Thursday, June 25, 2026
Home Blog Page 1262

मुंबई में ‘निर्भया’ जैसी दरिंदगी, रेप पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में मिले सर्जिकल ब्लेड और पत्थर

मुंबई में एक 20 वर्षीय महिला ने ऑटो चालक द्वारा दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया है। इस घटना से जुड़ा मामला तब सामने आया जब महिला ने राम मंदिर रेलवे स्टेशन, गोरेगांव से पुलिस को संपर्क किया। नालासोपारा, पालघर की रहने वाली इस महिला ने बताया कि एक ऑटो चालक ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

जांच के दौरान महिला ने खुलासा किया कि वह ऑटो चालक के साथ विरार के अर्नाला बीच गई थी। होटल में पहचान पत्र न होने के कारण उन्हें रात बीच पर ही बितानी पड़ी। महिला का आरोप है कि ऑटो चालक ने वहां उसके साथ दुष्कर्म किया और फरार हो गया।

डर के कारण उठाया खतरनाक कदम
महिला ने बताया कि उसे अपने माता-पिता की नाराजगी का डर था। इस डर के कारण उसने एक सर्जिकल ब्लेड और पत्थर अपने प्राइवेट पार्ट में डाल लिए। दर्द असहनीय होने पर उसने पुलिस और मेडिकल सहायता मांगी। डॉक्टरों ने सर्जरी कर इन वस्तुओं को निकाला।

जांच के दौरान कई खुलासे
महिला ने शुरू में दावा किया कि वह अनाथ है। हालांकि, बाद में उसके पिता ने सामने आकर यह दावा झूठा बताया। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि 2023 में महिला ने दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाई थी।

गहन जांच के बाद पुलिस ने आरोपी ऑटो चालक राज रतन को गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया। मामले की जटिलता को देखते हुए पुलिस अब महिला के बयानों और घटना की सच्चाई की जांच कर रही है।

अमूल ने दूध की कीमत घटाई, नई कीमतें हुई जारी

0

देश के प्रमुख डेयरी ब्रांड अमूल ने अपने तीन प्रमुख दूध उत्पादों की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। यह पहला मौका है जब अमूल ने अपने दूध उत्पादों की कीमतों में इस तरह की कटौती की है। अब अमूल गोल्ड, अमूल टी स्पेशल और अमूल फ्रेश के 1 लीटर पाउच की कीमतें 1 रुपये से कम हो गई हैं।

नई कीमतें इस प्रकार हैं:

  • अमूल गोल्ड – ₹66 से घटकर ₹65
  • अमूल फ्रेश – ₹54 से घटकर ₹53
  • अमूल टी स्पेशल – ₹62 से घटकर ₹61

इस कीमत में कटौती से उपभोक्ताओं को रोजाना के खर्चों में थोड़ी राहत मिलेगी, खासकर उन परिवारों को जिनकी दिनचर्या में अमूल का दूध महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कटौती के कारण

यह पहली बार है जब अमूल ने दूध की कीमतों में कटौती की है, खासकर जब पहले दूध की कीमतों में वृद्धि की जा चुकी थी। हालांकि, अमूल ने इस कटौती के पीछे का कोई विशेष कारण नहीं बताया, लेकिन विशेषज्ञ इसे उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया कदम मानते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अमूल ने यह कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए और उपभोक्ताओं के हित में लिया है।

वृद्धि के बाद पहली कटौती

पिछले कुछ महीनों में दूध की कीमतों में वृद्धि हुई थी, जिससे आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय दबाव बढ़ा था। इस कटौती के बाद अमूल के उत्पादों की कीमतों में थोड़ी राहत मिलने से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। अमूल की यह कटौती निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम माना जा रही है, क्योंकि इससे दूध खरीदने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा।

Maharashtra में सफर करना हुआ महंगा, एसटी बसों-रिक्शा और टैक्सियों के किराए में हुई बढ़ोत्तरी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य परिवहन निगम (एसटी) की बसों के टिकटों की कीमतों में 14.97 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। यह वृद्धि आज से प्रभावी हो गई है, जिससे अब एसटी बसों में यात्रा महंगी हो जाएगी। इसके अलावा, रिक्शा और टैक्सियों के किराए में भी 3 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जो 1 फरवरी से लागू होगी।

क्या कहा परिवहन मंत्री ने?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में यह फैसला लिया गया। मंत्री ने कहा, “यह एसटी किराए में वृद्धि पिछले कई सालों से लंबित थी। डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ने के कारण किराया बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। पिछले 3-4 साल से किराया वृद्धि की उम्मीद थी, और अब इसे लागू किया गया है।”

किराए में वृद्धि की वजहें
एसटी बसों के किराए में 14.97 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो आज से लागू हो गई है। वहीं, रिक्शा और टैक्सियों के किराए में 3 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जो 1 फरवरी से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण किराया वृद्धि की यह आवश्यकता महसूस की गई।

DPIIT रिपोर्ट में गुजरात का दबदबा: अप्रैल 2000 से गुजरात में आई कुल FDI इक्विटी इन्फ्लो का 86% पिछले दशक में दर्ज

गांधीनगर, 23 जनवरी: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति का प्रतीक बनकर उभरा है। मजबूत नीतिगत ढांचे, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और वैश्विक निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित रणनीति के साथ, गुजरात ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह में लगातार नए मानक स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निवेशक अनुकूल दूरदर्शी नीतियों की एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है।

हाल ही में दिसंबर 2024 में भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अप्रैल 2000 से लेकर सितंबर 2024 तक गुजरात में आए कुल FDI इक्विटी इन्फ्लो में 86% पिछले एक दशक यानी अप्रैल 2014 से सितम्बर 2024 तक में आया है।

इस आँकड़े को विस्तार से समझें तो गुजरात ने अप्रैल 2000 से मार्च 2014 तक मात्र USD 9.51 बिलियन FDI इक्विटी इन्फ्लो आकर्षित किया, वहीं अप्रैल 2014 से सितंबर 2024 के बीच गुजरात ने लंबी छलाँग लगाते हुए USD 57.65 बिलियन का FDI इक्विटी इन्फ्लो हासिल किया जो पिछले 24 वर्षों में गुजरात में आए USD 67.16 बिलियन FDI इक्विटी इन्फ्लो का 86% है। गुजरात के ये आंकड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य के असाधारण प्रदर्शन और निवेशकों के विश्वास को दर्शाते हैं।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में गुजरात का FDI इक्विटी इन्फ्लो राष्ट्रीय औसत से आगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरणा लेते हुए गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी गुजरात में निवेश अनुकूल नीतियों को लागू करने और व्यापार अनुकूल संपूर्ण माहौल तैयार करने में पूरी तरह सफल दिखाई पड़ रहे हैं। इसे आँकड़ों से समझें तो DPIIT रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में गुजरात में FDI इक्विटी इन्फ्लो में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। यह वित्तीय वर्ष 2023-24 में USD 2.29 बिलियन से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में USD 3.95 बिलियन हो गया, जो 72.5% की वृद्धि दर्शाता है।

वहीं, इसी समयावधि में राष्ट्रीय स्तर में भी FDI इक्विटी इन्फ्लो USD 20.49 बिलियन से बढ़कर USD 29.79 बिलियन हो गया है, जो 45.4% की वृद्धि दर्शाता है। इस प्रकार आँकड़ों से स्पष्ट है कि गुजरात ने राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक FDI इक्विटी इन्फ्लो हासिल कर राज्य को निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।

वर्ष 2000 से 2024 तक भारत के कुल FDI इक्विटी इन्फ्लो में गुजरात की हिस्सेदारी 9.5%

DPIIT रिपोर्ट में यह विस्तार से बताया गया है कि कैसे अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक, भारत में कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का प्रवाह USD 1.03 ट्रिलियन तक पहुंचा, जो देश के आर्थिक विकास और वैश्विक निवेशकों के भारत में लगातार बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। वहीं, इसी आँकड़े में FDI इक्विटी इन्फ्लो को समझें तो भारत में पिछले 24 वर्षों में USD 708.65 बिलियन FDI इक्विटी इन्फ्लो आया है।

इस व्यापक FDI इक्विटी इन्फ्लो में गुजरात का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जहां राज्य ने कुल USD 67.16 बिलियन का FDI इक्विटी इन्फ्लो हासिल किया, जो इस समयावधि में भारत में आए FDI का 9.5% है। विशेष रूप से, पिछले एक दशक यानी अप्रैल 2014 से सितंबर 2024 के बीच के आँकड़ों को देखें तो इस समयावधि में गुजरात ने रिकॉर्ड स्तर पर USD 57.65 बिलियन का FDI इक्विटी इन्फ्लो हासिल किया, जो इस अवधि के दौरान देश में आए USD 492.27 बिलियन FDI इक्विटी इन्फ्लो का 11.7% है।

गुजरात की FDI सफलता: नीतियों, बुनियादी ढांचे और वैश्विक जुड़ाव का प्रभावशाली समन्वय

गुजरात की सफलता राज्य की नीतिगत स्थिरता, नवाचार और व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों का परिणाम है। राज्य ने न केवल पारंपरिक उद्योगों, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और IT/ITeS जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित किया है, जिससे यह वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित हुआ है। गुजरात का कुशल कार्यबल और वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट जैसे मंचों ने इसे एक प्रमुख निवेश गंतव्य बना दिया है। इन सभी कारकों ने गुजरात को विदेशी निवेश का केंद्र बना दिया है।

बाजार में तेज उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स 329 अंक टूट कर 76,190 पर बंद

0

कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार (24 जनवरी) को भारी उतार-चढ़ाव के बीच लाल निशान पर बंद हुआ बाजार। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 329 अंक की गिरावट के साथ 76,190 के स्तर पर जबकि 113 अंक टूटकर 23,092 के स्तर पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में तेजी
  • एशियाई बाजार में जापान के निक्‍केई में 0.59% और कोरिया के कोस्पी में 0.86% की तेजी है। वहीं चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स 0.85% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है।
  • NSE के डेटा के अनुसार, 23 जनवरी को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 5,462.52 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस दौरान घरेलू निवेशकों (DIIs) ने 3,712.55 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
  • 23 जनवरी को अमेरिका का डाओ जोंस 0.92% की तेजी के साथ 44,565 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 0.53% चढ़कर 6,118 पर बंद हुआ। नैस्डैक इंडेक्स में 0.22% की तेजी रही।
कल बाजार में रही थी तेजी

इससे पहले कल यानी 23 जनवरी को सेंसेक्स 115 अंक की तेजी के साथ 76,520 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 50 अंक की बढ़त रही, ये 23,205 पर बंद हुआ था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 में तेजी और 12 में गिरावट देखने को मिली थी। IT और ऑटो शेयर्स में बढ़त थी। वहीं FMCG और बैंकिंग शेयर्स में गिरावट थी।

भिंड में गोली चलने से फैली सनसनी, पुरानी रंजिश को लेकर चचेरे भाई पर फायरिंग

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में जनजारी पुरा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर नारायण सिंह गुर्जर एवं उनके बेटे पिंटू ने अपने चचेरे भाई रामवीर को गोली मार दी यह घटना पावई थाना क्षेत्र की है। पुराने विवाद के चलते यह फायरिंग की गई है जिसमें युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मेहगांव में रामवीर स्कूल चलाता था। रामवीर अपने गांव जनजारी पुरा पत्नी के साथ पूजा करने आया था।

नारायण सिंह गुर्जर एवं उनके बेटे पिंटू ने रामवीर को गोली मार दी। परिवार के लोग तत्काल उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने घायल रामवीर को ग्वालियर रेफर कर दिया। ग्वालियर पहुंचते ही रामवीर सिंह की मौत हो गई। घटना की सूचना पावई थाना पुलिस को मिली तो थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है।  पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश में जुट गई है।

Republic Day 2025 : गणतंत्र दिवस की परेड में मध्य प्रदेश की झांकी में दिखेगी ‘प्रोजेक्ट चीता’ की झलक

इस साल नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के लिए मध्य प्रदेश की झांकी ‘चीता पुनर्वास परियोजना’ पर आधारित होगी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। गौरतलब है कि देश में सात दशक पहले चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। उनकी आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए सितंबर 2022 और फरवरी 2023 में नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में लाए गए थे। मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक संजय सक्सेना ने बताया कि झांकी का विषय ‘चीता – भारत का गौरव’ रखा गया है। इसमें 10 से अधिक फुर्तीले जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में प्रदर्शित किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश चीता पुनर्वास परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि को प्रदर्शित कर रहा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या अब 24 हो गई है।” सक्सेना के बताया कि इस साल 15 राज्यों की झांकियां गणतंत्र दिवस परेड के लिए चयनित हुई हैं, जिसमें मध्य प्रदेश की झांकी भी शामिल है।

नयी दिल्ली से एक अधिकारी ने बताया कि पिछले साल मध्य प्रदेश की झांकी का विषय ‘महिला सशक्तीकरण’ था। उन्होंने बताया कि लगातार दूसरे साल राज्य की झांकी का चयन इस भव्य समारोह के लिए किया गया है। दुनिया के सबसे तेज़ दौड़ने वाले जानवर चीता को साल 1952 में भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। साल 1947 में वर्तमान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले (तब मध्य प्रदेश का हिस्सा) में आखरी चीते की मौत हो गयी थी। अधिकारियों के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अभी 24 चीते हैं, जिनमें 12 शावक शामिल हैं।

इंदौर में भिक्षा देने वाले शख्स के खिलाफ FIR दर्ज, भीख मांगने वाली महिला पर भी हुई कार्रवाई

इंदौर को भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर आशीष सिंह ने लगातार अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत भिक्षा लेने और देने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी के तहत भिक्षा लेने और देने के दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

PunjabKesari

कलेक्टर आशीष सिंह ने इंदौर में भिक्षा लेने और देने दोनों को प्रतिबंधित किया गया है। कलेक्टर आशीष सिंह ने गुरुवार को बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर एक व्यक्ति के खिलाफ भिक्षा देना का मामला दर्ज हुआ है जबकि एक बुजुर्ग महिला के बेटे खिलाफ लगातार भिक्षावृत्ति करने पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।

दरअसल महिला के बेटे ने पूर्व में जिला प्रशासन को एक शपथ पत्र दिया था जिसमें उसने अपनी मां से कभी भिक्षावृत्ति नहीं कराने की बात की थी लेकिन महिला तीसरी बार भिक्षा मांगते हुए पकड़ी गई है। फिलहाल जिला प्रशासन की सख्ती के बाद शहर में भिक्षावृत्ति के केस में कमी देखने को मिल रही है।

MP में पहली बार हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट, CM मोहन यादव ने बताया ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने चिकित्सा सेवाओं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहली बार सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिये चिकित्सकीय टीम को बधाई दी हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य विभाग और नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर और एम्स भोपाल के चिकित्सीय स्टाफ की सजगता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है। प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने प्रक्रिया में शामिल डॉक्टरों, सहयोगी स्टाफ और पुलिस प्रशासन को बधाई दी है, जिनकी मेहनत और तत्परता से यह संभव हो पाया। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मरीज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

PunjabKesari

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि इस प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर और पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा का उत्कृष्ट उपयोग किया गया। इस जनहितैषी सेवा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, प्रशासन की सजगता और तालमेल ने ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अंगों को समय पर पहुंचाने का कार्य संभव हो सका। जबलपुर, भोपाल और इंदौर में तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए, जो प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है।

परिवारजनों का उदार और संवेदनशील निर्णय सराहनीय और अनुकरणीय

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सागर जिले के ग्राम मानक्याई निवासी 61 वर्षीय बलिराम कुशवाहा के परिवारजनों द्वारा अंगदान की पहल को महान और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि बलिराम कुशवाहा के परिवारजनों ने इस कठिन समय में जो उदार और संवेदनशील निर्णय लिया है, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी है। उन्होंने परिवारजनों की परोपकारिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका यह कदम एक नई जिंदगी देने का अद्भुत उदाहरण है और मानवता की सेवा का प्रतीक है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने समस्त प्रदेशवासियों से इस महान कार्य से प्रेरणा लेने और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की है।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा का उपयोग गंभीर मरीजों के परिवहन के साथ इस प्रकार की आपातकालीन और महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए भी किया जा रहा है। यह सेवा हमारी स्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक सशक्त बना रही है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता ही नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक नई आशा का संचार करती है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकीय सेवाओं के प्रदाय में एक महत्वपूर्ण सोपान है।

जबलपुर में ब्रेन डेड मरीज की सूचना मिलते ही राज्य शासन ने तुरंत कार्रवाई की। एम्स भोपाल के डॉक्टरों की एक टीम रातों-रात जबलपुर पहुंची और अंग रिट्रीवल की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस पूरी प्रक्रिया में जबलपुर, भोपाल और इंदौर में तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। पुलिस और चिकित्सा विभाग ने बेहतरीन समन्वय से अंगों का समय पर परिवहन सुनिश्चित हुआ। ब्रेन डेड मरीज का हृदय ग्रीन कॉरिडोर और एयर एम्बुलेंस के माध्यम से जबलपुर से भोपाल लाया गया। एम्स भोपाल में इस हृदय का सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया। लीवर को हेलीकॉप्टर और वायुयान के माध्यम से इंदौर स्थित चोइथराम अस्पताल भेजा गया। लीवर को पहले हेलीकॉप्टर से भोपाल हवाई अड्डे लाया गया और वहां से वायुयान से इंदौर पहुंचाया गया। चोइथराम अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया जारी है।

बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा हरियाणा, जुलाई 2028 में शुरू होगी न्यूक्लियर प्लांट की पहली यूनिट

0

हरियाणा के फतेहाबाद में वर्ष 2009 में शुरू हुई उत्तर भारत के पहले न्यूक्लियर पॉवर प्लांट परियोजना के कार्य में एक बार फिर से तेजी आई है। तकनीकी दिक्कतों के चलते निर्धारत समय में निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण यह परियोजना कईं साल पीछे हो गई थी, लेकिन अब कार्य में आई तेजी से जल्द ही इस परियोजना के पूरा होने के आसार है। फतेहाबाद के गोरखपुर में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के स्थापित होने में सबसे बड़ी बाधा उसकी प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी में काले हिरणों से खड़ी हुई थी।
गांव बड़ोपल में साइट पर काले हिरण मिलने से वन्यजीव संस्थान देहरादून और हरियाणा वन्यजीव विभाग ने आपत्ति जताते हुए क्षेत्र को परियोजना के लिए अनुपयुक्त करार देते हुए इसे किसी अन्य जगह स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। इसके बाद प्लांट की आवासीय कॉलोनी के लिए सेक्टर-6 एचएसवीपी अग्रोहा में 194 एकड़ वैकल्पिक भूमि का आवंटन किया गया। वहीं, कोरोना काल भी परियोजना में देरी का बड़ा कारण रहा है। अब सभी तरह की बाधाओं को लगभग पार कर लिया गया है और इसके निर्माण में तेजी लाई जा रही है।

चरणबद्ध तरीके से पूरे होंगे चारों चरण

यह परियोजना चार यूनिटों में बंटी है। 2800 मेगावाट वाली इस परियोजना की 700 मेगावाट की पहली यूनिट का व्यावसायिक संचालन जुलाई 2028 में शुरू होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद दूसरी यूनिट दिसंबर 2028, तीसरी यूनिट जुलाई 2029 और चौथी यूनिट जुलाई 2030 तक चालू होने की योजना है। पूरी परियोजना के पूर्ण रूप से संचालन में आने के बाद हरियाणा को कुल उत्पादित बिजली का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। अगर यह पर्यावणीय और तकनीकी समस्या आड़े नहीं आती तो यह परियोजना की पहली यूनिट जुलाई 2018, दूसरी दिसंबर 2018, तीसरी जुलाई 2019 और चौथी यूनिट जुलाई 2020 में शुरू हो जाती।

चुनौतियों को पार करने के बाद आगे बढ़ी परियोजना

न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के निर्माण के लिए हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम (एचपीजीसीएल) को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया था। परियोजना के लिए गोरखपुर में 1503 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया। इसे सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए 16 जुलाई 2012 को राज्य स्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय समिति का गठन किया गया। यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में काम करती है और परियोजना से जुड़े मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

अब तक आईडीसीसी की करीब 10 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें परियोजना से संबंधित कई समस्याओं का समाधान किया गया है। हालांकि परियोजना को कई पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। परियोजना की देरी के मुख्य कारणों में पर्यावरणीय चिंताएं और स्थानांतरण की प्रक्रिया शामिल रही है। बावजूद इसके अब परियोजना की प्रगति को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई है।

हरियाणा के बिजली हालात में यह रहेगी प्लांट की भूमिका

हरियाणा वर्तमान में देश के अन्य न्यूक्लियर पॉवर प्लांट्स से बिजली प्राप्त कर रहा है। इसमें 44.25 मेगावाट रावतभट्टा न्यूक्लियर पॉवर स्टेशन, 27.98 मेगावाट नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र और 25 मेगावाट अन्य न्यूक्लियर स्रोतों से शामिल हैं। राज्य की कुल स्थापित बिजली क्षमता 14943.92 मेगावाट है। इसका कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) लगभग 6.7 प्रतिशत है। गोरखपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट, जिसे न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा संचालित किया जा रहा है। राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्थायी रूप से पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। एनपीसीआईएल देश की सबसे बड़ी न्यूक्लियर पॉवर उत्पादन कंपनी है। यह स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा प्रदान करने में अग्रणी है।

ऊर्जा क्षेत्र में आएगा क्रांतिकारी बदलाव

गोरखपुर न्यूक्लियर पॉवर प्लांट हरियाणा के ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। यह परियोजना न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। इसके पूरा होने से हरियाणा न केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होगा बल्कि यह ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। हालांकि परियोजना के पहले चरण के चालू होने में अभी साढ़े तीन साल का समय है, लेकिन इसके भविष्य को लेकर उत्साह और उम्मीदें बनी हुई हैं।

पर्यावरणीय और तकनीकी बाधाओं को पार करते हुए यह परियोजना न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। 2030 तक इसके पूर्ण रूप से संचालित होने पर यह राज्य की बिजली की जरूरतों को स्थाई और विश्वसनीय रूप से पूरा करेगा। परियोजना के पूरा होने पर हरियाणा को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी और यह राज्य के औद्योगिक और सामाजिक विकास में भी बड़ा योगदान देगा।

- Advertisement -

News of the Day