सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि बेटियों को अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो बेटियां अपने माता-पिता को कानूनी रूप से बाध्य कर सकती हैं कि वे उनकी शिक्षा के लिए आवश्यक खर्च वहन करें। कोर्ट के इस आदेश के तहत, माता-पिता को अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार बेटी को शिक्षा का खर्च देने का जिम्मा उठाना होगा।

यह फैसला एक तलाक से जुड़े विवाद में दिया गया था। मामले में एक दंपत्ति 26 साल से अलग रह रहे थे और उनकी बेटी आयरलैंड में पढ़ाई कर रही थी। लड़की ने अपने पिता द्वारा उसके शिक्षा के लिए दिए गए 43 लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे अपनी मां को दिए जा रहे गुजारा भत्ते का हिस्सा नहीं बनाना चाहती थी।
कोर्ट ने इस मामले में कहा कि बेटी को अपनी शिक्षा जारी रखने का मौलिक अधिकार है और इसके लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक राशि प्रदान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि पिता द्वारा दी गई राशि से यह साफ़ है कि वह अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए सक्षम हैं, और बेटी को इस राशि को कानूनी रूप से प्राप्त करने का अधिकार है।
इस फैसले से पहले, जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय दिया था, जिसमें कहा गया था कि बिना वसीयत के मरने वाले व्यक्ति की संपत्ति में बेटी का भी समान अधिकार होगा।



इसी तरह सहायक पोस्टमास्टर ने दोबारा फर्जी अंगूठा लगाकर उसी खाते से 15 हजार रुपए निकाल लिए। इस डाकघर में जंडीर निवासी दरबारा सिंह पुत्र जोगा सिंह का खाता था और गुरजंट सिंह ने जोगा सिंह के खाते से अलग- अलग तारीखों में एंट्री की और निकासी फार्म खुद ही भरा और 1 लाख 43 हजार की रकम निकलवा ली।इस मामले का पता तब चला जब जोगा सिंह नवम्बर 2022 में भारत आ गया क्योंकि वह लंबे समय से इटली में रह रहा था, जिन तारीखों पर गुरजंट सिंह ने जोगा सिंह के खाते से पैसे निकलवाए, जोगा सिंह उन तारीखों पर इटली में था, जिससे यह स्पष्ट है कि गुरजंट सिंह ने उसके फर्जी हस्ताक्षर करके पैसे का गबन किया है। इसी प्रकार कमलजीत कौर पत्नी रविंदर सिंह निवासी जंडीर का भी उसी डाकघर में खाता था और वह 2013 से इटली में हैं। वह आज तक कभी भारत नहीं लौटीं। गुरजंट सिंह ने अलग- अलग तारीखों में विड्रॉल फॉर्म भरकर कमलजीत कौर के खाते से 1 लाख 53 हजार रुपए की रकम निकाल ली। चरणजीत की पत्नी बलविंदर सिंह कौर दसुआ होशियारपुर निवासी का खाता भी इसी जंडीर डाकघर में था।
छात्र ने ऐसा इसलिए किया था ताकि उसकी पहचान छिपी रहे और उसे आसानी से पकड़ा न जा सके। उसने यह योजना बनाई थी कि इससे स्कूलों को खाली किया जाएगा और उसकी परीक्षा रद्द हो जाएगी, जिससे वह परीक्षा से बच सके। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि छात्र ने अपने ईमेल में बम विस्फोट की धमकी दी थी, हालांकि बाद में यह धमकियां पूरी तरह से झूठी पाई गईं। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के स्कूलों और कॉलेजों में इस तरह की धमकियों के मामले सामने आए थे, जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच दहशत फैल गई थी।



नामांकन की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी

पुलिस ने कहा कि यह बरामदगी चाणक्य छात्रावास के एक कमरे से की गई और इस कमरे पर पीएमसीएच के छात्र अजय कुमार ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। मंगलवार देर रात पीएमसीएच के चाणक्य छात्रावास के एक कमरे में मामूली आग लग गई थी जिसपर तुरंत काबू पा लिया गया। पुलिस के अनुसार अस्पताल प्रशासन को मलबा हटाते समय जब एक बैग से 500 रुपये के नोटों के जले हुए बंडल मिले तब उसने थाने को इसकी सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की।