विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के जरिए भारत और रूस के रिश्तों में मजबूती पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं.
भारत ने पश्चिमी देशों की आलोचना के बीच रूस के साथ अपने संबंधों को एक बार फिर से मजबूती के साथ पेश किया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि जब भी भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा आया है, रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है. रूस ने उस दौर में भी भारत का साथ दिया, जब दुनिया के ज्यादातर देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया था.
नई दिल्ली में रविवार (4 अक्टूबर, 2026) को आयोजित म्यूनिक सुरक्षा सम्मेलन (MSC) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं और अपने अनुभवों से दोनों देश आज भी अपने रिश्तों को आकार देते हैं.

जयशंकर ने कहा, ‘लोग अच्छे या बुरे इतिहास को नहीं भूलते हैं.’ इस दौरान उन्होंने 1950 के दशक में रूस और सोवियत संघ की तरफ से भारत को मिले समर्थन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘उस दौर में दुनिया के बड़े हिस्से ने पाकिस्तान के मिलिट्री शासन का साथ दिया था.’ उनकी ये टिप्पणी साल 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भारत को मिले सोवियत संघ के समर्थन की तरफ इशारा करती है. जब अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में बंगाल की खाड़ी में अपना नौसैनिक बेड़ा भेजा था.
रूस के साथ भारत के अनुभव
मॉस्को के साथ भारत के रिश्तों पर पश्चिमी देशों की तरफ से उठाए जा रहे सवालों पर इशारों में जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, ‘दुनिया का हर एक देश अपने अनुभवों के आधार पर दूसरे देशों के साथ अपने रिश्तों का आकलन करता है.’ उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह यूरोप से रूस को लेकर भारत का नजरिया अपनाने की उम्मीद नहीं की जा सकती है, उसी तरह से नई दिल्ली के फैसले मॉस्को के साथ उसके अपने ऐतिहासिक अनुभवों से तय होते हैं.
उन्होंने कहा, ‘रूस के साथ भारत का अनुभव सकारात्मक और हमेशा से सकारात्मक ही रहा है. 1970 और 1980 के दशक से दोनों देशों की साझेदारी में विस्तार आया है. अब सैन्य और परमाणु सहयोग के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और संसाधनों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है.’

