WORLD : तिब्बत में भीषण बाढ़ से 21 लोगों की मौ’त, 541 लापता; भारत के 49 नागरिक भी शामिल

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नेपाल सीमा के पास तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पिछले सप्ताह अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है, जबकि 541 लोग अब भी लापता हैं। चीन के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने तिब्बत में एक आधिकारिक ब्रीफिंग के हवाले से बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिक हैं, जिनमें भारत के 49 और अन्य देशों के 22 नागरिक हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को यहां प्रेसवार्ता में बताया कि नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब भी पता नहीं चल पाया है।

उन्होंने कहा कि चीन की ओर से नेपाल को दी जा रही आपात राहत सामग्री की दूसरी खेप मंगलवार को काठमांडू पहुंच गई। उन्होंने बताया कि नेपाल के अनुरोध पर चीन ने पांच डीएनए फोरेंसिक विशेषज्ञ भेजे हैं।

गुओ ने कहा कि चीन नेपाल के अनुरोध के आधार पर आपात राहत सामग्री की तीसरी खेप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें बेली ब्रिज, शव रखने वाले रेफ्रिजरेटर, महामारी से बचाव की सामग्री और आपात संचार उपकरण शामिल होंगे।प्रवक्ता ने कहा कि चीन डीएनए विशेषज्ञों का एक दूसरा दल भी भेजेगा। उन्होंने बताया कि नेपाली पक्ष ने तत्काल और अधिक राहत सामग्री भेजने तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए चीन का आभार जताया है।

तिब्बत में ग्लेशियरों के लगातार पीछे हटने और इस संवेदनशील क्षेत्र को प्रभावित करने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पड़ोसी देशों के साथ समन्वय तंत्र बनाने को लेकर चीन की रजामंदी के बारे में पूछे जाने पर गुओ ने कहा कि बीजिंग ने काठमांडू के साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें, उपग्रह और जलविज्ञान संबंधी आंकड़े साझा किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘चीनी और नेपाली विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान के दीर्घकालिक प्रभावों ने ग्लेशियरों को अस्थिर कर दिया है और यह आपदा नेपाल में एक हिमनद के ढहने से शुरू हुई, जिसके परिणामस्वरूप बर्फ और चट्टानों का तेज बहाव हुआ और पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बह गया।’’

गुओ ने कहा, ‘‘हम राहत प्रयासों में नेपाल को मजबूत समर्थन देते रहेंगे और आपदा रोकथाम एवं न्यूनीकरण के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करेंगे।’’

हिमनदों के पीछे हटने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के सामने मौजूद साझा चुनौती है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी देश ऐसे जोखिमों से अछूता नहीं रह सकता। चीन जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को प्रभावी ढंग से रोकने और कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर आदान-प्रदान और सहयोग करता रहेगा।

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