यूरोप में पिघलती सड़कें, ठंडी हवा के लिए हाहाकार…यह जलती हुई धरती की वो हकीकत है जिसने यूरोप को ओवन बना दिया है। जब लाशों को रखने के लिए मुर्दाघर छोटे पड़ जाएं और एक सांस भर ठंडी हवा के लिए सड़कों पर दंगे होने लगें, तो समझ लीजिए पानी सिर से ऊपर जा चुका है। क्या हम अपनी ही गलतियों से अपनी कब्र खोद रहे हैं?
लंदन, पेरिस, मैड्रिड…पूरा यूरोप इन दिनों आग की भट्टी बना हुआ है। सड़कें पिघल रही हैं, ट्रेनें रुक गई हैं और अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी है। लेकिन सबसे दर्दनाक हालात मौत के बाद दिख रहे हैं। मुर्दाघरों में लाशें रखने की जगह नहीं बची है।
शवों को रखने के लिए अतिरिक्त ठंडे कमरे और अस्थायी मोर्ग बनाए जा रहे हैं, फिर भी जगह कम पड़ रही है। कुछ जगहों पर शवों को बाहर की तरफ भी रखना पड़ रहा है। परिवार वाले रो-रोकर अपने स्वजनों के शव लेने आ रहे हैं, लेकिन जगह न होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। यह नजारा देखकर हर कोई सिहर उठता है। गर्मी ने सिर्फ जिंदा लोगों को ही नहीं, मरने के बाद भी लोगों को परेशान कर रखा है।

आसमान से बरस रही आग
विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आंकड़े बेहद डरावने हैं। 21 जून से अब तक पूरे यूरोप में 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इसमें से अकेले फ्रांस में लगभग 1,000 लोगों की जान गई है। स्पेन, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन भी इस जानलेवा गर्मी से बुरी तरह जूझ रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, ये मौतें सिर्फ सीधे लू लगने से नहीं हो रही हैं। अत्यधिक गर्मी की वजह से दिल का दौरा, भयंकर डिहाइड्रेशन और सांस की बीमारियां अचानक बढ़ गई हैं। बुजुर्ग और बच्चे इसका सबसे पहला शिकार बन रहे हैं। फ्रांस में एक 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला की घर के अंदर ही बेहोश होने से मौत हो गई। मौतों का आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा है कि प्रशासन को शवों के लिए अस्थायी मुर्दाघर बनाने पड़ रहे हैं।
इस भीषण संकट की पांच बड़ी बातें
पूरे यूरोप में 21 जून से अब तक 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें हुईं।
अकेले फ्रांस में गर्मी के कारण लगभग 1,000 लोगों ने जान गंवाई।
अत्यधिक तापमान से डामर की सड़कें पिघल रही हैं और रेल लाइनें मुड़ गई हैं।
हर घर में कूलर-एसी चलने के कारण कई शहरों में पावर कट हो रहा है।
भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में भयंकर आग सुलग रही है।
ठंडी हवा के लिए दुकानों पर झड़पें, पुलिस तैनात
आम जनता के बीच इस समय ठंडी हवा पाने की अंधी होड़ मची है। इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों से एयर कंडीशनर और कूलरों का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। लोग पुराने और कबाड़ हो चुके पंखों को भी मुंहमांगे दामों पर खरीद रहे हैं। दुकानों के बाहर ग्राहकों के बीच होने वाली हिंसक झड़पों को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। लोग राहत पाने के लिए दिनभर शॉपिंग मॉल्स में बैठे रहते हैं और रातें पार्कों या समंदर के किनारे गुजार रहे हैं।

