Tuesday, September 22, 2026
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WORLD : ट्रम्प ने यूरोपीय यूनियन की कार-ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया:कहा- व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को घोषणा की है कि अगले हफ्ते से यूरोपीय संघ (EU) से आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।

ट्रम्प का कहना है कि यूरोपीय संघ पहले से तय व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है, इसलिए यह फैसला लिया गया है। हालांकि अगर यूरोपीय कंपनियां अमेरिका में ही कार और ट्रक बनाएंगी, तो उन पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा।

ट्रम्प के मुताबिक, इस समय अमेरिका में कई नई ऑटोमोबाइल और ट्रक फैक्ट्रियां बन रही हैं, जिनमें 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हो रहा है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में इस तरह का निवेश और विकास पहले कभी नहीं देखा गया। इन फैक्ट्रियों में अमेरिकी लोगों को रोजगार मिलेगा।

पिछले साल ट्रम्प और EU से बीच समझौता हुआ था

ट्रम्प जिस व्यापार समझौते की बात कर रहे हैं वो उनके और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच पिछले साल जुलाई में हुआ था। इस समझौते को ‘टर्नबेरी एग्रीमेंट’ कहा जाता है, जिसका नाम स्कॉटलैंड में ट्रम्प के गोल्फ कोर्स के नाम पर रखा गया है।

इस समझौते का मकसद अमेरिका और EU के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को कम करना था। इस डील के तहत दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार को संतुलित करने और टैरिफ विवाद को कम करने पर सहमति जताई थी।

अमेरिका ने EU से आने वाले समान पर 15% टैरिफ लगाया था

समझौते के मुताबिक, EU से अमेरिका आने वाले अधिकांश सामानों पर 15% टैरिफ तय किया गया था। यह बड़ा फैसला माना गया था, क्योंकि इससे पहले ट्रम्प प्रशासन 30% तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दे चुका था।

इसके बदले में यूरोपीय संघ ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने और कुछ आर्थिक नीतियों में बदलाव करने का वादा किया था, जिससे अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा मिल सके।

हालांकि शुरुआत में इस डील को राहत के रूप में देखा गया, लेकिन बाद में कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच विवाद बढ़ गया था, जिसमें जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों ने अमेरिकी प्रस्तावों का विरोध किया था।

इसके अलावा, इस साल अमेरिका सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति को आर्थिक आपातकाल घोषित कर EU के सामान पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद टैरिफ की सीमा कुछ मामलों में घटाकर 10% कर दी गई थी।

जर्मनी और फ्रांस को बड़ा नुकसान हो सकता है

ट्रम्प से इस फैसले से यूरोप, खासकर जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

टैरिफ बढ़ने से यूरोपीय गाड़ियां अमेरिकी बाजार में महंगी हो जाएंगी, जिससे उनकी मांग घट सकती है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और प्रोडक्शन पर पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर निर्यात घटता है तो यूरोपीय कंपनियां प्रोडक्शन कम कर सकती हैं, जिससे नौकरियों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, निर्यात में गिरावट से यूरोप की आर्थिक वृद्धि भी धीमी हो सकती है।

अमेरिका में भी महंगाई बढ़ सकती है

इस फैसले का असर अमेरिका पर भी पड़ेगा। यूरोपीय कारों के महंगे होने से अमेरिकी ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। साथ ही बाजार में ऑप्शन भी सीमित हो सकते हैं।

आशंका जताई गई है कि यूरोपीय संघ जवाबी कार्रवाई कर सकता है और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह विवाद एक बड़े ‘ट्रेड वॉर’ का रूप ले सकता है, जिससे दोनों पक्षों को नुकसान होगा।

ईरान जंग को लेकर EU और अमेरिका में मतभेद

ईरान जंग को लेकर भी अमेरिका और EU के बीच मतभेद है। फ्रांस, स्पेन और इटली अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए एयरस्पेस देने से इनकार कर चुके हैं।

ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त प्रतिबंध और दबाव की नीति अपनाता रहा है, जबकि यूरोपीय देश कूटनीतिक बातचीत और समझौते के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में रहे हैं।

NATIONAL : महिलाओं की बंपर वोटिंग से उलझी बंगाल की सियासी गुत्थी, मतदान में पुरुषों को 2.5 फीसदी से पीछे छोड़ा

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पश्चिम बंगाल का इस बार का विधानसभा चुनाव महज राजनीतिक दावों का नहीं, बल्कि टूटे हुए रिकॉर्ड्स का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहां तृणमूल और भाजपा सार्वजनिक मंचों के जरिये अपनी जीत के प्रति आश्वस्ति का भाव प्रदर्शित कर रहे हैं, वहीं अंदरखाने इनमें एक गहरी बेचैनी और मंथन का दौर जारी है।

चुनावी इतिहास में पहली बार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का ढाई फीसदी अधिक मतदान और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग इस बात का साफ संकेत है कि इस बार बंगाल की जनता ने खामोशी से कोई बड़ा फैसला लिख दिया है। मसलन राज्य के चुनावी इतिहास में रिकॉर्डतोड़ संख्या में मतगणना केंद्र पहुुंची महिला अपनी सुरक्षा के मामले में ममता सरकार से नाराज थी या कन्याश्री, रूपाश्री, लक्ष्मी भंडार योजना के लिए सरकार को अभयदान देने पहुंची थी। पहली बार ग्रामीणों की तर्ज पर मतदान  करने वाले शहरी मतदाता तृणमूल के बंगाल अस्मिता के मोहपाश में बंधे थे या बेरोजगारी- जनसांख्यिकी बदलाव से संंबंधित भाजपा के आक्रामक प्रचार के प्रभाव में थे।

महिला भागीदारी ने तोड़े सारे कीर्तिमान
पश्चिम बंगाल में 2011 के चुनाव के पहले तक लोकसभा और विधानसभा के सभी चुनावों में महिलाएं मतदान के मामले में पुरुषों से पीछे रही हैं। 2011 के बाद महिलाओं के मतप्रतिशत में बढ़ोत्तरी तो हुई मगर यह कभी भी .50 फीसदी से ज्यादा नहीं रही। हालांकि इस चुनाव में महिलाएं (93.24 फीसदी) पुरुषों (91.74%) पर पूरी तरह हावी रही। भाजपा का दावा है कि महिलाओं का बढ़ा मत प्रतिशत आरजीकर कांड के बाद असुरक्षा के भावना से उपजी परिस्थिति है जबकि तृणमूल का दावा है कि महिला वर्ग आधी आबादी केंद्रित योजनाओं के प्रभाव में सरकार की रक्षा के लिए आगे आई हैं।

शहरी बनाम ग्रामीण का भी टूटा भ्रम
अन्य राज्यों की भांति पश्चिम बंगाल में भी शहरी मतदाता आम तौर पर मतदान के प्रति विमुख रहे हैं। हालांकि इस बार शहरी मतदाताओंं ने मतदान के मामले में ग्रामीण मतदाताओं के साथ कदमताल किया है। राज्य में पहली बार शहरी और ग्रामीण मतदाताओं का मतदान प्रतिशत करीब-करीब बराबर रहा है। शहरी क्षेत्रों में आजादी के बाद पहली बार 90 फीसदी से अधिक मतदान दर्ज किया गया है।

लोकसभा की तुलना में कम मतदान
प्रतिशत की दृष्टि से भले ही राज्य में मतदान के सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं, मगर हकीकत में इस चुनाव में लोकसभा के मुकाबले 29.41 लाख कम लोगों ने वोट किए हैं। हालांकि लोकसभा की तुलना में एसआईआर के कारण मतदाताओं की संख्या में 68 लाख की कमी आई है।

टिकट वितरण पर दोनों पक्षों में आशंका
भाजपा में टिकट वितरण के बाद करीब पांच दर्जन सीटों से उम्मीदवारों के संदर्भ में शिकायत आई। टीएमसी में भी संख्या इतनी ही है। यही कारण है कि पीएम मोदी और ममता दोनों ने जनसभाओं में हर सीट पर खुद को ही उम्मीदवार बताया।

NATIONAL : केदारनाथ धाम पहुंचे अडाणी ग्रुप के चेयरमैन, श्रमिक दिवस के साथ मनाई शादी की 40वीं वर्षगांठ

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अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी शुक्रवार को पूरे परिवार के साथ केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने बाबा केदार के दरबार में हाजिरी लगाई। गौतम अडाणी ने शादी की 40वीं सालगिरह पर पत्नी प्रीति अडाणी के साथ बाबा केदार का जलाभिषेक किया। गौतम अडाणी शुक्रवार की सुबह दिल्ली से देहरादून पहुंचे। देहरादून से प्राइवेट हेलिकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचे। दर्शन के बाद उन्होंने प्रस्तावित सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना का एरियल सर्वे किया। इसके बाद गौतम अडाणी ने केदारनाथ धाम से जुड़ी फोटो शेयर की। इसके अलावा उन्होंने श्रमिक दिवस और शादी की सालगिरह को लेकर अपने विचार भी साझा किए।

गौतम अडाणी ने क्या कहा?
अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने बाबा केदार के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद कहा कि आज का दिन मेरे लिए विशेष है, एक ओर विश्व श्रमिक दिवस है और दूसरी ओर मेरे विवाह की 40वीं वर्षगांठ। इस पावन अवसर की शुरुआत मैंने अपनी जीवनसंगिनी प्रीति के साथ केदारनाथ धाम में भगवान महादेव के दर्शन और आशीर्वाद से की। अपनी पत्नी का इस मौके पर उन्होंने हर स्थिति में साथ देने के लिए धन्यवाद दिया।गौतम अडाणी ने लिखा कि चार दशकों की इस यात्रा में प्रीति का साथ मेरे लिए केवल जीवन का संबल नहीं, बल्कि हर चुनौती में एक शांत शक्ति और हर सफलता में एक विनम्र आधार रहा है। इसके लिए मैं हृदय से उनका आभारी हूं।

बाबा केदार से की प्रार्थना
गौतम अडाणी ने बाबा केदार के दर्शन पूजन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमने महादेव से प्रार्थना की कि वह हमारे देश को निरंतर प्रगति, समृद्धि और शक्ति प्रदान करें। हम सभी को राष्ट्र निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान देने की प्रेरणा दें।

अपनी बात, अपनों के साथ की शुरुआत
गौतम अडाणी ने श्रमिक दिवस पर नई पहल का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व श्रमिक दिवस के अवसर पर मैं अदाणी परिवार के अपने 4 लाख से अधिक साथियों से जुड़ने के लिए एक नई पहल ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ की शुरुआत कर रहा हूं। यह मेरे लिए केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि अदाणी परिवार में सभी से दिल से जुड़ने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से मैं समय-समय पर अपने विचार, अपने अनुभव और अपनी सीख साझा करूंगा। उतनी ही विनम्रता से सीखने का प्रयास भी करूंगा।चेयरमैन ने कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब अदाणी परिवार के लाखों सदस्य एक-दूसरे के सहयोगी बनकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जुड़ेंगे, तब हम सिर्फ परियोजनाएं ही नहीं बनाएँगे, बल्कि विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में अपना विनम्र योगदान भी दे सकेंगे। आप सभी का विश्वास और साथ ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।

रोपवे प्रोजेक्ट का लिया जायजा
गौतम अडाणी की कंपनी सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना का भी जायजा लिया। करीब 13 किलोमीटर लंबी यह रोपवे प्रणाली दुनिया के सबसे ऊंचे और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में से एक में स्थापित की जा रही है। श्रद्धालुओं को अभी सोनप्रयाग से केदारनाथ तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर की खड़ी और थका देने वाली पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। इसमें 8 से 9 घंटे का समय लगता है। रोपवे के शुरू होने के बाद यह कष्टकारी सफर महज 36 मिनट में पूरा होगा।केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे सुरक्षित और आधुनिक ‘3एस’ (थ्री-केबल) तकनीक पर आधारित होगा। इसे खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच भी सुचारू रूप से संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है। अडाणी ग्रुप की ओर से पर्वतमाला प्रोजेक्ट के तहत इस करीब 4081 करोड़ रुपये की लागत वाली योजना को पूरा कराया रहा है। रोपवे प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यह प्रति घंटे 1800 यात्रियों को एक तरफ से ले जाने में सक्षम होगा।

NATIONAL : कोलकाता में वोटों की गिनती से पहले ‘भारी सुरक्षा इंतजाम’; EVM स्ट्रॉन्ग रूम के आस-पास के दायरे में ‘धारा 163’ लागू

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कोलकाता पुलिस ने BNSS 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए हैं, जिसके तहत कम से कम सात ऐसी जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है, जहां EVM स्ट्रॉन्गरूम बने हैं। सीएम ममता बनर्जी गुरुवार देर रात भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने गईं और वहां करीब चार घंटे बिताए।

यह दौरा तब हुआ जब एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर खुदीराम अनुशीलन केंद्र में कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं; इसी केंद्र में उत्तरी कोलकाता के सात विधानसभा क्षेत्रों की EVM मशीनें रखी हुई हैं।

बता दें कि 4 मई 2026 को वोटों की गिनती से पहले, कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र में स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। यहां CRPF के जवान तैनात हैं।
कोलकाता में तनाव का माहौल बढ़ गया है
4 मई को आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले कोलकाता में तनाव का माहौल बढ़ गया है। पुलिस ने कई अहम इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है, वहीं राजनीतिक दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के रखरखाव में कथित अनियमितताओं को लेकर एक-दूसरे पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

BNSS 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू
कोलकाता पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत कम से कम सात ऐसी जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है, जहां EVM स्ट्रॉन्गरूम बने हैं। इन जगहों में शहीद खुदीराम बोस रोड, जजेस कोर्ट रोड, जादवपुर, डायमंड हार्बर रोड, लॉर्ड सिन्हा हॉल, नरेश मित्रा सरानी (बेल्टला रोड) और प्रमाथेश बरुआ सरानी शामिल हैं।

आरोपों के कारण पूरी रात राजनीतिक गहमागहमी बनी रही
यह कदम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद उठाया गया है। इन आरोपों के कारण पूरी रात राजनीतिक गहमागहमी बनी रही। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग पर BJP के साथ मिलकर EVM मशीनों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।

बनर्जी गुरुवार देर रात भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने गईं
बनर्जी गुरुवार देर रात भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने गईं और वहां करीब चार घंटे बिताए। यह दौरा तब हुआ जब एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर खुदीराम अनुशीलन केंद्र में कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं; इसी केंद्र में उत्तरी कोलकाता के सात विधानसभा क्षेत्रों की EVM मशीनें रखी हुई हैं।

“हम सब मिलकर अपनी जान की बाजी लगाकर इसका मुकाबला करेंगे”
बनर्जी ने कहा, “यहां EVM मशीनों के लिए एक स्ट्रॉन्गरूम बना हुआ है। हमने पाया है कि कई जगहों पर गड़बड़ियां की जा रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इसके बावजूद, अगर कोई EVM मशीन चुराने की कोशिश करता है, या वोटों की गिनती में हेराफेरी करने की कोशिश करता है, तो हम सब मिलकर अपनी जान की बाजी लगाकर इसका मुकाबला करेंगे।” उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआत में केंद्रीय बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया था। उन्होंने बताया कि चुनाव नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों (एजेंटों) को सीलबंद कमरे तक जाने की अनुमति होती है।

NATIONAL : डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम में 2 मई को दोबारा वोटिंग, चुनाव आयोग ने दिया आदेश

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बंगाल में दो चरणों में सभी 294 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न हो चुके हैं। 4 मई को वोटों की गिनती होगी। इससे पहले चुनाव आयोग ने 2 मई को बंगाल के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान का आदेश दिया है।

अनियमितताओं की शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने बंगाल के डायमंड हार्बर और मगराहट पश्चिम निर्वाचन क्षेत्रों के 15 बूथों पर पुनर्मतदान की घोषणा की है।

शिकायतों के बाद चुनाव आयोग का फैसला
बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में धांधली और अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग 15 जगहों पर दोबारा वोटिंग कराने का फैसला लिया है। जिन जगहों पर वोटिंग होनी है, वे सभी बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में आते हैं।
दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 बूथों पर और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के 4 बूथों पर कल यानी 2 मई को दोबारा वोट डाले जाएंगे।
इससे पहले राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने संकेत दिए थे कि दक्षिण 24 परगना सहित कुछ संवेदनशील इलाकों में ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा वोटिंग कराई जा सकती है।

NATIONAL : जम्मू के बंतलाब में दर्दनाक हादसा, पुल का हिस्सा गिरने से 6 मजदूर दबे; रेस्क्यू जारी

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जम्मू के बंटलाब के ठर इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया. यह घटना उस समय हुई जब एक पुल को चौड़ा करने का काम चल रहा था और उसके नीचे मजदूर काम कर रहे थे. इसी दौरान अचानक पुल का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया और नीचे काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए. हादसे में कुल 6 मजदूर मलबे के नीचे दब गए. घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया.

जम्मू कश्मीर पुलिस, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. अब तक 2 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 4 मजदूर अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं. उन्हें निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं. मौके पर राहत टीमों की ओर से भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है. स्थानीय विधायक श्याम लाल शर्मा ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चार लोग अभी भी फंसे हुए हैं और उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

मलबे में दबे 6 मजदूर

फिलहाल मौके पर बचाव अभियान तेजी से जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. घटना से इलाके में चिंता का माहौल है. मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुटी हुई है. पुल का एक हिस्सा गिरने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी. इस दौरान कई मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन 6 मजदूर मलबे में ही दब गए थे. आनन-फानन में घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन की दी गई.

स्क्यू ऑपरेशन जारी

इसके बाद मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया. एसडीआरएफ, इंडियन आर्मी और आम लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. दो मजदूरों की बाहर निकलाकर अस्पताल भेजा गया है, जबकि बाकी चार मलबे में कहां और किस हालत में इस बात का अब तक पता नहीं चल पाया है. उनकी तलाश भी जारी है.

BUSINESS : गड़बड़ाएगा किचिन का बजट, और महंगा हो सकता है खाद्य तेल

वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने, घरेलू स्तर पर रुपए की कमजोरी और इंपोर्ट की लागत बढ़ने की वजह से खाने का तेल महंगा होने की आशंका जताई जा रही है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से खाद्य तेल कंपनियों के लिए इंपोर्ट महंगा हो गया है, ऊपर से कमजोर रुपए ने उनके मार्जिन घटा दिए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी तरफ से दाम में बढ़ोतरी हो सकती हैं. 

मार्च में बढ़ी थीं कीमतें 

इससे पहले तेल कंपनियों ने अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न संकट के चलते मार्च में खाद्य तेल की थोक कीमतों में 3-5 फीसद की बढ़ोतरी की थी. इससे पाम तेल की खुदरा कीमतों में 10-12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी. 

महंगाई का दूसरा दौर 

खाद्य तेलों में महंगाई का दूसरा दौर शुरू होने वाला है. इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहली वजह है पश्चिम एशिया और लाल सागर दोनों जगह तनाव के कारण जहाज भाड़ा महंगे हो गए हैं. दूसरा कारण है, समुद्री परिवहन में बाधा से आपूर्ति श्रृंखला में अड़चन. अधिकांश देश खाद्य तेल सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भंडार बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों में उछाल आ रहा है. 

कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें 

खाद्य तेल उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तेल की कीमतों में 5-6 फीसदी की संभावित बढ़ोतरी हो सकती है. इससे पहले मार्च में एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इमामी एग्रोटेक और पतंजलि फूड्स जैसे प्रमुख खिलाड़ियों ने भी ऐसी ही बढ़ोतरी की थी. 

कच्चे तेल से है सीधा संबंध

पश्चिम एशिया में युद्ध ने खाद्य तेल निर्माताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं क्योंकि अस्थिरता के समय खाद्य तेल की कीमतें अक्सर कच्चे तेल की कीमतों के नक्शेकदम पर चलती हैं. कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ है जिसकी वजह से कई देश पाम तेल का इस्तेमाल बायो डीजल बनाने में कर रहे हैं. इस वजह से पाम तेल की आपूर्ति कम हुई है जबकि मांग ऊंची है. इस वजह से पाम तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल की महंगाई का कारण ऊंची ढुलाई लागत है. बीते गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 125 डॉलर/बैरल की ओर बढ़ गईं. अमेरिका द्वारा ईरान की नाकाबंदी जारी रखने की खबरों और शिपिंग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंकाओं ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को और गहरा कर दिया है. 

बढ़ रही है लैंडेड लागत 

भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 57 फीसदी आयात करता है. पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल भारत की कुल 25-26 मिलियन टन खपत का मुख्य हिस्सा हैं. पिछले साल की तुलना में इन तेलों की लैंडेड कॉस्ट (भारत पहुंचने तक की लागत) में भारी बढ़ोतरी हुई है. पाम ऑयल की लागत 14 फीसदी बढ़कर 1,270 डॉलर प्रति टन हो गई है. सोयाबीन तेल की लागत 20 फीसद बढ़कर 1,335 डॉलर प्रति टन हो गई. सूरजमुखी तेल की लैडेंड लागत 17 फीसदी  बढ़कर 1,425 डॉलर प्रति टन हो गई. 

बढ़ रही है लैंडेड लागत 

भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 57 फीसदी आयात करता है. पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल भारत की कुल 25-26 मिलियन टन खपत का मुख्य हिस्सा हैं. पिछले साल की तुलना में इन तेलों की लैंडेड कॉस्ट (भारत पहुंचने तक की लागत) में भारी बढ़ोतरी हुई है. पाम ऑयल की लागत 14 फीसदी बढ़कर 1,270 डॉलर प्रति टन हो गई है. सोयाबीन तेल की लागत 20 फीसद बढ़कर 1,335 डॉलर प्रति टन हो गई. सूरजमुखी तेल की लैडेंड लागत 17 फीसदी  बढ़कर 1,425 डॉलर प्रति टन हो गई.

आम आदमी पर असर

उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सभी प्रमुख ब्रांडों और श्रेणियों में लागू होने की संभावना है. हालांकि, कंपनियां क्षेत्रीय मांग और प्रतिस्पर्धा के आधार पर इसके समय और मात्रा का फैसला करेंगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब उपभोक्ता पहले से ही बढ़ी हुई खाद्य कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे समग्र मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ने की चिंता बढ़ गई है. विश्लेषकों का मानना है कि जब तक तिलहन की कीमतों में बड़ी कमी नहीं आती या वैश्विक माल ढुलाई दरें कम नहीं होतीं, तब तक कीमतों पर यह दबाव बना रहेगा. फिलहाल, उद्योग जगत लागत में हो रही इस बढ़त से जूझ रहा है और आने वाले हफ्तों में इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ना तय लग रहा है.

NATIONAL : 48 घंटे में दो पायलटों की हार्ट अटैक से मौत:एसोसिएशन का DGCA को पत्र- थकान से सुरक्षा को खतरा,

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दो पायलट्स की हार्ट अटैक से मौत के बाद देश में कॉमर्शियल पायलट्स की थकान और उनके ड्यूटी के घंटों को लेकर विवाद बढ़ गया है।

द एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को पत्र लिखकर फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को पूरी तरह सख्ती से लागू करने की मांग की है।

एसोसिएशन ने बताया कि पायलट्स का कहना है कि एयरलाइंस को नियमों में बार-बार दी जा रही छूट सुरक्षा और क्रू की सेहत के साथ समझौता है।

दो पायलट्स की मौत ने बढ़ाई चिंता

पायलट्स एसोसिएशन ने DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को लिखे लेटर में बताया कि, बाली (इंडोनेशिया) में 29 अप्रैल को रेस्ट पीरियड के दौरान एअर इंडिया के एक पायलट की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उन्होंने 28 अप्रैल को दिल्ली से बाली की फ्लाइट ऑपरेट की थी।

वहीं, 30 अप्रैल को बेंगलुरु में ट्रेनिंग सेशन के दौरान अकासा एयर के एक पायलट (उम्र 40-45 साल) की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। एसोसिएशन का कहना है कि 45 साल से कम उम्र के पायलट्स की ये मौतें काम के बढ़ते दबाव और थकान की ओर इशारा करती हैं।

पायलट्स को 48 घंटे का वीकली रेस्ट मिलना अनिवार्य

एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कैप्टन सैम थॉमस ने पत्र में बताया कि एयरलाइंस को दी जा रही अस्थायी छूट अब ‘नॉर्म’ बन गई है। इससे FDTL नियमों का मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया है।

पायलटों ने मांग की है कि इन छूटों को वापस लेने के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन तय की जाए। नियमों के मुताबिक, पायलट्स को 48 घंटे का ‘वीकली रेस्ट’ मिलना अनिवार्य है, लेकिन एयरलाइंस अक्सर ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला देकर इससे बचती हैं।

एअर इंडिया और इंडिगो को मिली है विशेष राहत

हाल ही में एयर इंडिया को लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विशेष छूट दी गई थी। एयरलाइन ने तर्क दिया था कि पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से विमानों को अमेरिका और यूरोप जाने में ज्यादा समय लग रहा है।

वहीं, दिसंबर 2025 में इंडिगो ने नियमों के चलते भारी संख्या में उड़ानें रद्द की थीं, जिसके बाद उसे 10 फरवरी तक की मोहलत दी गई थी। पायलट्स का कहना है कि ऐसी ‘सिलेक्टिव’ राहत कमर्शियल हितों को बढ़ावा देती है, सुरक्षा को नहीं।

थकान की रिपोर्टिंग पर एयरलाइंस का रवैया सुस्त

एसोसिएशन ने RTI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एयरलाइंस द्वारा थकान की रिपोर्ट स्वीकार करने की दर बहुत कम है। पायलट्स का आरोप है कि कंपनियां थकान की रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करती हैं।

मांग की गई है कि एयरलाइंस द्वारा जमा किए जाने वाले तिमाही थकान डेटा को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

भारत को 30 हजार पायलट्स की जरूरत, अभी सिर्फ 25 हजार

फरवरी में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में 65 साल से कम उम्र के 25,001 लाइसेंस प्राप्त पायलट हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मुताबिक, एयरबस और बोइंग को दिए गए 1,700 विमानों के ऑर्डर को देखते हुए भारत को जल्द ही 30,000 पायलट्स की जरूरत होगी।

वर्तमान में इंडिगो के पास सबसे ज्यादा 5,455 और एअर इंडिया के पास 3,432 पायलट हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पायलट्स की कमी की भरपाई मौजूदा स्टाफ से ज्यादा काम कराकर की जा रही है, जो जोखिम भरा है।

NATIONAL : सिलिंडर के दाम बढ़ने पर कांग्रेस आक्रामक: कहा- फिर चला महंगाई का चाबुक; राहुल बोले- अगला वार पेट्रोल-डीजल पर

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व्यवसायिक सिलिंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने व्यवसायिक सिलिंडर की कीमतों में उछाल के मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा, ‘महंगाई मैन मोदी’ का चाबुक फिर चला। आज कमर्शियल सिलिंडर 993 रुपए महंगा हुआ। मोदी ने पिछले 4 महीने में कमर्शियल सिलिंडर के दाम इस तरह बढ़ाए।’कांग्रेस ने कहा, ‘कमर्शियल सिलिंडर सिर्फ 4 महीने में 1,518 रुपए महंगा हो गया। अभी साल के 8 महीने बाकी हैं। मोदी की वसूली जारी है…। मोदी सरकार सिर्फ वसूली करना जानती है। अब 5 किलो वाला छोटू सिलिंडर भी महंगा कर दिया। पहले आधार कार्ड पर सिलिंडर बांटे, फिर उसका दाम बढ़ा दिया। ये बड़े चालबाज लोग हैं।’

राहुल गांधी बोले- आपकी थाली पर भी पड़ेगा असर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ने पर सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा, ‘कह दिया था- चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी। आज कमर्शियल गैस सिलिंडर 993 रुपये महंगा। एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है। फरवरी से अब तक 1380 रुपये की बढ़ोतरी हुई और सिर्फ 3 महीनों में 81 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। चायवाला, ढाबा, होटल और बेकरी, हलवाई- हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा। पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीजल पर।’

घरेलू गैस की कीमतों में नहीं हुआ कोई बदलाव
कमर्शियल सिलिंडर की कीमतों में एक मई से बड़ा इजाफा हुआ है। अब दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलिंडर की कीमत 993 रुपये बढ़कर 3071.50 रुपये हो गई है। हालांकि घरेलू सिलिंडर की कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है और घरेलू गैस का 14.2 किलो का सिलिंडर दिल्ली में 913 रुपये का ही मिल रहा है। 

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। पश्चिम एशिया संकट के चलते मई से एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की आशंका थी। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी होने के चलते दुनियाभर में 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ रहा है। बीते महीने घरेलू गैस के सिलिंडर पर भी 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। साथ ही कमर्शियल सिलिंडर पर भी 196 रुपये बढ़े थे। वहीं मार्च में भी 114 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। 

अलग-अलग महानगरों में कितने का मिलेगा कमर्शियल सिलिंडर?
शहरवार कमर्शियल सिलिंडर की कीमतों की बात करें तो दिल्ली में इसकी कीमत 3071 रुपये हो गई है, जो पहले 2078 रुपये थे। कोलकाता में अब कमर्शियल सिलिंडर 3202 रुपये का मिलेगा, जो पहले 2208 रुपये का मिलता था। देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में अब 19 किलो का कमर्शियल सिलिंडर 3024 रुपये का मिलेगा और चेन्नई में 3237 रुपये का। 

NATIONAL : कमर्शियल के बाद अब घरेलू रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल के बढ़ सकते हैं दाम, जानें क्या है वजह

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कमर्शियल सिलिंडर 993 रुपये महंगा हो गया। लेकिन, रसोई गैस सिलिंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े। पहली नजर में यह राहत लगती है, लेकिन असली कहानी रोके हुए दबाव की है। बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की लागत बढ़ चुकी है और तेल कंपनियों पर नुकसान का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि आम उपभोक्ता को कब तक बचाया जा सकता है?

दिक्कत यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों के बीच का अंतर अब बड़ा हो गया है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, अगर कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहता है, तो पेट्रोल पर तेल कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन करीब 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर निगेटिव है। घरेलू एलपीजी पर भी दबाव तेज है। एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा अंडर-रिकवरी बनी रही, तो वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

यही आंकड़ा सरकार की मुश्किल बताता है। 2026-27 के बजट में एलपीजी सब्सिडी के लिए 11,085 करोड़ का प्रावधान है। इसमें गरीब परिवारों के एलपीजी कनेक्शन के लिए 9,200 करोड़ और पहल के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए 1,500 करोड़ रुपये शामिल हैं। अगर एलपीजी अंडर-रिकवरी 80,000 करोड़ के आसपास जाती है, तो यह मौजूदा बजट प्रावधान से कई गुना बड़ा बोझ होगा।

सरकार ने पहले भी की है भरपाई: यह पहली बार नहीं है, जब ग्राहकों को बचाने की कीमत तेल कंपनियों ने चुकाई है। अगस्त, 2025 में कैबिनेट ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को घरेलू एलपीजी पर नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति मंजूर की थी।

दबाव सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं: दबाव सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं है। इक्रा ने 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी 2.05 से 2.25 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जबकि बजट में 1.71 लाख करोड़ का प्रावधान है। यानी महंगी ऊर्जा का असर सरकारी खर्च, कंपनी मार्जिन और जनता की जेब…तीनों पर पड़ रहा है।

सरकार के पास तीन रास्ते
पेट्रोल-डीजल में भी कहानी ऐसी ही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खुदरा कीमतें अप्रैल, 2022 से लगभग स्थिर हैं। इस बीच, कच्चा तेल इस सप्ताह 126 डॉलर प्रति बैरल तक गया और नरमी के बाद भी 110 डॉलर से ऊपर रहा। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये लीटर और डीजल 87.67 रुपये लीटर पर है। सरकार के पास अब तीन रास्ते हैं-
पहला : तेल कंपनियों को नुकसान उठाने दिया जाए।
दूसरा : बजट से फिर क्षतिपूर्ति दी जाए।
तीसरा : कीमतें धीरे-धीरे बढ़ाई जाएं।

पहले रास्ते से तेल विपणन कंपनियों की बैलेंसशीट कमजोर होगी। दूसरे से राजकोषीय बोझ बढ़ेगा और तीसरे से आम आदमी पर महंगाई का असर पड़ेगा।

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