ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर से वैश्विक ध्यान का केंद्र बन चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने यहां नियंत्रण कड़ा कर दिया है और इसके लिए उसने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी नाम का एक नया निकाय स्थापित किया है. इसे स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही की निगरानी का काम सौंपा गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या टोल न चुकाने पर भारतीय जहाजों को भी रोका जाएगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी ने कहा है कि होर्मुज टोल सभी के लिए है. यह संसद और सरकार तय करेंगी कि कितना टोल वसूला जाना है. इसी के साथ सभी देशों को ईरान की नई प्रक्रिया प्रणाली का पालन करना भी जरूरी है.
नए घोषित संप्रभु शासन के तहत स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को पारगमन से पहले पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को ईमेल के जरिए से पहचान विवरण जमा करना होगा. इसमें पिछले जहाज के नाम और पंजीकरण की जानकारी शामिल है.

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून क्या कहता है?
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के तहत होर्मुज स्ट्रेट को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है. यहां पारगमन मार्ग का सिद्धांत लागू होता है. इसका मतलब है कि सभी देशों के जहाज को आमतौर पर स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के गुजरने की अनुमति है और किसी भी देश को मनमाने ढंग से समुद्री यातायात को रोकने या फिर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है. भारत ने भी ईरान द्वारा उठाए गए इस कदम का विरोध किया है.
क्या है ईरान का तर्क
ईरान लगातार यह तर्क देता रहा है कि स्ट्रेट के आसपास का पानी उसके क्षेत्रीय और संप्रभु नियंत्रण में आता है. खासकर उन मामलों में जिनमें विरोधी या फिर प्रतिद्वंदी देश शामिल हों.
क्या भारतीय जहाजों को कोई परेशानी हो रही है?
फिलहाल भारतीय जहाज फंसे हुए नहीं दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें टोल से जुड़े किसी भी टकराव के बिना एक तय सुरक्षित गलियारे से गुजरने की अनुमति दी जा रही है. हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि स्थिति अभी भी काफी ज्यादा संवेदनशील है. खाड़ी में तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग ऑपरेशंस पर तेजी से असर पड़ सकता है.

