Sunday, October 4, 2026
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MAHARASHTRA : सुनसान रात, सिंदूर-नींबू और पर्चियां… नकाबपोश महिला की क्या है कहानी, जिसकी तलाश में जुटी पुलिस

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महाराष्ट्र के जालना में एक होटल के बाहर सिंदूर, हल्दी, नींबू और नाम लिखी पर्चियां मिली हैं. इस घटना के बाद सनसनी फैल गई. सीसीटीवी फुटेज में एक नकाबपोश महिला दिखी है, जो रात में तंत्र क्रिया करते नजर आई है. यह मामला सामने आने के बाद पुलिस से शिकायत की गई. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. महिला की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.

महाराष्ट्र के जालना के गांव की एक रात अचानक रहस्य, डर और चर्चा का केंद्र बन गई. अंधेरे में एक नकाबपोश महिला चुपचाप एक होटल के बाहर पहुंचती है. उसके हाथ में कुछ सामान है… सिंदूर, हल्दी, नींबू और कुछ मुड़ी हुई पर्चियां. कुछ ही मिनटों में वह जमीन पर एक अजीब तरह की सजावट जैसी चीजें रखती है, पाउडर छिड़कती है और पर्चियां छोड़कर वहां से चली जाती है. पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है.

एजेंसी के अनुसार, अगली सुबह जब होटल मालिक अपनी दुकान खोलने पहुंचता है, तो दरवाजे के पास का नजारा देखकर ठिठक जाता है. जमीन पर सिंदूर और हल्दी बिखरी है, नींबू रखे हैं और कई कागज की पर्चियां पड़ी हैं. जब वह पर्चियां उठाकर देखता है, तो उन पर कुछ नाम लिखे मिलते हैं. इनमें कुछ स्थानीय नामचीन लोग और पुलिस कर्मियों के नाम भी थे. यहीं से शुरू होता है रहस्य और आशंका का सिलसिला.

यह मामला जालना जिले के भोकरदन तहसील के जावखेड़ा थोम्बरे गांव का है. होटल मालिक ने जब यह सब देखा, तो पहले तो समझ नहीं पाया कि यह किसी शरारत का नतीजा है या किसी तरह का टोटका. लेकिन जैसे-जैसे बात फैली, गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. किसी ने इसे तंत्र-मंत्र से जोड़ा, किसी ने धमकाने की कोशिश बताया, तो किसी ने कहा कि यह साजिश हो सकती है.

गांव के लोगों में घबराहट का माहौल बन गया. खास तौर पर तब, जब यह बात सामने आई कि पर्चियों पर लिखे नाम साधारण लोगों के नहीं, बल्कि प्रभावशाली व्यक्तियों और पुलिस से जुड़े हैं. हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर नामों का खुलासा नहीं किया है.होटल मालिक ने जब CCTV फुटेज खंगाला, तो तस्वीर और साफ हुई. कैमरे में एक महिला दिखती है. चेहरा ढका हुआ, सिर पर हुड वाली जैकेट, रात का समय, और बेहद सुनियोजित तरीके से वह जगह पर सामान रखती हुई. इसके बाद वह वहां से निकल जाती है.

फुटेज देखने के बाद होटल मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मौके का मुआयना किया, सामान जब्त किया और वीडियो की जांच की. शुरुआती जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया गया.

पुलिस के अनुसार, अज्ञात महिला के खिलाफ महाराष्ट्र के विशेष कानून मानव बलि और अन्य अमानवीय, अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. यह कानून ऐसे दावों, कर्मकांडों और गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है, जो अंधविश्वास या लोगों में डर पैदा करते हैं.

भोकरदन पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत और CCTV फुटेज देखने के बाद 1 फरवरी को केस दर्ज किया गया. महिला की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन उसकी तलाश जारी है. आसपास के कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि वह कहां से आई और किस दिशा में गई.

लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में दो एंगल अक्सर सामने आते हैं- एक, अंधविश्वास या टोटके के नाम पर किया गया कर्मकांड, दूसरा, किसी खास व्यक्ति या समूह को डराने या मानसिक दबाव बनाने की कोशिश. यहां पर्चियों पर कुछ खास नाम लिखे मिले, इसलिए पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही है.

जांच टीम फिलहाल कई सवालों के जवाब तलाश रही है. महिला कौन है और क्या वह स्थानीय है? क्या उसने अकेले यह काम किया या कोई और भी शामिल है? पर्चियों पर लिखे नामों का आपसी संबंध क्या है? घटना से पहले और बाद में महिला कहां गई?

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें. महाराष्ट्र उन राज्यों में है जहां अंधविश्वास और काले जादू जैसी प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून लागू है. ऐसे मामलों को सिर्फ सामाजिक नहीं, कानूनी अपराध भी माना जाता है. इसलिए इस केस को भी गंभीरता से लिया जा रहा है.

NATIONAL : दादा पवार के टच में अजित पवार के दोनों बेटे? क्या विलय की अभी भी गुंजाइश

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अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के विलय को लेकर सवाल जस का तस बना हुआ है. अजित पवार की जगह उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम बन गई हैं और एनसीपी की कमान संभालने की तैयारी में भी हैं. ऐसे में क्या एनसीपी के दोनों धड़ों के एक होने की गुंजाइश बची है या नहीं?महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के निधन के बाद उनकी सियासी विरासत को सुनेत्रा पवार ने संभाल लिया है. महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री कुर्सी संभालने के बाद अब सुनेत्रा पवार को एनसीपी की बागडोर दिए जाने की चर्चा है. इस तरह अजित पवार की पूरी राजनीतिक पावर अब उनकी पत्नि सुनेत्रा पवार के हाथों में होगी.

अजित पवार की बीते सप्ताह प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी. इसके बाद एनसीपी के दोनों धड़ों की तरफ से यह बात कही जाने लगी थी कि चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) आपसी गिले-शिकवे को भुलाकर फिर से एक होने की तैयारी थी.सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के बाद एनसीपी के एक होने के कयास पर पूर्णविराम लगता दिख रहा था, लेकिन अभी भी संभावना बनी हुई है. पर्दे के पीछे से दोनों गुटों के बीच बातचीत जारी है. बुधवार को शरद पवार से अजित पवार के दोनों बेटे पार्थ और जय पवार की अलग-अलग बैठक हुई है. इससे कयास लगाया जा रहा है कि एनसीपी के एक होने का रास्ता खुला हुआ है?

अजित पवार के निधन के बाद उनके चाचा और राजनीतिक गुरू रहे शरद पवार अचानक बारामती स्थित उनके पैतृक आवास पर पहुंचे, जहां सुनेत्रा पवार से मुलाकात की. ये मौका अजित पवार की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का भले ही था, लेकिन शरद पवार का वहां पहुंचना कुछ अलग वजहों से भी चर्चाओं में छाया हुआ है. शरद पवार की दिवंगत अजित पवार के दोनों बेटों पार्थ और जय पवार से एक बंद कमरे में लंबी मुलाकात हुई.

सूत्रों के मुताबिक ये मुलाकात दरअसल मुलाकात कम बैठक ज्यादा थी, जो बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली. हालांकि उस बैठक का एजेंडा क्या था इस बारे में उनकी ओर से कोई बात नहीं खोली गई है, लेकिन अजित पवार के दोनों बेटे पार्थ और जय पवार ने शरद पवार से अलग-अलग बैठक की थी. इन दो बैठकों में से एक में सिर्फ़ करीबी परिवार के सदस्य शामिल थे, जबकि दूसरी में विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी शामिल थे, जिसकी अध्यक्षता इसके संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार ने की थी.

पवार परिवार के सदस्यों के साथ हुई बैठक के एजेंडे के बारे में तुरंत कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन सूत्रों की माने तो चर्चा एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय और आने वाले जिला परिषद चुनावों पर केंद्रित थी. पीटीआई के मुताबिक विद्या प्रतिष्ठान के एक ट्रस्टी ने बताया कि प्रतिष्ठान की बैठक का प्राथमिक उद्देश्य दोनों भाइयों को पवार परिवार द्वारा स्थापित बारामती स्थित शैक्षणिक संस्थान के कामकाज से परिचित कराना था.

ट्रस्टी ने बताया कि यह बैठक विद्या प्रतिष्ठान और विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित थी. शरद पवार साहब बारामती में थे, इसलिए उन्होंने बैठक बुलाने के लिए कहा था. उन्होंने आगे कहा कि जय और पार्थ को बैठक में इसलिए बुलाया गया था ताकि वे संस्थान द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं और पाठ्यक्रमों की प्रकृति को समझ सकें. यह पूछे जाने पर कि क्या भाइयों को ट्रस्टी के रूप में शामिल किया जाएगा. ऐसे में ट्रस्ट गवर्निंग बॉडी में किसी भी नए सदस्य को शामिल करने का फैसला होना है, लेकिन उसका फैसला पवार परिवार में लिया जाना है.

पवार परिवार की मुलाकात का राजनीतिक गलियारों में असली फोकस पार्थ पवार की राज्यसभा महत्वाकांक्षा पर टिका हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, पार्थ पवार की रुचि सुनेत्रा पवार की राज्यसभा सीट में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनके पास ये सीट 2028 तक है. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्थ अपने लिए छह साल का राज्यसभा कार्यकाल चाहते हैं, जिसके लिए वह अप्रैल में होने वाले चुनाव में संसद जाने का रास्ता चुन सकते हैं.

एनसीपी के दोनों गुटों के विलय होने की संभावना अभी भी कायम है, क्योंकि अजित पवार और शरद पवार के बीच बहुत कुछ बात तय हो चुकी थी. इस बात की जानकारी को दोनों नेताओं ने अपने-अपने सिपहसलारों के साथ मंथन कर सहमति बनाने की कवायद कर रहे थे. माना जा रहा था कि जिला परिषद चुनाव के बाद पवार परिवार के एक होने के साथ-साथ एनसीपी के एक होने का ऐलान भी कर दिया जाएगा, लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने से पहले अजित पवार का निधन हो गया.

अजीत पवार की 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. अजित पवार के निधन के तीन दिन बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गई. अजीत की मौत के बाद, शरद पवार और उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं ने दावा किया कि मर्जर की बातचीत एडवांस्ड स्टेज में थी और दिवंगत डिप्टी सीएम ने NCP गुटों के फिर से एक होने की घोषणा के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की थी. माना जा रहा है कि पार्थ और जय पवार के शरद पवार से मिलने के बाद एनसीपी के एक होने की संभावना बनी हुई हैं.

शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने दावा किया कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय 2000 फीसदी तय है. पवार परिवार के मुखिया शरद पवार हैं और उन्हें अजित पवार की इच्छा को पूरा करना चाहिए. अजीत पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय की बातचीत कर रहे थे, जिसे अब अमलीजामा पहनाना की कवायद करनी चाहिए. पार्थ और जय पवार जिस तरह से शरद पवार से मिले हैं, उसके सियासी मायने को समझना चाहिए.

RAJASTHAN : ‘मैं मरा नहीं हूं, मुझे मारा गया’, सुसाइड से पहले सस्पेंड हुए टीचर ने जयपुर पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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मरने से पहले मनोहर भादू ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह 20 लोगों के परिवार में अकेले घर संभालने वाला है. 4 साल से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा था और दोस्तों से उधार लेकर जा रहा था.राजस्थान की राजधानी जयपुर में बुधवार, 4 फरवरी की शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. इस घटना ने न सिर्फ पुलिस तंत्र ब्लिक पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महेशनगर इलाके में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे और सस्पेंड चल रहे लेक्चरर ने चलती ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली.मृतक का नाम मनोहर भादू था. उसने सुसाइड नोट में सीधे-सीधे पुलिस और एसओजी के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है, “मैंने आत्महत्या नहीं की. मेरी इरादतन हत्या की गई है.”

यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस मानसिक और सामाजिक दबाव की कहानी है, जिसने एक पढ़े-लिखे, जिम्मेदार और परिवार के सहारे को मौत की पटरी तक पहुंचा दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लेक्चरर का शव करीब 3 घंटे तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा. इस दौरान ऊपर से तीन ट्रेनें गुजर गईं, लेकिन किसी ने शव को हटाने की हिम्मत नहीं जुटाई.बाद में एक व्यक्ति ने साहस दिखाते हुए शव को ट्रैक से अलग किया, ताकि अन्य ट्रेनें प्रभावित न हों. घटना की सूचना मिलते ही महेशनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में भिजवाया.

मनोहर ने सुसाइड नोट में लिखा है, “हाथ कांप रहे हैं, लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही खत्म हो रही है, वो ईश्वर जानता है. मैं घर के 20 सदस्यों में अकेला था, जो सबको संभालता था. मैं इतना कमजोर नहीं हूं, लेकिन गलत आरोप सहन नहीं हो रहे. पहले भी आरोप थे, लेकिन उनसे मैं नहीं मरा. कोर्ट में तारीखों पर जाता था, लेकिन खर्चे बहुत लग रहे थे. 4 साल से दोस्तों से उधार लेकर जी रहा हूं.”मृतक मनोहर भादू ने आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट को अपने परिवार और दोस्तों को भेजा. उसका स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहा है. पुलिस अब वायरल सुसाइड नोट की जांच कर रही है.

अभी तक पुलिस की ओर से यह नहीं बताया गया है कि मनोहर भादू मरने से पहले किस केस की बात कर रहा था? उसपर क्या आरोप लगे थे और वह कोर्ट के चक्कर क्यों लगाता था? हालांकि, उसके भेजे गए सुसाइड नोट में एक बात यह भी लिखी है कि पुलिस ने कई बेगुनाहों के साथ ऐसा ही किया है, जैसा उसके साथ हो रहा है. सेंट्रल जेल में जाकर देखो, मैं अपना वैसा हाल नहीं करना चाहता. रोज-रोज मरने से अच्छा है, एक बार में मर जाऊं.

SPORTS : WPL 2026 फाइनल में आमने सामने होंगी जिगरी दोस्त, जानें पिच रिपोर्ट, मैच प्रेडिक्शन और संभावित प्लेइंग 11

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डब्ल्यूपीएल फाइनल में आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स की भिड़ंत है. दोनों की कप्तान स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स अच्छी दोस्त हैं, जो आज आमने-सामने होंगी.महिला प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण (WPL 2026) का फाइनल आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेला जाएगा. दोनों टीमों की कप्तान स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स कितनी पक्की दोस्त हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हो कि जब स्मृति की शादी टूटी थी तब उन्होंने बिग बैश लीग में नहीं जाने का बड़ा फैसला लिया था. खैर, आज जेमिमा अपनी टीम को पहला खिताब दिलाने के लिए पूरी जान लगा देंगी.

महिला प्रीमियर लीग 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अंक तालिका में टॉप का स्थान हासिल कर डायरेक्ट फाइनल में जगह बनाई, जबकि दिल्ली कैपिटल्स तीसरे स्थान पर रही थी. एलिमिनेटर में गुजरात को हराकर दिल्ली दूसरी फाइनलिस्ट बनी, जिन्होंने डबल राउंड रॉबिन में हुए 8 में से अपने 4 मैच हारे थे.

साल 2023 में महिला प्रीमियर लीग का पहला संस्करण खेला गया था, तब से लेकर अभी तक दिल्ली कैपिटल्स ने हर संस्करण फाइनल में जगह बनाई. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 2024 में दिल्ली को हराकर अपना पहला खिताब जीता था, जबकि अन्य दो फाइनल में दिल्ली मुंबई के हाथों हारी. अब इस सिलसिले को दिल्ली तोड़कर अपना पहला खिताब जीतना चाहेगी. इस सीजन राउंड रॉबिन फॉर्मेट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 2 मैच हारे, जिसमें एक दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ था.

आरसीबी: ग्रेस हैरिस, स्मृति मंधाना (कप्तान), जॉर्जिया वोल, राधा यादव, ऋचा घोष (विकेटकीपर), नादिन डी क्लार्क, पूजा वस्त्राकर, अरुंधति रेड्डी, सायली सतघारे, श्रेयंका पाटिल, लॉरेन बेल.

डीसी: शेफाली वर्मा, लिजेल ली (विकेटकीपर), लॉरा वोल्वार्ड्ट, जेमिमा रोड्रिग्स (कप्तान), मरिजाने कैप, चिनेल हेनरी, निकी प्रसाद, स्नेह राणा, मिनु मणि, श्री चरनी, नंदिनी शर्मा.

महिला प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल वडोदरा के बीसीए स्टेडियम में खेला जाएगा. इस पिच को धीमा माना जाता है, लेकिन एलिमिनेटर मैच में ऐसा देखने को नहीं मिला. गुजरात ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 168 रन बनाए, लक्ष्य को दिल्ली ने 16वें ही ओवर में हासिल कर लिया. ओस यहां बड़ा फैक्टर साबित हो सकती है, इसलिए टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी लेने का फैसला सही रहेगा. फाइनल में एक अच्छी बल्लेबाजी पिच देखने को मिल सकती है. पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को चाहिए होगा कि 190 या 200 के स्कोर तक पहुंचा जाए, इससे लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम पर दबाव बढ़ जाएगा.

बेशक दिल्ली कैपिटल्स ने अंतिम मैचों में अच्छी वापसी की, शानदार खेल दिखाया है लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ज्यादा मजबूत नजर आ रही है. स्मृति मंधाना इस संस्करण में तीसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज है, जिन्होंने 8 पारियों में 290 रन बनाए हैं. दिल्ली की नंदनी शर्मा इस सीजन दूसरी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं, जिन्होंने 16 विकेट लिए हैं. इसके बाद तीसरे नंबर पर आरसीबी की नदीन डी क्लर्क हैं, जिन्होंने 15 विकेट लिए हैं. आज आरसीबी का पलड़ा थोड़ा ज्यादा भारी लग रहा है.

MAHARASHTRA : 32 घंटे बाद खुला मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, गैस टैंकर हादसे के बाद जाम से मिली राहत, प्रशासन पर उठे सवाल

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर गैस टैंकर पलटने से 32 घंटे तक यातायात ठप रहा. टैंकर हटने के बाद रास्ता खुला, लेकिन लंबे जाम ने प्रशासन की तैयारी और टोल सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए.मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर आखिरकार 32 घंटे बाद यातायात पूरी तरह से बहाल हो गया है. दुर्घटनाग्रस्त प्रोपलीन गैस टैंकर को हाईवे से हटा दिया गया, जिसके बाद गाड़ियों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो सकी. हालांकि, इस लंबे जाम ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारी, आपातकालीन व्यवस्था और टोल के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

मंगलवार (3 फरवरी) की शाम करीब 5 बजे पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक टैंकर पलट गया. टैंकर में प्रोपाइलीन गैस भरी हुई थी, जो बेहद ज्वलनशील रसायन है. हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने एक्सप्रेसवे पर यातायात रोक दिया. शुरुआती तौर पर यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सही माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह जाम 32 घंटे तक खिंच गया.

इस दौरान हजारों वाहन हाईवे पर फंसे रहे. कई यात्री रातभर गाड़ियों में ही बैठे रहे, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी. खाने-पीने और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी देखने को मिली.टैंकर को हटाने के बाद उम्मीद थी कि यातायात तुरंत सामान्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. खंडाला से आगे यातायात तो सुचारू हो गया, लेकिन मलवली के पास एक ट्रक खराब हो गया. वहीं, कामशेत इलाके में कई भारी वाहनों के चालक गाड़ियों में ही सो गए, जिससे लंबी कतारें लग गईं.

महामार्ग पुलिस को खुद जाकर सो रहे ड्राइवरों को जगाना पड़ा, तब जाकर गाड़ियां आगे बढ़ सकीं. आडोशी सुरंग के पास यातायात चलता रहा, लेकिन यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ाकरीब 32 घंटे के लंबे इंतजार के बाद मुंबई की ओर जाने वाला मार्ग यातायात के लिए खोल दिया गया. धीरे-धीरे जाम कम हुआ और फंसे हुए वाहन आगे बढ़ने लगे.

इस पूरे मामले पर राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे लगभग 32 घंटे तक बंद रहा और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इसके बाद सरकार की ओर से हमेशा की तरह सिर्फ जांच के आदेश दे दिए गए.राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन के पास ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई ठोस एक्शन प्लान है? उन्होंने कहा कि स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की प्रेरणा से बने इस एक्सप्रेसवे को 24 साल हो चुके हैं, लेकिन न तो संभावित आपदाओं को लेकर गंभीर तैयारी की गई और न ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर लगातार ध्यान दिया गया.उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस दौरान कोई काम तत्परता से हुआ है, तो वह है टोल वसूली. सवाल यह है कि टोल के बदले यात्रियों को कौन-सी सुविधाएं मिल रही हैं?

राज ठाकरे ने मांग की कि जिन यात्रियों से इस अवधि में टोल वसूला गया है, वह राशि उन्हें वापस की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जांचों का दिखावा करने के बजाय सरकार को एक ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई हो सके.

उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई–पुणे हाई-स्पीड ट्रेन की घोषणा हो चुकी है, लेकिन जब तक वह हकीकत बनेगी, तब तक मौजूदा सड़क यात्रा को तो सुचारू किया जाए. आज की तारीख में कोई यह भरोसा नहीं दे सकता कि मुंबई से पुणे पहुंचने में कितना समय लगेगा.मामले पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि टैंकर में भरा प्रोपाइलीन रसायन बेहद ज्वलनशील था. हादसे के बाद तुरंत उसे हटाना संभव नहीं था, क्योंकि हल्की-सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती थी.

उन्होंने बताया कि क्रेन तुरंत भेजी गई थी, लेकिन रसायन की वजह से काम करना जोखिम भरा था. बीपीसीएल की विशेषज्ञ टीम को मौके पर बुलाया गया, क्योंकि वही इस तरह के रसायन को संभालने में सक्षम है. उनके अनुसार, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही काम किया गया और एक तरफ से यातायात शुरू किया गया.

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों के बीच यातायात व्यवस्था कितनी नाजुक है. यात्रियों का कहना है कि अगर एक्सप्रेसवे पर कोई हादसा हो जाए, तो वे घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक फंसे रह सकते हैं.अब सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन इस घटना से कोई सबक लेंगे, या फिर अगली बड़ी परेशानी तक सब कुछ यूं ही चलता रहेगा. जनता को सिर्फ जांच नहीं, बल्कि ठोस समाधान और भरोसा चाहिए कि उनका सफर सुरक्षित और समय पर पूरा हो सके.

UP : अबतक 300 लड़कियों का शिकार… हिंदू बनकर फंसाते, अश्लील वीडियो बनाते, फिर धर्मांतरण के लिए करते मजबूर! बस्ती की पीड़िता की आपबीती

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यूपी के बस्ती में हिंदू बनकर लड़कियों को फंसाने और धर्मांतरण कराने के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी अजफरुल हक उर्फ प्रिंस की गिरफ्तारी के बाद सरकार ने एसपी अभिनंदन का तबादला कर दिया है. अब आईपीएस यशवीर सिंह इस सनसनीखेज केस की कमान संभालेंगे.

बस्ती जिले में AIMIM नेता अजफरुल हक उर्फ प्रिंस द्वारा हिंदू बनकर लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने और उनका धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है. पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने प्रिंस सहित 8 लोगों के खिलाफ गैंगरेप और धर्मांतरण की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. मुख्य आरोपी प्रिंस को मुंबई के बांद्रा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इसी बीच, शासन ने जिले के एसपी अभिनंदन का तबादला सहारनपुर कर दिया है और उनकी जगह यशवीर सिंह को बस्ती का नया कप्तान बनाया गया है.

कलवारी थाना क्षेत्र की पीड़िता ने बताया कि जनवरी 2022 में उसकी मुलाकात प्रिंस से हुई थी. प्रिंस ने खुद को हिंदू बताया और हाथ में कलावा पहनकर उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया. आरोपी ने शादी का वादा कर पीड़िता का यौन शोषण किया. जब युवती शिकायत लेकर उसके घर पहुंची, तो प्रिंस ने अपने भाई और रिश्तेदारों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया. पीड़िता ने खुलासा किया कि विरोध करने पर उसके परिवार को प्रताड़ित किया जाता था और भाई का अपहरण तक कर लिया जाता था.

पीड़िता ने पुलिस के सामने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उसका दावा है कि हिस्ट्रीशीटर प्रिंस और उसके घरवाले करीब 300 हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बना चुके हैं. ये लोग हिंदू बनकर लड़कियों को फंसाते थे, उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाते थे और फिर धर्मांतरण के लिए मजबूर करते थे. आरोप है कि इन लड़कियों को देह व्यापार के दलदल में धकेलने और देश-विदेश में बेचने की भी साजिश रची जाती थी. इस काले कारनामे में आरोपी के घरवाले भी बराबर के साझीदार थे.

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी अभिनंदन ने एफआईआर और गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए थे. आरोपी प्रिंस को बांद्रा से दबोच लिया गया, लेकिन इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद शासन ने ‘तबादला एक्सप्रेस’ चलाते हुए एसपी अभिनंदन को हटा दिया. उन्हें अब सहारनपुर की जिम्मेदारी दी गई है. जिले में इस चर्चा का बाजार गर्म है कि धर्मांतरण रैकेट के खुलासे और पुलिस की शुरुआती कार्यप्रणाली को लेकर उपजे विवाद के चलते यह प्रशासनिक फेरबदल किया गया है.

बस्ती के नए एसपी के रूप में अब आईपीएस यशवीर सिंह पदभार संभालेंगे. यशवीर सिंह की छवि एक बेहद सख्त और तेजतर्रार अधिकारी की रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि वह इस धर्मांतरण और गैंगरेप मामले की गहराई से जांच करवाएंगे और पीड़िता को न्याय दिलाएंगे. फिलहाल पुलिस आरोपी प्रिंस के अन्य साथियों और सोशल मीडिया नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी बेनकाब किया जा सके.

MAHARASHTRA : जिनके पास खेत नहीं उन्हें बांटा मुआवजा, ₹25 करोड़ के गबन में नपा सरकारी बाबू

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महाराष्ट्र में जालना के 24.90 करोड़ रुपये के अतिवृष्टि अनुदान घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा ने मुख्य आरोपी आशीष पैठणकर को गिरफ्तार किया. अब तक 32 आरोपी पकड़े गए हैं और तीन फरार हैं.महाराष्ट्र के जालना जिले में सामने आए 24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये के अतिवृष्टि अनुदान घोटाले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. यह अनुदान भारी बारिश के बाद किसानों को हुए नुकसान के लिए दिया जाना था. इस मामले के मुख्य आरोपी को जालना की आर्थिक क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी का नाम आशीष प्रमोद कुमार पैठणकर है, जिसकी उम्र 45 साल बताई जा रही है. आरोपी घनसावंगी तहसील कार्यालय में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर काम करता था.

अंबड और घनसावंगी तहसील में अतिवृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ था. इसके बाद शासन द्वारा चार अलग-अलग फैसलों के जरिए प्रभावित किसानों के लिए अनुदान घोषित किया गया था. लेकिन संबंधित सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर अनुदान सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी लाभार्थियों के नाम शामिल किए, जिनके नाम पर कोई खेती ही मौजूद नहीं थी.इन फर्जी नामों के आधार पर मिली सरकारी अनुदान राशि को आरोपियों ने खुद निकालकर सरकारी फंड का 24.90 करोड़ रुपये से ज्यादा का गबन किया. इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन को मिलने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई थी.

कमेटी ने रिपोर्ट सबमिट कर दी है, जिसमें सरकारी फंड के बड़े पैमाने पर गबन की बातें सामने आई है. इसके बाद अंबड पुलिस थाने में 22 तलाठी, तहसील कार्यालय के आपदा प्रबंधन विभाग के 5 कर्मचारी और जिला कलेक्टर कार्यालय के 1 कर्मचारी सहित कुल 28 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.जांच के दौरान अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए. गुनाह दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गए थे. पुलिस से बचने के लिए वे लगातार मोबाइल फोन और ठिकाने बदलते रहे, सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और कुछ आरोपी अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर छिपकर रहने लगे थे.

मुख्य आरोपी आशीष पैठणकर पिछले पांच महीनों से फरार था और अग्रिम जमानत के लिए कोशिशें कर रहा था. इसी बीच आर्थिक अपराध शाखा को आरोपी के जालना आने की गुप्त जानकारी मिली. तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस कर आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.अब तक इस अनुदान घोटाले में कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी भी फरार हैं. फरार आरोपियों की तलाश जारी है. घोटाले की राशि वसूलने के लिए कुछ आरोपियों की संपत्तियों पर बोजा लगाया गया है और कुछ आरोपियों के बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए गए हैं. आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं.

इस मामले में अंबड सत्र न्यायालय और बॉम्बे हाईकोर्ट के छत्रपती संभाजीनगर खंडपीठ में दाखिल सभी अग्रिम जमानत अर्ज़ियां खारिज कर दी गई हैं. जालना की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मामले की आगे की जांच जारी है.

NATIONAL : न्यूड फोटो मार्फिंग और ब्लैकमेलिंग से परेशान युवक ने की खुदकुशी, पुलिस ने लोगों को किया अलर्ट

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न्यूड फोटो मॉर्फिंग और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर एक युवक ने सुसाइड कर लिया. इस घटना ने साइबर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं घटना के बाद पुलिस ने लोगों भी अलर्ट किया है.

हैदराबाद के रामनगर इलाके में न्यूड फोटो मॉर्फिंग और ब्लैकमेल का शिकार होने के बाद एक 36 साल के व्यक्ति ने सुसाइड कर लिया. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. मृतक की पहचान प्रेम कुमार (36) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार अज्ञात साइबर अपराधियों ने उसे मॉर्फ्ड न्यूड तस्वीरें भेजीं और धमकी दी कि अगर उसने तुरंत ₹3,000 नहीं दिए, तो वे उसके परिवार के सदस्यों की भी न्यूड तस्वीरें और वीडियो फैला देंगे.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पत्नी और परिवार के सदस्यों द्वारा बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद भी व्यक्ति ने ऐसा कदम उठाया. जबकि उसके परिवार वाले उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दे रहे थे. अधिकारी के मुताबिक पीड़ित कथित तौर पर लगातार धमकियों के कारण गंभीर मानसिक तनाव में था.ऐसे में दबाव से परेशान होकर प्रेम कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है.

पुलिस ने एक बार फिर नागरिकों से आग्रह किया है कि जब साइबर ब्लैकमेल करने वाले उन्हें निशाना बनाएं तो घबराएं नहीं या पैसे न दें. अधिकारियों ने जोर दिया कि एक बार पैसे देने के बाद मांगें आमतौर पर जारी रहती हैं. जिससे स्थिति और खराब हो जाती है.

पीड़ितों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी घटनाओं की तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें या 1930 पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें. अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर रिपोर्टिंग और हिम्मत साइबर जबरन वसूली के अपराधों का मुकाबला करने के सबसे प्रभावी तरीके हैं.

NATIONAL : अयोध्या में माता सीता के जीवन पर आधारित ‘वैदेही आर्ट गैलरी’ की होगी स्थापना, CM योगी ने दिए दिशा-निर्देश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में माता सीता के जीवन और मर्यादा पर आधारित ‘वैदेही आर्ट गैलरी’ स्थापित करने के निर्देश दिए, जो आधुनिक तकनीक से संस्कृति और प्रेरणा अनुभव कराएगी.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या धाम में माता सीता के जीवन-चरित पर केंद्रित ‘वैदेही आर्ट गैलरी’ की स्थापना के निर्देश दिए हैं. बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में उन्होंने कहा कि सीता मइया भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं, और नई पीढ़ी को उनके उज्ज्वल चरित्र से गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है.

आर्ट गैलरी की परिकल्पना साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक गैलरी केवल एक कला-संग्रहालय न होकर, सीता माता के जीवन, त्याग, करुणा, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्पाठ प्रस्तुत करने वाली एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव-स्थली होनी चाहिए.

उन्होंने निर्देश दिया कि इस गैलरी की कथा-वस्तु, डिजाइन, विज़ुअल भाषा, कला और तकनीक सहित सभी आयाम इस भावना को प्रकट करे कि हम एक दिव्य विरासत का पुनर्पाठ कर रहे हैं, जिसे नई पीढ़ी के सामने प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया जाना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वैदेही आर्ट गैलरी की मूल भावना यही हो कि आगंतुक सीता माता के जीवन-संदेश को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें.

अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निकट वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि इस गैलरी का विकास अयोध्या के वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में उभरने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा. मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए.

Silver Price Crash: एक झटके में 20000 रुपये गिरी चांदी की कीमत, जानें अपने शहर का ताजा भाव

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सोने-चांदी की कीमत में पिछले कुछ दिनों से तेज उतार-चढ़ाव जारी है. इसी क्रम में आज चांदी की कीमत में प्रति किलो के हिसाब से 20000 रुपये की गिरावट आई है.

आज गुरुवार 5 फरवरी को चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई. MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भारतीय समयानुसार सुबह 9:36 बजे तक चांदी की कीमतें 2,46,257 रुपये प्रति किलोग्राम पर थीं, जो पिछले बंद भाव से 8.4 परसेंट कम है. इस बड़ी गिरावट से पहले चांदी की कीमत 2,52,719 रुपये पर खुली थी.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर आज चांदी की कीमत 81 डॉलर प्रति औंस थी, जो पिछली क्लोजिंग से 3.74 परसेंट कम है. हालांकि, गिरावट से पहले चांदी में लगभग 25 परसेंट का उछाल भी आया. इसी तरह से रिटेल मार्केट में आज चांदी की कीमत में प्रति किलो के हिसाब से 20000 रुपये की गिरावट आई है .बुधवार को भारत में चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल आया. इसके चलते इसकी कीमत 320 रुपये प्रति ग्राम और 3,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम के लेवल पर पहुंच गई. जनवरी में चांदी की कीमतें 4 लाख रुपये के पार चली गई थीं, लेकिन बाद में इसमें तेजी से गिरावट आई.

बुधवार को आई तेजी के बाद आज चांदी की कीमत में प्रति किलो के हिसाब से 20000 रुपये की गिरावट आई है, जिससे अब इसकी कीमत 3,00,000 रुपये है. वहीं, प्रति ग्राम के हिसाब से अभी चांदी 300 रुपये में बिक रही है. इसी के साथ दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर जैसे तमाम बड़े शहरों में आज 1 ग्राम चांदी की कीमत 3000 रुपये, 100 ग्राम चांदी की कीमत 3000 रुपये और 1 किलो चांदी की कीमत 3,00,000 रुपये है.

दरअसल, अरब सागर में अमेरिकी सेना और ईरान के बीच तनातनी ने सेफ-हेवन डिमांड को बढ़ाया, लेकिन बाजार को फिलहाल शुक्रवार को होने वाली परमाणु वार्ता के नए दौर का इंतजार है. इसके अलावा, चांदी और दूसरी कीमती धातुओं की कीमतें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी पर नेगेटिव रिएक्शन दे रही हैं. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अब 98 के निशान के करीब ट्रेड कर रहा है, जबकि जनवरी के आखिर में यह चार साल के निचले स्तर पर गिर गया था.

डॉलर इंडेक्स और सोने-चांदी जैसे कीमती धातुओं के बीच उल्टा संबंध होता है. डॉलर मजबूत होने पर इनकी कीमतें गिरती हैं क्योंकि सोने-चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है. ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये जैसी दूसरी करेंसीज का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है. इससे ग्लोबल लेवल पर मांग कम होती है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है.

इसके अलावा, जब डॉलर मजबूत होता है तो निवेशक चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले एसेट्स के बजाय डॉलर में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं. चांदी गैर-ब्याज एसेट इसलिए है क्योंकि इसे अपने पास रखने मात्र से यह कोई अतिरिक्त पैसा, इंटरेस्ट या डिविडेंड जेनरेट नहीं करता.

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