बॉलीवुड से लेकर टीवी इंडस्ट्री तक न्यू ईयर के जश्न में डूबा हुआ है. एक्ट्रेस ने नए साल के मौके पर अपने बेटे की झलक दिखाई है. वीडियो में एक्ट्रेस बेटे के संग डांस करते हुए जेन बीटा को सलाह दे रही हैं.देशभर के लोग न्यू ईयर सेलिब्रेशन में डूबे हुए हैं. वहीं फिल्मी और टीवी सेलेब्स भी पीछे नहीं हैं. इसी बीच गौहर खान ने 2025 का आखिरी दिन परिवार के संग सेलिब्रेट किया. गौहर ने एक फैमिली फंक्शन की तस्वीर शेयर की, जिसमें वो संगीत में दिल खोलकर नाचते हुए दिखाई दे रही हैं.
इंस्टाग्राम स्टोरीज पर गौहर ने परिवार के संग शेयर किया हुआ एक वीडियो रीपोस्ट किया. वीडियो में, एक्ट्रेस एक खूबसूरत सूट पहने हुए मंच पर चढ़ती दिख रही हैं. इतना ही नहीं वो फेमस सॉन्ग गल बन गई की धुन पर थिरक रही हैं. वीडियो पर लिखा था,’सबसे प्यारी गौहर बाजी का डांस.’ गौहर ने इस वीडियो को परिवार कैप्शन और एक लाल दिल वाले इमोजी के संग दोबारा पोस्ट किया.
गौहर का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वो अपने बेटे से बातें करती दिख रही हैं.इतना ही नहीं वीडियो को शेयर करते हुए लिखा,’मम्मी की तरह से जेन बीटा बच्चे को दी जाने वाली एडवाइस.’ गौहर ‘हम हैं नए अंदाज क्यों हो पुराना’ पर बैठे हुए डांस कर रही हैं और फिर बेटे को गोद में ले लेती हैं.
ये कोई पहला मौका नहीं था जब गौहर ने अचानक से परफॉर्मेंस देकर हर किसी को चौंका दिया. इससे पहले बेटे के जन्म के एक महीने बाद ही एक्ट्रेस ने करण औजला के सॉन्ग फॉर ए रीजन पर जमकर डांस किया था. वो वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. मालूम हो गौहर खान और जैद दरबार ने इंस्टाग्राम पर अपने दूसरे बच्चे के जन्म की खुशखबरी शेयर की थी.हो एक्ट्रेस के दूसरे बेटे का जन्म 1 सितंबर 2025 को हुआ था. इससे पहले 2023 में एक्ट्रेस ने अपने बड़े बेटे जेहान का स्वागत किया था. गौहर ने 2020 में जैद संग शादी की थी. इन दिनों बेशक गौहर किसी प्रोजेक्ट में नजर नहीं आ रही हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं.
पटना जंक्शन पर सोना कारोबारी से 22.50 लाख की लूट को अंजाम दिया गया. आरोपी बदमाश पुलिस की वर्दी में आए थे. पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर लूट कांड का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस घटना ने स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह घटना सोमवार (29 दिसंबर) रात की है. घटना के बाद पीड़ित कारोबारी धीरज कुमार ने इस संबंध में जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद रेल पुलिस ने दोनों बदमाशों को पकड़ लिया है. दोनों के पास से 19 लाख कैश भी बरामद हुआ है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम दीपक झा और राजा कुमार हैं.
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि दोनों पटना जंक्शन पर ही पानी का कारोबार करते थे. उसी की आड़ में छिनतई और धोखाधड़ी जैसे अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लगे. कारोबारी धीरज कुमार द्वारा जीआरपी थाने में दी गई शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने साले दीपक कुमार को वैशाली से पटना के बाकरगंज स्थित राज टंच के मालिक संतोष देवकर के पास चांदी के गहने देने भेजा था.
गहने सौंपने के बाद दीपक एक बैग में 22.50 लाख रुपये लेकर पटना जंक्शन लौट रहा था. इसी दौरान पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति दीपक के पास पहुंचा और शाम होने का हवाला देते हुए बैग की जांच के नाम पर उसे जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से प्लेटफॉर्म नंबर-6 तक ले गया.
इसके बाद बदमाश उसे प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर खड़ी ट्रेन की एक खाली बोगी में ले गए. वहां पहले से एक अन्य आरोपी मौजूद था. बदमाशों ने दीपक को डरा-धमकाकर बैग की तलाशी ली और उसमें रखे 22.50 लाख रुपये निकालकर फरार हो गए.
रेल एसपी इनामुल हक ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजा और दीपक झा के रूप में हुई है. दीपक झा खुसरूपुर का रहने वाला है, जबकि राजा करबिगहिया इलाके का निवासी है. दोनों पिछले तीन महीनों से पटना जंक्शन पर पानी बेचने का काम कर रहे थे और करबिगहिया इलाके में किराए के कमरे में रह रहे थे.
घटना की रात पीड़ित के पास बैग देखकर आरोपियों को शक हुआ कि वह शराब ले जा रहा है. इसी बहाने दोनों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए पीड़ित को बरगलाया और प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन की बोगी में ले गए. वहां डरा-धमकाकर बैग से रुपये निकाल लिए.
आरोपी पुलिस की खाकी जैकेट पहने हुए थे और मोबाइल में जीआरपी थानेदार के नाम से नंबर सेव कर रखा था, जिससे पीड़ित को डराया गया. पुलिस ने राजा के पास से 9 लाख और दीपक के पास से 10 लाख रुपये बरामद किए हैं. शेष रकम की बरामदगी के लिए छापेमारी जारी है. रकम ज्यादा होने के कारण इनकम टैक्स विभाग को भी सूचना दे दी गई है, जो अपने स्तर से जांच कर रहा है.
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव लागू हो गए हैं. 1 जनवरी 2026 से यूपीआई और अन्य डिजिटल लेनदेन के नियम पहले से ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं, ताकि ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाई जा सके.नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव हो गए हैं, जिनका सीधा असर जेब पर पड़ने वाला है. इन बदलावों में एलपीजी गैस की कीमतों से लेकर कारों के दाम, बैंकिंग नियम, यूपीआई, सिम वेरिफिकेशन और सरकारी योजनाएं तक शामिल हैं. जहां एक ओर नया साल नई उम्मीदें लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर कुछ फैसलों से खर्च भी बढ़ गया है.
सबसे पहले एलपीजी सिलेंडर की बात करें तो 1 जनवरी 2026 से 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 111 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी गई है. दिल्ली में यह सिलेंडर अब 1580.50 रुपये से बढ़कर 1691.50 रुपये का हो गया है. कोलकाता में इसकी कीमत 1684 रुपये से बढ़कर 1795 रुपये, चेन्नई में 1739.50 रुपये से बढ़कर 1849.50 रुपये और मुंबई में 1531.50 रुपये से बढ़कर 1642.50 रुपये हो गई है. इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ने की संभावना है.
नए साल की शुरुआत पर इन्द्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने अपने उपभोक्ताओं को राहत दी है. कंपनी ने घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की कीमतों में प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर 70 पैसे तक की कटौती करने का ऐलान किया है. इस कटौती के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पीएनजी की नई कीमत घटकर 47.89 रुपये प्रति एससीएम हो गई है.
इस फैसले से खास तौर पर शहरी घरों को फायदा मिलेगा, जहां बड़ी संख्या में लोग खाना पकाने के लिए पीएनजी का इस्तेमाल करते हैं. बढ़ती महंगाई के बीच गैस की कीमतों में आई यह कमी घरेलू बजट पर बोझ कम करने में मददगार साबित हो सकती है और उपभोक्ताओं के लिए नए साल की एक सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है.
नए साल के साथ ही कार खरीदना भी महंगा हो गया है. 1 जनवरी 2026 से कई ऑटो कंपनियों ने अपने वाहनों की कीमतों में इजाफा कर दिया है. बीएमडब्ल्यू, रेनॉल्ट और निसान ने अपनी गाड़ियों के दाम 3,000 रुपये से लेकर तीन प्रतिशत तक बढ़ाने का ऐलान किया है. वहीं होंडा और टाटा मोटर्स ने भी कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं, जिससे 2026 मॉडल की कारें पिछले साल के मुकाबले ज्यादा महंगी पड़ सकती हैं.
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव लागू हो गए हैं. 1 जनवरी 2026 से यूपीआई और अन्य डिजिटल लेनदेन के नियम पहले से ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं, ताकि ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाई जा सके. इसके साथ ही सिम कार्ड के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी कड़ी कर दी गई है. राहत की बात यह है कि एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और पीएनबी समेत कई बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में कटौती की घोषणा की है, जो नए साल से प्रभावी हो गई है.
इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि योजना में भी कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अब योजना का लाभ लेने के लिए यूनिक किसान आईडी अनिवार्य कर दी गई है. साथ ही, यदि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचता है और 72 घंटे के भीतर उसकी रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है, तो अब उस नुकसान की भरपाई भी योजना के तहत की जा सकेगी.
आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए नया साल अहम साबित हुआ है. सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद 1 जनवरी 2026 से आठवां वेतन आयोग औपचारिक रूप से लागू हो चुका है. लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था, क्योंकि इससे वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद जुड़ी हुई है.
हालांकि जानकारों के मुताबिक, फिलहाल इसका असर सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहेगा. यानी कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी और भत्तों का रिकॉर्ड तो तैयार किया जाएगा, लेकिन वास्तविक रूप से बढ़ा हुआ वेतन और एरियर मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है. सरकार की ओर से नई वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसका लाभ सीधे कर्मचारियों और पेंशनधारियों को मिल पाएगा. ऐसे में फिलहाल सभी को थोड़े और इंतजार के लिए तैयार रहना होगा.
कुल मिलाकर, 1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये बदलाव जहां कुछ मामलों में राहत लेकर आए हैं, वहीं कई मोर्चों पर आम आदमी का खर्च बढ़ने वाला है. ऐसे में नए साल की शुरुआत के साथ इन नियमों को समझना और उसी हिसाब से वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी हो गया है.
हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव राजपुर में दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर दलबीर की बेरहमी से हत्या कर दी गई. अज्ञात हमलावरों ने उन्हें उनकी ही बैसाखी से पीट-पीटकर मार डाला. शव फैक्ट्री के अंदर मिला. पुलिस और क्राइम ब्रांच मामले की गहन जांच में जुटी है.
साल के पहले ही दिन हरियाणा के सोनीपत जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. सोनीपत के गांव राजपुर में दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान दलबीर के रूप में हुई है. दलबीर दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे और चार महीने पहले ही सेवानिवृत्त हुए थे.
मिली जानकारी के अनुसार दलबीर अपाहिज़ थे और इसी कारण उन्हें चार महीने पहले दिल्ली पुलिस से रिटायर होना पड़ा था. रिटायरमेंट के बाद वह अपने गांव राजपुर में रह रहे थे. उन्होंने गांव में ही एक फैक्ट्री बनवाई थी और उसी फैक्ट्री में अकेले रह रहे थे. मंगलवार सुबह उनकी फैक्ट्री के अंदर से खून से लथपथ शव बरामद किया गया.
बताया जा रहा है कि अज्ञात हमलावरों ने दलबीर को उनकी ही बैसाखी से बेरहमी से पीटा. गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई. शव मिलने की सूचना से पूरे गांव में हड़कंप मच गया. घटना की जानकारी मिलते ही सोनीपत पुलिस के आला अधिकारी और क्राइम ब्रांच की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी.
मृतक के बेटे संदीप राठी ने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर थे और हाल ही में रिटायर हुए थे. वह गांव में फैक्ट्री बनाकर अकेले रहते थे. सुबह फैक्ट्री के अंदर से उनके पिता का शव बरामद हुआ. संदीप ने गांव के ही एक व्यक्ति पर अपने पिता की हत्या का शक जताया है.
वहीं इस मामले में गन्नौर के एसीपी ऋषिकांत ने बताया कि कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी कि गांव राजपुर में एक फैक्ट्री के अंदर एक व्यक्ति का शव पड़ा है. मौके पर पहुंचने पर शव की पहचान दलबीर के रूप में हुई. दलबीर दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर थे और उसी फैक्ट्री में रहते थे. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उनकी बैसाखी से पीट-पीटकर हत्या की गई है.
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है. पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
बिजनौर के नजीबाबाद में कपड़ों की सेल के दौरान एक नकाबपोश युवक ने नाबालिग बच्ची के गले पर चाकू रखकर उसे बंधक बना लिया. नए साल पर गश्त कर रही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया और बच्ची को सुरक्षित छुड़ा लिया. आरोपी बाराबंकी का रहने वाला बताया जा रहा है.
बिजनौर जिले के नजीबाबाद कस्बे में बुधवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बाजार में कपड़ों की सेल के दौरान एक सिरफिरे युवक ने नाबालिग बच्ची को चाकू दिखाकर बंधक बना लिया. यह घटना शाम करीब सात बजे की है. बच्ची अपनी एक सहेली के साथ कपड़े खरीदने के लिए बाजार आई थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों नाबालिग बच्चियां सेल लगी दुकान पर कपड़े देख रही थीं, तभी अचानक एक नकाबपोश युवक वहां पहुंचा और एक बच्ची के गले पर चाकू रख दिया. युवक ने बच्ची को जान से मारने की धमकी देते हुए पैसों की मांग शुरू कर दी. घटना होते ही दुकान के अंदर हड़कंप मच गया. दुकानदारों ने शोर मचाया तो आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए.
भीड़ ने आरोपी युवक को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन युवक ने बच्ची के गले पर चाकू और कसकर रख दिया और उसे मारने की धमकी देने लगा. हालात बिगड़ते देख तुरंत पुलिस को सूचना दी गई. नए साल के चलते शहर में गश्त पर निकली पुलिस फोर्स को जैसे ही सूचना मिली, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए.
पुलिस ने पहले युवक को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब उसने बच्ची को छोड़ने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए उसे काबू में कर लिया. पुलिस ने आरोपी के हाथ से चाकू छीना और बच्ची को सुरक्षित बंधन मुक्त कराया. इसके बाद आरोपी युवक को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया.
नजीबाबाद के सीओ नितेश प्रताप सिंह ने बताया कि पकड़ा गया युवक बाराबंकी जिले का रहने वाला है और अपना नाम अजीत बता रहा है. प्रारंभिक पूछताछ में युवक का व्यवहार असामान्य लग रहा है. आरोपी का कहना है कि वह बाहर रहकर परेशान हो चुका था और जेल जाना चाहता था, इसलिए उसने यह घटना की. हालांकि उसने बच्ची से पैसों की मांग भी की थी.
पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और उसका आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है. यह भी जांच की जा रही है कि वह बाराबंकी से नजीबाबाद क्यों आया था और इस घटना के पीछे उसका असली मकसद क्या था. बच्ची सुरक्षित है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
पटना के सदर अस्पताल में आयुष चिकित्सक डॉ नुसरत प्रवीण ने 31 दिसंबर को भी ज्वाइन नहीं किया. सिविल सर्जन ने बताया कि अब ज्वाइनिंग की संभावना कम है क्योंकि अंतिम तिथि खत्म हो चुकी है. 15 दिसंबर को हिजाब विवाद के बाद से वह सामने नहीं आई हैं और मामला अनिश्चित बना हुआ है.
पटना में हिजाब विवाद से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है. आयुष चिकित्सक डॉ नुसरत प्रवीण ने 31 दिसंबर को भी पटना सदर अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया. यह ज्वाइनिंग की आखिरी तारीख थी. अब उनकी नियुक्ति को लेकर स्थिति अनिश्चित हो गई है.पटना के सिविल सर्जन डॉ अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि डॉ नुसरत प्रवीण ने आज भी अस्पताल में योगदान नहीं दिया है. विभाग की ओर से पहले ही ज्वाइनिंग की तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ाई जा चुकी थी. अब यह समय सीमा पूरी हो गई है और आगे तिथि बढ़ने की संभावना नहीं है.सिविल सर्जन ने कहा कि यदि डॉ नुसरत प्रवीण विभाग को पत्र लिखकर यह बताती हैं कि किसी कारणवश वह ज्वाइन नहीं कर पाईं, तो उस स्थिति में आगे का निर्णय स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिया जाएगा. फिलहाल विभाग की ओर से कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है.
बता दें, 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक घटना सामने आई थी. इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. वीडियो में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के व्यवहार को लेकर काफी आलोचना और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं. इसी दौरान डॉ नुसरत प्रवीण का हिजाब खींचे जाने का मामला सामने आया था.
इस घटना के बाद यह खबर आई थी कि डॉ नुसरत प्रवीण डिप्रेशन में हैं और संभव है कि वह नौकरी ज्वाइन न करें. इसके बाद से उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया. आज ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि भी समाप्त हो गई, लेकिन वह सदर अस्पताल नहीं पहुंचीं. बीच में एक दिन उनकी सहेली और एक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की ओर से यह दावा किया गया था कि डॉ नुसरत प्रवीण नौकरी ज्वाइन करेंगी. हालांकि यह दावा सही साबित नहीं हुआ और ज्वाइनिंग नहीं हो सकी.
सिविल सर्जन डॉ अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि समय सीमा समाप्त हो चुकी है और जब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई विशेष निर्देश नहीं आते, तब तक डॉ नुसरत प्रवीण की नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाएगी. फिलहाल पूरा मामला विभागीय निर्णय पर टिका हुआ है और सभी की नजरें स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर बनी हुई हैं.
रतलाम से भोपाल आई युवती ने बताया कि उसने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही. आखिरकार उसने ‘पढ़ाई और कोचिंग’ का बहाना बनाया. परिवार को लगा कि शहर जाकर वह और ‘ मोटी कमाई’ करेगी, इसलिए उन्होंने उसे घर की चौखट लांघने की इजाजत दे दी. इसी मौके का फायदा उठाकर वह भोपाल भाग आई.
“14 बरस की रही होऊंगी तब, जब एक दिन एक अनजान शख्स मेरे घर के उस कमरे में दाखिल हुआ जिसे मैं अपना सुरक्षित ठिकाना समझती थी. जब तक कुछ सोच पाती या किसी को पुकार पाती, दरवाजा बंद हो चुका था… उस दिन के बाद जो हुआ, वह बताने लायक नहीं है. आज भी सोचती हूं तो बदन ही नहीं, रूह तक सिहर उठती है.”
यह दास्तां उस 21 बरस की युवती की है, जो मध्य प्रदेश के मालवा इलाके के रतलाम स्थित अपने गांव के उस ‘नरक’ को पीछे छोड़कर राजधानी भोपाल पहुंची है, जिसे उसका समाज ‘रिवाज’ कहता है.पीड़िता ने जो खुलासा किया वह किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है. उसने बताया कि 14 साल की उम्र से लेकर 21 साल तक लगभग हर दिन अनजान दरिंदे उसके घर आते रहे. वह कोई चोरी-छिपे होने वाला अपराध नहीं था, बल्कि उसके अपने माता-पिता और मामा उन दरिंदों से चंद कागजी नोटों का ‘परमिट’ लेकर उन्हें घर के अंदर दाखिल करवाते थे.
जब उसने अपनी बड़ी बहनों या मां से इस जुल्म की शिकायत की, तो उसे यह कहकर खामोश कर दिया गया- ‘यही हमारे समाज की रवायत है.’ बाछड़ा समाज की इस कुप्रथा ने उसके घर को ही एक ऐसी ‘मंडी’ बना दिया था, जहां उसकी अस्मत का सौदा हर रोज 200-500 रुपए में होता था.
युवती ने भोपाल के महिला थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए समाज के उस ढांचे पर चोट की, जहां पुरुष कोई काम-धंधा नहीं करते. उसने बताया, “मेरे भाई और पिता घर के बाहर बैठे रहते थे. वे कोई काम नहीं करते, क्योंकि उनकी पूरी गृहस्थी हम बेटियों की ‘कमाई’ पर टिकी थी. उनके लिए हम इंसान नहीं, बल्कि नोट छापने की मशीन थे.”
21 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उस युवती ने तय कर लिया कि “हर रोज किश्तों में मरने से बेहतर है कि एक बार मर लिया जाए.” उसने घर से निकलने की एक खतरनाक योजना बनाई. उसने अपने लालची परिजनों को यकीन दिलाया कि वह शहर जाकर ‘कोचिंग’ करेगी.घर के बड़े इतने ‘भोले’ नहीं थे कि अपनी कमाई के जरिए को यूं ही छोड़ दें, लेकिन उनके लालच ने ही युवती के लिए रास्ता खोल दिया. उन्होंने सोचा कि शहर जाकर वह ‘धंधा’ और बड़े पैमाने पर करेगी और मोटी रकम घर भेजेगी. इसी उम्मीद में उन्होंने उसे घर की देहरी लांघने की इजाजत दे दी.
रतलाम से बस पकड़कर सीधे भोपाल पहुंची युवती ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर सवाल उठाए. उसने कहा कि वह रतलाम में अपनी सुनवाई की उम्मीद छोड़ चुकी थी क्योंकि वहां की पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में मौन रहती है या रसूखदारों और समाज के ठेकेदारों का साथ देती है. भोपाल के महिला थाने में अब उसकी शिकायत पर माता-पिता और दो मामाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है.
युवती की आंखों में अपनी आजादी की चमक तो है, लेकिन अपनी उन तीन बहनों के लिए दर्द भी है जो आज भी उसी नरक में कैद हैं. उसने रुंधे गले से कहा, “मेरी तीन बहनें हिम्मत नहीं जुटा पाईं, वे आज भी वहां नोची जा रही हैं… पर मैं अब उस देहरी पर कभी कदम नहीं रखूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए.”पीड़िता ने दावा किया कि उसकी तरह हजारों लड़कियों की जिंदगी पर जो ‘परंपरा’ के नाम पर देह व्यापार के अंधेरे में धकेली जा रही हैं. भोपाल पुलिस ने युवती को सुरक्षित गृह में भेज दिया है और मामले की जांच तेज कर दी है.
मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में बुधवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया. बीजना गांव की रहने वाली दो सगी बहनें काशिश (18) और तनिष्का (15) रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ गईं. दोनों खेत में बथुआ तोड़ने जा रही थीं. हादसा दोपहर करीब 2:15 बजे मोरादाबाद-रामनगर पैसेंजर ट्रेन से हुआ. मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं.
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बुधवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में दो सगी बहनों की मौके पर ही मौत हो गई. यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों बहनें रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रही थीं. अचानक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.
मृतक बहनों की पहचान कशिश (18) और तनिष्का (15) के रूप में हुई है. दोनों बहनें मुरादाबाद जिले के बीजना गांव की रहने वाली थीं. पुलिस के अनुसार, दोनों बुधवार दोपहर घर से पास के खेतों में बथुआ तोड़ने के लिए निकली थीं. इसी दौरान यह हादसा हो गया.
भोजपुर थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि यह हादसा दोपहर करीब 2:15 बजे बीजना चक बेगमपुर रेलवे अंडरपास के पास हुआ. जब दोनों बहनें रेलवे ट्रैक पार कर रही थीं, तभी मुरादाबाद की ओर से रामनगर जा रही मुरादाबाद-रामनगर पैसेंजर ट्रेन आ गई.ट्रेन की रफ्तार तेज होने के कारण दोनों बहनें संभल नहीं पाईं और ट्रेन की चपेट में आ गईं. हादसा इतना भीषण था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. आसपास मौजूद लोगों ने घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी.
सूचना मिलते ही भोजपुर थाना पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची. पुलिस ने दोनों शवों को रेलवे ट्रैक से हटवाया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की. इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया है. परिजन घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए और उनका रो-रोकर बुरा हाल है. गांव में भी शोक का माहौल है.
थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय कोई चेतावनी या अन्य कारण तो नहीं थे. फिलहाल इसे दुर्घटना माना जा रहा है.पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम को इस साल तीनों फॉर्मेट में काफी सारे मुकाबले खेलने हैं. टी20 वर्ल्ड कप के अलावा इंग्लैंड और न्यूजीलैंड का दौरा टीम इंडिया के लिए बेहद अहम होगा. भारतीय टीम के दिग्गज विराट कोहली और रोहित शर्मा भी बल्ले से रन बरसाते नजर आएंगे.
नए साल का आगाज शानदार तरीके से हो चुका है. नया साल भारतीय क्रिकेट के लिहाज से काफी अहम होने जा रहा है. साल 2026 भारतीय क्रिकेट की दिशा तय कर सकता है. इस साल भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम का सबसे बड़ा इम्तिहान टी20 वर्ल्ड कप 2026 में होगा, जो 7 फरवरी से 8 मार्च तक भारत और श्रीलंका की सहमेजबानी में खेला जाएगा. भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैम्पियन के रूप में उतरेगी.
अब तक किसी भी टीम ने लगातार दो बार टी20 वर्ल्ड कप खिताब नहीं जीता है, ऐसे में टीम इंडिया उस मिथक को तोड़ना चाहेगी. ग्रुप स्टेज में भारत का सामना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स से होगा. इस पूरे अभियान के केंद्र में सूर्यकुमार यादव होंगे, जिन्हें एक युवा भारतीय टीम की कमान सौंपी गई है. यह ऐसा पहला टी20 वर्ल्ड कप होगा, जिसमें रोहित शर्मा या विराट कोहली भाग नहीं लेंगे. अगर सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत खिताब बचाने में कामयाब होता है, तो वह क्रिकेट इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी.
यह कयास लगाया जा रहा है कि 2026 का टी20 वर्ल्ड कप बतौर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है. वर्ल्ड कप के बाद चयनकर्ता अगले दीर्घकालिक कप्तान को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी20 क्रिकेट से दूरी बना ली हो, लेकिन वनडे फॉर्मेट में उनकी अहमियत बरकरार है. 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम होगी. अगर भारत को सभी फॉर्मेट में शीर्ष दावेदार बने रहना है, तो इन दिग्गजों का योगदान निर्णायक रहेगा.
शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम से बाहर रखा जाना चौंकाने वाला रहा. अब सबकी निगाहें उनके इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में प्रदर्शन पर होंगी. चोटों और फॉर्म को पीछे छोड़कर अगर शुभमन शानदार वापसी करते हैं, तो वह खुद को भारत के भविष्य के ऑल-फॉर्मेट लीडर के रूप में फिर से स्थापित कर सकते हैं. भारतीय टीम इस साल श्रीलंका और न्यूजीलैंड दौरे पर भी जाएगी, जो काफी महत्वपूर्ण होंगे.
2026 में भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम के शेड्यूल पर एक नजर डालते हैं…
भारत का बांग्लादेश दौरा (सितंबर में संभावित) ♦ 3 वनडे ♦ 3 टी20
भारत का अफगानिस्तान दौरा (न्यूट्रल वेन्यू) | सितंबर-अक्तूबर ♦ 3 टी20
वेस्टइंडीज का भारत दौरा (सितंबर-अक्तूबर) ♦ 3 वनडे ♦ 5 टी20
एशियन गेम्स 2026 मेजबान: जापान
भारत का न्यूजीलैंड दौरा (अक्टूबर-नवंबर) ♦ 2 टेस्ट ♦ 3 वनडे ♦ 5 टी20
श्रीलंका का भारत दौरा (दिसंबर) ♦ 3 वनडे ♦ 3 टी20
सीनियर क्रिकेट से इतर साल की शुरुआत में ही आईसीसी मेन्स अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 भी खेला जाना है. जिम्बाब्वे और नामीबिया की सहमेजबानी में होने जा रहे इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन कर खिताब कब्जाना चाहेगी. इस टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाज पर खास नजर रहेगी. युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारतीय सीनियर टीम की झलक दिखा सकता है.
जहां ज्यादातर सुर्खियां मेन्स टीम पर टिकी रहेंगी, वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 2026 में और भी बड़ी उपलब्धियों की भूख के साथ कदम रखी है. नवंबर 2025 में अपना पहला आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय महिला टीम ने नए साल की शुरुआत विश्व विजेता के रूप में की है और यही पहचान अब गर्व के साथ-साथ अतिरिक्त दबाव भी लेकर आएगी.
इस साल जून-जुलाई में आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप भी होना है, जिसपर भारतीय फैन्स की निगाहें हैं. अगर भारतीय महिला टीम वनडे के बाद टी20 वर्ल्ड कप भी जीतने में सफल रहती है, तो यह काफी खास लम्हा होगा. यह तभी संभव हो पााएगा, जब हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना जैसी अनुभवी खिलाड़ी अच्छा खेल दिखाएंगी.
भारतीय क्रिकेट के लिए 2026 सिर्फ उपलब्धियों को दोहराने का साल नहीं, बल्कि यह साबित करने का मौका है कि 2025 की ऐतिहासिक जीतें कोई मंजिल नहीं, बल्कि लंबे समय तक दबदबे की नींव थी.
मुजफ्फरनगर में लापता समझे गए बुजुर्ग शरीफ़ 28 साल बाद अचानक घर लौटे, जिससे परिवार और स्थानीय लोग भावुक हो गए. उनका अपने पैतृक घर से संपर्क टूट गया था. सरकारी डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत पड़ने पर वे वापस आए.
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक भावुक करने वाला मंजर देखने को मिला, जब करीब तीन दशक पहले मरा हुआ मान लिया गया एक शख्स अचानक वापस आ गया. खतौली कस्बे के मोहल्ला बालाराम के रहने वाले बुजुर्ग शरीफ 28 साल बाद अपने परिवार के पास लौटे, जिससे रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक हो गए. उन्हें अपने खर-गांव की याद क्यों आई, इसके पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्प है.
शरीफ़ की पहली पत्नी का 1997 में निधन हो गया था. इसके बाद, उन्होंने दूसरी शादी कर ली और अपनी दूसरी पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल चले गए. कुछ वक्त तक परिवार लैंडलाइन फ़ोन से संपर्क में रहा, लेकिन धीरे-धीरे सारा संपर्क टूट गया.
परिवार के सदस्यों ने पश्चिम बंगाल में बताए गए पते पर उन्हें ढूंढने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई. आखिरकार, परिवार ने मान लिया था कि शरीफ़ की मौत हो गई है.पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR प्रोसेस के लिए ज़रूरी कागज़ात की ज़रूरत पड़ने के बाद, शरीफ दो दिन पहले अपने पैतृक घर खतौली लौटे. वे 28 साल में पहली बार अपने घर वापस आए. उनके अचानक आने से परिवार वालों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बहुत खुशी और हैरानी हुई.
शरीफ़ के भतीजे, मोहम्मद अकलम ने बताया कि परिवार ने करीब 15 से 20 सालों तक पश्चिम बंगाल की कई जगहों पर, जिसमें खड़गपुर और आसनसोल भी शामिल हैं, उन्हें ढूंढा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. जब खबर आई कि शरीफ़ वापस आ गए हैं, तो परिवार को शुरू में यकीन करना मुश्किल हुआ. शरीफ के घर आने पर बड़ी भीड़ जमा हो गई, लोग उनसे मिलने आए और दूर के रिश्तेदारों ने वीडियो कॉल के ज़रिए उससे बात की.शरीफ़ ने बताया कि 1997 में अपनी दूसरी शादी के वक्त सीमित साधनों और कम्युनिकेशन सुविधाओं की कमी के कारण उनका अपने परिवार से संपर्क टूट गया था. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ़ इसलिए वापस आए क्योंकि सरकारी डॉक्यूमेंटेशन ज़रूरी था, जिसके बाद वह फिर से वापस चले जाएंगे.
जानकारी के मुताबिक, ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करने और अपने रिश्तेदारों से मिलने के बाद, शरीफ़ अब पश्चिम बंगाल लौट गए हैं, जहां वे करीब तीन दशकों से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जिंदगी गुजार रहे हैं.