WORLD : जोर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल हमला, डोनाल्ड ट्रंप बोले- ‘अब बहुत बड़ा हमला करेंगे’

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29 जुलाई 2026 को जोर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया गया. अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य प्रहार की चेतावनी दी है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारतीय नागरिकों, यात्रियों और वैश्विक ईंधन बाजार पर असर पड़ेगा.

29 जुलाई 2026 को जोर्डन में स्थित अमेरिकी सेना के हवाई अड्डे और सेंट्रल कमांड सेंटर पर ईरान की तरफ से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं. अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने इस हमले को रियल टाइम में नाकाम कर दिया. इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए भारी हमला करने की सीधी चेतावनी दी है.

यह मिसाइल हमला 28 जुलाई 2026 को इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की तरफ से ईरान समर्थित लड़ाकों पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के तुरंत बाद हुआ है. मध्य पूर्व में दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत का खतरा काफी बढ़ गया है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और वैश्विक हवाई यात्राएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एरोस्पेस फोर्स ने जोर्डन में अमेरिकी बेस और सेंट्रल कमांड सेंटर पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है. ईरानी राज्य मीडिया (IRIB) के अनुसार आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है. आईआरजीसी ने बयान जारी कर चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी धमकियां और गैर-कानूनी हस्तक्षेप बंद नहीं होते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

दूसरी तरफ फॉक्स न्यूज से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जवानों के पास इस हमले पर प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ ही मिनट थे. रियल टाइम में जवानों ने एक-दूसरे को कोऑर्डिनेट्स बताए और मिसाइलों को निशाने तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया गया. ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका इस हमले का जवाब बहुत ही सख्त सैन्य कार्रवाई के रूप में देगा और ईरान के ठिकानों पर करारा प्रहार किया जाएगा.

जोर्डन में हुए इस मिसाइल हमले से ठीक एक दिन पहले, 28 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी अरब की सशस्त्र सेनाओं ने पूर्वी इराक में बड़ा संयुक्त सैन्य ऑपरेशन चलाया था. इस ऑपरेशन में दोनों देशों के फाइटर जेट्स ने इराक सरकार के साथ तालमेल बनाकर ईरान समर्थित लड़ाकों के हथियारों और रसद (लॉजिस्टिक्स) ठिकानों पर सटीक बमबारी की थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने इन लड़ाकों को दुनिया के लिए ‘कैंसर’ करार दिया और आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए.

सेंटकॉम की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों के भीतर आईआरजीसी के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में की गई थी. सेंटकॉम ने कहा कि उनके ये ड्रोन हमले पूरी तरह असफल रहे. इसके अलावा अमेरिकी सेना ने खुलासा किया कि फरवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच ही इराक में एक्टिव ईरान समर्थित आतंकी गुटों ने 600 से अधिक बार अमेरिकी नागरिकों और ठिकानों पर हमलों के प्रयास किए हैं. सेंटकॉम ने आईआरजीसी और उसके प्रॉक्सी गुटों को तुरंत हमले रोकने की चेतावनी दी है.

29 जुलाई 2026 को जोर्डन में अमेरिकी बेस पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और इराक में 28 जुलाई के संयुक्त हवाई हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. आम नागरिकों और विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए जरूरी है कि वे शांति बनाए रखें और केवल विदेश मंत्रालय के अधिकृत बयानों पर ही नजर रखें.

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