Monday, June 29, 2026
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NATIONAL : सरकारी आवास में मिले पति-पत्नी और दो बच्चों के शव… हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटी पुलिस

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद में सनसनीखेज घटना सामने आई है. यहां एक सरकारी कर्मचारी, उसकी पत्नी और उनके दो बच्चे आज बुधवार को घर में मृत पाए गए. पुलिस को शक है कि कर्मचारी ने अपनी पत्नी और दो बच्चों की हत्या के बाद खुदकुशी कर ली. यह घटना तब सामने आई, जब पड़ोसियों ने घर में किसी प्रकार की हलचल न होते देख पुलिस को सूचना दी.

छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले के बागबहरा कस्बे में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक सरकारी कर्मचारी, उसकी पत्नी और उनके दो बच्चे घर में मृत पाए गए. पुलिस का कहना है कि यह मामला आत्महत्या का लग रहा है, जिसमें व्यक्ति ने पहले अपने परिवार के तीन सदस्यों की हत्या की और फिर खुदकुशी कर ली. फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है.

एजेंसी के अनुसार, मृतकों की पहचान 41 वर्षीय बसंत पटेल, उनकी पत्नी 38 वर्षीय भारती, 11 वर्षीय बेटी सेजल और 4 साल के बेटे कियांश के रूप में हुई है. बसंत पटेल राज्य के आदिवासी कल्याण विभाग में बागबहरा विकास ब्लॉक कार्यालय में कार्यरत थे. वह Housing Board Colony में स्थित सरकारी आवास में रहते थे.

आज बुधवार को जब देर तक उनके घर से कोई गतिविधि नहीं देखी गई तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी. जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जायजा लिया. दरवाजा तोड़कर पुलिस घर में घुसी तो देखा कि बसंत पटेल को छत से लटका हुआ पाया, जबकि अन्य तीन शव बिस्तर पर पड़े हुए थे.

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बसंत पटेल ने पहले अपनी पत्नी और दो बच्चों को जहर देकर मारा और फिर आत्महत्या कर ली. इस मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है, ताकि घटना की असली वजह का पता चल सके.पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया और जायजा लिया. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं. हालांकि अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस का मानना है कि घरेलू झगड़े या मानसिक तनाव के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है. पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है, ताकि घटना के पीछे के कारणों का पता चल सके.

UP : पैसों के विवाद में पिता की हत्या, अंतिम संस्कार की भी कर ली तैयारी… पुलिस पहुंची तो शव छोड़कर भागे बेटे

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बरदह थाना के अजाऊर गांव में घर में पैसों को लेकर लड़ाई झगड़े के दौरान दो पुत्रों ने अपने 55 वर्षीय पिता राजेन्द्र राजभर की हत्या कर दी. इसके बाद दोनों फरार हो गए. फिलहाल पुलिस दोनों की गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चला रही है.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बरदह थाना के अजाऊर गांव में घर में पैसों को लेकर लड़ाई-झगड़े के दौरान दो पुत्रों ने अपने 55 वर्षीय पिता राजेन्द्र राजभर की हत्या कर दी. आरोप है कि अमित और सुमित ने कुल्हाड़ी और चाकू से चारपाई पर लिटा कर पिता की हत्या की. इसके बाद शव के अंतिम संस्कार की भी तैयारी कर ली. लेकिन पड़ोसियों की सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों भाई शव छोड़कर फरार हो गए.

बताया जाता है कि पुलिस जब पहुंची, तब राजेन्द्र की पत्नी सियादेवी शव के पास बैठी थी. उसने बताया कि पड़ोसी विनोद राजभर की पुत्री की शादी दो दिन बाद है. विनोद की पत्नी शादी का निमंत्रण देने आई थी. उसने घर की शादी में कुछ बर्तन दिया था. ऐसे में उसकी बेटी की शादी में भी बदले में कुछ दिया जाना था. उसी के बदले जब सियादेवी ने पति राजेन्द्र से 32 सौ रुपये मांगे तो वह उसे पीटने लगा.

मां को पिटता देख, दोनों पुत्र भी मौके पर पहुंच गए और पिता पर हमला कर दिया. जिससे पिता की मौत हो गई. सुमित 15 दिन पहले, जबकि अमित एक दिन पहले गुजरात से आया था. घर आने के बाद अमित ने अपनी पत्नी और बच्चों को ससुराल छोड़ दिया था.

घटना की खबर लगते ही सीओ लालगंज अपनी टीम के साथ पहुंच गए. बताया जा रहा है कि राजेन्द्र खेत भी बेच रहा था, जिसको लेकर दोनों पुत्र नाराज थे. आजमगढ़ एसपी सिटी ने बताया कि बगल की शादी में निमंत्रण पर उपहार को लेकर पति-पत्नी में विवाद हुआ. जिसपर पुत्र ने पिता को कुल्हाड़ी से वार किया. मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है.

NATIONAL : सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की वेबसाइट हैक, डिस्प्ले पर दिखा खास मैसेज

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सीसीएल की वेबसाइट हैक होने के बाद सीसीएल प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और वेबसाइट को बहाल करने का काम शुरू कर दिया. सीसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एन के सिंह ने फोन पर बातचीत में कहा कि इंजीनियर डेटा और वेबसाइट को रिकवर करने में जुटे हुए हैं. हालांकि, सीसीएल के पीआरओ ने इस तकनीकी खराबी करार दिया है.

सीसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एन के सिंह ने फोन पर बातचीत में कहा कि इंजीनियर डेटा और वेबसाइट को रिकवर करने में जुटे हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारी टीम इस परेशानी को दूर करने जुटी हुई है. हम जल्द ही वेबसाइट को पूरी तरह बहाल कर लेंगे.’

सीसीएल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) आलोक गुप्ता ने इस एक तकनीकी खराबी करार दिया है.उन्होंने कहा कि तकनीकी खामी है. डेटा का कोई नुकसान नहीं हुआ और हमारे सिस्टम इंजीनियरों ने 6 घंटे से अधिक समय के लिए काम कर, वेबसाइट को सफलतापूर्वक बहाल कर लिया है.

सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड कोल इंडिया लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जिसकी स्थापना 1 नवंबर 1975 को हुई थी. पहले इसे नेशनल कोल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनसीडीसी) के नाम से जाना जाता था, लेकिन अक्टूबर 2007 को इसे मिनी रत्न कंपनी का दर्जा मिल गया. इसका मुख्यालय रांची, झारखंड में स्थित है.

BIHAR : बारातियों को खाना नहीं मिला तो कर दिया बवाल… फिर दुल्हन के गांव वालों ने जमकर पीटा

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सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में एक शादी के दौरान जो हुआ वह हैरान करने वाला था. यहां दुल्हन के घर आए बारातियों ने खाना कम पड़ने पर हंगामा कर दिया. इसके बाद दुल्हन पक्ष के लोग भी पीछे नहीं रहे और दूल्हे के पक्ष को लोगो की पिटाई कर दी.

बिहार में सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में एक शादी के दौरान जो हुआ वह हैरान करने वाला था. यहां दुल्हन के घर आए बारातियों ने खाना कम पड़ने पर हंगामा कर दिया. बारातियों ने जमकर हल्ला मचाया. इसके बाद दुल्हन पक्ष के लोग भी पीछे नहीं रहे और दूल्हे के पक्ष को लोगो की पिटाई कर दी.

क्षेत्र के मुबारकपुर गांव में रविवार की रात आरा जिले के जानकी बाजार निवासी दसई बिंद,मुबारकपुर निवासी राज कुमार बिंद की पुत्री पूजा कुमारी की शादी के लिए बारात लेकर पहुंचे थे. शादी की रस्में चल रही थीं कि रात में खाना खाने को लेकर बारातियों और गांव के कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई. हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह स्थिति को संभालते हुए मामला शांत करा दिया.

लेकिन सुबह जब बारात विदाई के बाद लौट रही थी, तभी मांझी थाना क्षेत्र के सलेमपुर के पास एक बार फिर तनाव भड़क उठा. लड़की के भाई को बारातियों ने रात में हुए विवाद को लेकर पीटना शुरू कर दिया. उसे बचाने पहुंचे दूल्हे को भी उसके ही गांव के लोगों ने पीट दिया. स्थिति उस समय और बिगड़ गई.

इस घटना की जानकारी जब वधू पक्ष के लोगों को मिली तो काफी ज्यादा तादाद में मुबारकपुर से ग्रामीण सलेमपुर पहुंचे. मौके पर पहुंचते ही दोनों पक्षों के बीच फिर कहासुनी के बाद विवाद शुरू हो गया और दोनों पक्षों के बीच फिर मारपीट शुरू हो गई. दोनों ओर से कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं.किसी ने इस मारपीट के दौरान पुलिस को 112 नम्बर पर सूचना दी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की 112 नंबर टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर समझा बुझाकर मामले को शांत कराया. मामला सुलझने के बाद वर पक्ष वधू को लेकर अपने घर लौट गया. इस घटना के बारे में स्थानीय मांझी थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि पूरे मामले को लेकर फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से थाने में लिखित शिकायत नहीं दी गई है.

 

NATIONAL : मुंबई और पुणे में ड्रग रैकेट का भंडाफोड़… 10 करोड़ रुपये की मूल्य का हशीश जब्त

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महाराष्ट्र में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पुणे हवाई अड्डे और मुंबई में करीब 10.3 करोड़ रुपये मूल्य की हशीश सहित मादक पदार्थ जब्त किए हैं. यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी.महाराष्ट्र में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पुणे हवाई अड्डे और मुंबई में करीब 10.3 करोड़ रुपये मूल्य की हशीश सहित मादक पदार्थ जब्त किए हैं. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. मामले में दो को गिरफ्तार भी किया गया है.

अधिकारी ने बताया कि एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए डीआरआई की मुंबई क्षेत्रीय इकाई ने सोमवार को बैंकॉक से पुणे उतरने पर दो यात्रियों को रोका. इस दौरान जब उनकी तलाशी ली गई तो उनके बैगेज से 9.86 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड (एक प्रकार का मारिजुआना) के एयरटाइट पाउच बरामद किए गए.वहीं, मुंबई में भी इसी तरह की कार्रवाई में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार व्यक्ति के पास से तलाशी में हशीश और हाइड्रोपोनिक वीड सहित 478 ग्राम मादक पदार्थ बरामद हुए हैं.

डीआरआई ने कहा कि तीनों व्यक्तियों – जिनकी पहचान उजागर नहीं की गई है. आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब ड्रग्स को लेकर इस तरह की कार्रवाई की गई. इससे पहले भी महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से कई लोगों की ड्रग्स मामले को लेकर गिरफ्तारी की जा चुकी है. इससे पहले मुंबई पुलिस के एंटी-नारकोटिक सेल (ANC) ने पिछले दो दिनों में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर 5.8 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की थी. साथ ही तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था. जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई एएनसी की आजाद मैदान, घाटकोपर और वर्ली इकाइयों ने पवई, ओशिवारा और दादर में छापेमारी की गई थी.

इस दौरान आजाद मैदान यूनिट ने 21.60 लाख रुपये मूल्य की 108 ग्राम एमडी जब्त किया गया था. जबकि घाटकोपर यूनिट ने 2.04 करोड़ रुपये मूल्य की 2.040 किलोग्राम ‘हाइड्रोलिक वीड’ (भांग का एक प्रकार) जब्त की और वर्ली इकाई ने 3.55 करोड़ रुपये मूल्य की 3.55 किलोग्राम हाइड्रोलिक वीड जब्त की थी.

KANPUR : कानपुर का हेयर ट्रांसप्लांट कांड… कौन हैं डॉक्टर अनुष्का तिवारी, जिनके चक्कर में दो इंजीनियरों ने गंवाई जान

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कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट के चक्कर में जान गंवाने वाले इंजीनियरों ने डॉक्टर अनुष्का तिवारी इलाज कराया था. जो केशवनगर में एम्पायर नाम से क्लिनिक चलाती थी. यह चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में ग्राउंड फ्लोर पर स्थित है. इंजीनियर विनीत की मौत के बाद से यहां ताला लगा है और बोर्ड भी हटा दिया गया है. बताया जा रहा है इसी क्लिनिक पर ही डॉक्टर अनुष्का के पति भी बैठते थे.

हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दोनों ने ही कानपुर की रहने वाली डॉक्टर अनुष्का तिवारी से हेयर ट्रांसप्ंलाट कराया था. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने डॉक्टर को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया लेकिन अभी तक वह सामने नहीं आई हैं. अब तो उनकी डिग्री पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

डॉक्टर अनुष्का तिवारी कानपुर के केशवनगर में एम्पायर नाम से क्लिनिक चलाती थी. जो चार मंजिला कॉम्प्लेक्स में ग्राउंड फ्लोर पर स्थित है. यही बाहर उनका बोर्ड लगा था. जिस पर डेंटल, हेयर और एस्थेटिक्स लिखा था. इंजीनियर विनीत की मौत के बाद से यहां ताला लगा है और बोर्ड भी हटा दिया गया है. कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा के लिए तैनात गार्ड ने बताया कि कुछ दिन से डॉक्टर नहीं आ रही हैं. इस कारण क्लिनिक पर ताला लटका हुआ है. बताया जा रहा है इसी क्लिनिक पर ही डॉक्टर अनुष्का के पति भी बैठते थे. वह दांतों के डॉक्टर बताए जा रहे हैं. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है.

वैसे इस घटना के बाद से डॉक्टर अनुष्का की डिग्री पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वह हेयर ट्रांसप्लांट कर भी सकती थीं या नहीं. चर्चा तो ये भी है कि उसके पास MBBS तक की डिग्री नहीं है. वह डेंटिस्ट हैं. वैसे इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है. इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब वो पूछताछ के लिए पेश होंगी तो उनकी डिग्री का सबूत मांगा जाएगा. एक रोडियो के कार्यक्रम में डॉक्टर अनुष्का ने खुद को डर्मेटोलॉजी बताया था. उस कार्यक्रम में उन्होंने बालों के झड़ने से जुड़ी कई बेसिक बातें बताईं थीं.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हेयर ट्रांसप्लांट MD (Dermatology) त्वचा और बालों से संबंधित विशेषज्ञता या MS (General Surgery) या MCh (Plastic Surgery) सर्जरी करने की योग्यता देता है. ये डिग्रियाँ हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए सबसे मान्य और विश्वसनीय मानी जाती हैं. इसके अलावा हेयर ट्रांसप्लांट की तकनीकों में प्रशिक्षण (FUE, FUT आदि) आवश्यक होती है. इसके लिए डॉक्टर अलग से कोर्स या वर्कशॉप करते हैं. BAMS, BHMS या अन्य पैथी वाले लोग कानूनी रूप से हेयर ट्रांसप्लांट नहीं कर सकते. बिना सर्जिकल डिग्री वाले व्यक्ति द्वारा हेयर ट्रांसप्लांट करवाना खतरनाक हो सकता है और यह कानूनन अपराध भी हो सकता है.

हेयर ट्रांसप्लांट से पहले ध्यान रखने योग्य बातें :

– डॉक्टर की योग्यता जरूर जांचें. डॉक्टर के पासMD (Dermatology) या MS/MCh (Plastic Surgery) की डिग्री होनी चाहिए.
– मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण जरूरी है.
– डॉक्टर का अनुभव पूछें. अब तक कितने ट्रांसप्लांट किए हैं

क्लिनिक की मान्यता और सुविधाएं

– क्लिनिक को राज्य सरकार या संबंधित मेडिकल अथॉरिटी से लाइसेंस प्राप्त होना चाहिए.
– क्लिनिक में आपातकालीन सुविधा और आधुनिक उपकरण होने चाहिए.
– फायर सेफ्टी, इंफेक्शन कंट्रोल आदि की व्यवस्था हो.
– संभावित साइड इफेक्ट्स, रिकवरी टाइम, और कॉस्ट ब्रेकअप समझें.
– डॉक्टर के साथ काम करने वाले टेक्नीशियन भी प्रशिक्षित और अनुभवी होने चाहिए.
– ट्रांसप्लांट केवल डॉक्टर द्वारा ही किया जाना चाहिए. केवल टेक्नीशियन द्वारा किया गया प्रोसीजर अवैध है.

सावधानी बरतें अगर…

– क्लिनिक बहुत सस्ता पैकेज दे रहा हो.
-डॉक्टर का नाम/चेहरा वेबसाइट या क्लिनिक पर स्पष्ट नहीं हो.
-ट्रांसप्लांट बिना जांच किए तुरंत कराने को कहें.

इंजीनियर विनीत दुबे की पत्नी जया दुबे ने 9 मई को रावतपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. उनके पति विनीत दुबे ने रावतपुर क्षेत्र में स्थित डॉक्टर अनुष्का तिवारी के क्लिनिक में हेयर ट्रांसप्लांट कराया. प्रक्रिया के दौरान इंजेक्शन लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और चेहरे पर सूजन आ गई. उन्हें रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इन्फेक्शन बढ़ने से 15 मार्च को उनकी मृत्यु हो गई. जया दुबे ने बताया कि इस दौरान डॉक्टर ने उन्हें फोन कर अपनी पहचान छुपाते हुए बताया कि उनके पति की तबीयत बिगड़ गई है. जया का आरोप है कि उनके पति की मौत गलत इलाज और लापरवाही से हुई है. जया दुबे का कहना है कि उनके पति ने हेयर ट्रांसप्लांट के लिए पूरी फीस चुकाई थी, इसके बावजूद डॉक्टर ने लापरवाही की, जिससे उनके पति की मौत हो गई. उन्होंने डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

विनीत का मामला सुर्खियों में आने के बाद अब इसी डॉक्टर अनुष्का तिवारी पर एक और गंभीर आरोप लगा है. फर्रुखाबाद निवासी इंजीनियर मयंक कटिहार की मां प्रमोदिनी कटिहार और भाई कुशाग्र कटिहार मंगलवार को कानपुर पहुंचे और उन्होंने आज तक की टीम से मिलकर अपना दुख साझा किया. परिजनों के मुताबिक, मयंक ने 18 नवंबर 2024 को डॉक्टर अनुष्का के क्लिनिक में हेयर ट्रांसप्लांट करवाया. इलाज के बाद डॉक्टर ने सिर्फ एक दर्द की दवा देकर मयंक को घर भेज दिया. रास्ते में ही मयंक को सिर में तेज दर्द हुआ और घर पहुंचते ही उसकी हालत और बिगड़ने लगी. चेहरा सूजने लगा, आंखें बाहर निकलने जैसी हो गईं. मयंक लगातार डॉक्टर अनुष्का को फोन करता रहा, लेकिन डॉक्टर हर बार यही कहती रहीं कि ‘सब ठीक है’ और कोई घबराने की जरूरत नहीं है. परिजनों ने भी बार-बार डॉक्टर से संपर्क किया, लेकिन डॉक्टर ने न तो सही सलाह दी और न ही किसी अस्पताल ले जाने को कहा. जब मयंक की हालत और बिगड़ी, तो डॉक्टर ने कहा कि किसी कार्डियोलॉजिस्ट को दिखा दो. परिजन उसे फर्रुखाबाद के कार्डियोलॉजिस्ट के पास ले गए, जहां से बताया गया कि मयंक को कोई हार्ट से जुड़ी बीमारी नहीं है. जब यह बात डॉक्टर अनुष्का को बताई गई, तो उन्होंने कहा ठीक है, फिर हमारे पास ले आओ. लेकिन कुछ ही देर बाद 19 नवंबर की सुबह करीब 10 बजे मयंक की मौत हो गई. मां प्रमोदिनी कटिहार ने रोते हुए बताया, मेरा बेटा बार-बार फोन करके कह रहा था मां दर्द बहुत हो रहा है, लेकिन डॉक्टर ने सिर्फ बहलाया. मेरे बेटे की जान ले ली इस लापरवाही ने. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मयंक की मौत के बाद डॉक्टर ने परिजनों के नंबर ब्लॉक कर दिए और अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया. परिजनों का कहना है कि इलाज के नाम पर डॉक्टर ने मोटी फीस ली, लेकिन इलाज में गंभीर लापरवाही बरती.

PUNJAB : भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद पंजाब में खुले स्कूल, कहां-कहां थे बंद?

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भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते बंद किए गए पंजाब के सीमा जिलों में बुधवार से स्कूल दोबारा खुल गए. हालात सामान्य होने पर प्रशासन ने निर्देश जारी कर शिक्षण कार्य बहाल किया.

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते बंद किए गए पंजाब के सीमा जिलों के स्कूल बुधवार (14 मई) को फिर से खुल गए. राज्य सरकार ने 8 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए 5 जिलों में स्कूलों को 3 दिन के लिए बंद करने का आदेश दिया था. हालांकि, पंजाब के ज्यादातर जिलों में सोमवार (12 मई) को ही स्कूल खुल गए थे, लेकिन 6 सीमा जिलों में सुरक्षा कारणों से स्कूल बंद ही रखे गए थे.

पंजाब की पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो अमृतसर, तरनतारण, पठानकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर और गुरदासपुर जिलों से होकर गुजरती है. द इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार इनमें से गुरदासपुर जिले में स्कूल मंगलवार (13 मई) को ही खुल गए थे, जबकि 5 जिलों- अमृतसर, तरनतारण, पठानकोट, फाजिल्का और फिरोजपुर में बुधवार (14 मई) को स्कूलों ने दोबारा शिक्षण कार्य शुरू किया.

अमृतसर के अटारी में स्थित श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल की एक शिक्षिका ने कहा, “हमने सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आज से स्कूल फिर से खोल दिया है.” अमृतसर जिला प्रशासन ने मंगलवार (13 मई) को निर्देश जारी किए थे कि स्कूल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक खुले रहेंगे. पठानकोट में एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल खुलने के पहले दिन छात्रों की उपस्थिति लगभग 80 प्रतिशत रही. उन्होंने कहा, “हम सभी अभिभावकों से अपील करते हैं कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें.”

बॉर्डर इलाकों में अब हालात सामान्य हो रहे हैं. बाजारों में भी चहल-पहल दिखाई देने लगी है और लोग सामान्य दिनचर्या में लौटते नजर आ रहे हैं. स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों में भी उत्साह दिखा.

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को एक आपसी समझौते से सीजफायर की घोषणा की गई. इससे पहले 4 दिनों तक दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे सीमा क्षेत्रों में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई थी. अब हालात में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और सरकार की ओर से सुरक्षा की सतर्क निगरानी के बीच स्कूलों की नियमित पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई है.

NATIONAL : उत्तराखंड घूमने का है प्लान तो होगी जेब ढीली, 15 जून से नियम, Fastag से खुद कट जाएगा अमाउंट

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उत्तराखंड सरकार 15 जून से राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने जा रही है. इसके लिए परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है.

उत्तराखंड सरकार 15 जून से राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने जा रही है. इसके लिए परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है. विभाग ने निविदा प्रक्रिया के तहत एक निजी कंपनी का चयन कर लिया है, जो ग्रीन सेस वसूली के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर चुकी है. इस सॉफ्टवेयर को केंद्र सरकार की परिवहन सहित अन्य संबंधित वेबसाइटों से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रीन सेस वसूली की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके.

परिवहन विभाग के अनुसार, पहले ग्रीन सेस वसूली के लिए फास्टैग का उपयोग करने की योजना थी, लेकिन अब यह व्यवस्था ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक के माध्यम से की जाएगी. राज्य की सीमा पर लगे एएनपीआर कैमरे बाहरी वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ेंगे और उसी के आधार पर संबंधित वाहन के फास्टैग खाते से ग्रीन सेस की राशि स्वतः कट जाएगी. यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा.

संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि ग्रीन सेस वसूली की यह व्यवस्था राज्य के राजस्व को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी. लाखों की संख्या में प्रतिदिन बाहरी राज्यों के वाहन उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं. नई व्यवस्था से न केवल सरकार को महत्वपूर्ण राजस्व मिलेगा, बल्कि राज्य की सीमा में आने-जाने वाले वाहनों की सटीक जानकारी भी मिल सकेगी, जिससे निगरानी और यातायात प्रबंधन बेहतर किया जा सकेगा.

परिवहन विभाग ने विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए ग्रीन सेस की दरें तय कर दी हैं. चार पहिया वाहनों से 40 रुपये, तीन पहिया से 20 रुपये, मध्यम वाहनों से 60 रुपये और भारी वाहनों से 80 रुपये ग्रीन सेस लिया जाएगा. इसके अतिरिक्त तिमाही और वार्षिक भुगतान की सुविधा भी दी जा रही है, ताकि व्यवसायिक वाहनों को सहूलियत हो सके.

सरकार का कहना है कि इस ग्रीन सेस का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी है. पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य उत्तराखंड में बाहरी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम आवश्यक हो गया था. ग्रीन सेस के माध्यम से सरकार को यह अवसर मिलेगा कि वह पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में इस राशि का उपयोग कर सके.

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी और पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होगी. उन्हें कहीं रुकने या अतिरिक्त शुल्क भरने की जरूरत नहीं होगी. जैसे ही वाहन राज्य की सीमा में प्रवेश करेगा, ग्रीन सेस स्वतः कट जाएगा और वाहन मालिक को इसकी जानकारी एसएमएस अथवा संबंधित ऐप पर मिल जाएगी.

इस नई पहल से उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों पर यातायात का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और पर्यावरणीय दबाव को भी कम किया जा सकेगा. परिवहन विभाग 15 जून से इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए तैयार है.

 

BUSINESS : एक साल में बिक गए 1.4 करोड़ AC, क्या गर्मी में एयर कंडीश्नर का सहारा लेकर हम अपने पैरों पर मार रहे कुल्हाड़ी?

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भारत में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे मार्केट में एसी की डिमांड भी खूब बढ़ रही है. इससे बिजली की खपत भी खूब हो रही है, जिसकी आपूर्ति अधिकतर कोयले को जलाकर की जा रही है.

गर्मियां जैसे-जैसे बढ़ रही हैं वैसे-वैसे कूलर, फ्रीज, एयरकंडीश्नर की डिमांड भी बढ़ने लगी है. इसे देखते हुए कंपनियां भी अपनी सेल बढ़ाने के लिए तमाम तरह के ऑफर्स, स्कीम्स की पेशकश कर रही है. लोग भी चिलचिलाती धूप और गर्मी से कुछ राहत पाने के लिए अपने घरों में एसी लगवा रहे हैं. इसी का नतीजा है कि पिछले साल भारत में रिकॉर्ड 14 मिलियन एयर कंडीशनिंग यूनिट्स की बिक्री हुई.

अब जाहिर सी बात है कि एसी की मांग बढ़ने के साथ-साथ बिजली की भी डिमांड बढ़ेगी और अभी भी अधिकतर बिजली का उत्पादन कोयले को जलाकर किया जाता है, जिसका असर जलवायु पर पड़ता है.

इसके अलावा, एसी से क्लोरोफोरोकार्बन (CFC) और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFC) जैसी निकलने वाली जहरीली गैसें ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ती है.

हालांकि, इतनी दूर की सोचने से पहले तुरंत मिलने वाली राहत को अधिक तवज्जो दे रहे हैं और इसी का नतीजा है कि मार्केट में धड़ाधड़ एसी की बिक्री हो रही है. बढ़ती गर्मी और मांग के चलते भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता एयर कंडीशनिंग मार्केट है, बावजूद इसके मौजूदा समय में केवल सात परसेंट घरों में ही एयर कंडीशनिंग यूनिट हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस उछाल का मतलब यह है कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपना प्रोडक्शन तीन गुना बढ़ाना होगा.

एक सरकारी बयान के मुताबिक, 1.4 बिलियन लोगों का देश भारत ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है. ऊपर से 2024-25 में बिजली के उत्पादन में एक बिलियन टन कोयला जलाया गया.

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, एसी बनाने वाली जापान की कंपनी डाइकिन के भारत में प्रमुख के.जे. जावा ने कहा, ”आज के समय में एसी अब सिर्फ लग्जरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रात में अच्छी नींद के लिए यह जरूरी बन गया है, जो बेहतर फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है.”

मौसम विभाग के अनुसार, 1901 के बाद से 2024 भारत का सबसे गर्म साल रहा. नई दिल्ली में मई 2024 में हीटवेव के चलते तापमान साल 2022 की ही तरह 49.2 डिग्री सेल्सियस (120.5 डिग्री फारेनहाइट) के रिकॉर्ड हाई लेवल तक पहुंच गया. 2012 से 2021 के बीच भारत में हीटस्ट्रोक से लगभग 11,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम Cool Coalition के मुताबिक, साल 2050 तक एयर कंडीशनिंग भारत के उत्सर्जन का एक चौथाई और देश भर में बिजली की अधिकतम मांग का लगभग आधा हिस्सा होगा. हालांकि, स्थिति के सुधरने की भी संभावना है क्योंकि एनर्जी सेविंग इन्वर्टर एसी मार्केट में अपनी ज्यादा से ज्यादा जगह बना रहे हैं और कंपनियां भी यूनिट्स बेचते वक्त 24 डिग्री सेल्सियस का डिफॉल्ट टेम्परेचर सेट कर देती हैं.

 

NATIONAL : ’22 दिन बाद वीडियो कॉल पर देखा, मैं उन्हें पहचान नहीं पाई…’, PAK से लौटे BSF जवान पूर्णम कुमार की पत्नी का फर्स्ट रिएक्शन

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बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ की पत्नी रजनी ने कहा, “आज मैं बहुत खुश हूं. मैं पहले सीएम ममता बनर्जी का धन्यवाद देना चाहूंगी क्योंकि वो मुझे तीन-चार दिन से लगातार फोन कर रही थीं. इसके बाद मुझे कल्याण सर और चेमरमेन विजय मिश्रा सर का भी फोन आया.”

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम कुमार शॉ गलती से इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान पहुंच गए थे. इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया था. तभी से ही उनका परिवार पलकें बिछाए पूर्णम का इंतजार कर रहा था. उनकी वतन वापसी के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. पूर्णम कुमार की पत्नी रजनी ने कहा, “मेरे लिए आज का दिन बहुत बड़ा है. सुबह बीएसएफ के हेडक्वार्टर से फोन आया था कि पूर्णम जी आ गए हैं.”

पूर्णम शॉ की पत्नी ने कहा, “22 दिन बाद जब मैंने उन्हें वीडियो कॉल पर देखा, तो पहले तो मैं उनको पहचान ही नहीं पाई क्योंकि उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी. उन्होंने कहा कि फिक्र नहीं करो, मैं बिल्कुल ठीक हूं, मेरी मेडिकल भी हो गई है. उन्होंने कहा कि मैं खाना खाकर तीन बजे आपको कॉल करूंगा. जब वो घर पर आएंगे तो, जो भी उनके फेवरेट फूड्स हैं, मैं उनको खिलाऊंगी.”

रजनी ने आगे कहा कि मैं बहुत खुश हूं. कहीं न कहीं हम लोगों ने आशा छोड़ दी थी कि इतना दिन हो गया है, क्या हुआ. सीजफायर हुआ और वो तीन दिन के अंदर ही वापस आ गए. उन्होंने आगे कहा कि मैं पहले तो सीएम ममता बनर्जी का धन्यवाद देना चाहूंगी क्योंकि वो मुझे तीन-चार दिन से लगातार फोन कर रही थीं. इसके बाद मुझे कल्याण सर और चेमरमेन विजय मिश्रा सर का भी फोन आया. सभी लोगों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है. ममता जी ने मेरे मेडिकल ट्रीटमेंट के बारे में भी पूछा. मैं हाथ जोड़कर सभी को धन्यवाद कहना चाह रही हूं. मुझे बोला गया था कि आपके पति आ जाएंगे, तो आपको बुलाया जाएगा. अगर मुझे बुलाया जाता है, तो मैं जरूर जाऊंगी.

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मुझे यह जानकारी पाकर बहुत खुशी हुई कि हमारे BSF जवान पूर्णम कुमार शॉ को रिहा कर दिया गया है. मैं उनके परिवार के संपर्क में थी और हुगली के रिशरा में उनकी पत्नी से तीन बार बात की. आज भी मैंने उन्हें फ़ोन किया. मेरे भाई जैसे देश के जवान, उनकी पत्नी रजनी शॉ सहित उनके पूरे परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाए.”

पूर्णम कुमार, गलती से इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान पहुंच गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया. वे पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे. भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले किए, जिससे तनाव बढ़ गया. ऐसे में पूर्णम के परिवार की चिंता और भी बढ़ गई.

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पर्यटकों और नागरिकों पर हमला किया, जिसे 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना गया. इस हमले ने भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति को और मजबूत किया।जवाब में, भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना ने समन्वित रूप से पाकिस्तान और PoK में आतंकी शिविरों को नष्ट किया. इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा.

पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद 7-8 मई की रात को भारत के 15 सैन्य ठिकानों जैसे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. हालांकि, भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना के एकीकृत प्रयासों ने इन हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया. भारतीय नौसेना ने अपनी वाहक युद्ध समूह (Carrier Battle Group) और उन्नत वायु रक्षा तंत्र का उपयोग कर पाकिस्तानी वायु तत्वों को समुद्री क्षेत्र में निष्क्रिय कर दिया.

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