते हैं। यह सबसे पवित्र स्नान माना जाता है।शाही स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लाखों श्रद्धालु इस दिन संगम स्नान करने आते हैं।

प्रयागराज के प्रमुख घाट और उनका महत्व

संगम घाट:- यही वह पवित्र स्थान है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं। यहां सबसे ज्यादा श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। शाही स्नान भी यहीं होता है।

छतनाग और दशाश्वमेध घाट: त्रिवेणी घाट के अलावा इन दो घाटों पर भी आप डुबकी लगा सकते हैं, लेकिन ये घाट थोड़े दूर हैं, जिस वजह से श्रद्धालु बस त्रिवेणी संगम घाट भी पर ही डुबकी लगाने के लिए आते हैं।

अरैल घाट: यह संगम के पार स्थित है, जहां से अखाड़ों के साधु स्नान के लिए संगम की ओर जाते हैं। यहां कई आश्रम और संतों के डेरा होते हैं।

किला घाट: यह घाट प्रयागराज किले के पास स्थित है और काफी ऐतिहासिक है। यहां से संगम जाने के लिए कई नावें उपलब्ध होती हैं।

अक्षयवट घाट: यहां स्थित अक्षयवट (अमर वृक्ष)बहुत ही पवित्र माना जाता है। संगम के करीब होने के कारण यह स्नान के लिए उपयुक्त है।

यमुना घाट:- यह घाट प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे स्थित होते हैं। यहां गंगा नहीं मिलती, इसलिए इसे संगम स्नान की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

संगम घाट पर शाही स्नान कैसे करें?

शाही स्नान के दिन सबसे पहलेनागा साधु और अखाड़ों के संत स्नान करते हैं। आम श्रद्धालु उनके स्नान के बाद स्नान कर सकते हैं। शाही स्नान के दिन सूर्योदय से पहलेस्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। साधु-संतों के बाद ही आम भक्तों को स्नान की अनुमति मिलती है। महिलाओं के लिए अलग स्नान क्षेत्र बनाए जाते हैं। संगम तक पहुंचने के लिएनाव की सुविधा उपलब्ध होती है।

महाकुंभ 2025 के प्रमुख शाही स्नान तिथियां

पहला शाही स्नान (मकर संक्रांति) -14 जनवरी 2025

दूसरा शाही स्नान (मौनी अमावस्या)- 29 जनवरी 2025

तीसरा शाही स्नान (बसंत पंचमी)- 3 फरवरी 2025

चौथा शाही स्नान (माघी पूर्णिमा)- 12 फरवरी 2025

पांचवां शाही स्नान (महाशिवरात्रि)-26 फरवरी 2025

Air India की मुंबई-दुबई फ्लाइट में 5 घंटे तक फंसे यात्री, बिना AC के केबिन में मच गया हंगामा

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 मुंबई से दुबई जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में यात्रियों को 5 घंटे तक खराब AC के बीच कैद रहना पड़ा। इस दौरान, यात्री जिनमें छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे जो घुटन से परेशान हो गए। घटना का वीडियो एक यात्री ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब वायरल हो गया है। इस वीडियो को अब तक 28 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं।

यात्री ने अपनी आपबीती इंस्टाग्राम पर लिखते हुए कहा, “सुबह 8:25 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट 5 घंटे की देरी से रवाना हुई। इस दौरान एसी काम नहीं कर रहा था, और क्रू ने कोई राहत नहीं दी। जब यात्रियों ने दबाव बनाया, तब जाकर दरवाजे खोले गए और उन्हें बाहर निकलने दिया गया।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि यात्री अपनी सीट छोड़कर केबिन के सामने इकट्ठा हो गए। एक व्यक्ति को जोर से चिल्लाते हुए सुना गया, “हमें आप पर भरोसा नहीं है। हम अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकते। हमें यहां से जाने दो।” कुछ यात्री ओवरहेड बिन पर हाथ मारते नजर आए, जबकि कई अन्य लोग क्रू से दरवाजा खोलने की गुहार लगा रहे थे। इस दौरान, फ्लाइट क्रू ने इंटरकॉम पर यात्रियों से कहा, “एयरोब्रिज कनेक्ट करना होगा। कृपया समझने की कोशिश करें।”

वीडियो पोस्ट करने वाले यात्री ने यह भी आरोप लगाया कि फ्लाइट के कप्तान ने एक बार भी कॉकपिट से बाहर आकर यात्रियों को स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी। उन्होंने लिखा, “कप्तान ने पूरे 5 घंटे तक यात्रियों को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। यह उच्च समय है कि उड्डयन मंत्रालय ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करे। हमेशा यात्रियों को ही क्यों भुगतना पड़ता है?”

यह वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

  • एक यूजर ने लिखा, “घंटों तक यात्रियों को बिना एसी के रोकना अमानवीय है। ऐसे मामलों पर सख्त कानून होने चाहिए। देरी होने पर यात्रियों को उतार देना चाहिए।”
  • दूसरे ने कहा, “5 मिनट बिना एसी के रहना मुश्किल है। यह सोचकर ही डर लगता है कि यात्रियों ने घंटों यह घुटन कैसे झेली होगी।”
  • कुछ ने क्रू का बचाव भी किया। एक यूजर ने लिखा, “एयर इंडिया के हाथ में सब कुछ नहीं होता। एयर ट्रैफिक कंट्रोल और कस्टम अधिकारी यात्रियों को उतारने की अनुमति देते हैं। क्रू अपनी तरफ से सिर्फ अपना काम कर रहा था।

यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए अबतक Online System क्यों नहीं की गई? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया सवाल?

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक ऑनलाइन शिकायत प्रणाली बनाने पर विचार करने को कहा है जिससे यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराना आसान हो सके। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को पुलिस स्टेशन जाने की बाध्यता खत्म होनी चाहिए। इसके लिए एक केंद्रीय एजेंसी बनाई जाए जो शिकायतों को ऑनलाइन प्राप्त कर संबंधित थानों तक भेज सके। केंद्र सरकार को इस मामले पर 6 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

SCWLA की याचिका और मुख्य मांगें

महिला वकीलों के संगठन ‘सुप्रीम कोर्ट वुमेन लॉयर्स एसोसिएशन’ (SCWLA) ने महिलाओं की सुरक्षा पर गाइडलाइंस बनाने और कानूनों में सुधार की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में 20 प्रमुख मांगें रखी गई हैं जिनमें शामिल हैं:

➤ सार्वजनिक स्थानों और इमारतों में सीसीटीवी कैमरे लगाना।
➤ पोर्नोग्राफिक सामग्री पर सख्त रोक लगाना।
➤ रेप के दोषियों के लिए कठोर सजा, जैसे बधियाकरण (प्रजनन अंग को अयोग्य बनाना)।
➤ ओला-उबर और अन्य परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को महिला सुरक्षा का प्रशिक्षण देना।
➤ OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री को नियंत्रित करना।

16 दिसंबर 2024 को याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2024 को याचिका को विचार के लिए स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कुछ मांगें कठोर हैं लेकिन उनमें कई व्यावहारिक बातें भी शामिल हैं जिन पर विचार करना जरूरी है।

बेंगलुरु की घटना पर जजों की चिंता

27 जनवरी को इस याचिका पर फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान SCWLA की अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पवनी ने जजों को बेंगलुरु में हुई एक घटना के बारे में बताया।

➤ उन्होंने बताया कि उबर के जरिए बुक किए गए एक ऑटोरिक्शा में महिला के साथ दुर्व्यवहार हुआ।
➤ महिला और उसके पति को शिकायत दर्ज कराने के लिए कई थानों के चक्कर लगाने पड़े।
➤ इस पर जजों ने चिंता जताई और कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं बनी है?
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे काफी व्यापक हैं। इस पर जजों ने कहा कि तकनीकी बातों के बावजूद याचिका में महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

महिला सुरक्षा को लेकर SCWLA की मुख्य बातें

➤ छोटे शहरों में अनदेखी अपराधों को रोकना: याचिका में कहा गया कि बड़े शहरों के अपराध चर्चा में आ जाते हैं लेकिन छोटे स्थानों पर होने वाले अपराधों को दबा दिया जाता है।
➤ महिला सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश: कोर्ट से कानूनों में सुधार और सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई।
➤ सुरक्षा गार्ड की वेरिफिकेशन: केवल प्रशिक्षित और वेरिफाइड गार्ड को ही नियुक्त किया जाए।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 6 सप्ताह के भीतर अलग-अलग मंत्रालयों से विचार लेकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए जिससे महिलाएं बिना किसी झिझक के शिकायत दर्ज कर सकें।

यह मामला एक बार फिर महिला सुरक्षा की गंभीरता और इसके लिए उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर ध्यान आकर्षित करता है।

इस देश में मंत्रियों की सैलरी सबसे ज्यादा, लेकिन GDP गिरने पर होती है कटौती, जानें कैसे?

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सिंगापुर दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मंत्रियों की सैलरी सबसे अधिक है। यहां के वेतन निर्धारण प्रक्रिया में एक खास तंत्र काम करता है, जो मंत्रियों की सैलरी को देश की जीडीपी और उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित करता है। इस सिस्टम को पारदर्शिता और भ्रष्टाचार से बचने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि मंत्रियों को प्रेरित किया जा सके कि वे अधिक उत्पादक और ईमानदार बने रहें।

जानिए कैसा है सिंगापुर में मंत्रियों की सैलरी का ढांचा
सिंगापुर में मंत्रियों के वेतन का आकलन करने के लिए हर पांच साल में एक समिति बनाई जाती है, जो यह तय करती है कि मंत्रियों को कितनी सैलरी दी जानी चाहिए। यह समिति मंत्रियों के वेतन में परिवर्तन का निर्धारण करती है और इसे संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमोदित करवाती है। इसके अलावा, समिति यह सुनिश्चित करती है कि मंत्री की सैलरी देश की आर्थिक स्थिति के अनुरूप हो।

मंत्रियों के वेतन का निर्धारण मुख्य रूप से दो प्रकार के घटकों पर आधारित होता है:

1. फिक्स्ड कंपोनेंट्स (स्थिर घटक):
– 12 महीने का वेतन: यह सालाना वेतन का हिस्सा होता है, जो मंत्री को सालभर प्राप्त होता है।
– गैर-पेंशन भत्ता: यह भत्ता एक महीने के वेतन के बराबर होता है।
– स्पेशल भत्ता: यह भी एक महीने के वेतन के बराबर होता है और मंत्री की विशेष स्थिति को ध्यान में रखकर दिया जाता है।
– पब्लिक लीडरशिप भत्ता: यह भत्ता दो महीने के वेतन के बराबर होता है, जो सार्वजनिक नेतृत्व के महत्व को दर्शाता है।

2. वेरिएबल कंपोनेंट्स (परिवर्तनीय घटक):
– परफॉर्मेंस बोनस: यह बोनस मंत्री के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित होता है, जिसे प्रधानमंत्री हर मंत्री के काम का मूल्यांकन करने के बाद तय करते हैं। यह बोनस 14 महीने के वेतन के बराबर हो सकता है।
– GDP बोनस: यह बोनस देश की आर्थिक स्थिति, यानी सिंगापुर की जीडीपी पर आधारित होता है। अगर देश की अर्थव्यवस्था अच्छी होती है तो यह बोनस डेढ़ महीने के वेतन के बराबर हो सकता है।

हर पांच साल में की जाती है सैलरी की समीक्षा
सिंगापुर में सैलरी की समीक्षा हर पांच साल में की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मंत्री को मिलने वाली सैलरी देश की अर्थव्यवस्था और अन्य आर्थिक स्थितियों के अनुरूप हो। 2011 में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया था जब सिंगापुर के प्रधानमंत्री की सैलरी को उनके ग्रेड (MR4) से दोगुना कर दिया गया था। उस समय यह निर्णय लिया गया था कि प्रधानमंत्री को MR4 मंत्री के वेतन से दोगुना वार्षिक वेतन मिलना चाहिए। इससे प्रधानमंत्री की सैलरी 2010 में निर्धारित वेतन से 28% कम हो गई थी। हालांकि, इस बदलाव के बाद से प्रधानमंत्री की सैलरी में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है और यह आज भी स्थिर बनी हुई है।

क्या है सिंगापुर में प्रधानमंत्री का वेतन
सिंगापुर के वर्तमान प्रधानमंत्री, लॉरेंस वोंग, दुनिया में सबसे अधिक वेतन पाने वाले नेताओं में शामिल हैं। वे 1.69 मिलियन सिंगापुर डॉलर (लगभग 10.84 करोड़ रुपये) के वेतन के अलावा कई भत्ते भी प्राप्त करते हैं। अगर सभी भत्तों और बोनस को मिलाकर देखा जाए, तो उनका वार्षिक वेतन लगभग 14.11 करोड़ रुपये के बराबर हो जाता है।

GDP घटने पर सैलरी में कटौती
सिंगापुर के मंत्रियों के वेतन का सबसे खास पहलू यह है कि अगर देश की जीडीपी गिरती है या मंत्री का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होता, तो उनकी सैलरी में कटौती हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर मंत्री अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं या देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट आती है, तो उनका वेतन 1.1 मिलियन सिंगापुर डॉलर (लगभग 7 करोड़ रुपये) से भी कम हो सकता है। इस प्रणाली के कारण सिंगापुर के मंत्री अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने के लिए प्रेरित होते हैं और उन्हें यह सुनिश्चित करने की जरूरत होती है कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखें।

जानिए क्या है सिंगापुर की सैलरी समीक्षा प्रणाली का महत्व
सिंगापुर की सैलरी समीक्षा प्रणाली यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि मंत्री न केवल उच्च वेतन प्राप्त करें, बल्कि उनका वेतन देश की आर्थिक स्थिति और उनके प्रदर्शन के अनुरूप हो। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि मंत्री देश की जनता की भलाई के लिए काम करें और भ्रष्टाचार से बचें, क्योंकि उन्हें उच्च वेतन और भत्तों का ऑफर दिया जाता है, जो उनके अच्छे काम और देश की आर्थिक प्रगति पर निर्भर करते हैं।

अजीबोगरीब घटना: 35 वर्षीय महिला ने निगला Mobile Phone, इलाज के दौरान मौत!

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आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां मनोरोग से पीड़ित एक महिला ने कीपैड मोबाइल फोन निगल लिया। वहीं डॉक्टरों ने सर्जरी कर फोन निकाला लेकिन दिल की खराब स्थिति और ऑक्सीजन की कमी के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

आमतौर पर हम बच्चों के कुछ निगलने से हादसे होने की खबरें सुनते हैं लेकिन यहां एक 35 वर्षीय महिला की मौत की वजह बनी एक मोबाइल फोन।

क्या है मामला?

राजमुंदरी की रहने वाली पेनुमल्ला राम्या स्मृति जो मनोरोग संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं ने कीपैड वाला मोबाइल फोन निगल लिया। यह घटना तब सामने आई जब उनके रिश्तेदार ने उनका फोन ढूंढना शुरू किया। जब रिश्तेदार ने स्मृति से फोन के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने फोन निगल लिया है।

कैसे हुई सर्जरी?

स्मृति को तुरंत राजमुंदरी के सरकारी जनरल अस्पताल ले जाया गया। ईएनटी डॉक्टरों ने जांच में पाया कि फोन उनके वॉयस बॉक्स के ऊपर फंसा हुआ है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर फोन को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

क्या हुआ ऑपरेशन के बाद?

ऑपरेशन के दौरान उनका दिल रुक गया। डॉक्टरों ने तुरंत CPR देकर उनकी धड़कन को दोबारा चालू कर दिया लेकिन ऑपरेशन के बाद उनके दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो गई जिससे उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित हुई। उनका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट असामान्य रूप से बढ़ गया जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

काकीनाडा रेफर और मौत

हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए काकीनाडा के सरकारी जनरल अस्पताल (GGH) रेफर कर दिया। जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी हालत और खराब हो गई और उनकी मौत हो गई।

डॉक्टरों का सुझाव

➤ मनोरोग से जूझ रहे मरीजों की विशेष देखभाल करें।
➤ ऐसे मरीजों को अकेला न छोड़ें और उनकी आदतों पर नजर रखें।
➤ समय रहते इलाज कराना जरूरी है।

वहीं यह घटना बताती है कि मनोरोग को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में परिवार और समाज को मिलकर मरीज का साथ देना चाहिए।

फिर बदला स्कूलों का समय, जानें अब क्या होगी Timing?

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पिछले कुछ दिनों से मौसम साफ रहने और धूप खिलने के बाद अब शहर के सभी स्कूल मंगलवार से पुराने शेड्यूल के अनुसार खुलेंगे। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने भी मौसम को देखते हुए समय में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।

सिंगल शिफ्ट स्कूलों के बच्चों को सुबह 8:20 बजे कैंपस में पहुंचना होगा और दोपहर 2:20 बजे छुट्टी होगी। अध्यापकों को सुबह 8:10  से दोपह 2:30 बजे तक कैंपस में रहना होगा। डबल शिफ्ट के बच्चों के लिए समय दोपहर 1.15 बजे तक तथा दूसरी शिफ्ट के बच्चों के लिए समय दोपहर 12.45 से शाम 5 बजे तक रहेगा। अध्यापकों के लिए डबल शिफ्ट में पहली शिफ्ट सुबह 7.50 बजे से दोपहर 2.10 बजे तक और दूसरी शिफ्ट सुबह 10.50 बजे से शाम 5.10 बजे तक होगी।

PM Narendra Modi फरवरी में जा सकते हैं अमेरिका, व्हाइट हाउस में होगी मुलाकात: Trump

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में अमेरिका का दौरा कर सकते हैं और इस दौरान उनका व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात करने का कार्यक्रम हो सकता है। यह जानकारी ट्रंप ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में दी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से लंबी बातचीत की और वह अगले महीने संभवत: व्हाइट हाउस आएंगे।ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अच्छे रिश्ते हैं और यह मुलाकात दोनों देशों के बीच इस दोस्ती को और भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। ट्रंप के अनुसार, इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के साथ अमेरिका के संबंधों को और विस्तार देने पर चर्चा की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप और पीएम मोदी के बीच संवाद हुआ हो। इससे पहले, 7 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। इस बातचीत में ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना करते हुए कहा था कि वह “शानदार शख्स” हैं और पूरी दुनिया उन्हें पसंद करती है। ट्रंप ने भारत को “शानदार देश” बताते हुए यह भी कहा कि वह पीएम मोदी और भारत को सच्चा दोस्त मानते हैं। इसके साथ ही, दोनों नेताओं ने यह भी चर्चा की थी कि भारत और अमेरिका मिलकर वैश्विक शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए काम करेंगे। ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और साझेदारी आधारित संबंध हैं, जिनका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिलेगा।

पीएम मोदी ने इस बातचीत के बाद एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने ट्रंप को दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी थी और कहा था कि भारत-अमेरिका संबंध और भी मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच एक मजबूत और स्थायी साझेदारी की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा को लेकर कई विश्लेषक यह मानते हैं कि यह दौरा भारतीय और अमेरिकी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत कर सकता है। विशेष रूप से दोनों देशों के व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हो सकती है।

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