WORLD : नेपाल में नए कस्टम नियम से सैकड़ों कंटेनर सीमा पर अटके

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काठमांडू, 30 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल सरकार के 30 अप्रैल से विदेश से आयात होने वाले सामान पर भी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लेबल अनिवार्य किए जाने के बाद अधिकांश आयातित वस्तुओं का कस्टम क्लियरेंस ठप हो गया है। इससे सैकड़ों कंटेनर सीमा पार अटक गए हैं।

पहली अप्रैल को नेपाल के वाणिज्य विभाग ने सूचना जारी कर देश में उत्पादित और आयातित तैयार वस्तुओं पर 30 अप्रैल से एमआरपी लेबल अनिवार्य करने की जानकारी दी थी। इस समय सीमा के अनुसार, मध्य रात 12 बजे सेी एमआरपी उल्लेख न होने वाले किसी भी सामान का कस्टम क्लियरेंस नहीं हो रहा है। कई कस्टम कार्यालयों ने इसकी पुष्टि की है।

उपभोक्ता संरक्षण की धारा 6(3) के अनुसार, नेपाल में उत्पादित वस्तुओं के लिए निर्माता और विदेश से आयातित वस्तुओं के लिए आयातकर्ता को नेपाली या अंग्रेजी भाषा में एमआरपी अनिवार्य रूप से अंकित करना होता है। कानून के मुताबिक, ऐसे उत्पाद जिन पर उपभोक्ता आसानी से समझ सकने वाला मूल्य अंकित न हो, उन्हें बाजार में बेचा नहीं जा सकता। मूल्य निर्धारण करते समय सभी करों को शामिल कर एमआरपी तय करना आवश्यक है।

लेबल पर मूल्य के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विवरण भी देना अनिवार्य है, जैसे—वस्तु का वजन या मात्रा, उत्पादन तिथि, बैच नंबर, उपभोग की अंतिम तिथि और संभावित साइड इफेक्ट की जानकारी विशेष रूप से हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या मशीनरी के मामले में गारंटी/वारंटी अवधि और संभावित जोखिम (जैसे टूट-फूट या ज्वलनशीलता) की जानकारी देना जरूरी है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर चेतावनी संदेश या चित्र भी अनिवार्य है।

इन कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 3 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, सख्त कानून के बावजूद इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन में चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। सरकार ने कस्टम प्रणाली को सरल बनाने और वाणिज्य तथा उपभोक्ता संरक्षण कार्यों को अलग कर प्रभावी निगरानी के माध्यम से एमआरपी लागू करने की बात कही थी। वाणिज्य विभाग के अनुसार, खाद्य सामग्री में उत्पादन और उपभोग तिथि तथा तैयार वस्तुओं में ब्रांड और एमआरपी अनिवार्य है।

सरकार के निर्देशानुसार वीरगंज, भैरहवा, विराटनगर, रसुवा, नेपालगंज और कांकड़भिट्टा जैसे प्रमुख कस्टम नाकों पर एमआरपी और निर्धारित मानकों को पूरा न करने वाले सामान का क्लियरेंस पूरी तरह रोक दिया गया है। स्थिति यह है कि कस्टम क्लियरेंस ठप होने से 1000 से अधिक मालवाहक वाहन सीमा पर फंसे हुए हैं। इनमें से केवल वीरगंज में ही लगभग 600 कंटेनर रुके हुए हैं, जबकि अन्य स्थानों पर 20 से 100 तक कंटेनर अटके हैं।

हालांकि आवश्यक और औद्योगिक सामग्री का कस्टम क्लियरेंस जारी है। फल, हरी सब्जियां, लहसुन जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान, कच्चा पाम ऑयल, औद्योगिक कच्चा माल, जलविद्युत परियोजनाओं की सामग्री और मशीनरी का क्लियरेंस नियमित रूप से हो रहा है।

वीरगंज कस्टम के अधिकारी उदय सिंह विष्ट के अनुसार, ऊपर से निर्देश मिलने के कारण मानक पूरा न करने वाले सामान का क्लियरेंस संभव नहीं है। वहीं आयातकर्ता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि कस्टम पहुंच चुके सामान पर अब एमआरपी लेबल कैसे लगाया जाए। भैरहवा कस्टम प्रमुख हरिहर पौडेल ने बताया कि केवल मानक पूरा करने वाले सामान का ही क्लियरेंस हो रहा है।

रसुवागढ़ी नाके पर चीन से आए कपड़े और जूते के करीब 20 कंटेनर रुके हुए हैं। सूचना अधिकारी ठाकुर गौतम के अनुसार, एमआरपी न होने के कारण व्यापारी जुर्माने के डर से कस्टम घोषणा पत्र भरने से भी बच रहे हैं। विराटनगर कस्टम प्रमुख उमेश श्रेष्ठ ने कहा कि सरकार की नीति का सख्ती से पालन किया जा रहा है और बिना एमआरपी वाले सामान का क्लियरेंस संभव नहीं है।

सरकार का कहना है कि यह नीति उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने और बाजार मूल्य नियंत्रण के लिए लाई गई है, लेकिन व्यवसायी पूर्व तैयारी और स्पष्ट कार्यविधि की कमी का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। व्यवसायियों ने कई बार उद्योग मंत्री और वाणिज्य विभाग के महानिदेशक से मुलाकात कर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, लेकिन सरकार हर हाल में एमआरपी लागू करने के पक्ष में है।

व्यवसायियों का कहना है कि वे नियम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे व्यावहारिक तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि पहले यह तय किया जाए कि किन वस्तुओं पर एमआरपी लगाया जा सकता है और किन पर नहीं, और कस्टम के बजाय गोदाम या बिक्री बिंदु पर लेबलिंग की अनुमति दी जाए।

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