Sunday, September 27, 2026
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Technology : गर्मी से पहले बड़ा झटका! महंगे होने वाले हैं AC, जानिए क्यों बढ़ रही हैं कीमतें

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इस साल गर्मी शुरू होने से पहले ही एयर कंडीशनर खरीदने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. इस साल गर्मी शुरू होने से पहले ही एयर कंडीशनर खरीदने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. बाजार में जल्द ही AC की कीमतें बढ़ सकती हैं जिससे लोगों के बजट पर असर पड़ने की आशंका है. अगर आप आने वाले महीनों में नया AC लेने की सोच रहे हैं तो जल्दी खरीदना फायदे का सौदा हो सकता है. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रमुख कंपनियां अपने एयर कंडीशनर के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं.

घरेलू और विदेशी कई प्रमुख ब्रांड अपने AC महंगे करने जा रहे हैं. इनमें Voltas, LG Electronics, Daikin और Blue Star Limited जैसे बड़े नाम शामिल हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले समय में एयर कंडीशनर की कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है. कंपनियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है. AC के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि है. एयर कंडीशनर के कई अहम हिस्सों में कॉपर का व्यापक उपयोग होता है. हाल के महीनों में कॉपर की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं जिससे उत्पादन लागत भी बढ़ गई है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी के कारण आयात किए जाने वाले पार्ट्स पहले की तुलना में ज्यादा महंगे पड़ रहे हैं. वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से भी कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है.

सरकार की ओर से लागू किए गए नए ऊर्जा मानकों का असर भी AC की कीमतों पर पड़ रहा है. Bureau of Energy Efficiency द्वारा तय किए गए नए नियम 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुके हैं. इन मानकों के तहत तैयार किए गए 5-स्टार एयर कंडीशनर पुराने मॉडलों की तुलना में लगभग 10 से 11 प्रतिशत तक कम बिजली की खपत करते हैं. हालांकि इन नए मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को बेहतर तकनीक और नए कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है जिससे शुरुआती कीमत थोड़ी बढ़ जाती है. लेकिन लंबे समय में कम बिजली खपत के कारण उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिल सकती है.

बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई नया AC खरीदने की योजना बना रहा है तो ज्यादा देर करना ठीक नहीं होगा. आने वाले महीनों में लागत बढ़ने के साथ कंपनियां कीमतों में और बदलाव कर सकती हैं. ऐसे में समय रहते खरीदारी करने से उपभोक्ता बढ़ती कीमतों से बच सकते हैं.

Bollywood : चॉल में रहते थे जैकी श्रॉफ, शादी के लिए पत्नी आएशा ने छोड़ी थी लग्जरी लाइफ

कृष्णा श्रॉफ ने एक रियलिटी शो में अपने माता-पिता जैकी और आएशा श्रॉफ की लव स्टोरी और जीवन के संघर्ष के बारे में खुलासा किया. उन्होंने बताया कि कैसे उनकी मां ने अपनी आरामदायक और अमीर जिंदगी छोड़कर जैकी के साथ मुंबई की चॉल में रहने का फैसला किया था. बॉलीवुड एक्टर जैकी श्रॉफ की बेटी कृष्णा श्रॉफ टीवी पर छाई हुई हैं. इन दिनों वो रियलिटी शो द 50 में नजर आ रही हैं. कृष्णा ने शो में अपने बॉयफ्रेंड संग मुलाकात और लव लाइफ को लेकर चर्चा की थी. हालिया एपिसोड में कृष्णा ने अपने पेरेंट्स की लव स्टोरी और उनके लाइफ स्ट्रगल पर बात की है.

कृष्णा ने बताया कि उनकी मां आएशा ने उनके पिता जैकी के साथ रहने के लिए अपनी लग्जूरियस लाइफ को छोड़ गिया था. जब दोनों का प्यार परवान चढ़ा था, तब उनके पिता जैकी मुंबई की एक चॉल में रहते थे. स्ट्रगल के दिनों में उनकी मां ने पिता का साथ दिया. तब वो सुपरस्टार नहीं थे. मगर उनकी मां ने पिता को मुश्किल वक्त में संभाला, उनकी लो-लाइफ को सपोर्ट किया.

कृष्णा के मुताबिक, उनकी मां आएशा एक फाइनेंसियली सिक्योर बैकग्राउंड से आती थीं. वो अच्छे और अमीर घराने से थीं. कंफर्ट माहौल में पली बढ़ी थीं. लेकिन जब उनकी मां ने जैकी श्रॉफ से शादी करने की ठानी तो चीजें अलग थीं. उनके पिता जैकी संग आने के लिए मां ने अपना सब कुछ छोड़ दिया था. वो मुंबई की चॉल में रहने लगी थीं. तब जैकी चॉल में अपने पेरेंट्स के साथ रहते थे. मां ने शादी के बाद वहीं पर शिफ्ट किया. अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल को पीछे छोड़ दिया था.

बाद में उनका परिवार अपने पहले घर में गया. कृष्णा ने बताया कि उनकी मां हमेशा दूसरों की खुशी देखती हैं. अपने बारे में सबसे आखिर में सोचती हैं. युविकाचौधरी संग बातचीत में कृष्णा ने बताया कि उनका बचपन नॉर्मल बीता था. उन्हें और उनके भाई टाइगर को पेरेंट्स ने इंडस्ट्री की लाइमलाइट से दूर ही रखा था. कृष्णा ने बताया कि वो और टाइगर फैमिली के करीब हैं. क्योंकि आखिर में घर पर उनके पेरेंट्स और वो दोनों ही रहे थे. उनका स्कूल टाइम भी लो-प्रोफाइल रहा था. फिल्म सेट्स पर जाना उनके चाइल्डहुड का रेगुलर पार्ट नहीं था. उनकी फैमिली प्राइवेट लाइफस्टाइल फॉलो करती थी.

Technology : सिर्फ फोन ही चार्ज करने के काम नहीं आता पावर बैंक, ये यूज करना जान लिए तो आज ही खरीदने दौड़ेंगे

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अधिकतर लोग पावर बैंक को फोन या दूसरी एक्सेसरीज चार्ज करने के लिए यूज करते हैं, लेकिन यह कई और काम भी आ सकता है. इससे लैंप से लेकर फैन तक बनाया जा सकता है. पावर बैंक एक बहुत काम की एक्सेसरी है. अगर आप लगातार ट्रैवल करते हैं या फील्ड में रहते हैं तो फोन चार्जिंग के लिए पावर बैंक का होना जरूरी है. अधिकतर लोग पावर बैंक को फोन चार्जिंग और ज्यादा से ज्यादा स्मार्टवॉच या ईयरफोन आदि चार्ज करने के लिए इसे यूज करते हैं. कम ही लोगों को पता है कि पावर बैंक के और भी कई यूज हैं. आज हम आपको पावर बैंक के ऐसे ही कुछ हिडन यूजेज के बारे में बताने जा रहे हैं.

आजकल मार्केट और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर USB लाइट्स आसानी से मिल जाती हैं. पावर बैंक की मदद लेकर आप आसानी से इनका नाइट लैंप बना सकते हैं. घर में डेकोरेशन के साथ-साथ आप कैंपिंग आदि जगहों पर इसका यूज कर सकते हैं. लैंप की तरह आप पावर बैंक से एक छोटा पंखा भी चला सकते हैं. USB लाइट्स की तरह ही बाजार में USB फैन मिल जाएंगे. इन्हें पावर बैंक में प्लग-इन करना है और फिर आप मजे से ठंडी हवा खा सकते हैं. इस तरह का फैन आप ऑफिस से लेकर किचन तक में यूज कर सकते हैं.

लाइट्स और पंखे की तरह कई CCTV कैमरा को भी USB के जरिए पावर बैंक से कनेक्ट किया जा सकता है. ऐसे में अगर आपको कहीं टेंपरेरी कैमरा लगाना है तो पावर बैंक आपके काम आ जाएगा. इसके लिए आपको नया बिजली का कनेक्शन नहीं करना पड़ेगा.अगर आप कंटेट क्रिएटर हैं या फोटोग्राफी करते हैं तो आपको लाइट पर ज्यादा खर्चा करने की जरूरत नहीं है. आप चाहें तो पावर बैंक से कनेक्ट होने वाली रिंग लाइट खरीद सकते हैं. यह सस्ती भी पड़ेगी और इसके लिए आपको बिजली के प्लग की जरूरत भी नहीं होगी. यह पावर बैंक को पावर सोर्स के तौर पर यूज करेगी और आप इसे आउटडोर सेटिंग में भी यूज कर पाएंगे.

World : गर्मी से इंदौर एयरपोर्ट के रनवे की सतह पिघली, जानें कितनी तेज धूप में होता है ऐसा?

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इंदौर में भीषण गर्मी के कारण एयरपोर्ट रनवे का डामर पिघल गया, जिससे उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा. आइए जानें कि आखिर कितनी तेज धूप में ऐसा होता है और डामर क्यों पिघलने लगता है. मध्य प्रदेश के इंदौर में पड़ रही भीषण गर्मी ने न केवल आम जनजीवन को बेहाल किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी चुनौती दे दी है. हाल ही में इंदौर एयरपोर्ट के रनवे की सतह पिघलने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. इस वजह से उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और यात्री घंटों परेशान रहे. यह महज एक गड़बड़ी नहीं, बल्कि बढ़ते तापमान का वह खतरनाक संकेत है जिसे ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ के दौर में समझना बेहद जरूरी है. आइए जानें कि आखिर कितनी तेज धूप में सड़कें पिघलने लगती हैं.

भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का एक हिस्सा नरम पड़ गया और वहां लगा बिटुमेन (डामर) पिघलने लगा. रनवे की सतह ढीली होने के कारण विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था. ऐसे में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तुरंत मरम्मत का काम शुरू किया. इस दौरान दिल्ली और रायपुर से आ रही इंडिगो की दो उड़ानों को भोपाल डायवर्ट करना पड़ा. हालांकि, इंजीनियरों की मुस्तैद टीम ने करीब 20 मिनट के भीतर डामर की जरूरी मरम्मत कर दी, जिसके बाद परिचालन फिर से सामान्य हो पाया.

अक्सर लोग सोचते हैं कि जब मौसम विभाग तापमान 40 डिग्री सेल्सियस बताता है, तो सड़क का तापमान भी उतना ही होगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. डामर की सड़कें और रनवे काले रंग के होते हैं, और काला रंग सूर्य की ऊष्मा को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है. विज्ञान के अनुसार, जब हवा का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस होता है, तो सड़क की सतह का तापमान उससे 20 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा यानी 60 डिग्री तक पहुंच सकता है. यही वह बिंदु है जहां डामर अपनी मजबूती खोने लगता है.

सड़कों और रनवे को बनाने में ‘बिटुमेन’ या तारकोल का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक चिपचिपा और काला पदार्थ है. जब सतह का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो बिटुमेन नरम होने लगता है. उच्च तापमान पर यह तरल की तरह व्यवहार करने लगता है, जिससे सड़क की ऊपरी परत अपनी पकड़ छोड़ देती है. इसी स्थिति को बोलचाल की भाषा में सड़क का पिघलना कहा जाता है. इंदौर में भी रनवे की ऊपरी परत इसी प्रक्रिया के तहत ढीली हो गई थी, जिससे विमानों के टायर फंसने का डर था.

रनवे या सड़क के पिघलने के पीछे केवल गर्मी ही एकमात्र कारण नहीं होती है. कई बार पुराने निर्माण या डामर की घटिया गुणवत्ता भी इसके लिए जिम्मेदार होती है. समय के साथ डामर अपनी लचीलापन खो देता है और अत्यधिक तापमान सहने की उसकी क्षमता कम हो जाती है. इसके अलावा, अगर डामर का मिश्रण उस इलाके के औसत अधिकतम तापमान के हिसाब से तैयार नहीं किया गया हो, तो वह जल्दी पिघलने लगता है. यही वजह है कि अब आधुनिक निर्माणों में ‘पॉलिमर मॉडिफाइड बिटुमेन’ का उपयोग किया जा रहा है जो अधिक तापमान सह सके. जब रनवे या सड़क की सतह नरम हो जाती है, तो उस पर भारी वाहनों या विमानों के पहियों के निशान पड़ जाते हैं. इसे तकनीकी भाषा में रटिंग कहा जाता है. इससे सतह ऊपर-नीचे हो सकती है या उसमें दरारें आ सकती हैं. विमानों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि तेज रफ्तार में लैंडिंग के समय संतुलन बिगड़ सकता है. वहीं सड़कों पर चलने वाले ड्राइवरों के लिए यह ‘बकलिंग’ का खतरा पैदा करती है, जिससे गाड़ियां अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकती हैं.

Bollywood : तूफान बनी साउथ की ये मामूली बजट में बनी फिल्म, 11 दिनों में कमा डाला 300 फीसदी से ज्यादा मुनाफा

राधिका सारथकुमार की थाई किझावी ने बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ाया हुआ है. इस फिल्म ने रिलीज के 11वें दिन शानदार कलेक्शन किया है. सिनेमाघरों में जहां द केरल स्टोरी दबदबा बनाए हुए है तो वहीं इस फिल्म को साउथ की एक बिना बड़े स्टार कास्ट वाली फिल्म बराबर की टक्कर दे रही है. दरअसल हम बात कर रहे हैं राधिका सरथकुमार स्टारर थाई किझावी की. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस रिलीज के बाद से बवाल काट रही है और ऐसे-ऐसे रिकॉर्ड बना रही है कि हर कोई हैरान रह गया है. जानते हैं इस फिल्म ने 11वें दिन यानी दूसरे सोमवार को कितने नोट छापे हैं?

अपने दूसरे सोमवार को थाई किझावी ने कोईमोई के आंकड़ों के मुताबिक 2.5 करोड़ रुपये और कमाए. वहीं आंकड़ों के मुताबिक शिवकुमार मुरुगेसन के डायरेक्शन में बनी इस तमिल कॉमेडी ड्रामा ने पहले हफ्ते में 23.25 करोड़ का कलेक्शन कर डाला था. इसके बाद इसने दूसरे फ्राइडे को 2.55 करोड़, दूसरे शनिवार को 4.6 करोड़ और दूसरे संडे को 5 करोड़ का कलेक्शन किया. इसी के साथ इसकी 11 दिनों की कुल कमाई 37.9 करोड़ रुपये हो गई. जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन 44.72 करोड़ हो गया है. फिल्म की रफ़्तार को देखते हुए, ये आसानी से भारत में 50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी.

बता दे कि थाई किझावी का बजट 9 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. इस लागत के मुकाबले, इसने अब तक 37.9 करोड़ नेट कमाए हैं, इस तरह 28.9 करोड़ का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) मिला है जोकि 321.11% रिटर्न के बराबर है. फिल्म को सुपर डुपर हिट के टैग के लिए 100 करोड़ नेट कमाने होंगे, जो इसकी पहुंच से बाहर है. हालांकि 321.11% रिटर्न के साथ, थाई किझावी 2026 की दूसरी तमिल फिल्म बन गई है जिसने अभिशन जीविंथ और अनस्वरा राजन की विद लव के बाद इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 300% रिटर्न कमाया है.

कॉलीवुड कॉमेडी ड्रामा को शिवकुमार मुरुगेसन ने डायरेक्ट किया है और इसे सुधन सुंदरम और शिवकार्तिकेयन ने पैशन स्टूडियो और शिवकार्तिकेयन प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है. इसमें सिंगमपुली, अरुलदोस, मुनीशकांत और बाला सरवनन भी अहम रोल में हैं. यह 27 फरवरी को थिएटर में रिलीज़ हुई थी.

Technology : iPhone 17e की बिक्री भी शुरू नहीं हुई और ऐप्पल ने कर ली iPhone 18e की तैयारी, मिलेंगे ये धाकड़ फीचर्स

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ऐप्पल ने अपने एंट्री-लेवल आईफोन के नेक्स्ट जनरेशन वेरिएंट iPhone 18e की तैयारी शुरू कर दी है. इसमे डायनामिक आईलैंड और A20 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. पिछले हफ्ते लॉन्च हुए iPhone 17e की अभी फर्स्ट सेल भी शुरू नहीं हुई है और ऐप्पल ने इसके नेक्स्ट जनरेशन वेरिएंट iPhone 18e की तैयारी शुरू कर दी है. iPhone 17e की बिक्री 11 मार्च से शुरू होगी, लेकिन ताजा लीक्स के मुताबिक, उससे पहले ही ऐप्पल ने iPhone 18e के लिए अपनी प्लानिंग को फाइनल कर लिया है. साथ ही यह जानकारी भी आ गई है कि इस एंट्री-लेवल आईफोन में क्या-क्या मिलने वाला है. आइए जानते हैं कि यह कब लॉन्च होगा और इसमें क्या-क्या फीचर्स होंगे.

e सीरीज में ऐप्पल किफायती कीमत वाले आईफोन लॉन्च करती है, लेकिन इनमें स्टैंडर्ड मॉडल वाले कई फीचर्स मिलते हैं. iPhone 18e को लेकर जानकारी मिल रही है कि इसमें डायनामिक आईलैंड का इंतजार खत्म हो सकता है. iPhone 17e में भी यह फीचर मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन ऐप्पल ने इसे पुराने नॉच डिजाइन के साथ ही लॉन्च किया है. इसके अलावा 18e के प्रोसेसर की जानकारी भी सामने आई है. उम्मीद की जा रही है इस आईफोन में कंपनी आईफोन 18 में मिलने वाला अपना सबसे एडवांस A20 चिपसेट देगी.

iPhone 18e को अगले साल मार्च में आईफोन 18 स्टैंडर्ड और iPhone Air 2 मॉडल के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इस साल से ऐप्पल अपने लॉन्च शेड्यूल में बदलाव कर रही है. इस साल सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन iPhone Ultra को लॉन्च किया जाएगा, वहीं अगले साल मार्च में सीरीज के बाकी तीन मॉडल्स एक साथ लॉन्च किए जाएंगे. iPhone 18e की कीमत को लेकर ऑफिशियल जानकारी नहीं आई है, लेकिन इसे पूरी सीरीज की तुलना में सस्ती कीमत पर लॉन्च किया जाएगा.

iPhone 17e में 6.1 इंच का सुपर रेटिना XDR OLED डिस्प्ले लगा है, जो 1200 निट्स की पीक HDR ब्राइटनेस और प्रोटेक्शन के लिए Ceramic Shield 2 के साथ आता है. इसमें आईफोन 17 वाला A19 चिपसेट दिया है, जो एडवांस्ड 3nm टेक्नोलॉजी पर बना है. इसके रियर में 48MP का सिंगल फ्यूज कैमरा सिस्टम लगा है. ऐप्पल ने इसकी बेस स्टोरेज को बढ़ाकर 256GB कर दिया है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स से लैस इस आईफोन को भारत में 64,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर खरीदा जा सकता है.

National : दोस्त समझकर इस देश को अमेरिका ने दिए थे F-16 जैसे फाइटर जेट, लेकिन अब है कट्टर दुश्मन

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वेनेजुएला और अमेरिका एक समय में काफी करीबी दोस्त थे. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. आइए जानते हैं क्या है इसकी वजह. अमेरिका कभी इस देश पर इतना भरोसा करता था कि उसने इसे अपना करीबी स्ट्रैटेजिक पार्टनर मानते हुए एडवांस F-16 फाइटर जेट दिए थे. लेकिन आज के हालात काफी अलग हैं. उसी देश को अब अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक माना जाता है. वह देश है वेनेजुएला. पिछले कुछ दशकों में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी बदल गए हैं.

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में सत्ता में आए हैं यूएस की फॉरेन पॉलिसी और भी ज्यादा एग्रेसिव हो चुकी है. दूसरे टर्म में ट्रंप ने कनाडा, पनामा, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड, ईरान और क्यूबा समेत कई देशों को खुलेआम धमकी दी है. जनवरी में अमेरिकी सेना ने ट्रंप के डायरेक्शन में वेनेजुएला में एक ऑपरेशन शुरू किया. इस ऑपरेशन के नतीजे में प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया. इसके तुरंत बाद सत्ता में आए वेनेजुएला के नए नेताओं ने ट्रंप को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. इसके बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच डायनामिक्स बदल गए.

हालांकि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते हमेशा उतार चढ़ाव से भर रहे हैं. एक समय में काफी करीबी सहयोगी थे लेकिन आज वे ग्लोबल पॉलिटिक्स में अलग-अलग तरफ खड़े हैं. 1980 के दशक में यूनाइटेड स्टेट्स और वेनेजुएला के बीच रिश्ते काफी मजबूत थे. वेनेजुएला में अमेरिका के सपोर्ट में सरकार थी और कोल्ड वॉर के दौरान लैटिन अमेरिका में उसे एक अहम सहयोगी के तौर पर देखा जाता था. इस स्ट्रैटेजिक दोस्ती की वजह से यूनाइटेड स्टेट्स ने 1983 में वेनेजुएला को करीब 24 F-16 फाइटर फाल्कन जेट बेचे. उस समय वेनेजुएला इन एडवांस्ड अमेरिकन फाइटर जेट्स को ऑपरेट करने वाला पहला लैटिन अमेरिकन देश था.

1999 में जब ह्यूगो शावेज वेनेजुएला में पावर में आए तो रिश्ते बिगड़ने लगे. शावेज ने मजबूत एंटी अमेरिकन पॉलिसी को अपनाया और इस इलाके में यूनाइटेड स्टेट्स के असर को चैलेंज करना शुरू कर दिया. उन्होंने रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी वेनेजुएला के रिश्ते मजबूत किए. इससे अमेरिका और भी ज्यादा परेशान हो गया. 2006 में हालात और खराब हो गए. यूनाइटेड स्टेट्स ने वेनेजुएला पर आर्म्स एम्बार्गो लगा दिया. इस वजह से वेनेजुएला को अपने अमेरिका में बने हथियारों के लिए स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड या फिर टेक्निकल मेंटेनेंस लेने की इजाजत नहीं थी. इस फैसले ने वेनेजुएला के F-16 फ्लीट पर काफी बुरा असर डाला .

इसके बाद वेनेजुएला ने कथित तौर पर अपने एयरक्राफ्ट को ऑपरेशनल रखने के लिए दूसरे तरीके खोजे. रिपोर्ट के मुताबिक देश ने जेट्स को मेंटेन करने के लिए ईरान से मदद मांगी या फिर रूस और चीन को एयरक्राफ्ट की टेक्नोलॉजी को स्टडी करने की इजाजत दी. ऐसी संभावनाओं से यूनाइटेड स्टेट्स काफी नाराज था. उसे डर था कि सेंसिटिव मिलिट्री टेक्नोलॉजी को रिवर्स इंजीनियर किया जा सकता है.

समय के साथ पुराने हो रहे अमेरिकी जेट्स को मेंटेन करना और भी मुश्किल होता गया. जैसे-जैसे अमेरिका के साथ रिश्ते खराब होते गए वेनेजुएला ने रूसी मिलट्री इक्विपमेंट की तरफ रुख किया. पुराने अमेरिकी जेट्स की जगह रूसी सुखोई Su-30 फाइटर जैट ने ले ली.

Bollywood : ‘लव एंड वॉर’ को लेकर आया बड़ा अपडेट, स्टारकास्ट के सीन हुए रीशूट, बढ़ गया फिल्म का बजट

फिल्म लव एंड वॉर को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने मिल रहा है.अब फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है. खबरें हैं कि फिल्म के कुछ सीन्स दुबारा शूट किए जा रहे है. फिल्म ‘लव एंड वॉर’ संजय लीला भंसाली की आने वाली बड़ी फिल्म है. इस फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल एक साथ नजर आने वाले हैं. फैंस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड है और बेसब्री से इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. वहीं अब फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है.

‘लव एंड वॉर’ को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के कुछ अहम सीन दोबारा शूट किए जा रहे हैं. खबर है कि संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को पहले इसी साल अगस्त में रिलीज करने का प्लान था, लेकिन अब कुछ सीन के रीशूट होने की वजह से इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है.

बताया जा रहा है कि भंसाली अपनी फिल्म में परफेक्शन चाहते हैं, इसलिए कुछ अहम सीन फिर से शूट किए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सीन के रीशूट की वजह से फिल्म का बजट भी बढ़ गया है. वहीं, लगातार हो रहे इस रीवर्क के कारण फिल्म की रिलीज डेट फिलहाल तय नहीं है. ‘लव एंड वॉर’ अब संजय लीला भंसाली के सबसे महंगे प्रोजेक्ट्स में से एक बन चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की रिलीज में देरी की एक बड़ी वजह इसका भव्य पैमाना बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि फिल्म में बड़े एरियल एक्शन सीक्वेंस दिखाए जाएंगे, जिन पर वीएफएक्स का काम होना है. इन जटिल सीन को तैयार करने में काफी समय लग सकता है, इसलिए फिल्म की रिलीज आगे खिसकने की संभावना भी जताई जा रही है.

इससे पहले एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान रणबीर कपूर ने खुद कन्फर्म किया था कि ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज आगे बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि यह फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ के बाद रिलीज होगी, जो अक्टूबर में सिनेमाघरों में आने वाली है.

Life style : 30 की उम्र में भूलने लगे हैं छोटी-छोटी बातें, कहीं आपके दिमाग पर ‘ब्रेन फॉग’ तो नहीं छा रहा? आइए जाने

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उम्र का एक पड़ाव होता है, जिसमें इंसान चीजों को भूलने लगता है. हालांकि, 30 साल की उम्र में इस तरह की दिक्कत नहीं होती है. अगर आपको हो रही है, तो सावधान होने की जरूरत है.
तीस की उम्र में याददाश्त कम होना आम बात नहीं है. लेकिन कई लोग एक अलग तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं जैसे कि दिमाग में धुंध-सा छाया रहना, सोचने की रफ्तार धीमी पड़ जाना, मीटिंग में ध्यान न टिक पाना, या बात करते-करते साधारण शब्द भूल जाना. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब बोझ जैसे लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने TOI को बताया कि यह डिमेंशिया नहीं, बल्कि ‘ब्रेन फॉग’ है. इसमें मेंटल थकान, उलझन और एकाग्रता में कमी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. एक्सपर्ट के अनुसार, लगातार तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कुछ मामलों में कोविड के बाद की रिकवरी इसकी बड़ी वजहें हैं. यानी दिमाग जवाब नहीं दे रहा, वह संकेत दे रहा है कि उसे संभालने की जरूरत है. ब्रेन फॉग कोई आधिकारिक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का मेल है जिसमें मानसिक सुस्ती, छोटी-छोटी बातें भूलना, मल्टीटास्किंग में दिक्कत और दोपहर तक थकावट शामिल होती है. दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है. जब नींद अधूरी हो, तनाव ज्यादा हो या पोषण कम मिले, तो सबसे पहले सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. ब्रेन बंद नहीं होता, बस लो पावर मोड में चला जाता है.

तीस की उम्र बॉयोलॉजिकल रूप से मेंटल क्षमता का अच्छा दौर माना जाता है, लेकिन लाइफस्टाइल बदल चुकी है. काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार डिजिटल एक्सपोजर तनाव बढ़ाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन बताते हैं कि लंबी कार्य अवधि और कम नींद ध्यान और वर्किंग मेमोरी को कमजोर करती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एक तिहाई एडल्ट पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है.

पोषक तत्वों की कमी भी अहम कारण हो सकती है. विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से एकाग्रता और एनर्जी घटती है. इसके साथ में थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या पीली त्वचा जैसे संकेत मिलें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. नींद, नियमित व्यायाम और पानी की पर्याप्त मात्रा, ये तीन चीजें अक्सर नजरअंदाज होती हैं. रोज 30 मिनट हल्का-फुल्का एक्सराइज ब्लड फ्लो बढ़ाता है और ध्यान सुधारता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी फोकस बिगाड़ सकता है. संतुलित आहार और स्क्रीन से दूरी भी मददगार है. अगर भूलने की समस्या रोजमर्रा के काम या नौकरी को प्रभावित करे, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

National : मिडिल ईस्ट की जंग में ईरान के खिलाफ कूदा तुर्किए, जानें उसकी मिलिट्री पॉवर

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तुर्किए ने इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया है. आइए जानते हैं कितनी ताकतवर है तुर्किए की मिलिट्री सेना. तुर्किए ने अब इजरायल और ईरान के बीच चल रहे मिडल ईस्ट झगड़े में ईरान के खिलाफ एक्टिव रूप से शामिल होने का अपना इरादा जाहिर किया है. यह स्थिति तब और बिगड़ गई जब तुर्किए की सेना ने कथित तौर पर भूमध्य सागर में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया. इससे अंकारा को झगड़े में ज्यादा सीधा रुख अपनाने पर मजबूर होना पड़ा. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान की तुलना में तुर्किए की सेना कितनी ताकतवर है.

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 के मुताबिक तुर्किए अभी दुनिया की नौंवी सबसे ताकतवर सेना है. बीते 10 सालों में अंकारा ने अपनी सेना को मॉडर्न बनाने में भारी इन्वेस्ट किया है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, देसी हथियार बनाने और मजबूत एयरफोर्स पर फोकस किया गया है. मॉडर्नाइजेशन और स्ट्रैटेजिक एलाइंस के इस कॉम्बिनेशन ने तुर्किए को मिडिल ईस्ट और यूरोप की सबसे असरदार मिलिट्री ताकतों में से एक बना दिया है.

तुर्किए के सबसे बड़े फायदे में से एक उसकी एयर पावर है. देश मॉडर्न F-16 फाइटर जेट का एक बड़ा बेड़ा चलाता है. यह इसकी एयरफोर्स की रीढ़ है. ये एयरक्राफ्ट सटीक हमले, एयर सुपीरियोरिटी मिशन और लंबी दूरी के ऑपरेशन करने में सक्षम हैं. फाइटर जेट के अलावा तुर्किए ने अपनी ड्रोन वाॅरफेयर क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया है. एडवांस्ड कॉम्बैट ड्रोन जैसे स्वदेशी अनमैन्ड सिस्टम ने सीरिया, लीबिया और कॉकेशस में संघर्षों में एक बड़ी भूमिका निभाई है.
तुर्किए के पास एक जबरदस्त जमीनी सेना भी है. देश के पास लगभग 2284 टैंक हैं. इनमें एडवांस्ड लेपर्ड 2 टैंक और देश में ही डेवलप किया गया अल्टे मेन बैटल टैंक शामिल हैं. इन आर्मर्ड यूनिट्स को मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी सिस्टम और एडवांस्ड बैटलफील्ड कम्युनिकेशन नेटवर्क का सपोर्ट मिलता है.

तुर्किए की आर्म्ड फोर्स में लगभग 3,55,000 एक्टिव सैनिक हैं. यह इसे इस इलाके की सबसे बड़ी प्रोफेशनल मिलिट्री में से एक बनाता है. तुर्किए के सैनिक काफी ज्यादा ट्रेंड और अनुभवी माने जाते हैं. यह सीरिया, इराक और दूसरे रीजनल कॉन्फिलक्ट जोन में कई ऑपरेशन में शामिल रहे हैं.
इसी के साथ तुर्किए की मिलिट्री ताकत के पीछे एक और बड़ा फैक्टर नाटो में उसकी मेंबरशिप है. नाटो मेंबर होने के नाते तुर्किए को आर्टिकल 5 के तहत कलेक्टिव डिफेंस अरेंजमेंट का फायदा मिलता है.

सैनिकों की संख्या के मामले में ईरान को साफ फायदा है. ईरान के पास 6,10,000 एक्टिव लोग हैं. यह तुर्किए से दोगुनी ताकत है. लेकिन जब टेक्नोलॉजी, एयर पावर और वेस्टर्न डिफेंस सिस्टम की बात होती है तो तुर्किए को बड़े पैमाने पर आगे माना जाता है.

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